उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · हर महीने का व्रत
मासिक शिवरात्रि 2027
Masik Shivratri 2027
हर महीने की चौदस। छोटी शिवरात्रि, पर रात उतनी ही लंबी।
मासिक शिवरात्रि 2027 में 13 बार आती है, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को। पहली 5 जनवरी, मंगलवार को है, और आख़िरी 25 दिसंबर, शनिवार को। इनमें से महाशिवरात्रि के अपने पन्ने भी हैं। हर तारीख़ की तिथि, निशीथ काल और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।
घर सो चुका है। बस पूजा वाले कोने में एक दीया जल रहा है।
दीये के पास एक लोटा। पानी पर बेल के दो पत्ते तैर रहे हैं।
आसमान में चाँद की बस एक पतली फाँक बची है, और वह भी भोर से पहले नहीं उगेगी।
यह फागुन वाली बड़ी शिवरात्रि नहीं। बस महीने की चौदस है।
फिर भी किसी ने दिन भर कुछ नहीं खाया, और आधी रात तक जागा है।
पुरानी कथा में क़र्ज़ में डूबा एक शिकारी भी ऐसे ही जागा था, बेल के पेड़ पर, बिना जाने कि नीचे शिव हैं।
हर महीने यह रात लौटती है। हर बार कोई और जागता है।
2027 में कब
मासिक शिवरात्रि 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
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पहचान
मासिक शिवरात्रि क्या है
मासिक शिवरात्रि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी है, यानी अमावस्या से ठीक पहले की चौदस। साल में ऐसी बारह रातें होती हैं, और इनमें फागुन वाली सबसे बड़ी है, महाशिवरात्रि। शिव की पूजा आधी रात के पास होती है, जिसे निशीथ काल कहते हैं, क्योंकि मान्यता है कि महाशिवरात्रि की आधी रात को शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे और उस लिंग की पहली पूजा विष्णु और ब्रह्मा ने की थी। इसलिए व्रत की रात वह मानी जाती है जिसके निशीथ काल में चतुर्दशी चल रही हो। उत्तर भारत का पूर्णिमांत पंचांग इस रात को एक महीने का नाम देता है, दक्षिण और पश्चिम का अमांत पंचांग दूसरे का, पर रात वही रहती है। हर रात के निशीथ काल का समय यह पन्ना ऊपर गिनकर देता है, और साल की हर मासिक शिवरात्रि नीचे सूची में है।
पूरी सूची
मासिक शिवरात्रि 2027: हर तारीख़
हर तारीख़, उस दिन की तिथि कब से कब तक, निशीथ काल का समय, और उस दिन की अपनी बात।
5जनवरी
पौष मासिक शिवरात्रि
पौष कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 5 जनवरी, रात 8:40 से 6 जनवरी, रात 11:15 तक
साल की पहली मासिक शिवरात्रि, जाड़े की लंबी रात में। अमांत पंचांग इसी रात को मार्गशीर्ष की कृष्ण चतुर्दशी कहते हैं।
निशीथ काल: 5 जनवरी, रात 11:59 से 6 जनवरी, रात 12:54 तक
4फ़रवरी
माघ मासिक शिवरात्रि
माघ कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 4 फ़रवरी, शाम 4:32 से 5 फ़रवरी, शाम 7:06 तक
महाशिवरात्रि से ठीक पहले की मासिक शिवरात्रि। इसी पखवाड़े के आख़िर में माघ की अमावस्या आती है, मौनी अमावस्या, जिसका अपना पन्ना है।
निशीथ काल: 5 फ़रवरी, रात 12:09 से रात 1:01 तक
6मार्च
महाशिवरात्रि
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 6 मार्च, दोपहर 12:04 से 7 मार्च, दोपहर 1:47 तक
