पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · भाद्रपद कृष्ण तृतीया

कजरी तीज 2027

Kajari Teej 2027

भादों की अँधेरी रात। सबकी आँखें बादलों के पीछे छिपे चाँद पर।

कजरी तीज 2027 में 20 अगस्त, शुक्रवार को है। भाद्रपद कृष्ण तृतीया तिथि 19 अगस्त, शाम 5:16 से 20 अगस्त, शाम 6:54 तक है। चाँद रात 8:23 निकलेगा। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 90 प्रतिशत रोशन

बादल घने हैं। उनके पीछे कहीं चाँद है, जो अभी दिखा नहीं।

छत पर औरतें खड़ी हैं, आँखें ऊपर।

नीचे कमरे में दीवार के सहारे मिट्टी और गोबर से एक छोटा तालाब बना है। उसकी पाल घी और गुड़ से बँधी है।

तालाब में कच्चा दूध और पानी भरा है। किनारे एक दीया जल रहा है।

पास में नीम की एक टहनी रोपी गई है। आज यही नीमड़ी माता हैं।

पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली और काजल की तेरह तेरह बिंदियाँ।

दीये की रोशनी में किनारे पर एक नथ रखी है, एक नींबू, एक ककड़ी।

कहीं से एक गीत उठता है, बिछड़ने और मिलने का। गीत वही पुराना, पर हर गली उसे अपने सुर में गाती है।

2027 में कब

कजरी तीज 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़20 अगस्त, शुक्रवार

तिथिभाद्रपद कृष्ण तृतीया19 अगस्त, शाम 5:16 से 20 अगस्त, शाम 6:54 तक

नक्षत्रपूर्वा भाद्रपदसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:53

सूर्यास्तशाम 6:56

चंद्रोदयरात 8:23

चंद्रोदय
रात 8:23नई दिल्ली में चाँद निकलने का समय। बादल हों तो इसी समय अर्घ्य देते हैं।

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शुभकामना

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कजरी तीज का शुभकामना कार्ड: कजरी तीज की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

कजरी तीज क्या है

कजरी तीज भादों के कृष्ण पक्ष की तृतीया को आती है, रक्षा बंधन के तीन दिन बाद, जन्माष्टमी से पाँच दिन पहले, और हरियाली तीज के पंद्रह दिन बाद। इसे बड़ी तीज, सातुड़ी तीज, बूढ़ी तीज और कजली तीज भी कहते हैं। कजली या कजरी नाम बरसात के कजरी गीतों से आया है, और सातुड़ी नाम सत्तू से, जो इस दिन चढ़ता है। सुहागिनें यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं, और कुँवारी लड़कियाँ अच्छे वर के लिए। इस दिन शिव पार्वती की, नीम की, और रात को चाँद की पूजा होती है। कई घरों में दिन भर पानी भी नहीं लिया जाता, कई घरों में फलाहार चलता है, और व्रत चाँद को अर्घ्य देकर खुलता है। यह सबसे ज़्यादा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में रखी जाती है।

कथा

कजरी तीज की कथा

कजरी तीज की एक लोक कथा बहुत घरों में सुनी जाती है। एक ग़रीब ब्राह्मण का घर था। तीज आई, ब्राह्मणी ने व्रत रखा। पर व्रत पूरा करने के लिए सत्तू चाहिए था, और घर में पैसे नहीं थे। ब्राह्मण सत्तू लाने एक दुकान पर गया, और पैसे न होने से चुपके से सत्तू उठाने लगा। दुकानदार ने उसे पकड़ लिया।

ब्राह्मण ने सच बता दिया: मेरी पत्नी का तीज का व्रत है, सत्तू के बिना वह पूरा नहीं होगा। दुकानदार का मन पसीज गया। उसने ब्राह्मण को सत्तू दिया, साथ में सुहाग की चीज़ें और कुछ पैसे भी। ब्राह्मणी ने उसी सत्तू से पूजा की और अपना व्रत पूरा किया। इसीलिए इस दिन सत्तू का भोग लगता है।

