उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · श्रावण कृष्ण प्रतिपदा
सावन सोमवार 2027
Sawan Somvar 2027
सावन का हर सोमवार। एक लोटा जल, और एक पुराने विष की याद।
2027 में सावन के 5 सोमवार हैं: 19 जुलाई, 26 जुलाई, 2 अगस्त, 9 अगस्त और 16 अगस्त। यह गिनती पूर्णिमांत सावन की है, जैसे उत्तर भारत में चलती है। अमांत गिनती वाले प्रांतों में सावन दो हफ़्ते बाद शुरू होता है, इसलिए वहाँ सोमवार भी उसी हिसाब से बदलते हैं।
कच्ची सड़क पर गीले पैरों की लंबी क़तार। कंधों पर बाँस की कांवड़, दोनों सिरों पर जल।
कोई कांवड़ ज़मीन पर नहीं रखता। थककर भी नहीं।
यहाँ कोई किसी को नाम से नहीं पुकारता। सब एक दूसरे के लिए भोले हैं।
गाँव के शिवालय में भोर से लोटे उठ रहे हैं। दूध, गंगाजल, बेल पत्र।
बादल फिर घिर आए हैं। आज सोमवार है, और बहुत से घरों में दिन भर व्रत है।
कहते हैं, इसी महीने समुद्र मथा गया था, और शिव ने उसका विष गले में रोक लिया था।
उस गले की जलन पर तब से जल चढ़ रहा है। हर सावन, हर सोमवार।
2027 में कब
सावन सोमवार 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़19 जुलाई, सोमवार
तिथिश्रावण कृष्ण प्रतिपदा18 जुलाई, रात 9:15 से 19 जुलाई, रात 11:48 तक
नक्षत्रउत्तराषाढ़ासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:35
सूर्यास्तशाम 7:19
चंद्रोदयरात 7:54
तारीख़26 जुलाई, सोमवार
तिथिश्रावण कृष्ण सप्तमी25 जुलाई, सुबह 9:53 से 26 जुलाई, सुबह 10:25 तक
नक्षत्रअश्विनीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:39
सूर्यास्तशाम 7:16
चंद्रोदयरात 11:24
तारीख़2 अगस्त, सोमवार
तिथिश्रावण अमावस्या1 अगस्त, शाम 7:21 से 2 अगस्त, दोपहर 3:35 तक
नक्षत्रपुष्यसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:43
सूर्यास्तशाम 7:12
चंद्रोदयसुबह 5:18
तारीख़9 अगस्त, सोमवार
तिथिश्रावण शुक्ल अष्टमी8 अगस्त, रात 10:25 से 9 अगस्त, रात 10:35 तक
नक्षत्रस्वातीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:47
सूर्यास्तशाम 7:06
चंद्रोदयदोपहर 12:58
तारीख़16 अगस्त, सोमवार
तिथिश्रावण शुक्ल चतुर्दशी15 अगस्त, सुबह 7:54 से 16 अगस्त, सुबह 10:29 तक
नक्षत्रश्रवणसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:51
सूर्यास्तशाम 7:00
चंद्रोदयशाम 6:29
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पहचान
सावन सोमवार क्या है
सावन सोमवार श्रावण महीने के हर सोमवार का व्रत है। पूरा सावन शिव का महीना माना जाता है, और सोमवार शिव का दिन; इसलिए इस महीने के सोमवार सबसे बड़े गिने जाते हैं। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में महीना पूर्णिमा पर पूरा होता है, सो वहाँ सावन पहले शुरू होता है। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के अमांत पंचांग में महीना अमावस्या पर पूरा होता है, सो वहाँ सावन पंद्रह दिन बाद शुरू होता है और उसके सोमवार भी लगभग एक पखवाड़ा बाद आते हैं। नेपाल में, और उत्तराखंड और हिमाचल के कुछ हिस्सों में, सावन सूरज के महीने से गिना जाता है। बहुत से लोग सावन के पहले सोमवार से सोलह सोमवार का व्रत भी उठाते हैं। सावन के मंगलवार पार्वती के हैं; उन दिनों मंगला गौरी का व्रत होता है। इस पन्ने की तारीख़ें उत्तर भारत की पूर्णिमांत गिनती से हैं।
