पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · श्रावण शुक्ल पंचमी

नाग पंचमी 2027

Nag Panchami 2027

एक कटोरा दूध, और एक माफ़ी।

नाग पंचमी 2027 में 6 अगस्त, शुक्रवार को है। श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि 6 अगस्त, रात 2:28 से 7 अगस्त, रात 12:23 तक है। सुबह की पूजा का समय (प्रातः काल) सुबह 5:45 से सुबह 8:26 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

नाग पंचमी का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 23 प्रतिशत रोशन

गोबर से बने दो नाग, दरवाज़े के दोनों ओर। अभी गीले हैं।

उन पर हल्दी की लकीर, और ऊपर चंदन का टीका।

आज खेत में हल नहीं चलेगा। आँगन में कोई खुरपी नहीं उठाता।

एक लड़की कटोरे में कच्चा दूध लेकर बाँबी की ओर जाती है।

वह कटोरा धरती पर रखती है, और हाथ जोड़ देती है।

कहते हैं, बहुत पहले एक और लड़की ने ऐसा ही कटोरा रखा था, और एक पूरा घर लौट आया था। एक कथा, और हर गाँव में उसका अपना कटोरा।

2027 में कब

नाग पंचमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़6 अगस्त, शुक्रवार

तिथिश्रावण शुक्ल पंचमी6 अगस्त, रात 2:28 से 7 अगस्त, रात 12:23 तक

नक्षत्रउत्तरा फाल्गुनीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:45

सूर्यास्तशाम 7:09

चंद्रोदयसुबह 9:51

प्रातः काल
सुबह 5:45 से सुबह 8:26 तकसूर्योदय के बाद दिन का पहला पाँचवाँ हिस्सा।

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शुभकामना

नाग पंचमी का शुभकामना कार्ड

नाग पंचमी का शुभकामना कार्ड: नाग पंचमी की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

नाग पंचमी क्या है

नाग पंचमी सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है। ज्योतिष में पंचमी तिथि के स्वामी नाग माने गए हैं, इसलिए पंचमी को नागों की तिथि कहा जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा होती है: घर के दरवाज़े पर नाग बनाए जाते हैं, बाँबी पर दूध रखा जाता है, और धरती खोदने या हल चलाने से बचा जाता है। गरुड़ पुराण में नाग पंचमी पर घर के दोनों ओर नाग की आकृति बनाकर अनंत आदि बड़े नागों की पूजा की बात आती है, और स्कंद पुराण के नागर खंड में सावन की पंचमी को चमत्कारपुर के नागों की पूजा से मनोकामना पूरी होने की बात। बरसात में बिलों में पानी भर जाने से साँप बाहर आते हैं, इसलिए यही समय नाग पूजा का माना गया है।

कथा

नाग पंचमी की कथा

लोक में एक कथा घर घर सुनाई जाती है। एक किसान था, उसके दो बेटे और एक बेटी। एक दिन खेत में हल चलाते हुए हल के नीचे आकर नाग के तीन बच्चे मर गए। नागिन लौटी, अपने बच्चों को देखा और बहुत रोई। फिर उसने बदला लेने की ठान ली। उसी रात उसने किसान, उसकी पत्नी और दोनों बेटों को डस लिया।

अगली सुबह नागिन बेटी को डसने आई। पर बेटी ने उसके आगे दूध से भरा कटोरा रख दिया और हाथ जोड़कर माफ़ी माँगी। नागिन का मन पिघल गया। उसने वर दिया, और पूरा परिवार फिर से जी उठा। उस दिन सावन की शुक्ल पंचमी थी। कहते हैं, तभी से इस दिन नागों की पूजा होती है, और इस दिन हल चलाना और साग काटना मना हो गया। कुछ घरों में यही कथा बेटी की जगह बहू के नाम से कही जाती है।

