पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · श्रावण पूर्णिमा

रक्षा बंधन 2027

Raksha Bandhan 2027

एक धागा। उतना ही पतला, जितना पुराना।

रक्षा बंधन 2027 में 17 अगस्त, मंगलवार को है। श्रावण पूर्णिमा तिथि 16 अगस्त, सुबह 10:29 से 17 अगस्त, दोपहर 12:59 तक है। भद्रा पिछले दिन रात 11:45 ख़त्म हो जाती है, इसलिए राखी सुबह 5:51 से दोपहर 12:59 तक बाँधी जा सकती है। समय नई दिल्ली के हैं।

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पूर्णिमा: उस रात पूरा चाँद

लहरें आज कुछ ऊँची हैं।

किनारे पर मछुआरे खड़े हैं, हर हाथ में एक नारियल।

एक नारियल हवा में उठता है, पानी पर गिरता है। समुद्र उसे ले जाता है।

कुछ गलियाँ दूर, एक बहन भाई के माथे पर कुमकुम लगाती है, उस पर चावल के दाने।

फिर दाहिनी कलाई पर एक धागा।

किसी मंदिर में पंडित जी नए जनेऊ को हाथ में लेकर मंत्र पढ़ रहे हैं।

एक पूनम, और उस पर इतने धागे। हर धागे के पीछे अपनी एक कथा।

2027 में कब

रक्षा बंधन 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़17 अगस्त, मंगलवार

तिथिश्रावण पूर्णिमा16 अगस्त, सुबह 10:29 से 17 अगस्त, दोपहर 12:59 तक

नक्षत्रधनिष्ठासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:51

सूर्यास्तशाम 6:59

चंद्रोदयशाम 6:59

राखी बाँधने का समय
सुबह 5:51 से दोपहर 12:59 तकभद्रा के बाद, पूर्णिमा रहते, दिन में।
भद्रा
16 अगस्त, सुबह 10:29 से रात 11:45 तकविष्टि करण, जिसमें राखी नहीं बाँधी जाती। इस बरस यह पिछले दिन है।
अपराह्न
दोपहर 1:44 से शाम 4:21 तकदिन के पाँच हिस्सों में चौथा।

पूर्णिमा 16 अगस्त की सुबह से शुरू होती है, पर उस दिन भद्रा लगभग आधी रात तक रहती है। इसलिए राखी 17 अगस्त को है, पूर्णिमा ख़त्म होने से पहले।

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शुभकामना

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पहचान

रक्षा बंधन क्या है

रक्षा बंधन सावन की पूर्णिमा को आता है। इस दिन बहन भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है, उसके माथे पर तिलक और अक्षत लगाती है, और भाई उसे भेंट देकर उसकी रक्षा का वचन देता है। राखी बाँधने में भद्रा से बचा जाता है। भद्रा पंचांग के ग्यारह करणों में सातवें करण, विष्टि, का नाम है, और मान्यता है कि भद्रा के रहते कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए। इसलिए राखी भद्रा ख़त्म होने के बाद ही बाँधी जाती है। भद्रा कब तक है, यह इस पन्ने पर ऊपर दिया है। राजा बलि के नाम पर इस दिन को बलेव या बलि एव भी कहते हैं।

कथा

रक्षा बंधन की कथा

पहली कथा भविष्य पुराण से जोड़ी जाती है। देवताओं और असुरों में बारह बरस से युद्ध चल रहा था, और देवता हार रहे थे। अगली लड़ाई से पहले इंद्र की पत्नी शची, जिन्हें इंद्राणी भी कहते हैं, ने इंद्र की कलाई पर रक्षा का धागा बाँधा। उस लड़ाई में इंद्र जीत गए। तभी से यह धागा रक्षा और हिम्मत की निशानी माना गया।

दूसरी कथा राजा बलि की है। विष्णु ने बलि को वचन दिया था, और उस वचन से बँधकर वे सुतल लोक में बलि के द्वार पर पहरा देने लगे। लक्ष्मी अकेली रह गईं। सावन की पूर्णिमा को वे बलि के पास आईं, उनकी कलाई पर राखी बाँधी, उन्हें भाई बनाया, और भेंट में विष्णु को वापस माँग लिया। बलि ने बहन की बात रख ली। परंपरा कहती है कि तब से चौमासे के चार महीने विष्णु बलि की रक्षा करते हैं, और बाक़ी महीने ब्रह्मा और शिव बारी बारी से।

इसी कथा की याद उस मंत्र में है जो पंडित जी राखी बाँधते हुए पढ़ते हैं। इसे भविष्योत्तर पुराण का बताया जाता है: येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥ इसका मतलब है: जिस धागे से दानवों के राजा, महाबली बलि बाँधे गए थे, उसी से मैं तुम्हें बाँधता हूँ। हे रक्षा, तुम डिगना मत, डिगना मत।

तीसरी कथा लोक में महाभारत से जोड़ी जाती है। कहते हैं कि एक बार कृष्ण की उँगली कट गई, तो द्रौपदी ने अपने कपड़े का एक टुकड़ा फाड़कर उस पर लपेट दिया। बरसों बाद, जब भरी सभा में द्रौपदी का चीर खींचा गया, तो कृष्ण ने उनकी लाज बचाई। मान्यता है कि वही कपड़े का टुकड़ा राखी का पहला धागा था।

कहाँ कैसे

रक्षा बंधन कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • महाराष्ट्र

    यहाँ यह दिन नारली पूर्णिमा है, यानी नारियल वाली पूनम। मछुआरे समुद्र और वरुण देवता को नारियल चढ़ाते हैं, और घरों में पूरन पोली बनती है।

