उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
नव संवत्सर 2084
Hindu New Year, Vikram Samvat 2084 2027
पंचांग का पहला पन्ना, और पूरे साल की गिनती।
नव संवत्सर 2084 (हिंदू नव वर्ष) 2027 में 7 अप्रैल, बुधवार को है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 7 अप्रैल, सुबह 5:21 से 8 अप्रैल, सुबह 4:29 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
स्याही की ताज़ा गंध। एक नया पंचांग पहली बार खुल रहा है।
पन्ने अभी एक दूसरे से चिपके हैं। उँगली उन्हें धीरे से अलग करती है।
मंदिर के आँगन में दरी बिछी है। लोग घेरकर टिके हैं, कुछ पीछे खड़े भी।
पुजारी जी पहला पन्ना पढ़ते हैं: इस साल का राजा कौन ग्रह है, मंत्री कौन।
एक किसान बस एक बात सुनने को रुका है। बादल कैसे रहेंगे।
पीछे से एक बच्चा पूछता है, साल का भी नाम होता है?
होता है। साठ नाम हैं, जो घूम घूमकर लौटते हैं। जैसे एक ही कथा, हर बार किसी नए मुँह से।
2027 में कब
नव संवत्सर 2084 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़7 अप्रैल, बुधवार
तिथिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा7 अप्रैल, सुबह 5:21 से 8 अप्रैल, सुबह 4:29 तक
नक्षत्ररेवतीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:05
सूर्यास्तशाम 6:42
चंद्रोदयसुबह 5:55
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
फ़ोन पर Google का पन्ना ठीक से न खुले, तो यही बटन कंप्यूटर पर दबाइए। जुड़ते ही यह फ़ोन में भी दिखेगा।
जोड़ते समय “Remove Alerts” बंद कर दें (टिक हटा दें), तो बड़े त्योहारों की सुबह 7 बजे याद भी आएगी कि अपनों को कार्ड भेजना है।
- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल · सिर्फ़ यह दिन
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
शुभकामना
नव संवत्सर 2084 का शुभकामना कार्ड

अपनों को नए साल की शुभकामनाएँ भेजिए, इस बरस की तारीख़ और उस दिन की बात के साथ। कार्ड पर QR कोड है, जिससे तारीख़, कथा और मुहूर्त भी साथ पहुँचते हैं।
WhatsApp पर भेजेंकार्ड डाउनलोड करें
फ़ोन पर बटन दबाते ही कार्ड सीधे WhatsApp में चला जाता है, बधाई और लिंक के साथ।
पहचान
नव संवत्सर 2084 क्या है
नव संवत्सर हिंदू पंचांग का नया साल है, विक्रम संवत का पहला दिन। यह चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आता है, यानी अमावस्या के बाद की पहली तिथि को। इस बार विक्रम संवत 2083 पूरा होकर 2084 शुरू होता है। उत्तर भारत में इसे हिंदू नववर्ष कहते हैं, और इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू होती है। संवत्सर का सीधा मतलब है साल, पर पंचांग में हर संवत्सर का अपना एक नाम भी होता है, साठ नामों के एक चक्र में से। इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र, तेलंगाना और कर्नाटक में उगादी, और कश्मीर में नवरेह आता है, हर जगह अपने ढंग से।
कथा
नव संवत्सर 2084 की कथा
पहले सबसे पुरानी बात। मान्यता है, और इसे ब्रह्म पुराण से जोड़ा जाता है, कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचनी शुरू की थी। कहते हैं यह ब्रह्मा जी का भी पहला दिन है, और यहीं से दिन, हफ़्ते, महीने और बरस गिने जाने लगे। इसलिए यह दिन किसी एक घर या एक राज्य का नहीं, पूरे समय का जन्मदिन माना गया।
फिर संवत का नाम। लोक में कथा है कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों को हराया, और उसी जीत की याद में यह संवत चला। जैन परंपरा की कालकाचार्य कथा में भी विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य से जोड़ी गई है। यह संवत ईसवी सन से लगभग सत्तावन बरस आगे चलता है। पर असली विक्रमादित्य कौन थे, इस पर इतिहास एक राय का नहीं है। पुराने शिलालेखों में इसी तरह की गिनती कृत संवत और मालव संवत के नाम से मिलती है, और कई जानकार उन्हें विक्रम संवत का ही पुराना रूप मानते हैं।
अब संवत्सर। पुराने ज्योतिष में एक संवत्सर उतना समय है जितने में बृहस्पति ग्रह एक राशि पार करता है। सूर्य सिद्धांत इसे लगभग तीन सौ इकसठ दिन का बताता है, यानी सूरज वाले साल से थोड़ा छोटा। ऐसे साठ संवत्सरों का एक चक्र है, और हर एक का नाम है: पहला प्रभव, दूसरा विभव, तीसरा शुक्ल, चौथा प्रमोदूत। चौदहवें का नाम ही विक्रम है। साठ पूरे हुए, तो फिर प्रभव से शुरू।