नाग पंचमी पर जिन नागों को याद किया जाता है, उनमें कालिया भी हैं, और उनकी कथा भागवत पुराण के दसवें स्कंध के सोलहवें अध्याय में है। वृंदावन में यमुना के एक कुंड में कालिया नाग रहता था, और उसके ज़हर से नदी का पानी ज़हरीला हो गया था। कृष्ण कदंब के पेड़ पर चढ़े और पानी में कूद गए। कालिया ने उन्हें अपनी कुंडलियों में जकड़ लिया, और किनारे खड़े ग्वाले रोने लगे।

तब कृष्ण ने अपना शरीर बड़ा किया, कुंडलियों से छूटे, और कालिया के फनों पर नाचने लगे। कालिया की पत्नियाँ आईं और हाथ जोड़कर माफ़ी माँगी। कृष्ण ने कालिया को मारा नहीं। उन्होंने कहा कि तुम यमुना छोड़कर समुद्र में अपने रमणक द्वीप लौट जाओ; तुम्हारे फनों पर मेरे पैरों के निशान हैं, इसलिए अब गरुड़ तुम्हें नहीं छुएँगे। यमुना का पानी फिर साफ़ हो गया। दोनों कथाओं का अंत एक ही है: माफ़ी, और जीवन।

कहाँ कैसे

नाग पंचमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • बत्तीस शिराळा, सांगली (महाराष्ट्र)

    यह क़स्बा नाग पंचमी पर जीते नागों की पूजा के लिए जाना जाता था: लोग नाग ढूँढकर लाते, पूजते और फिर छोड़ देते थे। पर्यावरण संस्थाओं की याचिका पर बंबई हाई कोर्ट ने सन 2002 में यहाँ नागों की नुमाइश और जुलूस पर रोक लगा दी, और जीते नागों की वह पूजा अब बंद है। नाग, यानी कोबरा, वन्यजीव संरक्षण क़ानून की पहली अनुसूची में संरक्षित है।

  • बंगाल और उत्तर पूर्व

    यहाँ नागों की रानी मनसा देवी की पूजा होती है।

  • कर्नाटक और आंध्र प्रदेश

    औरतें अपने भाइयों की कुशल के लिए पूजा करती हैं और पत्थर के नागों पर, जिन्हें नाग कल्लु कहते हैं, तंबिट्टु चढ़ाती हैं। तंबिट्टु एक मीठा पकवान है।

  • गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत

    इन इलाक़ों में नाग पंचमी का चलन बहुत है। दक्षिण में नाग की मूर्तियों के साथ जुलूस निकलते हैं और भक्ति गीत गाए जाते हैं।

  • गाँवों में गुड़िया

    कई गाँवों में लड़कियाँ इस दिन कपड़े की गुड़ियाँ पानी में डालती हैं, भाई उन्हें डंडों से पीटते हैं, और बहनें भाइयों को रुपये देती हैं।

रीत

नाग पंचमी के दिन क्या करते हैं

  1. सुबह नहाकर घर के मुख्य दरवाज़े पर गोबर से नाग बनाए जाते हैं, और दूध, दूब, कुशा, चंदन, अक्षत और फूलों से उनकी पूजा होती है।
  2. कई घरों में हल्दी और चंदन की स्याही से, चाँदी, लकड़ी या मिट्टी की कलम से, पाँच फनों वाले पाँच नाग बनाए जाते हैं।
  3. नाग की मूर्ति को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के पंचामृत से नहलाया जाता है, फिर चंदन, सिंदूर, बेलपत्र, फूलों की माला, धूप, दीप और फल चढ़ते हैं।
  4. कच्चे दूध में शहद, चीनी या गुड़ मिलाकर बाँबी पर रखा जाता है।
  5. नाग स्तोत्र पढ़ा जाता है, और कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं।
  6. इस दिन धरती नहीं खोदते, हल नहीं चलाते, और तवा, सुई और चाकू से बचते हैं; धर्मसिंधु में धरती न खोदने की बात कही गई है।
  7. लड्डू, मालपुए या खीर का भोग लगता है, और पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।

रसोई

नाग पंचमी का खाना

  • खीर नाग देवता का भोग, और पूजा के बाद ब्राह्मणों को परोसी जाती है।
  • लड्डू और मालपुए दरवाज़े वाले नागों के भोग में।
  • भीगा बाजरा नागों को चढ़ाने वाली चीज़ों में।
  • तंबिट्टु कर्नाटक का मीठा पकवान, जो पत्थर के नागों पर चढ़ता है।

सवाल जवाब

नाग पंचमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

नाग पंचमी 2027 कब है?