कथा
सावन सोमवार की कथा
सावन के सोमवार को घरों में जो कथा पढ़ी जाती है, वह एक साहूकार की है। यह लोक कथा है; इसके साथ किसी एक पुराण का नाम नहीं आता। एक नगर में एक साहूकार रहता था, शिव का बड़ा भक्त। धन की कमी नहीं थी, बस संतान नहीं थी, और इसी दुख में वह हर दिन शिव के मंदिर में दीया जलाता और पूजा करता। उसकी भक्ति देखकर पार्वती ने शिव से कहा, इसकी मुराद पूरी क्यों नहीं करते? शिव बोले, इसके भाग्य में बेटा है ही नहीं। पार्वती ने ज़िद की, तो शिव ने बेटे का वर दिया, पर एक शर्त के साथ: वह बस बारह बरस जिएगा। कुछ घरों की कथा में यह उम्र सोलह बरस कही जाती है।
साहूकार ने यह बात चुपचाप सुन ली और पूजा करता रहा। नौवें महीने उसके घर बेटा हुआ। बेटा ग्यारह बरस का हुआ तो माँ ने ब्याह की बात छेड़ी। साहूकार बोला, पहले यह काशी जाकर पढ़ेगा, और उसने बेटे को मामा के साथ काशी भेज दिया, यह कहकर कि रास्ते में जहाँ रुको, वहाँ यज्ञ करना और ब्राह्मणों को खिलाना। रास्ते में एक नगर में एक राजकुमारी का ब्याह होने वाला था, पर दूल्हे की एक आँख नहीं थी। राजा ने सुंदर साहूकार पुत्र को देखा और ठान लिया कि बेटी का ब्याह इसी से होगा। उसने मामा को बहुत सा धन देकर मना लिया। दूल्हे की जगह वही लड़का मंडप में खड़ा हुआ, और ब्याह हो गया। विदा से पहले लड़के ने राजकुमारी की चुनरी के पल्लू पर लिख दिया: तुम्हारा ब्याह मुझसे हुआ है, पर तुम्हें एक काने राजकुमार के साथ भेजा जाएगा। चुनरी पढ़कर राजकुमारी ने उस राजकुमार के साथ जाने से मना कर दिया, और बारात ख़ाली लौट गई।
काशी में मामा और भांजा यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ वाले दिन लड़का कमरे से बाहर नहीं निकला। मामा भीतर गया तो देखा, लड़के के प्राण जा चुके थे। यज्ञ अधूरा था, सो मामा चुप रहा, यज्ञ पूरा किया, ब्राह्मणों को खिलाया, और फिर फूट फूटकर रोने लगा। उसी समय शिव और पार्वती उधर से निकले। पार्वती ने पूछा, यह कौन रो रहा है? शिव ने बताया, यह उसी साहूकार का बेटा है, इसके बारह बरस पूरे हो गए। पार्वती बार बार विनती करती रहीं, और आख़िर शिव ने लड़के को फिर से जीवन दे दिया। लड़का ॐ नमः शिवाय कहता हुआ उठ खड़ा हुआ।
मामा और भांजा घर की ओर चले। रास्ते में वही नगर आया जहाँ ब्याह हुआ था। राजकुमारी ने लड़के को पहचान लिया, और राजा ने बहुत सा धन देकर बेटी को उसके साथ विदा किया। उधर साहूकार और उसकी पत्नी छत पर बेटे की राह देख रहे थे। उन्होंने ठान रखा था कि बेटा सही सलामत न लौटा तो छत से कूद जाएँगे। मामा ने क़सम खाकर ख़बर सुनाई, तब जाकर उन्हें भरोसा हुआ, और उन्होंने बेटे बहू का स्वागत किया। उसी रात शिव ने साहूकार को सपने में दर्शन दिए और कहा, तुम्हारी पूजा से मैं ख़ुश हूँ; जो सोमवार को यह कथा पढ़ेगा या सुनेगा, उसके दुख दूर होंगे और उसकी मुराद पूरी होगी।
