उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · हर महीने का व्रत
विनायक चतुर्थी 2027
Vinayaka Chaturthi 2027
उजले पाख की चौथ। पूजा भरी दोपहर में, और चाँद बस पश्चिम में एक पतली लकीर।
विनायक चतुर्थी 2027 में 13 बार आती है, हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को। पहली 11 जनवरी, सोमवार को है, और आख़िरी 31 दिसंबर, शुक्रवार को। हर तारीख़ की तिथि, मध्याह्न पूजा और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।
हथेली भर गीली मिट्टी। उँगलियाँ उसे दबाती हैं, और एक छोटी सी सूँड निकल आती है।
पीढ़े पर अब अँगूठे भर के गणेश हैं। माथे पर सिंदूर का लाल तिलक।
आगे दूब के तिनके, और पीले फूलों की एक माला।
न ढोल है, न पंडाल। बस एक दीया, और थाली में चार मोदक।
पूजा भरी दोपहर में होती है। शाम को आसमान के पश्चिम में चाँद की एक पतली फाँक दिखती है।
माँ खिड़की का पर्दा खींच देती हैं। आज उधर मत देखो।
महीने में एक बार यह छोटी सी दोपहर आती है। भादों में यही दोपहर पूरे शहर का त्योहार बन जाती है।
2027 में कब
विनायक चतुर्थी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
फ़ोन पर Google का पन्ना ठीक से न खुले, तो यही बटन कंप्यूटर पर दबाइए। जुड़ते ही यह फ़ोन में भी दिखेगा।
जोड़ते समय “Remove Alerts” बंद कर दें (टिक हटा दें), तो बड़े त्योहारों की सुबह 7 बजे याद भी आएगी कि अपनों को कार्ड भेजना है।
- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
पहचान
विनायक चतुर्थी क्या है
विनायक चतुर्थी हर महीने के शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि है, यानी अमावस्या के बाद वाली चौथ। इसे वरद विनायक चतुर्थी भी कहते हैं; वरद का मतलब है वर देने वाला, और इस दिन लोग गणेश से मन की मुराद पूरी होने का वर माँगते हैं। कृष्ण पक्ष वाली चौथ संकष्टी कहलाती है, और उसका अपना पन्ना है। धर्मशास्त्र के पुराने ग्रंथ, जैसे कृत्यकल्पतरु, भविष्य पुराण का हवाला देकर इसे गणपति चतुर्थी भी कहते हैं। इसकी पूजा मध्याह्न में होती है, यानी दिन के बीच वाले पहर में। इस दिन रात को चाँद नहीं देखते, क्योंकि मान्यता है कि उससे झूठा कलंक लगता है। साल की बारह विनायक चतुर्थियों में सबसे बड़ी भादों की है, जिसे गणेश चतुर्थी कहते हैं, और उसका अपना पन्ना है। माघ वाली चौथ को महाराष्ट्र और कोंकण में गणेश जयंती मानते हैं। इस पन्ने की सूची जनवरी से दिसंबर तक चलती है, इसलिए उसमें तेरह चौथ हैं: पौष की चौथ साल के दोनों सिरों पर आती है।
पूरी सूची
विनायक चतुर्थी 2027: हर तारीख़
हर तारीख़, उस दिन की तिथि कब से कब तक, मध्याह्न पूजा का समय, और उस दिन की अपनी बात।
11जनवरी
पौष विनायक चतुर्थी
पौष शुक्ल चतुर्थी · तिथि 11 जनवरी, सुबह 9:29 से 12 जनवरी, सुबह 11:30 तक
यह इस सूची की पहली विनायक चतुर्थी है, पौष के उजले पाख की। सूची की आख़िरी चौथ भी पौष की ही होगी, क्योंकि चाँद के बारह महीने सूरज के साल से कुछ दिन छोटे पड़ते हैं, और साल घूमकर फिर पौष आ जाता है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:26 से दोपहर 1:32 तक
10फ़रवरी
गणेश जयंती (तिलकुंद चतुर्थी)
माघ शुक्ल चतुर्थी · तिथि 10 फ़रवरी, रात 2:20 से 11 फ़रवरी, रात 3:05 तक
माघ की शुक्ल चतुर्थी को गणेश जयंती, तिलकुंद चतुर्थी, वरद चतुर्थी और माघ शुक्ल चतुर्थी कहते हैं। महाराष्ट्र और कोंकण के किनारे इसे गणेश का जन्मदिन मानकर रखते हैं, जबकि बाक़ी देश में वह दिन भादों की गणेश चतुर्थी है। इस दिन भी दोपहर की गणेश पूजा होती है और चाँद नहीं देखा जाता।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:29 से दोपहर 1:42 तक
