उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · सिंह संक्रांति
घी संक्रांति 2027
Ghee Sankranti 2027
भादों का पहला दिन। कटोरी भर घी, और एक कहावत।
घी संक्रांति 2027 में 17 अगस्त, मंगलवार को है। सूर्य दोपहर 2:14 पर सिंह राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
तवे पर एक रोटी फूलकर गोल हो जाती है।
यह बेड़ू रोटी है। भीतर उड़द की दाल भरी है, ऊपर घी की एक धार।
एक कटोरी में घी पिघल रहा है। पहला हिस्सा देवता का।
एक दादी उँगली घी में डुबोती हैं और बच्चे के सिर पर फेर देती हैं।
बच्चा पूछता है: न खाऊँ तो?
दादी हँसती हैं: तो अगले जनम गनेल बनेगा। घोंघा।
खिड़की के बाहर भादों के खेत भरे खड़े हैं।
हर गाँव यह बात अपने बोल में कहता है। कथाएँ भी ऐसे ही एक ज़बान से दूसरी तक चलती हैं।
2027 में कब
घी संक्रांति 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़17 अगस्त, मंगलवार
संक्रांतिसूर्य सिंह राशि मेंदोपहर 2:14
नक्षत्रधनिष्ठासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:51
सूर्यास्तशाम 6:59
चंद्रोदयशाम 6:59
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
फ़ोन पर Google का पन्ना ठीक से न खुले, तो यही बटन कंप्यूटर पर दबाइए। जुड़ते ही यह फ़ोन में भी दिखेगा।
जोड़ते समय “Remove Alerts” बंद कर दें (टिक हटा दें), तो बड़े त्योहारों की सुबह 7 बजे याद भी आएगी कि अपनों को कार्ड भेजना है।
- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल · सिर्फ़ यह दिन
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
शुभकामना
घी संक्रांति का शुभकामना कार्ड

अपनों को घी संक्रांति की शुभकामनाएँ भेजिए, इस बरस की तारीख़ और उस दिन की बात के साथ। कार्ड पर QR कोड है, जिससे तारीख़, कथा और मुहूर्त भी साथ पहुँचते हैं।
WhatsApp पर भेजेंकार्ड डाउनलोड करें
फ़ोन पर बटन दबाते ही कार्ड सीधे WhatsApp में चला जाता है, बधाई और लिंक के साथ।
पहचान
घी संक्रांति क्या है
घी संक्रांति उत्तराखंड का लोक त्योहार है। यह भादों महीने के पहले दिन आता है, जिस दिन सूरज सिंह राशि में जाता है, यानी सिंह संक्रांति को। कुमाऊँ में इसे घी त्यार या घ्यू त्यार कहते हैं (घ्यू यानी घी, और त्यार यानी त्योहार), गढ़वाल में घी संक्रांति, और कुमाऊँ में इसका एक नाम ओलगिया भी है। यह वह समय है जब खेत फ़सल से भरे होते हैं और दूध देने वाले पशु अच्छी हालत में होते हैं, इसलिए इस दिन घी खाने और भेंट देने का चलन है। घर की हालत जैसी भी हो, इस दिन सब घी या मक्खन सिर पर लगाते हैं और खाने में डालते हैं।
कथा
घी संक्रांति की कथा
घी संक्रांति की कोई पोथी वाली कथा नहीं है। जो है, वह लोक की बात है, जो दादी नानी की ज़बान से अगली पीढ़ी तक आती है। लोक कथा में कहते हैं कि जो इस दिन घी नहीं खाता, उसे अगले जनम में घोंघा, यानी गनेल, बनना पड़ता है। गनेल पहाड़ की बोली में घोंघे को कहते हैं। इसलिए इस दिन घर का हर आदमी, चाहे थोड़ा सा ही, घी ज़रूर खाता है।
इस दिन के दूसरे नाम ओलगिया के पीछे एक पुराना चलन है। ओलग यानी ख़ास भेंट। पुराने समय में किसान सबसे पहले गाँव के देवता को गेबे यानी अरबी के पत्ते, मक्का, दही, घी और मक्खन चढ़ाते थे। फिर पंडितों, पुजारियों और रिश्तेदारों को ओलग दिया जाता था। किसान अपने भूस्वामियों और राज को भी ओलग देते थे। दामाद अपने ससुराल वालों को, और भांजे अपने मामा को भेंट देते थे।
कारीगर भी इस लेन देन में थे। वे लोहे के औज़ार, कुल्हाड़ी, दाँत खोदने की धातु की सींक जिसे दातखोचा कहते हैं, और बिणाई देते थे, जो मुँह से बजने वाला एक छोटा बाजा है। अब शिल्प और पुराने धंधे कम होने से यह भेंट वाली रीत लगभग ख़त्म हो चली है। पर गाँवों में आज भी सबसे पहले देवताओं और बड़ों को भेंट देकर ही गेबे खाने का चलन बचा है।