व्रत
सावन सोमवार का व्रत कैसे रखें
- सोमवार की सुबह नहाकर शिव के आगे दिन भर के व्रत का संकल्प लेते हैं।
- बहुत से लोग यह व्रत कड़ाई से रखते हैं; बाक़ी अपनी ताक़त और घर की रीत के हिसाब से।
- व्रत के बीच घर में या शिवालय में पूजा करते हैं, और पूजा पूरी होने पर साहूकार वाली कथा पढ़ते या सुनते हैं।
- जो सोलह सोमवार का व्रत लेते हैं, वे सावन के पहले सोमवार से गिनती शुरू करते हैं और लगातार सोलह सोमवार रखते हैं।
- कांवड़ उठाने वाले जल चढ़ाने तक अन्न और नमक नहीं लेते, पानी से भी बचते हैं, और शिव को जल चढ़ाए बिना घर नहीं लौटते।
पारण: व्रत कैसे खोलें
सावन सोमवार का व्रत सोमवार के दिन भर का है। इसे खोलने की कोई तय घड़ी पंचांगों में नहीं मिलती, जैसी एकादशी या प्रदोष की मिलती है। सो यहाँ अपने घर की रीत चलती है: उसी दिन शिव की पूजा और कथा पूरी करके व्रत खोलते हैं। कांवड़ वालों का नियम अलग है: उनका व्रत तब खुलता है जब ढोया हुआ गंगाजल शिव पर चढ़ जाए।
कहाँ कैसे
सावन सोमवार कहाँ कैसे मनाया जाता है
उत्तर भारत
राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पूर्णिमांत गिनती चलती है, सो यहाँ सावन और उसके सोमवार पहले शुरू होते हैं, और इसी महीने कांवड़ यात्रा चलती है।
महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और दक्षिण भारत
यहाँ अमांत गिनती है, इसलिए श्रावण उत्तर से पंद्रह दिन बाद शुरू होता है, और सावन के सोमवार भी लगभग एक पखवाड़ा बाद आते हैं।
नेपाल, उत्तराखंड और हिमाचल के कुछ हिस्से
यहाँ सावन सूरज के महीने से गिना जाता है, चाँद से नहीं। नेपाल में भी सोमवार को शिवलिंग पर दूध, गंगाजल और बेल पत्र चढ़ते हैं, और लोक में माना जाता है कि सावन के सोमवार का व्रत रखने वाली लड़कियों को अच्छा जीवन साथी मिलता है।
हरिद्वार, गोमुख, गंगोत्री और सुल्तानगंज
कांवड़िये यहाँ से गंगाजल भरते हैं और पैदल चलकर अपने इलाक़े के शिवालय में चढ़ाते हैं। हरिद्वार के कांवड़ मेले में बम बम भोले और जय शिव शंकर की आवाज़ गूँजती है।
रीत
सावन सोमवार के दिन क्या करते हैं
- सुबह शिवलिंग पर दूध, गंगाजल और बेल पत्र चढ़ाते हैं, और शिव के साथ पार्वती की भी पूजा करते हैं।
- मंत्र जपते हुए लिंग पर धीरे धीरे जल डालते हैं; मान्यता है कि विष की जलन कम करने को देवताओं ने शिव पर गंगाजल चढ़ाया था, और अभिषेक की रीत वहीं से चली।
- कांवड़िये गंगा से जल भरकर बाँस की खोखली कांवड़ में ढोते हैं, और जल चढ़ने तक कांवड़ को ज़मीन पर नहीं रखते।
- कई कांवड़िये नंगे पाँव चलते हैं, और एक दूसरे को नाम से नहीं, भोले कहकर बुलाते हैं।
सवाल जवाब
सावन सोमवार 2027: पूछे जाने वाले सवाल
सावन सोमवार 2027 में कब कब है?