12मार्च
ढुंढिराज चतुर्थी
फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी · तिथि 11 मार्च, दोपहर 3:38 से 12 मार्च, दोपहर 2:58 तक
फाल्गुन की शुक्ल चतुर्थी ढुंढिराज चतुर्थी है। मुद्गल पुराण की कथा में मालवा के राजा हेमांगद को पेट का ऐसा दर्द था जो किसी दवा से नहीं गया, और पर्वत मुनि ने बताया कि उसके राज में गणेश चतुर्थी का व्रत छूट गया है; राजा ने व्रत फिर शुरू किया, गं गणपतये नमो नमः का मंत्र जपा और ठीक हो गया। वराह पुराण का अविघ्नकर व्रत भी फाल्गुन की चतुर्थी का ही है, जिसका पारण तिल वाले अन्न से होता है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:20 से दोपहर 1:42 तक
10अप्रैल
चैत्र विनायक चतुर्थी
चैत्र शुक्ल चतुर्थी · तिथि रात 1:32 से रात 11:40 तक
चैत्र की शुक्ल चतुर्थी चैत्र नवरात्रि के बीच आती है, जो प्रतिपदा की घटस्थापना, यानी कलश की स्थापना, से शुरू होकर नवमी तक चलती है, और जिसका नौवाँ दिन राम नवमी है। चैत्र नवरात्रि का अपना पन्ना है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:07 से दोपहर 1:39 तक
9मई
वैशाख विनायक चतुर्थी
वैशाख शुक्ल चतुर्थी · तिथि 9 मई, सुबह 9:04 से 10 मई, सुबह 6:23 तक
इस बरस वैशाख की विनायक चतुर्थी उसी दिन पड़ रही है जिस दिन कैलेंडर में अक्षय तृतीया है, यानी तीज और चौथ एक ही तारीख़ पर आ मिली हैं। अक्षय तृतीया का अपना पन्ना है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 10:57 से दोपहर 1:38 तक
8जून
ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी
ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी · तिथि 7 जून, दोपहर 3:26 से 8 जून, दोपहर 12:22 तक
जेठ की कड़ी गर्मी में भी इसकी पूजा भरी दोपहर में ही होती है, क्योंकि विनायक चतुर्थी की पूजा का समय मध्याह्न ही माना गया है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 10:57 से दोपहर 1:44 तक
7जुलाई
आषाढ़ विनायक चतुर्थी
आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी · तिथि 6 जुलाई, रात 9:49 से 7 जुलाई, शाम 6:45 तक
आषाढ़ की इस चौथ के सात दिन बाद देवशयनी एकादशी आती है, जब मान्यता है कि विष्णु क्षीर सागर में सोने जाते हैं और कार्तिक की देवउठनी एकादशी तक सोते हैं। सो विष्णु के सोने से पहले की यह आख़िरी विनायक चतुर्थी है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:03 से दोपहर 1:49 तक
5अगस्त
श्रावण विनायक चतुर्थी
श्रावण शुक्ल चतुर्थी · तिथि 5 अगस्त, सुबह 5:09 से 6 अगस्त, रात 2:28 तक
सावन की यह चौथ नाग पंचमी से ठीक एक दिन पहले आती है, बरसात के बीच। अगले दिन घरों के दरवाज़ों पर नाग बनते हैं और बाँबी पर दूध रखा जाता है। नाग पंचमी का अपना पन्ना है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:07 से दोपहर 1:48 तक
4सितंबर
गणेश चतुर्थी
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी · तिथि 3 सितंबर, दोपहर 2:20 से 4 सितंबर, दोपहर 12:26 तक
भादों की शुक्ल चतुर्थी साल की सबसे बड़ी विनायक चतुर्थी है, गणेश चतुर्थी, जिसका अपना पन्ना है। उसी दिन कैलेंडर में जैनों की संवत्सरी और ऋषि पंचमी भी हैं, और मिथिला में इसी रात चौरचन होता है, जिसमें चाँद देखा नहीं, पूजा जाता है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:04 से दोपहर 1:36 तक
3अक्टूबर
आश्विन विनायक चतुर्थी
आश्विन शुक्ल चतुर्थी · तिथि 3 अक्टूबर, रात 2:09 से 4 अक्टूबर, रात 1:29 तक
आश्विन की शुक्ल चतुर्थी शारदीय नवरात्रि के बीच आती है, जब घरों में देवी माहात्म्य का पाठ चल रहा होता है। शारदीय नवरात्रि का अपना पन्ना है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 10:59 से दोपहर 1:21 तक