  • दक्षिण भारत

    ब्राह्मण परिवारों में यह आवणि अवित्तम है, जिसे उपाकर्म भी कहते हैं। इस दिन पुराना जनेऊ उतारकर नया पहना जाता है, और इसे अपने को शुद्ध करने और प्रायश्चित का दिन माना जाता है।

  • उत्तराखंड और हिमाचल

    यहाँ पुरोहित गाँव के लोगों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधते हैं, और बहनें भाइयों को राखी।

  • मध्य प्रदेश और बिहार

    यहाँ इसे कजरी पूर्णिमा भी कहते हैं। किसान अपनी धरती पूजते हैं, माँएँ बेटों की लंबी उम्र माँगती हैं, और बहनें राखी बाँधती हैं।

  • बंगाल और ओड़िशा

    यहाँ यह झूलन पूर्णिमा है। राधा कृष्ण के झूले सजते हैं, और बहनें भाइयों की लंबी उम्र माँगती हैं।

  • राजस्थान

    यहाँ बहनें भाई के साथ भाभी को भी राखी बाँधती हैं, जिसे लुंबा राखी कहते हैं; यह घर में भाभी की जगह का मान है।

रीत

रक्षा बंधन के दिन क्या करते हैं

  1. पूजा की थाली सजाई जाती है: राखी, कुमकुम, अक्षत, दीया, फूल, अगरबत्ती, नारियल और मिठाई।
  2. पहले गणेश जी या कुल देवता को याद किया जाता है।
  3. भद्रा बीत जाने के बाद, शुभ मुहूर्त में, बहन भाई के माथे पर तिलक लगाती है, अक्षत डालती है और आरती करती है।
  4. फिर वह भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है और उसकी कुशल माँगती है।
  5. पंडित जी रक्षासूत्र बाँधते हुए येन बद्धो बलिराजा वाला मंत्र पढ़ते हैं।
  6. भाई बहन को भेंट देता है और हर हाल में साथ देने का वचन देता है।
  7. आख़िर में पूरा परिवार साथ खाना खाता है।

रसोई

रक्षा बंधन का खाना

  • पूरन पोली महाराष्ट्र में नारली पूर्णिमा पर बनने वाली मीठी भरवाँ रोटी।
  • मिठाई थाली में रखी मिठाई से बहन भाई का मुँह मीठा कराती है।

सवाल जवाब

रक्षा बंधन 2027: पूछे जाने वाले सवाल

रक्षा बंधन 2027 कब है?

रक्षा बंधन 2027 में 17 अगस्त, मंगलवार को है। श्रावण पूर्णिमा तिथि 16 अगस्त, सुबह 10:29 से 17 अगस्त, दोपहर 12:59 तक है। भद्रा पिछले दिन रात 11:45 ख़त्म हो जाती है, इसलिए राखी सुबह 5:51 से दोपहर 12:59 तक बाँधी जा सकती है। समय नई दिल्ली के हैं।

भद्रा में राखी क्यों नहीं बाँधते?

भद्रा, यानी विष्टि करण, में शुभ काम वर्जित माने गए हैं, इसलिए राखी भद्रा ख़त्म होने के बाद बाँधी जाती है। लोक में यह भी कहते हैं कि सूर्पनखा ने रावण को भद्रा में ही राखी बाँधी थी; यह मान्यता है, किसी रामकथा का प्रसंग नहीं।

भद्रा कौन है?

मान्यता है कि भद्रा सूर्य देव की बेटी और शनि देव की बहन हैं। पंचांग में ग्यारह करणों में सातवाँ करण, विष्टि, ही भद्रा कहलाता है।

राखी किस हाथ में बाँधते हैं?

राखी भाई की दाहिनी कलाई पर बाँधी जाती है, माथे पर तिलक और अक्षत लगाकर।

येन बद्धो बलिराजा मंत्र का क्या अर्थ है?

जिस धागे से दानवों के राजा, महाबली बलि बाँधे गए थे, उसी से मैं तुम्हें बाँधता हूँ; हे रक्षा, तुम डिगना मत। यह मंत्र भविष्योत्तर पुराण का बताया जाता है।

नारली पूर्णिमा क्या है?

महाराष्ट्र में सावन की पूनम को नारली पूर्णिमा कहते हैं। मछुआरे इस दिन समुद्र और वरुण देवता को नारियल चढ़ाते हैं।

रक्षा बंधन के दिन जनेऊ क्यों बदलते हैं?

दक्षिण भारत के ब्राह्मण परिवारों में यह दिन आवणि अवित्तम या उपाकर्म है, जब पुराना जनेऊ उतारकर नया पहना जाता है। इसे अपने को शुद्ध करने का दिन माना जाता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. ISKCON Educational Services: Stories connected with Raksha Bandhanइंद्र और शची (भविष्य पुराण), बलि और लक्ष्मी, चौमासा, येन बद्धो मंत्र (भविष्योत्तर पुराण 137.20), बलेव
  2. Swaminarayan: Raksha Bandhanसावन पूर्णिमा, दाहिनी कलाई, कुमकुम और चावल, बलि एव
  3. शुभ पंचांग: रक्षा बंधनभद्रा के बाद मुहूर्त, द्रौपदी और कृष्ण, मंत्र, पूजा की थाली, नारली पूर्णिमा, अवनी अविट्टम
  4. आज तक: भद्रा कौन है, भद्रा में राखी क्यों नहीं बाँधतेभद्रा यानी विष्टि करण, सूर्य की बेटी, शुभ काम वर्जित, सूर्पनखा वाली मान्यता
  5. नवभारत: हर कोने में अलग रूप में मनता है राखी का त्योहारनारली पूर्णिमा, आवणि अवित्तम, उत्तराखंड हिमाचल का रक्षासूत्र, कजरी पूर्णिमा, झूलन पूर्णिमा, लुंबा राखी

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।