उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · चैत्र शुक्ल त्रयोदशी
महावीर जयंती 2027
Mahavir Jayanti 2027
एक रात, एक रानी, और एक के बाद एक चौदह सपने।
महावीर जयंती 2027 में 19 अप्रैल, सोमवार को है। चैत्र शुक्ल त्रयोदशी तिथि 18 अप्रैल, सुबह 7:43 से 19 अप्रैल, सुबह 6:09 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
लकड़ी के पहिए गली के पत्थरों पर धीरे धीरे घूमते हैं।
रथ पर भगवान महावीर की प्रतिमा है। आगे आगे लोग स्तवन गाते चलते हैं, यानी तीर्थंकर की स्तुति के गीत।
सुबह ही प्रतिमा का अभिषेक हुआ था। कंधे पर अब भी पानी की एक बूँद चमक रही है।
रास्ते के किनारे कोई कपड़े बाँट रहा है, कोई अनाज।
एक बच्ची पूछती है, आज इनका जन्मदिन है?
दादी कहती हैं, जन्म कल्याणक। ऐसा दिन, जो सबके भले के लिए आया।
फिर धीरे से जोड़ती हैं: और उससे पहले, एक रानी ने एक रात चौदह सपने देखे थे।
2027 में कब
महावीर जयंती 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़19 अप्रैल, सोमवार
तिथिचैत्र शुक्ल त्रयोदशी18 अप्रैल, सुबह 7:43 से 19 अप्रैल, सुबह 6:09 तक
नक्षत्रहस्तसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:52
सूर्यास्तशाम 6:49
चंद्रोदयशाम 5:25
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
महावीर जयंती क्या है
महावीर जयंती, जिसे जैन महावीर जन्म कल्याणक कहते हैं, चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म का दिन है। यह दिन चैत्र के उजाले पक्ष, यानी शुक्ल पक्ष, की तेरहवीं तिथि को आता है, यानी चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को, जिसे श्वेतांबर पंचांग में चैत्र सुद तेरस कहते हैं। श्वेतांबर और दिगंबर, दोनों परंपराएँ जन्म का दिन इसी तिथि को रखती हैं। जैन मानते हैं कि हर तीर्थंकर के जीवन में पाँच कल्याणक होते हैं, यानी पाँच मंगल घड़ियाँ, और जन्म उनमें दूसरा है। इस दिन देश भर के जैन मंदिरों में अभिषेक, पूजा और रथ यात्रा होती है।
कथा
महावीर जयंती की कथा
जैन परंपरा में कथा है कि वैशाली के पास कुंडग्राम में नाय कुल के राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला रहते थे। एक रात रानी ने सपने देखे, एक के बाद एक। श्वेतांबर परंपरा चौदह सपने गिनती है, दिगंबर परंपरा सोलह। पहले एक हाथी, फिर बैल, फिर सिंह, फिर देवी लक्ष्मी, फिर फूलों की माला, पूरा चाँद, सूरज, झंडा, सोने का कलश, कमलों से भरा सरोवर, समुद्र, देवताओं का विमान, रत्नों का ढेर, और आख़िर में बिना धुएँ की आग। सोलह गिनने वालों की सूची थोड़ी अलग है, और उसमें मछलियों का जोड़ा और एक ऊँचा सिंहासन भी आते हैं।
सुबह राजा ने विद्वानों को दरबार में बुलाया और पूछा, इन सपनों का अर्थ क्या है? जैन परंपरा इनके अर्थ यूँ बताती है: सिंह कहता है कि बालक निडर होगा; सूरज कहता है कि उसका ज्ञान भ्रम का अँधेरा मिटाएगा; लक्ष्मी कहती है कि वह तीर्थंकर होगा; और बिना धुएँ की आग कहती है कि वह अपने कर्म जला देगा। यानी रानी की कोख में एक तीर्थंकर आया था। यही पहला कल्याणक है, गर्भ में आना, जिसे च्यवन कल्याणक भी कहते हैं।
फिर चैत्र सुदी तेरस को बालक का जन्म हुआ, और उसका नाम वर्धमान रखा गया। जैन मान्यता है कि देवताओं के राजा इंद्र बालक को सुमेरु पर्वत पर ले गए और वहाँ उसका अभिषेक किया। आज भी इस दिन मंदिरों में प्रतिमा का अभिषेक होता है, फिर पूजा, फिर रथ यात्रा।
आगे की कथा बाक़ी तीन कल्याणकों की है। वर्धमान ने घर और राजपाट छोड़कर दीक्षा ली, यानी साधु का जीवन; यह तीसरा कल्याणक है। बरसों के तप के बाद ऋजुवालिका नदी के पास उन्हें केवल ज्ञान हुआ, यानी पूरा, बिना किसी परदे का ज्ञान; यह चौथा है। और आख़िर में पावापुरी में उनका निर्वाण हुआ, देह से पूरी मुक्ति; यह पाँचवाँ है।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में महावीर जयंती
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
पउमचरिय
प्राकृत, जैन परंपरा · Paumachariya
