पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी 2027

Krishna Janmashtami 2027

आधी रात। सबसे गहरा अँधेरा। और ठीक तभी।

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 स्मार्त परंपरा में 24 अगस्त, मंगलवार को है, और वैष्णव परंपरा (इस्कॉन और ब्रज के मंदिर) में 25 अगस्त, बुधवार को। अष्टमी तिथि 24 अगस्त, रात 8:25 से 25 अगस्त, शाम 7:20 तक है, और जन्म की निशीथ पूजा 25 अगस्त, रात 12:02 से रात 12:46 तक। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 56 प्रतिशत रोशन

फूलों से सजा एक छोटा पालना है। अभी ख़ाली।

मंदिर में भीड़ है, पर शोर नहीं। सबकी आँखें उसी पालने पर हैं।

दिन भर अन्न का एक दाना मुँह में नहीं गया।

कोई धीमे से भागवत पढ़ रहा है: देवकी, कारागार, बंद दरवाज़े।

फिर शंख बजता है। परदा हटता है।

पालने में अब कोई है।

भागवत कहती है, उस रात वे पूरब में उगते पूरे चाँद की तरह प्रकट हुए।

हर मंदिर का पालना अलग, पर रात सबकी एक ही।

2027 में कब

कृष्ण जन्माष्टमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

स्मार्त

तारीख़24 अगस्त, मंगलवार

तिथिभाद्रपद कृष्ण अष्टमी24 अगस्त, रात 8:25 से 25 अगस्त, शाम 7:20 तक

नक्षत्रभरणीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:55

सूर्यास्तशाम 6:52

चंद्रोदयरात 10:46

वैष्णव

तारीख़25 अगस्त, बुधवार

तिथिभाद्रपद कृष्ण अष्टमी24 अगस्त, रात 8:25 से 25 अगस्त, शाम 7:20 तक

नक्षत्रकृत्तिकासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:55

सूर्यास्तशाम 6:51

चंद्रोदयरात 11:37

निशीथ काल स्मार्त
25 अगस्त, रात 12:02 से रात 12:46 तकआधी रात के आसपास का मुहूर्त, रात के पंद्रह हिस्सों में आठवाँ।
निशीथ काल वैष्णव
26 अगस्त, रात 12:01 से रात 12:46 तकआधी रात के आसपास का मुहूर्त, रात के पंद्रह हिस्सों में आठवाँ।

भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची में जन्माष्टमी (वैष्णव) 25 अगस्त को है।

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शुभकामना

कृष्ण जन्माष्टमी का शुभकामना कार्ड

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पहचान

कृष्ण जन्माष्टमी क्या है

कृष्ण जन्माष्टमी भादों के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है, कजरी तीज के पाँच दिन बाद। इसे कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, अष्टमी रोहिणी, श्रीकृष्ण जयंती और श्री जयंती भी कहते हैं। कैलेंडर में अक्सर इसके दो दिन दिखते हैं, क्योंकि दो परंपराएँ दिन अलग नियम से चुनती हैं। स्मार्त परंपरा उस दिन को लेती है जिस दिन निशीथ काल में, यानी आधी रात को, अष्टमी तिथि हो; रोहिणी नक्षत्र को वे उसके बाद देखते हैं, और उनका दिन सप्तमी या अष्टमी को पड़ता है। वैष्णव परंपरा, जिसमें इस्कॉन भी है, जन्माष्टमी कभी सप्तमी वाले दिन नहीं रखती; वह अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र को आगे रखती है, इसलिए उसका दिन अष्टमी या नवमी को पड़ता है और दोनों में बाद वाला होता है। उत्तर भारत और ब्रज में वैष्णव दिन ज़्यादा माना जाता है। निशीथ पूजा का समय इस पन्ने पर ऊपर दिया है।

कथा

कृष्ण जन्माष्टमी की कथा

कृष्ण के जन्म की कथा भागवत पुराण के दसवें स्कंध के तीसरे अध्याय में है। भागवत कहती है कि उस घड़ी सब कुछ शुभ हो गया था। रोहिणी नक्षत्र शुभ था, ग्रह शांत थे, आकाश साफ़ था, और धरती अपने नगरों, गाँवों और चरागाहों के साथ सुंदर दिख रही थी। एक साफ़, सुगंध भरी हवा बह रही थी।

कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव बंद थे। फिर भागवत का वह श्लोक आता है: निशीथे तमउद्भूते जायमाने जनार्दने। देवक्यां देवरूपिण्यां विष्णुः सर्वगुहाशयः। आविरासीद् यथा प्राच्यां दिशीन्दुरिव पुष्कलः॥ (भागवत 10.3.8) इसका मतलब है: आधी रात को, जब घना अँधेरा छाया था, देवकी के गर्भ से जनार्दन जन्मे; सबके मन में बसने वाले विष्णु ऐसे प्रकट हुए जैसे पूरब की दिशा में पूरा चाँद उगता है।

वसुदेव ने देखा कि बालक की चार भुजाएँ हैं, हाथों में शंख और गदा, छाती पर श्रीवत्स का चिह्न और कौस्तुभ मणि, पीले कपड़े, और रंग बरसात के बादल जैसा। भगवान ने उन्हें उनके पिछले जन्म याद दिलाए, जब वे पृश्नि और सुतपा थे, और फिर एक साधारण शिशु बन गए।

फिर वसुदेव उस बालक को लेकर निकले। यमुना ने उन्हें रास्ता दिया, और शेषनाग ने बारिश से उन्हें ढक लिया। गोकुल पहुँचकर उन्होंने बालक को यशोदा के पास रखा और नंद की नवजात बेटी, योगमाया, को लेकर लौट आए। भागवत के अगले अध्याय में कंस उस कन्या को मारने चला, पर वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में उठ गई, आठ भुजाओं वाली देवी बनकर दिखी, और बोली कि तुम्हें मारने वाला कहीं और जन्म ले चुका है।

कहाँ कैसे

कृष्ण जन्माष्टमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • मथुरा

    कृष्ण की जन्मभूमि मानी जाने वाली मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का गर्भगृह वह कोठरी माना जाता है जहाँ उनका जन्म हुआ। यहाँ दो दिन उत्सव चलता है: झूलन उत्सव, झाँकियाँ और रासलीला, जिसमें ज़्यादातर बच्चे खेलते हैं।

  • वृंदावन

    बाँके बिहारी, राधा रमण, गोविंद देव, रंगनाथ जी और इस्कॉन जैसे मंदिरों में दस दिन पहले से रासलीला और झाँकियाँ शुरू हो जाती हैं, और उत्सव से पहले कृष्ण का अभिषेक होता है।

  • द्वारका

    माना जाता है कि कृष्ण बड़े होकर यहीं रहे। यहाँ दिन मंगला आरती से खुलता है। आधी रात से पहले उत्सव भोग लगता है, आधी रात को भजन होते हैं, भक्त व्रत खोलते हैं और महाभोग चढ़ता है; रात भर भजन और रासलीला चलती है।

  • महाराष्ट्र

    दूसरे दिन दही हांडी होती है: ऊँचाई पर लटकी दही की हांडी को गोविंदा कहलाने वाले लड़कों की टोलियाँ एक के ऊपर एक चढ़कर फोड़ती हैं।

  • उडुपी, कर्नाटक

    यहाँ इसे गोकुलाष्टमी कहते हैं। आठ मठों से घिरे श्री कृष्ण मठ में आधी रात को कृष्ण को दूध या पानी का अर्घ्य दिया जाता है। घरों में लड्डू और चक्कुली बनती हैं, और गलियों में रासलीला होती है।

  • मणिपुर

    असम और मणिपुर के इस्कॉन मंदिरों में उत्सव एक दिन पहले शुरू होता है। इंफाल के श्री श्री गोविंदजी मंदिर, महाबली मंदिर और इस्कॉन मंदिर में प्रार्थना होती है, ग़रीबों के लिए भोजन बनता है, और पुजारी कृष्ण के बचपन की कथाएँ सुनाते हैं।

रीत

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करते हैं

  1. दिन भर व्रत रखा जाता है, और व्रत खुलने तक अन्न नहीं खाया जाता; इसमें भी वही नियम माने जाते हैं जो एकादशी के व्रत में।
  2. निशीथ काल में, यानी आधी रात के मुहूर्त में, कृष्ण की षोडशोपचार पूजा होती है, यानी सोलह चरणों वाली पूजा।
  3. मंदिरों में अभिषेक होता है, पालना झुलाया जाता है, और झाँकियाँ और रासलीला होती हैं।
  4. दक्षिण के घरों में दरवाज़े से पूजा की जगह तक छोटे छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं, कोलम और रंगोली के साथ, जैसे कान्हा घर में चलकर आ रहे हों।
  5. परंपरा में पारण अगले दिन सूरज निकलने के बाद होता है, जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों बीत चुके हों। जो इतना लंबा व्रत न रख सकें, वे धर्मसिंधु के अनुसार अगले दिन सुबह व्रत खोल सकते हैं, और कई लोग निशीथ पूजा के बाद ही खोल लेते हैं।
  6. गोकुल में अगले दिन दधिकाना या नंदोत्सव होता है, जब लोग एक दूसरे पर दही और हल्दी डालते हैं।