फागुन की यही कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि है, साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि, जिसका पूरा पन्ना अलग है।
निशीथ काल: 7 मार्च, रात 12:08 से रात 12:57 तक
5अप्रैल
चैत्र मासिक शिवरात्रि
चैत्र कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 5 अप्रैल, सुबह 5:24 से 6 अप्रैल, सुबह 5:41 तक
जो लोग साल भर का व्रत महाशिवरात्रि से उठाते हैं, उनकी यह पहली मासिक शिवरात्रि है।
निशीथ काल: 6 अप्रैल, रात 12:01 से रात 12:46 तक
4मई
वैशाख मासिक शिवरात्रि
वैशाख कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 4 मई, रात 7:31 से 5 मई, शाम 6:17 तक
अमांत पंचांग वाले राज्यों में यह चैत्र की कृष्ण चतुर्दशी है, यानी उनके नए साल के पहले महीने की शिवरात्रि।
निशीथ काल: 4 मई, रात 11:56 से 5 मई, रात 12:39 तक
3जून
2जुलाई
आषाढ़ मासिक शिवरात्रि
आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 2 जुलाई, दोपहर 3:24 से 3 जुलाई, दोपहर 12:06 तक
सावन से पहले की आख़िरी शिवरात्रि। अमांत पंचांग इसे ज्येष्ठ की चतुर्दशी गिनते हैं।
निशीथ काल: 3 जुलाई, रात 12:05 से रात 12:45 तक
31जुलाई
सावन शिवरात्रि
श्रावण कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 31 जुलाई, रात 10:58 से 1 अगस्त, शाम 7:21 तक
शिव के अपने महीने, सावन, की शिवरात्रि। महीने भर गंगाजल ढोते कांवड़िये इसी रात अपने शिवालय में जल चढ़ाते हैं, और कांवड़ को जल चढ़ने तक ज़मीन पर नहीं रखते।
निशीथ काल: 1 अगस्त, रात 12:07 से रात 12:49 तक
30अगस्त
भाद्रपद मासिक शिवरात्रि
भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 30 अगस्त, सुबह 6:13 से 31 अगस्त, रात 2:42 तक
महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के अमांत पंचांग में यही श्रावण की कृष्ण चतुर्दशी है, सो वहाँ की सावन शिवरात्रि यही रात है।
निशीथ काल: 31 अगस्त, रात 12:00 से रात 12:44 तक
28सितंबर
आश्विन मासिक शिवरात्रि
आश्विन कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 28 सितंबर, दोपहर 1:55 से 29 सितंबर, सुबह 10:56 तक
यह चतुर्दशी पितृ पक्ष के भीतर आती है, उन सोलह तिथियों में जब पुरखों को याद करके श्राद्ध और तर्पण होता है; पितृ पक्ष का अपना पन्ना है।
निशीथ काल: 28 सितंबर, रात 11:48 से 29 सितंबर, रात 12:36 तक
27अक्टूबर
कार्तिक मासिक शिवरात्रि
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 27 अक्टूबर, रात 10:50 से 28 अक्टूबर, रात 8:49 तक
कार्तिक की यही कृष्ण चतुर्दशी नरक चतुर्दशी या छोटी दीवाली कहलाती है। निशीथ काल में चतुर्दशी धनतेरस वाले दिन ही आ जाती है, इसलिए शिवरात्रि की पूजा धनतेरस की रात होती है; धनतेरस का अपना पन्ना है।
निशीथ काल: 27 अक्टूबर, रात 11:40 से 28 अक्टूबर, रात 12:31 तक
26नवंबर
मार्गशीर्ष मासिक शिवरात्रि
मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी · तिथि 26 नवंबर, सुबह 9:48 से 27 नवंबर, सुबह 9:08 तक