एक और कथा भी कही जाती है। एक ग़रीब ब्राह्मणी ने निर्जल व्रत रखा, पर भोग के लिए घर में बस एक कच्चा पेठा था, और वही उसने पूरे मन से चढ़ा दिया। उसी गाँव की रानी ने सोने चाँदी के बर्तनों में बड़ी पूजा की, पर मन में घमंड था। शाम को शिव और पार्वती साधु बनकर ब्राह्मणी के घर आए और वही कच्चा पेठा माँगा। उसने ख़ुशी से दे दिया। साधुओं ने आशीर्वाद दिया, और उसके घर के दुख दूर हो गए।

और फिर गीत, जिनसे इस तीज का नाम है। कजरी बरसात के लोक गीत हैं: बारिश के, बिछड़ने के, मिलने के, और शिव पार्वती के। कहीं इनमें कृष्ण के लिए राधा की तड़प गाई जाती है। ये एक के गाने और बाक़ी के दोहराने के ढंग से गाए जाते हैं, अक्सर झूले पर, और इनकी जड़ विंध्य और बुंदेलखंड के इलाक़े में मानी जाती है।

कहाँ कैसे

कजरी तीज कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • मिर्ज़ापुर और वाराणसी

    कजरी तीज की सबसे ख़ास जगहों में ये दोनों गिनी जाती हैं। मिर्ज़ापुर विंध्य के उसी इलाक़े में है जहाँ कजरी गीतों की जड़ मानी जाती है।

  • बूँदी (हाड़ौती, राजस्थान)

    यहाँ तीज माता की सवारी से त्योहार शुरू होता है, और उसके बाद मेला लगता है, जिसमें हाथ का काम, पकवान, लोक नाच और गीत होते हैं।

  • उदयपुर और जोधपुर

    उदयपुर में औरतें लहरिया पहनती हैं, और तीज की सवारी पिछोला झील के घाटों पर रुकती है। जोधपुर में हरियाली तीज छोटी तीज कहलाती है और लोग इसी बड़ी तीज की राह देखते हैं; औरतें पति के साथ शिव मंदिर जाती हैं और घंटा घर का बाज़ार सज जाता है।

  • बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश

    विंध्य के इलाक़े की तरह यहाँ भी औरतें यह तीज रखती हैं, और बरसात की शामों में कजरी गाई जाती है।

रीत

कजरी तीज के दिन क्या करते हैं

  1. दीवार के सहारे मिट्टी और गोबर से छोटा सा तालाब बनाया जाता है, उसकी पाल घी और गुड़ से बाँधी जाती है, और पास में नीम की टहनी रोपी जाती है।
  2. तालाब में कच्चा दूध और पानी डालकर किनारे दीया जलाया जाता है।
  3. थाली में नींबू, ककड़ी, केला, सेब, सत्तू, रोली, मौली और अक्षत रखकर नीमड़ी माता को रोली, जल और अक्षत चढ़ाए जाते हैं।
  4. नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली और काजल की तेरह तेरह बिंदियाँ लगाई जाती हैं; मेहंदी और रोली अनामिका से, काजल तर्जनी से।
  5. दीये की रोशनी में तालाब के किनारे नींबू, ककड़ी, नीम की डाली, नाक की नथ और साड़ी का पल्ला रखा जाता है।
  6. कई जगह औरतें नीम के पेड़ के तने पर सिंदूर, रोली, हल्दी और धागा चढ़ाकर उसकी सात परिक्रमा करती हैं।
  7. घी और चीनी मिला सत्तू नीमड़ी माता को चढ़ता है, दीया जलाकर कजरी तीज की कथा सुनी जाती है, और शिव को बेलपत्र और धतूरा चढ़ते हैं।
  8. चाँद निकलने पर हाथ में चाँदी की अँगूठी और गेहूँ के दाने लेकर चाँद को अर्घ्य दिया जाता है, और फिर सत्तू से व्रत खोला जाता है।

