पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मेष संक्रांति

विषु 2027

Vishu 2027

आँख खुले, तो साल की पहली नज़र पीले फूलों पर।

विषु 2027 में 15 अप्रैल, गुरुवार को है। सूर्य 14 अप्रैल, दोपहर 3:28 पर मेष राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।

विषु का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

सूर्य मेष राशि में, और उस शाम का चाँद

दो हथेलियाँ आँखों पर हैं। अँधेरा, और किसी बड़े की धीमी आवाज़: अभी नहीं।

नंगे पाँव ठंडे फ़र्श पर एक एक क़दम आगे।

फिर हथेलियाँ हटती हैं।

सामने निलविळक्कु की लौ। उसकी रोशनी में उरुळि, यानी चौड़ा धातु का बर्तन: चावल, सुनहरी ककड़ी, कटहल, सिक्के, और कणिक्कोन्ना के पीले फूलों के गुच्छे।

बीच में कृष्ण, और एक शीशा। शीशे में अपना ही चेहरा, इस भरे बर्तन के बीच।

बाहर किसी आँगन में पहला पटाखा फूटता है।

लोक में कहते हैं, आज के दिन सूरज फिर से सीधा पूरब से उगा था, एक लंबी लड़ाई के बाद।

2027 में कब

विषु 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़15 अप्रैल, गुरुवार

संक्रांतिसूर्य मेष राशि में14 अप्रैल, दोपहर 3:28

नक्षत्रपुष्यसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:56

सूर्यास्तशाम 6:47

चंद्रोदयदोपहर 1:12

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

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सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।

शुभकामना

विषु का शुभकामना कार्ड

विषु का शुभकामना कार्ड: विषु की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

विषु क्या है

विषु केरल का नया साल है, मलयालम महीने मेडम की पहली तारीख़। विषु चाँद की तिथि से नहीं चलता। उसका दिन सूरज तय करता है, जब वह मेष राशि में जाता है। केरल का नियम यह है कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को पाँच हिस्सों में बाँटो; संक्रांति पहले तीन हिस्सों में हो जाए तो विषु उसी दिन, नहीं तो अगले दिन। विषु नाम संस्कृत के विषुवम् से आया है, जिसका मतलब है बराबर, यानी वह दिन जब दिन और रात बराबर माने गए। इस दिन की सबसे बड़ी बात विषुक्कणी है: सुबह की पहली नज़र, जो पूरे साल का रंग तय करती है।

कथा

विषु की कथा

विषु के पीछे लोक में दो कथाएँ कही जाती हैं। पहली रावण की। कहते हैं, रावण का ज़ोर ऐसा था कि उसने सूरज को पूरब से सीधा उगने नहीं दिया। जब राम ने रावण को हराया, तब मेडम की पहली तारीख़ को सूरज फिर से पूरब से उगा, और दुनिया का क्रम लौट आया। यह कथा लोक की है, किसी पुराने रामायण पाठ में इसका ज़िक्र हमें नहीं मिला।

दूसरी कथा कृष्ण की है। मान्यता है कि मेडम की पहली तारीख़ को ही कृष्ण ने नरकासुर को मारा, जिसने सोलह हज़ार स्त्रियों को क़ैद कर रखा था, और उन्हें छुड़ाया। सुबह के पटाखे, कहते हैं, उसी जीत की ख़ुशी हैं और बुरी ताक़तों को दूर रखते हैं।

पर विषु की असली कथा उस पहली नज़र की है। मान्यता है कि नए साल की सुबह आँख खुलते ही जो दिखे, पूरा साल वैसा ही जाता है। इसलिए घर की सबसे बड़ी स्त्री रात को ही पूजा के कमरे में कणी सजा देती हैं। सुबह बड़े पहले उठकर दीये जलाते हैं, फिर बाक़ी सबको जगाते हैं, और सब आँखें बंद करके कणी तक लाए जाते हैं। कणी में शीशा इसलिए रखा जाता है कि देखने वाला ख़ुद को भी इस भरे बर्तन का हिस्सा देखे।

कहाँ कैसे

विषु कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • केरल के घर

    रात को पूजा के कमरे में कणी सजती है, सुबह आँखें बंद करके उसका दर्शन होता है, फिर कैनीट्टम और दोपहर का विषु सद्या।

  • गुरुवायूर

    विषु की सुबह गुरुवायूर के कृष्ण मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

  • सबरीमला

    अय्यप्पा के मंदिर में भी विषु पर दर्शन के लिए बड़ी भीड़ जुटती है।

  • केरल के आँगन और गलियाँ

    पटाखे विषु से कई दिन पहले शुरू हो जाते हैं और विषु की सुबह सबसे ज़्यादा फूटते हैं; बच्चों के लिए यह सबसे बड़ा खेल है।