अगहन, यानी मार्गशीर्ष, की शिवरात्रि। माना जाता है कि इस रात शिव के साथ पार्वती की पूजा का फल देर तक बना रहता है। अमांत पंचांग इसे कार्तिक की चतुर्दशी कहते हैं।
निशीथ काल: 26 नवंबर, रात 11:42 से 27 नवंबर, रात 12:36 तक
25दिसंबर
कथा
मासिक शिवरात्रि की कथा
शिवरात्रि की जो कथा घरों की पोथियों में पढ़ी जाती है, वह एक शिकारी की है। चित्रभानु नाम का एक शिकारी जानवर मारकर अपना घर चलाता था। उस पर एक साहूकार का क़र्ज़ था, और जब वह समय पर न चुका सका, तो साहूकार ने उसे एक शिवमठ में बंद करवा दिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। दिन भर बंद पड़ा वह शिव की बातें सुनता रहा, शिवरात्रि की कथा भी। शाम को साहूकार आया तो उसने वादा किया कि कल सारा क़र्ज़ चुका दूँगा, और वह छूट गया।
दिन भर का भूखा प्यासा वह जंगल में शिकार को निकला। सूरज डूबते समय वह एक तालाब पर पहुँचा और घाट के पास के बेल के पेड़ पर मचान बाँधकर टिक गया, कि रात में कोई जानवर पानी पीने आएगा। पेड़ के नीचे सूखे बेल पत्रों में ढका एक शिवलिंग था, जो उसे दिखा नहीं। मचान बाँधते हुए जो टहनियाँ टूटीं, वे लिंग पर गिरीं। पहले पहर एक गाभिन हिरनी पानी पीने आई। उसने धनुष ताना, तो पत्ते और पानी की बूँदें फिर लिंग पर गिरीं। हिरनी ने कहा, मुझे बच्चे को जन्म दे लेने दो, फिर लौट आऊँगी। उसने जाने दिया। दूसरे पहर एक और हिरनी आई, जो अपने साथी को ढूँढ रही थी, और वह भी लौटने का वादा करके चली गई। तीसरे पहर बच्चों के साथ एक हिरनी आई और बोली, इन्हें इनके पिता के पास छोड़ आऊँ। शिकारी पहले मना करता रहा, उसके अपने बच्चे भी भूखे थे, पर फिर उसे दया आ गई। हर बार बेल के पत्ते नीचे गिरते रहे, और हर पहर की पूजा अपने आप होती गई।
भोर को एक हट्टा कट्टा हिरन आया। उसने कहा, अगर तुमने मेरी हिरनियों और बच्चों को मार दिया है तो मुझे भी जल्दी मार दो; अगर छोड़ दिया है, तो मुझे थोड़ी देर दो, मैं उनसे मिलकर लौट आऊँगा। दिन भर के व्रत, रात भर के जागने और बेल पत्रों से शिकारी का मन बदल चुका था। उसने धनुष रख दिया। थोड़ी देर में हिरन अपनी हिरनियों और बच्चों के साथ लौट आया, वादा निभाने। शिकारी रो पड़ा, और उसने फिर कभी शिकार न करने की ठानी। तब शिव प्रकट हुए, उसे सुख और धन का वर दिया, और उसका नाम रखा गुह। लोक की कथा कहती है कि यही वह गुह है जिससे आगे चलकर राम की मित्रता हुई।
इसी कथा का एक दूसरा रूप है, जिसे परंपरा महाभारत के शांति पर्व से जोड़ती है, जहाँ बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म धर्म की बातें कहते हुए इसे सुनाते हैं। इक्ष्वाकु वंश के राजा चित्रभानु रानी के साथ महाशिवरात्रि का व्रत रख रहे थे, तभी अष्टावक्र ऋषि आए और पूछा, यह व्रत क्यों? राजा को अपना पिछला जन्म याद था। वे वाराणसी में सुस्वर नाम के शिकारी थे। एक दिन जंगल में रात हो गई, तो वे बेल के पेड़ पर चढ़ गए और दिन में मारा हिरन एक डाल से बाँध दिया। भूख प्यास में वे रात भर जागते रहे, घर के भूखे बाल बच्चों को याद करके रोते रहे, और समय काटने को बेल के पत्ते तोड़ तोड़कर नीचे गिराते रहे; उनके आँसू भी पेड़ की जड़ पर गिरते रहे। सुबह उन्होंने हिरन बेचकर खाना ख़रीदा, और व्रत खोलने ही वाले थे कि एक अजनबी भूखा माँगने आया। उन्होंने पहले उसे खिलाया, फिर ख़ुद खाया। जब उनकी मौत आई, तो शिव के दूत उन्हें लेने आए और बताया कि उस पेड़ के नीचे एक लिंग था, जिसे गिरते पत्तों और आँसुओं ने धोया, और अनजाने में उनका पूरा व्रत और पूजा हो गई थी।
