उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मेष संक्रांति
पोइला बोइशाख 2027
Poila Boishakh 2027
बोइशाख का पहला दिन। नया खाता, पुराना रिश्ता।
पोइला बोइशाख 2027 में 15 अप्रैल, गुरुवार को है। सूर्य 14 अप्रैल, दोपहर 3:28 पर मेष राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
सिंदूर की गंध पहले आती है, फिर धूप की।
दुकान के गल्ले पर एक नया, मोटा, जिल्द वाला खाता रखा है।
उसके पास नई पंजिका, एक रुपये का सिक्का, कुछ फूल।
रात अभी ढली नहीं, पर कालीघाट के बाहर लोग खाते लेकर खड़े हैं।
शाम को पुराने ग्राहक आएँगे। उनके लिए मिठाई है, और दीवार पर टाँगने को नया बांग्ला कैलेंडर।
पुराना हिसाब चैत के आख़िरी दिन बंद हो गया।
आज खाते का पहला पन्ना ख़ाली है। हर कथा भी कभी न कभी ऐसे ही एक ख़ाली पन्ने से शुरू हुई थी।
2027 में कब
पोइला बोइशाख 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़15 अप्रैल, गुरुवार
संक्रांतिसूर्य मेष राशि में14 अप्रैल, दोपहर 3:28
नक्षत्रपुष्यसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:56
सूर्यास्तशाम 6:47
चंद्रोदयदोपहर 1:12
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
पोइला बोइशाख क्या है
पोइला बोइशाख यानी बोइशाख महीने का पहला दिन, बांग्ला साल की शुरुआत। इसे नबो बर्षो भी कहते हैं, यानी नया साल। बांग्ला साल का हिसाब भी सूरज का है: सूरज मेष राशि में जाता है तो चैत ख़त्म होता है और बोइशाख शुरू। पश्चिम बंगाल के नियम में संक्रांति सूर्योदय और आधी रात के बीच हो तो नया साल अगले दिन से गिना जाता है। बांग्लादेश में बांग्ला अकादमी के सुधार के बाद यह दिन अंग्रेज़ी कैलेंडर की एक तय तारीख़ पर बाँध दिया गया है। बंगाल और बांग्लादेश के बंगाली, हिंदू और मुसलमान दोनों, इसे अपना नया साल मानते हैं।
कथा
पोइला बोइशाख की कथा
बांग्ला साल की कथा खेत और लगान से शुरू होती है। मुग़ल राज में लगान हिजरी कैलेंडर से लिया जाता था, जो चाँद से चलता है। चाँद का साल फ़सल के साल से मेल नहीं खाता था, इसलिए किसान को कई बार फ़सल आने से पहले ही लगान भरना पड़ता। बादशाह अकबर ने इसे सुधारने का हुक्म दिया, और विद्वान ज्योतिषी फ़तेहउल्लाह शीराज़ी ने चाँद के हिजरी साल और सूरज के साल को मिलाकर नया हिसाब बनाया। इसे फ़सली साल कहा गया, इसे अकबर के गद्दी पर आने के बरस 1556 से गिना गया, और आगे चलकर यही बंगाब्द यानी बांग्ला साल बना।
पर सब यही नहीं मानते। कुछ विद्वान इसकी जड़ गौड़ के राजा शशांक तक ले जाते हैं, और कुछ इसे सुल्तान हुसैन शाह से जोड़ते हैं। बात पक्की नहीं। इतना सब मानते हैं कि यह साल लगान और फ़सल से बँधा था।
चैत के आख़िरी दिन तक लगान और बकाया चुका दिया जाता। बोइशाख के पहले दिन ज़मींदार अपने रैयतों का मुँह मीठा कराते। व्यापारी पुराना खाता बंद करते और नया हालखाता खोलते, यानी हिसाब की नई बही, ग्राहकों को मिठाई देते और लेन देन फिर से जोड़ते। सुनार और किराने वाले आज भी यह रीत निभाते हैं।
समय के साथ यह हिसाब का दिन पूरे बंगाल का त्योहार बन गया। ढाका में रमना के बरगद के नीचे सुबह सुबह छायानट के कलाकार गाकर बोइशाख का स्वागत करते हैं। और 1989 से ढाका विश्वविद्यालय के ललित कला वाले छात्र मंगल शोभायात्रा निकालते हैं, जिसे यूनेस्को ने मान्यता दी है। सन 2025 से विश्वविद्यालय ने इसका पुराना नाम लौटा दिया है: बर्षबरन आनंद शोभायात्रा।
कहाँ कैसे
पोइला बोइशाख कहाँ कैसे मनाया जाता है
कोलकाता
लोग कालीघाट और दक्षिणेश्वर के काली मंदिरों में नए साल की प्रार्थना करने जुटते हैं। कालीघाट में व्यापारियों के खातों की पूजा तड़के से देर रात तक चलती है।
पश्चिम बंगाल के बाज़ार
चैत की महीने भर की सेल के बाद दुकानदार नया हालखाता खोलते हैं। शाम को ख़ास ग्राहकों को बुलाकर मिठाई, छोटे उपहार और नया बांग्ला कैलेंडर दिया जाता है।
ढाका