2नवंबर
नागुला चविति (कार्तिक विनायक चतुर्थी)
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी · तिथि 1 नवंबर, शाम 5:16 से 2 नवंबर, शाम 6:03 तक
कार्तिक की शुक्ल चतुर्थी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में नागुला चविति है: साँप की बाँबी पर दूध, हल्दी, कुमकुम और फूल चढ़ते हैं, और औरतें पूजा तक व्रत रखती हैं। यही तिथि बिहार में छठ का पहला दिन है, नहाय खाय; छठ का अपना पन्ना है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 10:58 से दोपहर 1:11 तक
2दिसंबर
मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी
मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी · तिथि 1 दिसंबर, सुबह 11:40 से 2 दिसंबर, दोपहर 1:44 तक
अगहन की इस चौथ के ठीक अगले दिन विवाह पंचमी आती है, राम और सीता के ब्याह का दिन, जिसका अपना पन्ना है।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:08 से दोपहर 1:13 तक
31दिसंबर
पौष विनायक चतुर्थी
पौष शुक्ल चतुर्थी · तिथि 31 दिसंबर, सुबह 8:12 से 1 जनवरी, सुबह 10:56 तक
साल घूमकर फिर पौष आ गया, और यह इस सूची की आख़िरी विनायक चतुर्थी है। ठंड की इस दोपहर में भी विधि वही है: सिंदूर का तिलक, पीले फूलों की माला, दूर्वा, मोदक का भोग, और रात को चाँद से नज़र बचाकर सोना।
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:22 से दोपहर 1:26 तक
कथा
विनायक चतुर्थी की कथा
विनायक चतुर्थी पर घरों में जो कथा सबसे ज़्यादा सुनाई जाती है, वह एक चौपड़ के खेल से शुरू होती है। लोक में कहते हैं, एक बार शिव और पार्वती नर्मदा के किनारे पहुँचे, और पार्वती का मन चौपड़ खेलने का हुआ। शिव ने पूछा, हार जीत कौन बताएगा? तब घास के तिनकों से एक बालक गढ़ा गया और उसमें प्राण डाले गए। उससे कहा, खेल देखते रहना, और आख़िर में बताना कि कौन जीता।
तीन बाज़ियाँ हुईं, और तीनों पार्वती जीतीं। पर जब बालक से पूछा गया, तो उसने कहा, महादेव जीते। पार्वती को ग़ुस्सा आया, और उन्होंने शाप दिया कि तू लंगड़ा होकर यहीं कीचड़ में पड़ा रहे। बालक रोया, बोला, मुझसे अनजाने में भूल हुई, मुझे माफ़ कर दो, और बताओ कि यह शाप कैसे छूटेगा। पार्वती का मन पसीजा। उन्होंने कहा, एक बरस बाद यहाँ नाग कन्याएँ गणेश की पूजा करने आएँगी। उनसे गणेश के व्रत की विधि पूछना और व्रत रखना। फिर वे कैलाश लौट गईं।
बरस बीता। नाग कन्याएँ आईं, और बालक ने उनसे व्रत की विधि सीखी। उसने इक्कीस दिन लगातार गणेश का व्रत रखा। गणेश प्रसन्न होकर प्रकट हुए और वर माँगने को कहा। बालक ने माँगा, मेरे पाँव में इतनी ताक़त दो कि मैं अपने पैरों पर चलकर कैलाश पहुँच जाऊँ। गणेश ने वर दिया, और बालक कैलाश पहुँचकर शिव के चरणों में गिर पड़ा और सारी बात सुनाई।
कई घरों में यही कथा आगे भी चलती है। उस दिन से पार्वती शिव से रूठी हुई थीं। शिव ने भी इक्कीस दिन गणेश का व्रत रखा, और पार्वती के मन में शिव से मिलने की इच्छा जागी; वे दौड़ी हुई कैलाश आईं और पूछा, आपने ऐसा क्या किया? शिव ने गणेश के व्रत की बात बताई। तब पार्वती ने अपने बेटे कार्तिकेय से मिलने की चाह में इक्कीस दिन गणेश की पूजा की, रोज़ इक्कीस दूर्वा, इक्कीस फूल और इक्कीस लड्डू चढ़ाकर। इक्कीसवें दिन कार्तिकेय अपने आप माँ के पास आ पहुँचे, और माँ से व्रत की महिमा सुनकर उन्होंने भी यह व्रत रखा। कई जगह यही कथा सकट चौथ पर भी सुनाई जाती है।