रसोई

कृष्ण जन्माष्टमी का खाना

  • मक्खन तमिलनाडु और कर्नाटक में मिठाइयों के साथ भोग में चढ़ता है।
  • सीडै और मुरुक्कु तमिलनाडु और कर्नाटक में गोकुलाष्टमी के भोग।
  • लड्डू और चक्कुली उडुपी के घरों में इस दिन बनते हैं।
  • रसमलाई और चमचम ओड़िशा में दूसरे दिन, नंद उत्सव पर, चढ़ते हैं।

सवाल जवाब

कृष्ण जन्माष्टमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 कब है?

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 स्मार्त परंपरा में 24 अगस्त, मंगलवार को है, और वैष्णव परंपरा (इस्कॉन और ब्रज के मंदिर) में 25 अगस्त, बुधवार को। अष्टमी तिथि 24 अगस्त, रात 8:25 से 25 अगस्त, शाम 7:20 तक है, और जन्म की निशीथ पूजा 25 अगस्त, रात 12:02 से रात 12:46 तक। समय नई दिल्ली के हैं।

जन्माष्टमी दो दिन क्यों होती है?

स्मार्त परंपरा वह दिन लेती है जिस दिन आधी रात को अष्टमी हो, और वैष्णव परंपरा, जिसमें इस्कॉन भी है, अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र को आगे रखती है और सप्तमी वाले दिन को कभी नहीं लेती। इसलिए कई बरस दोनों के दिन अलग हो जाते हैं, और वैष्णव दिन बाद वाला होता है।

निशीथ पूजा क्या है?

निशीथ काल वैदिक गिनती की आधी रात है, जब कृष्ण का जन्म माना जाता है। इसी समय षोडशोपचार से कृष्ण की पूजा होती है। इसका समय हर बरस अलग होता है, और यह पन्ना उसे ऊपर बताता है।

जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें?

परंपरा में अगले दिन सूरज निकलने के बाद, जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों बीत जाएँ। जो इतना न रुक सकें, वे अगले दिन सुबह खोल सकते हैं, और कई लोग निशीथ पूजा के बाद ही खोलते हैं।

भागवत के अनुसार कृष्ण का जन्म कैसे हुआ?

भागवत के दसवें स्कंध के तीसरे अध्याय में कथा है कि कंस के कारागार में, आधी रात को, रोहिणी नक्षत्र में, देवकी से कृष्ण जन्मे। वसुदेव उन्हें यमुना पार करके गोकुल ले गए और यशोदा के पास रख आए।

दही हांडी क्या है?

महाराष्ट्र में जन्माष्टमी के दूसरे दिन ऊँचाई पर दही की हांडी लटकाई जाती है, और गोविंदा कहलाने वाले लड़कों की टोलियाँ एक के ऊपर एक चढ़कर उसे फोड़ती हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Drik Panchang: Krishna Janmashtamiस्मार्त और वैष्णव नियम, इस्कॉन, निशीथ पूजा, पारण के नियम, दूसरे नाम
  2. Shlokam: Srimad Bhagavatam 10.3, The Birth of Lord Krishnaभागवत 10.3.1, 10.3.4, 10.3.8 का श्लोक, 10.3.9 का रूप
  3. Green Message: Life events of Sri Krishna (Bhagavata Purana)कंस का कारागार, पृश्नि और सुतपा, यमुना, शेषनाग, गोकुल, योगमाया
  4. Sahapedia: Janmashtami, prominent places where Krishna's birth is celebratedमथुरा, वृंदावन, द्वारका, महाराष्ट्र, उडुपी, मणिपुर
  5. Outlook India: Janmashtami, how is it celebrated across Indiaदही हांडी और गोविंदा, गोकुल का नंदोत्सव, दक्षिण के पैरों के निशान और भोग, ओड़िशा
  6. Bhakti Bharat: Kajari Teejकजरी तीज भादों कृष्ण तृतीया, जन्माष्टमी से पाँच दिन पहले

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।