पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · श्रावण कृष्ण द्वितीया

मंगला गौरी व्रत 2027

Mangala Gauri Vrat 2027

उम्र छोटी लिखी थी। एक दुल्हन के सपने ने साँप को रोक लिया।

2027 में मंगला गौरी व्रत सावन के 5 मंगलवारों को है: 20 जुलाई, 27 जुलाई, 3 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त। यह गिनती पूर्णिमांत सावन की है, जैसे उत्तर भारत में चलती है।

मंगला गौरी व्रत का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 97 प्रतिशत रोशन

हथेली पर आटे की एक लोई घूमती है, और एक छोटा दीया बन जाता है। उँगली के निशान अब भी उस पर हैं।

उसमें रुई की चार बत्तियाँ। हर बत्ती में सोलह तार।

चौकी पर लाल कपड़ा। उस पर गौरी।

थाली में सब कुछ सोलह सोलह: पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चूड़ियाँ।

नई बहू गिनती है। फिर से गिनती है। यह उसका पहला सावन है।

सास पास आकर धीरे से कहती है: पाँच बरस करना है। हर सावन, हर मंगलवार।

दीया जलता है। और कथा शुरू होती है एक सेठ से, जिसके घर सब कुछ था, बस किसी बच्चे की आवाज़ नहीं थी।

2027 में कब

मंगला गौरी व्रत 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़20 जुलाई, मंगलवार

तिथिश्रावण कृष्ण द्वितीया19 जुलाई, रात 11:48 से 21 जुलाई, रात 2:22 तक

नक्षत्रश्रवणसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:36

सूर्यास्तशाम 7:19

चंद्रोदयरात 8:26

तारीख़27 जुलाई, मंगलवार

तिथिश्रावण कृष्ण अष्टमी26 जुलाई, सुबह 10:25 से 27 जुलाई, सुबह 10:13 तक

नक्षत्रअश्विनीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:40

सूर्यास्तशाम 7:15

तारीख़3 अगस्त, मंगलवार

तिथिश्रावण शुक्ल प्रतिपदा2 अगस्त, दोपहर 3:35 से 3 अगस्त, सुबह 11:52 तक

नक्षत्रआश्लेषासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:44

सूर्यास्तशाम 7:11

चंद्रोदयसुबह 6:31

तारीख़10 अगस्त, मंगलवार

तिथिश्रावण शुक्ल नवमी9 अगस्त, रात 10:35 से 10 अगस्त, रात 11:28 तक

नक्षत्रविशाखासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:47

सूर्यास्तशाम 7:05

चंद्रोदयदोपहर 1:58

तारीख़17 अगस्त, मंगलवार

तिथिश्रावण पूर्णिमा16 अगस्त, सुबह 10:29 से 17 अगस्त, दोपहर 12:59 तक

नक्षत्रधनिष्ठासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:51

सूर्यास्तशाम 6:59

चंद्रोदयशाम 6:59

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शुभकामना

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पहचान

मंगला गौरी व्रत क्या है

मंगला गौरी व्रत सावन के हर मंगलवार को रखते हैं। मंगलवार यानी मंगल का दिन, और गौरी यानी माँ पार्वती। नई ब्याही औरतें यह व्रत पति की लंबी उम्र और अखंड सुहाग के लिए रखती हैं, और बहुत से घरों में शादी के बाद लगातार पाँच बरस तक; पाँचवें बरस के बाद उद्यापन होता है, यानी व्रत को पूरा करने की पूजा। कुँवारी लड़कियाँ भी इसे अच्छे वर के लिए रखती हैं। व्रतों की पुरानी पोथी व्रतराज इसकी विधि भविष्य पुराण के हवाले से बताती है। एक बात ध्यान रखने की है: उत्तर भारत का सावन पूर्णिमा के बाद शुरू होता है, और महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु का सावन अमावस्या के बाद, यानी लगभग पंद्रह दिन बाद। इसलिए दोनों तरफ़ के मंगलवार कुछ अलग पड़ते हैं। महाराष्ट्र में इसे मंगळागौर कहते हैं, और दक्षिण के कई राज्यों में श्री मंगला गौरी व्रतम्।

