उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मेष संक्रांति
बोहाग बिहू 2027
Bohag Bihu 2027
पहले उनका बिहू जो हल खींचते हैं, फिर आदमी का।
बोहाग बिहू 2027 में 15 अप्रैल, गुरुवार को है। सूर्य 14 अप्रैल, दोपहर 3:28 पर मेष राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
नदी के घाट पर पानी गँदला हो रहा है। गायें, बैल, भैंसें, सब पानी में।
लड़के उनके सिर और सींगों पर उड़द और हल्दी का लेप मलते हैं। असम में इसे माह हालोधि कहते हैं।
दीघलती और माखियती के पत्तों से हल्की हल्की थपकी, ताकि मक्खियाँ भाग जाएँ।
बाँस की छड़ी पर लौकी और बैंगन के टुकड़े बँधे हैं।
कोई गाता है कि लौकी खाओ, बैंगन खाओ, और साल दर साल बढ़ते जाओ।
शाम को नई रस्सियाँ, खाने को पीठा, और आँगन में अलाव का धुआँ, कीड़ों को भगाने के लिए।
कल आदमी का बिहू है। आज पहले उनका, जो साल भर हल खींचते हैं।
2027 में कब
बोहाग बिहू 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़15 अप्रैल, गुरुवार
संक्रांतिसूर्य मेष राशि में14 अप्रैल, दोपहर 3:28
नक्षत्रपुष्यसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:56
सूर्यास्तशाम 6:47
चंद्रोदयदोपहर 1:12
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
शुभकामना
बोहाग बिहू का शुभकामना कार्ड

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पहचान
बोहाग बिहू क्या है
बोहाग बिहू, जिसे रोंगाली बिहू भी कहते हैं, असम का नया साल है। रोंग का मतलब है ख़ुशी, यानी ख़ुशी वाला बिहू। इसका दिन चाँद नहीं, सूरज तय करता है: चोत महीने का आख़िरी दिन, जब सूरज मेष में जाता है, गोरु बिहू होता है, और अगले दिन, बोहाग की पहली तारीख़ को, मानुह बिहू। फिर यह कम से कम सात दिन चलता है, और हर इलाक़े में दिनों के नाम थोड़े अलग हैं। यह असम के तीन बिहू में सबसे बड़ा है; बाक़ी दो हैं काति यानी कोंगाली बिहू, और माघ यानी भोगाली बिहू। खेत के हिसाब से यह आहु धान बोने के बाद और शालि धान रोपने से पहले आता है।
कथा
बोहाग बिहू की कथा
बिहू किसी एक देवता की कथा नहीं, यह खेत, मौसम और घर का त्योहार है। फिर भी असम में एक लोक कथा बहुत कही जाती है, बोरदोइसिला की। कहते हैं, बोरदोइसिला असम की बेटी है, जिसका ब्याह बहुत दूर हुआ। हर बसंत वह अपनी माँ से मिलने मायके आती है। साल की पहली आँधी बताती है कि बोरदोइसिला आ गई। और बोहाग के आख़िर में जो आँधी उठती है, वह उसके लौटने की होती है।
बिहू नाम कहाँ से आया, इस पर दो बातें कही जाती हैं, और दोनों में से कोई पक्की नहीं। एक बात यह कि यह दिमासा भाषा के शब्द बिशु से आया, जिसका मतलब है देवता से अच्छी फ़सल माँगना। दूसरी यह कि संस्कृत के विषुवन् से, जो अच्छी फ़सल के लिए अग्नि पूजा का दिन था, और जिसका ज़िक्र अथर्ववेद और ऐतरेय ब्राह्मण में मिलता है।
बिहू के दिनों की गिनती ऐसे चलती है। पहले दिन गोरु बिहू, गाय बैलों का, क्योंकि खेती उन्हीं के कंधों पर है। दूसरे दिन मानुह बिहू, आदमी का: सुबह नहाना, नए कपड़े, और बड़ों का आशीर्वाद। तीसरे दिन कुटुम बिहू, जब लोग रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाते हैं, मिठाई और भेंट लेते देते हैं। और आख़िर में सेरा बिहू, जब बिहू विदा होता है।
कहाँ कैसे
बोहाग बिहू कहाँ कैसे मनाया जाता है
गाँव के घाट और गोठ
गोरु बिहू की सुबह मवेशी नदी या पोखर में नहलाए जाते हैं। उससे पहले की शाम आदमी गोठ को नया करते हैं और तारा के पत्तों की नई रस्सियाँ बटते हैं, और औरतें घर धोकर पीठा और लारु बनाती हैं।
नामघर और गाँव के आँगन
हुसोरी की टोली गाँव के नामघर से निकलती है और ढोल, ताल के साथ घर घर जाती है। घर के फाटक पर, जिसे पदुलिमुख कहते हैं, वह अपने आने की ख़बर देती है; जिस घर में शोक या बीमारी हो, उसे वह फाटक से ही आशीष देकर आगे बढ़ जाती है।