विमलसूरि का पउमचरिय, प्राकृत में लिखी सबसे पुरानी जैन रामकथा, अपनी कथा भगवान महावीर के समय से जोड़कर शुरू करता है। जैन ग्रंथों पर लिखे अध्ययन बताते हैं कि मगध के राजा श्रेणिक के मन में लोक में चल रही रामकथा को लेकर शंका उठी: राक्षसों में सबसे बलवान को वानर कैसे हरा सकते हैं? तब वे महावीर के शिष्यों में सबसे बड़े, गौतम, के पास गए, और गौतम ने उन्हें राम की यह कथा सुनाई। जैन परंपरा यह भी कहती है कि यह रामकथा पहले ख़ुद भगवान महावीर ने कही थी।
कहाँ कैसे
महावीर जयंती: कहाँ और कैसे
कुंडग्राम, वैशाली के पास, बिहार
जैन परंपरा भगवान महावीर का जन्म यहीं मानती है। ठीक जगह को लेकर मत अलग हैं: श्वेतांबर परंपरा बिहार के क्षत्रियकुंड को जन्म की जगह मानती है, और कुछ लोग नालंदा ज़िले के कुंडलपुर को।
जैन मंदिर
सुबह प्रतिमा का अभिषेक होता है और फिर पूजा। मंदिर फूलों, झंडों और दीयों से सजते हैं।
शहरों और क़स्बों की गलियाँ
भगवान महावीर की प्रतिमा रथ पर रखकर रथ यात्रा निकलती है, और रास्ते भर स्तवन गाए जाते हैं।
धर्मसभाएँ
साधु और साध्वियाँ प्रवचन देते हैं: अहिंसा, यानी किसी जीव को दुख न देना; अनेकांत, यानी सच को कई ओर से देखना; और अपरिग्रह, यानी ज़रूरत से ज़्यादा न जोड़ना।
ज़रूरतमंदों के बीच
इस दिन कपड़े, पैसे, खाना और ज़रूरत की चीज़ें बाँटने की रीत है। कई शहरों में अहिंसा का संदेश लेकर रैलियाँ भी निकलती हैं।
रीत
महावीर जयंती के दिन क्या करते हैं
- सुबह मंदिर में भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक होता है, यानी जल से स्नान।
- फिर पूजा होती है, और लोग मंदिर जाकर प्रार्थना करते हैं।
- प्रतिमा को रथ पर रखकर रथ यात्रा निकलती है, और साथ चलते लोग स्तवन गाते हैं।
- मंदिर फूलों, झंडों और दीयों से सजाए जाते हैं।
- साधु और साध्वियाँ अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह पर प्रवचन देते हैं।
- बहुत से लोग इस दिन व्रत रखते हैं।
- ज़रूरतमंदों को कपड़े, पैसे और खाना दिया जाता है।
- कई जगह अहिंसा के संदेश के साथ रैलियाँ निकलती हैं।
सवाल जवाब
महावीर जयंती 2027: पूछे जाने वाले सवाल
महावीर जयंती 2027 कब है?
महावीर जयंती 2027 में 19 अप्रैल, सोमवार को है। चैत्र शुक्ल त्रयोदशी तिथि 18 अप्रैल, सुबह 7:43 से 19 अप्रैल, सुबह 6:09 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
महावीर जयंती को जैन क्या कहते हैं?
महावीर जन्म कल्याणक। कल्याणक यानी तीर्थंकर के जीवन की वह मंगल घड़ी, जो सबके भले के लिए आती है। जन्म पाँच कल्याणकों में दूसरा है।
भगवान महावीर का जन्म कहाँ हुआ था?
जैन परंपरा के अनुसार वैशाली के पास कुंडग्राम में। श्वेतांबर परंपरा बिहार के क्षत्रियकुंड को जन्म की जगह मानती है, और कुछ लोग नालंदा ज़िले के कुंडलपुर को।
रानी त्रिशला ने कितने सपने देखे थे?
श्वेतांबर परंपरा चौदह सपने मानती है, और दिगंबर परंपरा सोलह। सोलह वाली गिनती में मछलियों का जोड़ा और एक ऊँचा सिंहासन भी आते हैं।
पाँच कल्याणक कौन से हैं?
गर्भ में आना (च्यवन), जन्म, दीक्षा, केवल ज्ञान, और निर्वाण। जैन मानते हैं कि ये हर तीर्थंकर के जीवन में आते हैं।
भगवान महावीर के बचपन का नाम क्या था?
वर्धमान। वे राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के बेटे थे।
भगवान महावीर को निर्वाण कहाँ मिला?
पावापुरी में। और केवल ज्ञान उन्हें ऋजुवालिका नदी के पास हुआ था।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Mahavira Janma Kalyanaka, Wikipediaचैत्र सुद तेरस, क्षत्रियकुंड और कुंडलपुर, नाय कुल, चौदह और सोलह सपने, इंद्र का अभिषेक, रथ यात्रा, अहिंसा रैली
- Panch Kalyanaka, Wikipediaपाँच कल्याणक, दोनों परंपराओं की तिथियाँ, वैशाली के पास कुंडग्राम, ऋजुवालिका, पावापुरी
- Dreams of Mother Trishala, JainWorldचौदह सपनों का क्रम और अर्थ, सोलह वाली गिनती, विद्वानों को बुलाना
- JAINA Newsletter: Mahavir Janma Kalyanak, HereNow4Uअभिषेक, रथ यात्रा, दान, प्रवचन, सजावट, वर्धमान नाम
- Studies in Jainism, page 166, JainQQविमलसूरि, श्रेणिक की शंका, गौतम का कथा सुनाना
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तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।