कथा

मंगला गौरी व्रत की कथा

घरों में जो कथा पढ़ते हैं, उसकी शुरुआत में धर्मराज युधिष्ठिर कृष्ण से पूछते हैं: कोई ऐसा व्रत बताइए जिससे उम्र बढ़े। कृष्ण एक ऐसे व्रत की बात करते हैं जो बेटों की उम्र बढ़ाता है और औरत को विधवा होने से बचाता है। फिर कथा सुनाते हैं। कुंडिनपुर नाम के नगर में धर्मपाल नाम का एक धनी सेठ रहता था। घर में धन बहुत था, पर कोई संतान नहीं थी। एक साधु रोज़ उसके दरवाज़े पर भिक्षा माँगने आते, और हर बार बिना कुछ लिए लौट जाते। एक दिन सेठानी ने चुपके से उनके हाथ में सोने की मोहरें रख दीं। साधु नाराज़ हो गए और बोले: तुम्हारे घर कभी संतान नहीं होगी।

सेठानी उनके पैरों में गिरकर माफ़ी माँगने लगी। तब साधु ने उपाय बताया: तुम्हारा पति काले कपड़े पहनकर, काले घोड़े पर जंगल जाए। जहाँ घोड़ा फिसले, वहाँ ज़मीन खोदे। वहाँ देवी का मंदिर मिलेगा, वहाँ पूजा करे। धर्मपाल ने ऐसा ही किया। घोड़ा फिसला, ज़मीन खोदी, मंदिर निकला, और पूजा हुई। देवी ख़ुश हुईं और बोलीं: तीन में से एक चुन लो। एक बेटी, जो जल्दी विधवा हो जाएगी। एक गुणी बेटा, जिसकी उम्र छोटी होगी। या एक अंधा बेटा, जो लंबा जिएगा। धर्मपाल ने छोटी उम्र वाला गुणी बेटा माँगा। देवी ने उसे एक आम दिया और कहा: यह अपनी पत्नी को खिला देना।

समय पर बेटा हुआ, और उसका नाम शिव रखा गया। पर उसकी क़िस्मत में लिखा था कि सोलहवें बरस में साँप के डसने से उसकी जान जाएगी। कुछ घरों की कथा में यह बात ज्योतिषी बताते हैं। बेटा दस बरस का हुआ तो माँ उसका ब्याह करना चाहती थी, पर पिता ने उसे उसके मामा के साथ काशी की यात्रा पर भेज दिया। रास्ते में दोनों प्रतिष्ठानपुर पहुँचे। वहाँ सुशीला नाम की एक लड़की रहती थी, जिसकी माँ बरसों से मंगला गौरी का व्रत करती आई थी। मामा भाँजे को लगा कि इस लड़की का सुहाग ही इस लड़के को बचा सकता है। वे उसके घर के पास रुक गए, और सुशीला के माँ बाप ब्याह के लिए मान गए।

ब्याह की रात सुशीला ने सपना देखा: एक साँप धीरे धीरे उसके पति की ओर बढ़ रहा है। सपने में जो बताया गया, उसने वैसा ही किया, और साँप को पकड़ लिया। पति बच गया। फिर सपने में शिव आए और कहा कि अब इसकी उम्र पर कोई ख़तरा नहीं। बेटा बहू घर लौटे तो धर्मपाल और उसकी पत्नी की जान में जान आई, और उन्होंने भी बेटे की लंबी उम्र के लिए सावन के मंगलवारों को मंगला गौरी का व्रत किया। कथा के एक और रूप में बात बस इतनी है कि लड़की की माँ के व्रत का पुण्य इतना था कि बेटी कभी विधवा नहीं हुई, और सेठ का बेटा सौ बरस जिया। कहते हैं, तभी से नई ब्याही औरतें यह व्रत रखती आई हैं।

व्रत

मंगला गौरी व्रत का व्रत कैसे रखें

  1. सावन के पहले मंगलवार को सुबह जल्दी नहाकर, साफ़ या नए कपड़े पहनकर, पाँच बरस तक व्रत करने का संकल्प लेते हैं।
  2. दिन भर व्रत रहता है; कई घरों में बस एक बार अन्न खाते हैं, और पुरानी विधि में यह खाना दोपहर को चुप रहकर, यानी मौन में, खाते हैं।
  3. मांस, शराब और ऐसी हर तामसिक चीज़ से पूरी तरह दूर रहते हैं।
  4. पूजा के आख़िर में मंगला गौरी की कथा पढ़ते या सुनते हैं; इसके बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती।
  5. जाने अनजाने में हुई ग़लतियों के लिए हाथ जोड़कर देवी से माफ़ी माँगते हैं।
  6. महाराष्ट्र में पहली मंगळागौर की रात औरतें जागती हैं, और खेल और गीत अगली सुबह तक चलते हैं।
  7. हर सावन के हर मंगलवार यही क्रम चलता है, और पाँच बरस पूरे होने पर उद्यापन करते हैं।