पुराणों में भी चतुर्थी का एक ऐसा ही व्रत है, विघ्न दूर करने वाला। वराह पुराण के उनसठवें अध्याय में अविघ्नकर व्रत की विधि आती है: "चतुर्थ्यां फाल्गुने मासि ग्रहीतव्यं व्रतं त्विदम्। नक्ताहारेण राजेन्द्र तिलान्नं पारणं स्मृतम्॥" मतलब, यह व्रत फाल्गुन महीने की चतुर्थी को लेना चाहिए; हे राजा, इसमें रात को एक बार खाना होता है, और पारण तिल वाले अन्न से होता है। उसी अध्याय में गणेश की सोने की मूर्ति बनवाकर ब्राह्मण को देने, तिल मिली खीर के पाँच पात्र और गजानन और लंबोदर जैसे नामों से पूजा और हवन की बात है।
व्रत
विनायक चतुर्थी का व्रत कैसे रखें
- सुबह सूरज निकलने से पहले उठकर नहाते हैं और गणेश के आगे व्रत का संकल्प लेते हैं।
- दिन भर अन्न नहीं खाते; फल और फलाहार की चीज़ें चलती हैं, और मांस और शराब तो मना हैं ही।
- सबसे ज़्यादा माना जाने वाला उपवास सूरज निकलने से अगले दिन सूरज निकलने तक का है; दोपहर की पूजा और कथा इसी के बीच आती है।
- वराह पुराण की फाल्गुन वाली विधि में दिन भर का उपवास रात के एक बार के खाने पर टिकता है, जिसे नक्त कहते हैं।
- व्रत अगली सुबह सूरज निकलने के बाद खोलते हैं।
पारण: व्रत कैसे खोलें
विनायक चतुर्थी का पारण सब जगह एक ढंग से नहीं बताया जाता। सबसे ज़्यादा बताया जाने वाला ढंग यह है कि व्रत सूरज निकलने से शुरू होता है और अगले दिन सूरज निकलने के बाद खुलता है, यानी पूरा दिन और पूरी रात का उपवास, और खाना अगले दिन। वराह पुराण के अविघ्नकर व्रत में रात को एक बार खाने का नियम है, जिसे नक्त कहते हैं, और पारण तिल वाले अन्न से बताया गया है। इस दिन चाँद देखा ही नहीं जाता, इसलिए संकष्टी की तरह चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोलने का नियम इसमें नहीं है। दोपहर की पूजा का मुहूर्त यह पन्ना ऊपर अपने आप दिखाता है।
कहाँ कैसे
विनायक चतुर्थी कहाँ कैसे मनाया जाता है
महाराष्ट्र और कोंकण
यहाँ माघ की विनायक चतुर्थी गणेश जयंती है, जिसे तिलकुंद चतुर्थी और वरद चतुर्थी भी कहते हैं, और यहाँ यही गणेश का जन्मदिन माना जाता है। बाक़ी देश में गणेश का जन्मदिन भादों की गणेश चतुर्थी को माना जाता है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
कार्तिक की विनायक चतुर्थी यहाँ नागुला चविति है, नागों की चौथ, और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी रखी जाती है। लोग साँप की बाँबी पर जाकर दूध, अंडे, और चावल के आटे में गुड़ मिलाकर बनी मिठाई चढ़ाते हैं, बाँबी पर हल्दी और कुमकुम लगाते हैं, पास में छोटे दीये जलाते हैं, और बहुत सी औरतें पूजा होने तक व्रत रखती हैं।
मिथिला, बिहार से नेपाल के मधेस तक
भादों की इसी चौथ को, जिस रात बाक़ी जगह चाँद से नज़र बचाई जाती है, मिथिला में चौरचन होता है, यानी चौठ चंद्र, चाँद की पूजा। घर की एक औरत दिन भर व्रत रखती है, शाम को आँगन गोबर से लीपकर घी का दीया जलाती है, और गणेश के साथ चाँद को फल और पकवान चढ़ाती है।
रीत
विनायक चतुर्थी के दिन क्या करते हैं
- पूजा की जगह को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करते हैं और गणेश की मूर्ति रखते हैं।
- गणेश को लाल सिंदूर का तिलक लगाते हैं, जो उन्हें प्यारा माना जाता है, और पीले फूलों की माला पहनाते हैं।
- धूप, दीप, नैवेद्य, अक्षत, यानी साबुत चावल, और दूर्वा, यानी दूब घास, चढ़ाते हैं।
- भोग में मोदक, लड्डू या कोई मिठाई चढ़ती है, और रोली, पान और फल भी।
- पूजा दोपहर के मध्याह्न पहर में होती है; उसके बाद व्रत कथा और आरती।
- पूजा के बाद ग़रीबों को दान देते हैं, और फल और मिठाई प्रसाद में बाँटते हैं।
- रात को चाँद की ओर नहीं देखते; भूल से दिख जाए तो स्यमंतक मणि वाला श्लोक पढ़ते हैं, जो गणेश चतुर्थी के पन्ने पर है।
सवाल जवाब
विनायक चतुर्थी 2027: पूछे जाने वाले सवाल
विनायक चतुर्थी 2027 में कब कब है?