2027 में सावन के 5 सोमवार हैं: 19 जुलाई, 26 जुलाई, 2 अगस्त, 9 अगस्त और 16 अगस्त। यह गिनती पूर्णिमांत सावन की है, जैसे उत्तर भारत में चलती है। अमांत गिनती वाले प्रांतों में सावन दो हफ़्ते बाद शुरू होता है, इसलिए वहाँ सोमवार भी उसी हिसाब से बदलते हैं।
सावन सोमवार का व्रत कौन रख सकता है?
कोई भी। लोक में माना जाता है कि कुँवारी लड़कियों को इससे अच्छा वर मिलता है, और सुहागिनों के पति की सेहत अच्छी रहती है।
सावन का महीना शिव को इतना प्यारा क्यों है?
मान्यता है कि समुद्र मंथन इसी महीने हुआ था, जब शिव ने विष पिया। यह भी कहा जाता है कि मार्कंडेय ने लंबी उम्र के लिए इसी महीने तप किया था, और शिव हर सावन अपनी ससुराल आते थे, जहाँ जल चढ़ाकर उनका स्वागत होता था।
उत्तर और दक्षिण में सावन सोमवार की तारीख़ें अलग क्यों होती हैं?
उत्तर भारत का पूर्णिमांत पंचांग महीना पूर्णिमा पर ख़त्म करता है, और दक्षिण और पश्चिम का अमांत पंचांग अमावस्या पर। इसलिए वहाँ श्रावण पंद्रह दिन बाद शुरू होता है, और आधे सोमवार अलग पड़ते हैं।
सोलह सोमवार का व्रत कब से शुरू करें?
बहुत से लोग इसे सावन के पहले सोमवार से शुरू करते हैं, और वहाँ से लगातार सोलह सोमवार रखते हैं।
सावन सोमवार पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाएँ?
दूध, गंगाजल और बेल पत्र। जल मंत्र जपते हुए धीरे धीरे चढ़ाते हैं।
सावन सोमवार की कथा क्या है?
एक बेऔलाद साहूकार की, जिसे शिव ने पार्वती के कहने पर बस बारह बरस जीने वाला बेटा दिया। काशी में बारह बरस पूरे होने पर बेटे के प्राण गए, और पार्वती की विनती पर शिव ने उसे फिर जीवन दिया।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Sawan Somwar Vrat (Drik Panchang)पूर्णिमांत और अमांत में पंद्रह दिन का फ़र्क़, राज्यों के नाम, नेपाल, उत्तराखंड और हिमाचल का सूर्य वाला सावन, सोलह सोमवार, मंगला गौरी व्रत
- Sawan Somvar ki katha (DNA Hindi)साहूकार, पार्वती की ज़िद, बारह बरस का वर, काशी, काना दूल्हा, चुनरी, बेटे का लौटना, शिव का सपना
- Sawan Somvar vrat katha (Patrika)रोज़ का दीया, नौवें महीने बेटा, ग्यारह बरस पर काशी, यज्ञ अधूरा रहने पर मामा का चुप रहना, ॐ नमः शिवाय कहकर उठना, छत पर माता पिता, कथा का फल
- Sawan vrat katha (Aaj Tak)कथा का दूसरा रूप, सोलह बरस की उम्र, किसी एक ग्रंथ का नाम न होना
- History and significance of Shravan (The Goan)मार्कंडेय का तप, ससुराल आना, समुद्र मंथन, देवताओं का गंगाजल चढ़ाना और अभिषेक, लड़कियों और सुहागिनों का व्रत
- The Beliefs and Mythology of Shravan Maas (Nepal Traveller)नेपाल में भी सोमवार को दूध, गंगाजल, बेल पत्र, कड़ा व्रत, शिव और पार्वती की पूजा, मंत्र जप, जीवन साथी की मान्यता
- Kanwar Yatra (Bhakti Bharat)बाँस की खोखली कांवड़, जल भरने की जगहें, अन्न, नमक और पानी से बचना, कांवड़ ज़मीन पर न रखना, नंगे पाँव, भोले कहकर बुलाना, अपने शिवालय में जल
- Kanwar Yatra enters final stage (News on AIR)हरिद्वार का कांवड़ मेला, बम बम भोले और जय शिव शंकर
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।