रमना बटमूल यानी रमना के बरगद तले सुबह के गीत, और ढाका विश्वविद्यालय से निकलने वाली मंगल शोभायात्रा।
बांग्लादेश के गाँव
बोइशाखी मेले लगते हैं, जिनमें जात्रा, पाला गान, कविगान, कठपुतली और नाव दौड़ होती है। राजशाही में गंभीरा और चटगाँव में बली यानी कुश्ती होती है।
चटगाँव के पहाड़ी इलाक़े
यहाँ के आदिवासी नया साल अपने नाम से मानते हैं: त्रिपुरा लोग बोइसु, मारमा लोग सांग्राई, और चकमा व तंचंग्या लोग बिजु। मिलाकर इसे बैसाबी कहते हैं।
रीत
पोइला बोइशाख के दिन क्या करते हैं
- घर की सफ़ाई होती है, लोग सुबह जल्दी नहाते हैं और अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनते हैं।
- दुकानों में लक्ष्मी और गणेश की पूजा होती है।
- नए खाते के साथ पंजिका, सिंदूर, एक रुपये का सिक्का, भांग के पत्ते और फूल चढ़ाए जाते हैं।
- बहुत से व्यापारी अपना नया खाता कालीघाट जैसे मंदिरों में पुजवाकर लाते हैं।
- शाम को ग्राहकों को बुलाकर मिठाई खिलाई जाती है और पुराना रिश्ता नए खाते में आगे बढ़ता है।
- लोग रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के घर जाते हैं, और मेहमानों के लिए ख़ास खाना बनता है।
- मेलों में खेती की चीज़ें, हाथ के बने सामान, खिलौने और मिठाइयाँ बिकती हैं।
रसोई
पोइला बोइशाख का खाना
- मिठाई हालखाता की शाम ग्राहकों को दी जाने वाली मिठाई।
- बताशा, कदमा और मुड़की मोआ मेलों और घरों की पुरानी चीनी और गुड़ की मिठाइयाँ।
- पीठा चावल से बने बंगाली पकवान।
सवाल जवाब
पोइला बोइशाख 2027: पूछे जाने वाले सवाल
पोइला बोइशाख 2027 कब है?
पोइला बोइशाख 2027 में 15 अप्रैल, गुरुवार को है। सूर्य 14 अप्रैल, दोपहर 3:28 पर मेष राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
हालखाता क्या होता है?
हिसाब की नई बही। पोइला बोइशाख पर व्यापारी पुराना खाता बंद करके नया हालखाता खोलते हैं, उसकी पूजा करते हैं और ग्राहकों को मिठाई देकर लेन देन फिर से जोड़ते हैं।
बांग्ला कैलेंडर किसने शुरू किया?
ज़्यादातर इतिहासकार इसे बादशाह अकबर से जोड़ते हैं, जिनके कहने पर फ़तेहउल्लाह शीराज़ी ने फ़सली साल बनाया। कुछ विद्वान इसे गौड़ के राजा शशांक या सुल्तान हुसैन शाह से जोड़ते हैं, इसलिए बात पूरी तरह पक्की नहीं।
पोइला बोइशाख पर क्या कहकर बधाई देते हैं?
शुभो नोबोबोर्षो, यानी नया साल शुभ हो।
पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में पोइला बोइशाख का दिन अलग क्यों हो सकता है?
पश्चिम बंगाल में दिन मेष संक्रांति के समय से तय होता है, जबकि बांग्लादेश ने अपने कैलेंडर को अंग्रेज़ी कैलेंडर की तय तारीख़ों से बाँध दिया है। इसलिए दोनों जगह यह कभी एक दिन, और कभी अलग दिन पड़ सकता है।
मंगल शोभायात्रा क्या है?
ढाका विश्वविद्यालय के ललित कला वाले छात्रों की निकाली हुई नए साल की यात्रा, जो 1989 से निकल रही है और जिसे यूनेस्को ने मान्यता दी है। सन 2025 से इसे फिर से इसके पहले नाम, बर्षबरन आनंद शोभायात्रा, से निकाला जाता है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Pahela Baishakh, Banglapediaअकबर और फ़तेहउल्लाह शीराज़ी, फ़सली साल, हालखाता, मेले, रमना
- Pahela Baishakh: How Bangla new year shaped Bangalee identity, The Daily Starशशांक और हुसैन शाह वाली बातें, बांग्ला अकादमी का सुधार, मंगल शोभायात्रा, बैसाबी, मिठाइयाँ
- Poila Boishakh celebrated across Bengal, News On AIRकालीघाट, दक्षिणेश्वर, हालखाता और मिठाई
- A new turn, Business Standardखाते की पूजा, लक्ष्मी गणेश, पंजिका, सिंदूर, सिक्का, भांग के पत्ते, कैलेंडर
- Mesha Sankranti, Drik Panchangआधी रात वाला बंगाली नियम, नबो बर्षो
- Poila Baisakh 2017: Subho Noboborsho, IBTimesशुभो नोबोबोर्षो की बधाई (खोज के नतीजे से)
- Mangal Shobhajatra renamed, a return to roots, The Daily Starसन 2025 से बर्षबरन आनंद शोभायात्रा नाम
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।