व्रत
मासिक शिवरात्रि का व्रत कैसे रखें
- सुबह जल्दी, ब्रह्म मुहूर्त में, उठकर नहाते हैं और शिव के आगे व्रत का संकल्प लेते हैं।
- दिन भर का व्रत अपनी ताक़त के हिसाब से रखते हैं: कोई फल पर रहता है, कोई पुरानी कड़ाई से पानी तक नहीं लेता।
- दिन में या रात की पूजा से पहले शिकारी वाली शिवरात्रि कथा पढ़ी या सुनी जाती है।
- रात को सोते नहीं, जागरण करते हैं।
- अगली सुबह नहाकर, पहले किसी ब्राह्मण या भूखे को खिलाते हैं, फिर व्रत खोलते हैं।
- जो इसे साल भर का नियम बनाना चाहें, वे महाशिवरात्रि से शुरू करते हैं और फिर हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी रखते हैं।
पारण: व्रत कैसे खोलें
मासिक शिवरात्रि का व्रत रात की पूजा के बाद, अगली सुबह खोला जाता है। शिवरात्रि की विधि कहती है कि सुबह पहले ब्राह्मणों को खिलाओ, फिर ख़ुद खाओ; कथा का शिकारी सुस्वर भी व्रत खोलने से पहले एक भूखे अजनबी को खिलाता है। हर रात के बाद की सुबह पारण का समय यह पन्ना ऊपर देता है।
कहाँ कैसे
मासिक शिवरात्रि कहाँ कैसे मनाया जाता है
हरिद्वार, गोमुख, गंगोत्री और सुल्तानगंज
सावन शिव का महीना है। कांवड़िये, यानी बाँस की कांवड़ में जल ढोने वाले, यहाँ से गंगाजल भरते हैं और पैदल चलकर सावन की कृष्ण चतुर्दशी को अपने इलाक़े के शिवालय में चढ़ाते हैं।
उत्तर भारत
यहाँ के पूर्णिमांत पंचांग में महीना पूर्णिमा पर पूरा होता है, इसलिए हर शिवरात्रि उस महीने के नाम से जानी जाती है जिसकी पूर्णिमा अभी अभी बीती है, जैसे सावन शिवरात्रि।
महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना और तमिलनाडु
यहाँ के अमांत पंचांग में महीना अमावस्या पर पूरा होता है, सो वही रात एक महीना पीछे के नाम से गिनी जाती है: उत्तर की सावन शिवरात्रि यहाँ आषाढ़ की चतुर्दशी है, और यहाँ की श्रावण शिवरात्रि उत्तर की भादों वाली रात।
घर का पूजा घर
बहुत से लोग यह व्रत मंदिर नहीं, घर में रखते हैं। कहा जाता है कि कुँवारी लड़कियाँ मनचाहे वर के लिए और सुहागिनें सुखी घर के लिए इसे रखती हैं।
रीत
मासिक शिवरात्रि के दिन क्या करते हैं
- पूजा की जगह साफ़ करके गंगाजल छिड़कते हैं, और लकड़ी की चौकी पर सफ़ेद कपड़ा बिछाकर शिव और पार्वती की मूर्ति या तस्वीर रखते हैं।
- शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक होता है, फिर बेल पत्र, चंदन, अक्षत यानी साबुत चावल, फल और फूल चढ़ते हैं।
- रुद्राक्ष की माला पर ॐ नमः शिवाय, यानी पंचाक्षर मंत्र, के ग्यारह फेरे करते हैं।
- शिवलिंग के आगे राम राम जपना भी शिव को प्यारा माना जाता है।
- मुख्य पूजा आधी रात के पास होती है, जिसे निशीथ काल कहते हैं।
सवाल जवाब
मासिक शिवरात्रि 2027: पूछे जाने वाले सवाल
मासिक शिवरात्रि 2027 में कब कब है?