रीत

विषु के दिन क्या करते हैं

  1. विषु से पहले की रात घर की सबसे बड़ी स्त्री पूजा के कमरे में उरुळि में कणी सजाती हैं।
  2. कणी में चावल, सुनहरी ककड़ी, नारियल, कटहल, पान सुपारी, सिक्के, नया कपड़ा, एक ग्रंथ, शीशा, कणिक्कोन्ना के फूल, और कृष्ण या विष्णु की मूर्ति रखी जाती है।
  3. शीशा अक्सर आरन्मुळा कण्णाडि होता है, धातु का बना केरल का पुराना शीशा।
  4. सुबह बड़े निलविळक्कु यानी पीतल का खड़ा दीया जलाते हैं और छोटों को आँखें बंद करवाकर कणी तक लाते हैं।
  5. कणी देखने के बाद कैनीट्टम होता है: बड़े छोटों के हाथ में सिक्के या पैसे रखते हैं, और लेने वाला उनके पाँव छूता है।
  6. विषुपडक्कम यानी पटाखे, ख़ासकर तड़के, नए साल के आने की ख़बर देते हैं।
  7. दोपहर को परिवार विषु सद्या खाता है, मौसम के फल और सब्ज़ियों से बने पकवानों का भोज।

रसोई

विषु का खाना

  • विषु सद्या दोपहर का बड़ा भोज, मौसम के फल और सब्ज़ियों से बने कई पकवान।
  • विषु कंजी चावल, नारियल के दूध और मसालों से बनी कंजी।
  • विषु कट्टा नए धान का आटा और नारियल का दूध, गुड़ के साथ।
  • वेप्पम्पू रसम नीम के फूलों वाला कड़वा रसम।
  • माम्बऴ पुळिश्शेरी पके आम की खट्टी करी।
  • तोरन नारियल के साथ भुनी सब्ज़ी।

सवाल जवाब

विषु 2027: पूछे जाने वाले सवाल

विषु 2027 कब है?

विषु 2027 में 15 अप्रैल, गुरुवार को है। सूर्य 14 अप्रैल, दोपहर 3:28 पर मेष राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।

विषुक्कणी में क्या क्या रखते हैं?

उरुळि में चावल, सुनहरी ककड़ी, नारियल, कटहल, पान सुपारी, सिक्के, नया कपड़ा, एक ग्रंथ, शीशा और कणिक्कोन्ना के पीले फूल, कृष्ण या विष्णु की मूर्ति के आगे, और पास में जलता निलविळक्कु।

कैनीट्टम क्या है?

कणी देखने के बाद बड़े, छोटों के हाथ में सिक्के या पैसे देते हैं। कैनीट्टम का मतलब है हाथ में पाना, और लेने वाला बड़ों के पाँव छूता है।

विषु पर कौन सा फूल रखते हैं?

कणिक्कोन्ना, अमलतास के सोने जैसे पीले फूल, जो विषु के समय ही खिलते हैं और ख़ुशहाली की निशानी माने जाते हैं।

विषु पर पटाखे क्यों फोड़ते हैं?

मान्यता है कि यह कृष्ण की नरकासुर पर जीत की ख़ुशी है और बुरी ताक़तों को दूर रखता है। पटाखे विषु से कई दिन पहले शुरू होकर विषु की सुबह सबसे ज़्यादा फूटते हैं।

विषु सद्या में क्या क्या बनता है?

दोपहर का बड़ा भोज, मौसम के फल और सब्ज़ियों से बने कई पकवान। कई घरों में विषु कंजी, विषु कट्टा, नीम के फूलों वाला वेप्पम्पू रसम, पके आम की पुळिश्शेरी और तोरन बनते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Vishu, Kerala Tourismमलयालम सौर नया साल, कणी, कैनीट्टम, पटाखे, सद्या
  2. Vishu Kani: Welcoming Prosperity and New Beginnings, Kerala Tourismउरुळि, कणी की चीज़ें, तेल का दीया, सुबह का दर्शन
  3. Kerala celebrates Vishu with traditional fervour, Onmanoramaकणी, सिक्के, दोपहर का सद्या, गुरुवायूर और सबरीमला की भीड़
  4. Kerala Vishu, Kerala Folkloreकौन सजाता है, आँख बंद करके दर्शन, कैनीट्टम, विषुपडक्कम, रावण और नरकासुर की कथाएँ, विषुवम्
  5. Vishu, Wikipedia (केवल स्रोत ढूँढने के लिए)रावण और सूरज की लोक कथा, कंजी और विषु कट्टा, सद्या के पकवान
  6. Mesha Sankranti, Drik Panchangदिन के पाँच हिस्सों वाला केरल नियम

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।