विनायक चतुर्थी 2027 में 13 बार आती है, हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को। पहली 11 जनवरी, सोमवार को है, और आख़िरी 31 दिसंबर, शुक्रवार को। हर तारीख़ की तिथि, मध्याह्न पूजा और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।
विनायक चतुर्थी पर चाँद क्यों नहीं देखते?
मान्यता है कि इस दिन चाँद देखने से झूठा कलंक लगता है। कहते हैं कृष्ण ने इस तिथि की रात चाँद देखा था, और उन पर स्यमंतक मणि की चोरी का झूठा आरोप लगा।
भूल से चाँद दिख जाए तो क्या करें?
पंचांग स्यमंतक मणि की कथा से जुड़ा एक श्लोक पढ़ने को कहते हैं, जिसमें शेर, प्रसेन, जांबवान और मणि की बात है। पूरा श्लोक और कथा गणेश चतुर्थी के पन्ने पर है।
विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर में ही क्यों होती है?
विनायक चतुर्थी की पूजा का समय मध्याह्न ही माना गया है, यानी दिन के पाँच हिस्सों में बीच वाला। मान्यता है कि गणेश इसी पहर में जन्मे थे।
विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी में क्या फ़र्क़ है?
विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चौथ है, अमावस्या के बाद, और इसकी पूजा दोपहर में होती है। संकष्टी कृष्ण पक्ष की चौथ है, पूर्णिमा के बाद, और वह रात को चाँद को अर्घ्य देकर खुलती है।
विनायक चतुर्थी के व्रत में क्या खाएँ?
दिन में अन्न नहीं, बस फलाहार। मांस और शराब मना हैं। वराह पुराण की फाल्गुन वाली विधि में रात को एक बार खाने और तिल वाले अन्न से पारण की बात है।
विनायक चतुर्थी महीने में कितनी बार आती है?
महीने में एक बार, शुक्ल पक्ष में, यानी साल में बारह। जिस साल अधिक मास जुड़ता है, उसकी शुक्ल चतुर्थी को मुद्गल पुराण वरदा चतुर्थी कहता है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Drik Panchang: Ganesha Jayantiमाघ शुक्ल चतुर्थी, तिलकुंद और वरद चतुर्थी नाम, महाराष्ट्र और कोंकण में गणेश का जन्मदिन
- Drik Panchang: Dhundhiraja Chaturthi Vrat Kathaफाल्गुन शुक्ल चतुर्थी, मुद्गल पुराण की राजा हेमांगद वाली कथा
- Varaha Purana, Adhyaya 59 (Vedapath)फाल्गुन चतुर्थी का अविघ्नकर व्रत, नक्त और तिल वाले अन्न से पारण का श्लोक
- भारतकोश: विनायक चतुर्थीचौपड़ वाली कथा, इक्कीस दिन का व्रत, कृत्यकल्पतरु में गणपति चतुर्थी नाम
- InstaAstro: Vinayak Chaturthiचौपड़ वाली कथा, सूरज से सूरज तक का व्रत, फलाहार, अगली सुबह पारण
- BhaktiBharat: विनायक चतुर्थी, और सकट चौथ की महादेव पार्वती वाली कथापूजा की विधि, सिंदूर और पीले फूल, चाँद न देखना, वरदा चतुर्थी
- Nepal Traveller: Chauth Chandra (Chaurchan) in Madhesमिथिला का चौरचन, भादों की शुक्ल चौथ को चाँद की पूजा
- Haindavam: Nagula Chavithiकार्तिक शुक्ल चतुर्थी, आंध्र, तेलंगाना और कर्नाटक, बाँबी की पूजा, औरतों का व्रत
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।