पारण: व्रत कैसे खोलें

इस व्रत को खोलने के दो चलन मिलते हैं। एक में दिन भर व्रत रखकर शाम को, पूजा के बाद, खाना खाते हैं। दूसरे में, जो व्रतराज की पुरानी विधि है, पूजा करने वाली औरतें दोपहर को एक बार मौन रहकर खाती हैं, और दिन में अन्न बस एक ही बार लेती हैं। दोनों में मांस और शराब जैसी चीज़ें नहीं छूतीं। पाँच बरस पूरे होने पर उद्यापन करके यह व्रत पूरा माना जाता है।

कहाँ कैसे

मंगला गौरी व्रत कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • महाराष्ट्र

    यहाँ यह मंगळागौर है, और नई दुल्हन की पहली मंगळागौर सबसे बड़ा दिन होता है। दुल्हन पति और नए घर की भलाई के लिए शिवलिंग की पूजा करती है। फिर औरतें झिम्मा, फुगड़ी और भेंड्या जैसे खेल खेलती हैं, उखाणे कहती हैं (यानी तुकबंदी में पति का नाम लेना), और यह सब अगली सुबह तक चलता है।

  • पुणे, नाशिक, कोल्हापुर, मुंबई

    घरों, मंदिरों और बड़े हॉल में औरतें मंगळागौर के लिए जुटती हैं। गौरी को फूलों, गहनों और कपड़ों से सजाती हैं, और लोक गीत गाती हैं।

  • कर्नाटक के माध्व घर

    चावल की थाली पर हल्दी की पाँच गौरी रखते हैं, और उनमें ब्याह वाली मंगला गौरी सबसे आगे होती है। चावल के आटे, गुड़ और घी से बने तंबिट्टु के दीयों से काजल बनाते हैं; थोड़ा गौरी को लगाते हैं, और बाक़ी औरतें लगाती हैं।

  • आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण के राज्य

    यहाँ इसे श्री मंगला गौरी व्रतम् कहते हैं। सावन यहाँ अमावस्या के बाद शुरू होता है, इसलिए व्रत के मंगलवार उत्तर भारत से कुछ बाद में पड़ते हैं।

  • उत्तर भारत

    राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों में सावन पूर्णिमा के बाद शुरू होता है। यहाँ के घरों में आटे का दीया, सोलह चीज़ों की थाली और कथा ही इस व्रत की पहचान है।

रीत

मंगला गौरी व्रत के दिन क्या करते हैं

  1. लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाते हैं, और गौरी की मूर्ति या तस्वीर को लाल कपड़े में लपेटकर उस पर रखते हैं।
  2. गेहूँ के आटे से दीया बनाते हैं, जिसमें रुई की चार बत्तियाँ होती हैं और हर बत्ती सोलह तार की।
  3. पूजा में पहले गणेश, फिर कलश, फिर नौ ग्रहों और सोलह माताओं की पूजा होती है।
  4. गौरी को जल, दूध और दही से नहलाकर कपड़े पहनाते हैं, और रोली, चंदन, सिंदूर, मेहंदी और काजल लगाते हैं।
  5. फिर सोलह शृंगार की चीज़ें, सोलह चूड़ियाँ, सोलह तरह के फूल और पत्ते, पाँच तरह के मेवे और सात तरह के अनाज चढ़ाते हैं।
  6. पुरानी विधि में सोलह सुहागिनें साथ होती हैं, और देवी की आरती सोलह दीयों से उतारते हैं।
  7. पूजा के बाद बहू अपनी सास और ननद को सोलह लड्डू देती है, और यही प्रसाद ब्राह्मण को भी देते हैं।
  8. अगले दिन गौरी की मूर्ति नदी या तालाब में विसर्जित करते हैं।

रसोई

मंगला गौरी व्रत का खाना

  • सोलह लड्डू पूजा के बाद बहू अपनी सास और ननद को देती है।
  • पूरण पोळी, मोदक, श्रीखंड महाराष्ट्र में मंगळागौर के दिन का खाना, जो परिवार और सहेलियों के साथ खाते हैं।
  • हुग्गी और अक्की पायस कन्नड़ घरों का नैवेद्य, यानी भोग; हुग्गी तूर दाल वाली, और पायस चावल की खीर।
  • कोसंबरी, चिगळी, भीगे चने और रवे के लड्डू कन्नड़ घरों की वह थाली, जो गौरी के आगे रखते हैं।

सवाल जवाब

मंगला गौरी व्रत 2027: पूछे जाने वाले सवाल

मंगला गौरी व्रत 2027 में कब कब है?