रसोई

कजरी तीज का खाना

  • सत्तू गेहूँ, जौ, चना या चावल का, घी और चीनी मिलाकर; यही इस तीज का भोग है और इसी से व्रत खुलता है।
  • मालपुआ सत्तू के साथ भोग में रखा जाने वाला मीठा।
  • फल नींबू, ककड़ी, केला और सेब, जो नीमड़ी माता की थाली में सजते हैं।

सवाल जवाब

कजरी तीज 2027: पूछे जाने वाले सवाल

कजरी तीज 2027 कब है?

कजरी तीज 2027 में 20 अगस्त, शुक्रवार को है। भाद्रपद कृष्ण तृतीया तिथि 19 अगस्त, शाम 5:16 से 20 अगस्त, शाम 6:54 तक है। चाँद रात 8:23 निकलेगा। समय नई दिल्ली के हैं।

कजरी तीज को बड़ी तीज और सातुड़ी तीज क्यों कहते हैं?

हरियाली तीज को छोटी तीज कहते हैं, और उसके पंद्रह दिन बाद आने वाली कजरी तीज को बड़ी तीज। सातुड़ी नाम सत्तू से है, जो इस दिन नीमड़ी माता को चढ़ता है और जिससे व्रत खुलता है।

नीमड़ी माता कौन हैं?

कजरी तीज पर नीम की टहनी या नीम के पेड़ को माता के रूप में पूजा जाता है, और उसी को नीमड़ी माता कहते हैं। उन्हें जल, कच्चा दूध, रोली, अक्षत, फूल और सत्तू चढ़ते हैं।

कजरी तीज का व्रत कैसे खोलते हैं?

रात को चाँद निकलने पर उसे अर्घ्य दिया जाता है, और फिर सत्तू खाकर व्रत खोला जाता है।

कजरी गीत क्या होते हैं?

कजरी बरसात के लोक गीत हैं, जिनमें बारिश, बिछड़ना, मिलना और शिव पार्वती की भक्ति गाई जाती है। इन्हीं गीतों से इस तीज का नाम कजरी या कजली पड़ा।

कजरी तीज और हरियाली तीज में क्या फ़र्क़ है?

हरियाली तीज सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है, और कजरी तीज भादों के कृष्ण पक्ष की तृतीया को, उसके पंद्रह दिन बाद। कजरी तीज में नीमड़ी माता, सत्तू और चाँद की पूजा ख़ास है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Bhakti Bharat: Kajari Teejभादों कृष्ण तृतीया, रक्षा बंधन और जन्माष्टमी से दूरी, नाम, निर्जल व्रत, वाराणसी मिर्ज़ापुर बूँदी
  2. पत्रिका: कजरी तीज पूजा विधि, नीमड़ी माता पूजननीमड़ी माता की पूरी विधि, तेरह बिंदियाँ, नथ, चाँद को अर्घ्य
  3. Bhaskar English: Kajari Teej puja vidhi and vrat rulesनीम की डाल वाला तालाब, सत्तू घी चीनी, मालपुआ, कथा सुनना
  4. PanchangBodh: Kajari Teejकजली और सातुड़ी नाम का कारण, नीम की परिक्रमा, कजरी गीत, विंध्य और बुंदेलखंड, फलाहार
  5. Ved Panchang: Kajari Teejकजरी गीतों में राधा की तड़प, झूले
  6. The CSR Journal: कजरी तीज व्रत कथाग़रीब ब्राह्मण और सत्तू की लोक कथा
  7. नवभारत: कजरी तीज की कच्चे पेठे वाली कथाब्राह्मणी, कच्चा पेठा और रानी की कथा
  8. eSamskriti: Teej, a delightful and colourful array of eventsबड़ी तीज, सत्तू से व्रत खोलना, बूँदी, उदयपुर की सवारी, जोधपुर में बड़ी तीज

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।