मासिक शिवरात्रि 2027 में 13 बार आती है, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को। पहली 5 जनवरी, मंगलवार को है, और आख़िरी 25 दिसंबर, शनिवार को। इनमें से महाशिवरात्रि के अपने पन्ने भी हैं। हर तारीख़ की तिथि, निशीथ काल और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।
मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या फ़र्क़ है?
हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि है, साल में बारह। इनमें फागुन की कृष्ण चतुर्दशी, जिसे अमांत पंचांग माघ की कहते हैं, महाशिवरात्रि है, सबसे बड़ी।
मासिक शिवरात्रि की पूजा किस समय करें?
आधी रात के पास, निशीथ काल में। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की आधी रात को ही शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
मासिक शिवरात्रि का व्रत कब से शुरू करें?
जो इसे नियम से रखना चाहें, वे महाशिवरात्रि के दिन से शुरू करके साल भर हर महीने की शिवरात्रि रख सकते हैं।
मासिक शिवरात्रि का व्रत कौन रख सकता है?
कोई भी। कहा जाता है कि लक्ष्मी, इंद्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती और रति ने भी शिवरात्रि का व्रत रखा था, और आज कुँवारी लड़कियाँ और सुहागिनें इसे ख़ास तौर पर रखती हैं।
क्या मासिक शिवरात्रि के व्रत में पानी पी सकते हैं?
यह अपनी ताक़त पर है। शिवरात्रि का व्रत कड़ा माना जाता है और कुछ लोग पानी भी नहीं लेते, पर बहुत से लोग फल और पानी पर रहकर रात की पूजा करते हैं।
सावन की शिवरात्रि ख़ास क्यों है?
क्योंकि सावन शिव का महीना है, और कांवड़िये पूरे महीने गंगाजल ढोकर इसी कृष्ण चतुर्दशी को अपने शिवालय में चढ़ाते हैं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Masik Shivaratri (Drik Panchang)कृष्ण चतुर्दशी, निशीथ काल की पूजा, आधी रात का लिंग, विष्णु और ब्रह्मा की पहली पूजा, लक्ष्मी से रति तक व्रत रखने वाली देवियाँ, महाशिवरात्रि से साल भर का व्रत, जागरण
- महा शिवरात्रि पूजन पौराणिक व्रत कथा (Bhakti Bharat)चित्रभानु, साहूकार का क़र्ज़, शिवमठ, बेल का पेड़, तीन हिरनियाँ और हिरन, गुह नाम और राम की मित्रता
- Shivaratri (The Divine Life Society)शांति पर्व और भीष्म, राजा चित्रभानु और अष्टावक्र, शिकारी सुस्वर, आँसू और पत्ते, अजनबी को खिलाना, कड़ा व्रत, सुबह ब्राह्मणों को खिलाकर पारण
- मासिक शिवरात्रि व्रत (Navbharat Live)हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी, कुँवारी लड़कियाँ और सुहागिनें, चौकी, अभिषेक, पंचाक्षर के ग्यारह फेरे, राम राम जप, अगहन की शिवरात्रि
- Kanwar Yatra (Bhakti Bharat)सावन की कृष्ण चतुर्दशी को जल, हरिद्वार, गोमुख, गंगोत्री, सुल्तानगंज, कांवड़ ज़मीन पर न रखना, अपने शिवालय में जल
- Sawan Somwar Vrat (Drik Panchang)पूर्णिमांत और अमांत में पंद्रह दिन का फ़र्क़, कौन से राज्य किस गिनती पर, सावन शिवरात्रि
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।