पर इसमें एक पेच है। बृहस्पति वाला साल छोटा है, इसलिए पुराने हिसाब में लगभग पचासी बरस में एक नाम छोड़ दिया जाता था, ताकि गिनती सूरज के साथ चलती रहे। दक्षिण में यह छोड़ना दसवीं सदी के आसपास बंद हो गया। इसीलिए आज उत्तर और दक्षिण के पंचांग एक ही साल को अलग अलग नाम देते हैं। इस बार कौन सा नाम शुरू हो रहा है, यह अपने इलाक़े के पंचांग में ही देखिए, वही आपके घर का हिसाब है।
कहाँ कैसे
नव संवत्सर 2084 कहाँ कैसे मनाया जाता है
उत्तर भारत
यह दिन हिंदू नववर्ष कहलाता है और चैत्र नवरात्रि के पहले दिन के साथ आता है। घरों और मंदिरों में नव संवत्सर की पूजा होती है और नए साल का फल सुना जाता है।
महाराष्ट्र और गोवा
महाराष्ट्र में घरों के बाहर गुड़ी उठती है, और गोवा के कोंकणी हिंदू इस दिन को संवत्सर पाडवो कहते हैं।
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक
यहाँ यह उगादी या युगादि है। छह स्वादों वाली पचड़ी खाई जाती है, और शाम को पंचांग श्रवणम होता है।
कश्मीर
कश्मीरी पंडितों का नवरेह इसी दिन आता है, उनके अपने सप्तर्षि संवत का पहला दिन।
गुजरात
यहाँ विक्रम संवत का नया साल चैत्र में नहीं, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से गिना जाता है। एक ही संवत, दो जगह, दो शुरुआतें।
रीत
नव संवत्सर 2084 के दिन क्या करते हैं
- नए साल के पहले दिन नव संवत्सर की पूजा होती है, जिसमें संवत्सर के स्वामी का आवाहन करके उनकी पूजा की जाती है।
- नया पंचांग घर आता है, क्योंकि आज से तिथियाँ, व्रत और त्योहार उसी के पन्नों से गिने जाएँगे।
- पंचांग श्रवण होता है: पंडित जी नए पंचांग से पूरे साल का फल पढ़कर सुनाते हैं।
- उस फल में ग्रहों का एक मंत्रिमंडल होता है: साल का राजा, मंत्री, और मेघेश यानी बादलों का स्वामी, जिससे बारिश का अनुमान लगाया जाता है।
- इसी दिन घटस्थापना के साथ चैत्र नवरात्रि शुरू होती है।
- महाराष्ट्र में गुड़ी, दक्षिण में छह स्वादों वाली पचड़ी और कश्मीर में सुबह का थाल, हर इलाक़ा इस दिन को अपनी रीत से खोलता है।
सवाल जवाब
नव संवत्सर 2084 2027: पूछे जाने वाले सवाल
हिंदू नव वर्ष 2027 कब है?
नव संवत्सर 2084 (हिंदू नव वर्ष) 2027 में 7 अप्रैल, बुधवार को है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 7 अप्रैल, सुबह 5:21 से 8 अप्रैल, सुबह 4:29 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
संवत्सर का मतलब क्या है?
संवत्सर का मतलब है साल। पुराने ज्योतिष में यह वह समय है जितने में बृहस्पति एक राशि पार करता है, और हर संवत्सर का अपना एक नाम होता है।
विक्रम संवत किसने शुरू किया?
परंपरा इसे उज्जैन के राजा विक्रमादित्य से जोड़ती है, जिन्होंने शकों को हराया था; जैन कालकाचार्य कथा भी यही कहती है। पर विक्रमादित्य असल में कौन थे, इस पर इतिहास में एक राय नहीं है।
साठ संवत्सर क्या हैं?
पंचांग में साठ नामों का एक चक्र है, प्रभव से शुरू होकर। हर साल एक नाम आता है, और साठ बरस बाद वही नाम फिर लौटता है।
उत्तर और दक्षिण के पंचांग में संवत्सर का नाम अलग क्यों होता है?
बृहस्पति वाला साल सूरज वाले साल से थोड़ा छोटा है, इसलिए पुराने हिसाब में कभी कभी एक नाम छोड़ा जाता था। दक्षिण में यह छोड़ना बहुत पहले बंद हो गया, इसलिए दोनों के नाम अब मेल नहीं खाते।
पंचांग श्रवण क्या होता है?
नए साल के दिन नए पंचांग को पढ़कर सुनाना। इसमें साल के राजा और मंत्री ग्रह, बारिश का अनुमान और साल का फल बताया जाता है।
विक्रम संवत और ईसवी सन में कितना फ़र्क़ है?
विक्रम संवत ईसवी सन से लगभग सत्तावन बरस आगे चलता है। चैत्र से साल बदलता है, इसलिए यह फ़र्क़ साल के कुछ महीनों में छप्पन भी दिखता है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Samvatsara, Wikipediaसाठ संवत्सरों के नाम, बृहस्पति का साल, उत्तर और दक्षिण का फ़र्क़
- हिंदू नववर्ष, विक्रम संवत 2083, आज तकसाल का राजा, मंत्री, मेघेश और संवत्सर का फल
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और विक्रम संवत, आज तकब्रह्म पुराण की मान्यता, कालकाचार्य कथा, सत्तावन बरस का फ़र्क़
- विक्रम संवत, भारतकोशकृत और मालव संवत, गुजरात में कार्तिक से साल, संवत्सर पूजा
- विक्रम संवत, शुभ पंचांगउज्जैन के विक्रमादित्य और शकों की कथा, इतिहास पर मतभेद
- New Year in Spring, The Goanब्रह्म पुराण में सृष्टि की शुरुआत
- Ugadi, Wikipediaपंचांग श्रवण में क्या पढ़ा जाता है
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।