2027 में मंगला गौरी व्रत सावन के 5 मंगलवारों को है: 20 जुलाई, 27 जुलाई, 3 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त। यह गिनती पूर्णिमांत सावन की है, जैसे उत्तर भारत में चलती है।

मंगला गौरी व्रत कितने साल रखना होता है?

ज़्यादातर घरों में शादी के बाद लगातार पाँच बरस, सावन के हर मंगलवार। पाँच बरस पूरे होने पर उद्यापन करते हैं।

मंगला गौरी व्रत में क्या खाएँ?

कई घरों में दिन में एक ही बार अन्न लेते हैं, और पुरानी विधि में यह खाना दोपहर को मौन रहकर खाते हैं। मांस, शराब और ऐसी तामसिक चीज़ें बिल्कुल नहीं खाते।

क्या कुँवारी लड़कियाँ मंगला गौरी व्रत रख सकती हैं?

हाँ। यह व्रत ज़्यादातर नई ब्याही औरतें पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं, पर कुँवारी लड़कियाँ भी अच्छे वर के लिए इसे रखती हैं।

मंगला गौरी व्रत का पारण कब करें?

एक चलन में दिन भर व्रत रखकर शाम की पूजा के बाद खाना खाते हैं। पुरानी विधि में दोपहर को एक बार मौन रहकर खाना होता है।

उत्तर और दक्षिण भारत में मंगला गौरी के मंगलवार अलग क्यों होते हैं?

उत्तर भारत में सावन पूर्णिमा के बाद शुरू होता है, और महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के राज्यों में अमावस्या के बाद, यानी लगभग पंद्रह दिन बाद। इसलिए दोनों के मंगलवार कुछ अलग पड़ते हैं।

मंगळागौर क्या है?

महाराष्ट्र में मंगला गौरी व्रत को मंगळागौर कहते हैं। नई दुल्हन की पहली मंगळागौर पर पूजा के बाद औरतें झिम्मा, फुगड़ी जैसे खेल खेलती हैं और उखाणे कहती हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Madhwasakha: Mangala Gowri Vrathamपूरी कथा: कृष्ण और धर्मराज, कुंडिनपुर, साधु, काला घोड़ा, आम, शिव और सुशीला, साँप; कन्नड़ घरों की पूजा और नैवेद्य
  2. Boldsky: Mangala Gauri Vrat rituals and legendसोलह बरस और सौ बरस वाली कथा, पाँच बरस, शाम को व्रत खोलना, तामसिक चीज़ें नहीं, विसर्जन
  3. Astrobix: मंगला गौरी पूजनसोलह चीज़ें, आटे का दीया और सोलह तार की बत्तियाँ, पूजा का क्रम, सोलह लड्डू, अगले दिन विसर्जन, उद्यापन
  4. Bharatdiscovery: मंगलागौरी व्रतव्रतराज और भविष्य पुराण, सोलह फूल, सोलह सुहागिनें, सोलह दीयों की आरती, दोपहर का मौन भोजन, महाराष्ट्र
  5. Wikipedia: List of Hindu festivals in Maharashtraपहली मंगळागौर, शिवलिंग पूजा, झिम्मा, फुगड़ी, भेंड्या, उखाणे, अगली सुबह तक खेल
  6. Incredible India: Mangalagaurमहाराष्ट्र की मंगळागौर, शहर, खेल, पूरण पोळी, मोदक, श्रीखंड
  7. GaneshaSpeaks: Mangala Gauri Vratपूर्णिमांत और अमांत सावन, कौन से राज्य किस पंचांग पर
  8. Free Press Journal: Mangala Gauri Vrat for newly married womenअमांत राज्य, उत्तर भारत में सावन पंद्रह दिन पहले, श्री मंगला गौरी व्रतम्

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।