गुवाहाटी
शहर में सौ के आसपास बिहुतलियाँ यानी बिहू के मंडप लगते हैं। गोरु बिहू के दिन जजेस फ़ील्ड में खुले मैदान का मुकोली बिहू होता है, जिसमें बिहू नाच और हुसोरी की होड़ होती है।
खुले मैदान और पुराने पेड़
लड़कियाँ खेतों में नाचती हैं, जिसे मुकोली बिहू कहते हैं। जेंग बिहू सिर्फ़ औरतें नाचती हैं, चारों ओर लकड़ियाँ गाड़कर, और गोसोर तोलोर बिहू पेड़ के नीचे होता है।
रीत
बोहाग बिहू के दिन क्या करते हैं
- गोरु बिहू की सुबह गाय, बैल और भैंसें माह हालोधि का लेप लगाकर नदी में नहलाई जाती हैं।
- दीघलती, माखियती और तोंगलती के पत्तों से उन्हें हल्की थपकी दी जाती है, ताकि मक्खियाँ और बीमारी दूर रहें, और उन्हें लौकी बैंगन खिलाए जाते हैं।
- शाम को मवेशियों को नई रस्सियाँ पहनाई जाती हैं, पीठा खिलाया जाता है, और जाक यानी अलाव जलाया जाता है।
- मानुह बिहू पर लोग सुबह जल्दी नहाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, और छोटे बड़ों के पास आशीर्वाद लेने जाते हैं।
- इस दिन हाथ से बुना गामोसा भेंट दिया जाता है, जिसे बिहुवान भी कहते हैं; यह प्यार और आदर की निशानी है।
- हुसोरी की टोली आती है तो घर वाले सराई पर तामुल पान, यानी सुपारी और पान, रखकर उसका स्वागत करते हैं।
- बिहू में ढोल और पेपा बजता है; पेपा भैंस के सींग से बना बाजा है।
- औरतें मूगा की मेखेला चादर पहनती हैं और बालों में कोपोउ फूल लगाती हैं।
रसोई
बोहाग बिहू का खाना
- तिल पीठा चावल के आटे में तिल और गुड़ भरकर बना पीठा।
- नारिकोल पीठा नारियल वाला पीठा।
- तेल ओत दिया पीठा तेल में तला पीठा।
- चुंगा पीठा खोखले बाँस में पकाया गया पीठा।
- चिरा दोई चिउड़ा और दही।
- लारु नारियल का नारिकोल लारु, काले तिल का तिलोर लारु, और सूजी का लारु।
सवाल जवाब
बोहाग बिहू 2027: पूछे जाने वाले सवाल
बोहाग बिहू 2027 कब है?
बोहाग बिहू 2027 में 15 अप्रैल, गुरुवार को है। सूर्य 14 अप्रैल, दोपहर 3:28 पर मेष राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
रोंगाली बिहू कितने दिन का होता है?
कम से कम सात दिन का। गोरु बिहू, मानुह बिहू और कुटुम बिहू से शुरू होकर यह सेरा बिहू पर विदा होता है, और बीच के दिनों के नाम हर इलाक़े में अलग हैं।
गोरु बिहू क्या है?
बिहू का गाय बैलों वाला दिन, चोत महीने का आख़िरी दिन। मवेशियों को माह हालोधि लगाकर नदी में नहलाया जाता है, पत्तों से मक्खियाँ भगाई जाती हैं, और उन्हें लौकी, बैंगन और पीठा खिलाया जाता है।
बिहू पर गामोसा क्यों दिया जाता है?
गामोसा हाथ से बुना कपड़ा है, जिस पर लाल बेल बूटे होते हैं। मानुह बिहू पर छोटे इसे बड़ों को आदर से देते हैं, और यह प्यार और इज़्ज़त की निशानी माना जाता है।
हुसोरी क्या होता है?
बिहू गाने वालों की टोली, जो नामघर से निकलकर घर घर जाती है, ढोल और ताल के साथ गाती नाचती है, और घर को नए साल का आशीष देती है।
असम के तीन बिहू कौन से हैं?
बोहाग यानी रोंगाली बिहू, काति यानी कोंगाली बिहू, और माघ यानी भोगाली बिहू। तीनों खेती के अलग अलग समय से जुड़े हैं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Assam's Rongali Bihu: the festival of happiness, The Sentinelगोरु, मानुह, कुटुम बिहू, गामोसा, हुसोरी, नाच के रूप, पीठा और लारु
- Rongali Bihu festivities begin today, The Assam Tribuneगोरु बिहू की सुबह, गायों का गीत, गुवाहाटी का मुकोली बिहू और बिहुतलियाँ
- Rongali Bihu: The Cultural Facet of Assamese Community, Abhijna e-Museumबिहू नाम की दो बातें, बोरदोइसिला, तीन बिहू, हुसोरी, पदुलिमुख, पोशाक, ढोल पेपा, पकवान
- Mesha Sankranti, Drik Panchangमेष संक्रांति पर बिहू
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।