नाग पंचमी 2027 में 6 अगस्त, शुक्रवार को है। श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि 6 अगस्त, रात 2:28 से 7 अगस्त, रात 12:23 तक है। सुबह की पूजा का समय (प्रातः काल) सुबह 5:45 से सुबह 8:26 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

इस दिन नाग देवता की पूजा होती है, ताकि घर साँप के डर से बचा रहे। लोक कथा है कि इसी दिन एक किसान की बेटी ने नागिन को दूध देकर माफ़ी माँगी थी और नागिन ने उसका पूरा परिवार फिर से जीवित कर दिया था।

नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?

इस दिन धरती नहीं खोदी जाती और हल नहीं चलाया जाता। तवा, सुई और चाकू से बचा जाता है, साग नहीं काटा जाता, और किसी साँप को चोट नहीं पहुँचाई जाती।

क्या नाग को दूध पिलाना ठीक है?

परंपरा में दूध बाँबी पर रखा जाता है या मूर्ति पर चढ़ाया जाता है। साँप दूध ठीक से पचा नहीं पाते, और नाग क़ानून से संरक्षित है, इसलिए जीते साँप को पकड़ना या ज़बरदस्ती दूध पिलाना ठीक नहीं।

बत्तीस शिराळा की नाग पंचमी क्यों प्रसिद्ध है?

महाराष्ट्र के सांगली ज़िले का यह क़स्बा नाग पंचमी पर जीते नागों को ढूँढकर पूजने और छोड़ने के लिए जाना जाता था। सन 2002 में बंबई हाई कोर्ट की रोक के बाद यह चलन बंद है।

नाग पंचमी और कालिया नाग का क्या संबंध है?

इस दिन याद किए जाने वाले नागों में कालिया भी हैं। भागवत पुराण के दसवें स्कंध में कथा है कि कृष्ण ने यमुना में कालिया के फनों पर नाचकर उसे वश में किया और फिर उसे जीवित छोड़ दिया।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. भारतकोश: नाग पंचमीतिथि, गरुड़ और स्कंद पुराण, किसान की कथा, पाँच फनों के नाग, बाँबी पर दूध, गुड़िया
  2. Astrobix: नाग पंचमी कथा और पूजन विधिकिसान और नागिन की कथा, दरवाज़े पर गोबर के नाग, पंचामृत, भोग
  3. शुभ पंचांग: नाग पंचमी के सार का अनावरणकथा में बहू वाला रूप, दूध पर सावधानी, दक्षिण के जुलूस
  4. Shubh Panchang: Nag Panchami significance, rituals and puja vidhiकालिया का नाम, धर्मसिंधु, तवा सुई चाकू, नाग कल्लु और तंबिट्टु, मनसा
  5. Green Message: Life events of Sri Krishna (Bhagavata Purana)भागवत दसवाँ स्कंध, सोलहवाँ अध्याय: कालिया की कथा
  6. The Week (PTI): Maharashtra assembly members want snake worship restarted in Battis Shiralaशिराळा का पुराना चलन, 2002 की हाई कोर्ट रोक
  7. The Week (PTI): No reviving practice of live worship of snakes, say activistsनाग वन्यजीव क़ानून की पहली अनुसूची में
  8. Hinduism Today: Nag Panchami and the Shirala rulingपर्यावरण संस्थाओं की याचिका पर शिराळा में नुमाइश और जुलूस पर रोक

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।