कहाँ कैसे
घी संक्रांति कहाँ कैसे मनाया जाता है
कुमाऊँ
यहाँ यह दिन घी त्यार, घ्यू त्यार और ओलगिया कहलाता है। ओलग की भेंट वाली रीत का नाम यहीं से है।
गढ़वाल
यहाँ इसे घी संक्रांति कहते हैं, और घर घर घी के साथ पकवान बनते हैं।
ऊपर के पहाड़ी गाँव
शहरों में यह दिन अब कम मनाया जाता है, पर ऊँचाई वाले बहुत से गाँव इसे आज भी पूरे मन से रखते हैं।
रीत
घी संक्रांति के दिन क्या करते हैं
- पहले एक कटोरी में घी भरकर देवता को भोग लगाया जाता है, फिर तरह तरह के पकवान चढ़ाए जाते हैं।
- घर के सब लोग सिर पर घी या मक्खन लगाते हैं; कई घरों में लोग एक दूसरे के माथे पर घी लगाते हैं।
- बच्चों के सिर पर ताज़ा मक्खन मलकर उनकी लंबी उम्र माँगी जाती है, और नवजात के सिर और तलवों पर घी लगाया जाता है।
- दिन के हर खाने में घी डाला जाता है।
- बेड़ू रोटी, यानी उड़द की दाल भरी रोटी, मक्खन या घी के साथ खाई जाती है।
- गाँव के देवता, पुरोहित और रिश्तेदारों के लिए ओलग यानी भेंट निकाली जाती है।
- सबसे पहले देवताओं और बड़ों को भेंट देकर ही गेबे यानी अरबी के पत्ते खाए जाते हैं।
रसोई
घी संक्रांति का खाना
- बेड़ू रोटी उड़द की दाल भरी रोटी, जिसे बेड़वा रोटी भी कहते हैं, घी या मक्खन के साथ।
- गेबे अरबी के पत्ते, जिनकी सब्ज़ी इस दिन बनती है।
- पुए, पकौड़े और खीर घी के साथ परोसे जाते हैं।
- गुलगुले मीठे पकौड़े, जो कई घरों में इस दिन बनते हैं।
सवाल जवाब
घी संक्रांति 2027: पूछे जाने वाले सवाल
घी संक्रांति 2027 कब है?
घी संक्रांति 2027 में 17 अगस्त, मंगलवार को है। सूर्य दोपहर 2:14 पर सिंह राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
घी संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
यह भरी फ़सल और दूध देने वाले पशुओं के लिए धन्यवाद का दिन है। भादों के पहले दिन खेत भरे होते हैं, इसलिए घी खाया जाता है, देवता को भोग लगता है और भेंट दी जाती है।
घी संक्रांति पर घी न खाने से क्या होता है?
यह लोक की कहावत है कि जो इस दिन घी नहीं खाता, उसे अगले जनम में घोंघा यानी गनेल बनना पड़ता है। इसे लोक मान्यता की तरह ही कहा और सुना जाता है।
ओलगिया का क्या मतलब है?
कुमाऊँ में घी संक्रांति को ओलगिया भी कहते हैं। ओलग यानी ख़ास भेंट, जो पुराने समय में इस दिन देवता, पुजारी, रिश्तेदारों और ससुराल वालों को दी जाती थी।
बेड़ू रोटी क्या होती है?
बेड़ू रोटी उड़द की दाल भरकर बनी रोटी है, जिसे बेड़वा रोटी भी कहते हैं। घी संक्रांति पर इसे मक्खन या घी के साथ खाने का रिवाज है।
घी संक्रांति किस संक्रांति को होती है?
यह सिंह संक्रांति को होती है, जब सूरज सिंह राशि में जाता है। यही भादों महीने का पहला दिन है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- भक्ति भारत: घी संक्रांतिभादों का पहला दिन, नाम, ओलगिया, कटोरी का भोग, बेदू रोटी, ओलग की भेंट, गेबे
- Bhakti Bharat: Ghee Sankrantiओलग किसानों से भूस्वामी और राज को, दामाद से ससुराल को
- Times Now Hindi: घी त्यार पर घी खाना ज़रूरीगनेल वाली लोक कहावत, सिंह संक्रांति, कुमाऊँ और गढ़वाल के नाम, नवजात के घी
- eUttaranchal: Olgia (Ghee Sankranti)दामाद और भांजे की भेंट, कारीगरों की भेंट, बिणाई, ऊपर के गाँव
- Daaju Pahadi: Ghee Sankranti, a festival of gratitude and gheeघोंघे वाली मान्यता, माथे पर घी, हर खाने में घी, पकवान
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।