उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
गुड़ी पड़वा 2027
Gudi Padwa 2027
बाँस की नोक पर उल्टा कलश, और हर खिड़की से उठा एक झंडा।
गुड़ी पड़वा 2027 में 7 अप्रैल, बुधवार को है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 7 अप्रैल, सुबह 5:21 से 8 अप्रैल, सुबह 4:29 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
आज हर दूसरी खिड़की से एक बाँस बाहर निकला है।
उसकी नोक पर रेशमी कपड़ा लिपटा है। कहीं पीला, कहीं हरा, कहीं लाल।
कपड़े के ऊपर नीम और आम की टहनी, और फूलों की माला।
सबसे ऊपर एक ताँबे का लोटा, उल्टा रखा हुआ। धूप उस पर फिसलती है।
नीचे रसोई में नीम की पत्तियाँ पिसकर गुड़ और इमली में मिल रही हैं। आज का पहला कौर कड़वा है।
गली में आज जितने झंडे हैं, उतनी ही जीतें गिनाई जाती हैं।
सबसे पुरानी जीत पैठण की है, कहते हैं। एक राजा लौटा था, और नगर ने उसके लिए घर घर झंडे उठाए थे।
2027 में कब
गुड़ी पड़वा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़7 अप्रैल, बुधवार
तिथिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा7 अप्रैल, सुबह 5:21 से 8 अप्रैल, सुबह 4:29 तक
नक्षत्ररेवतीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:05
सूर्यास्तशाम 6:42
चंद्रोदयसुबह 5:55
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
गुड़ी पड़वा का शुभकामना कार्ड

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पहचान
गुड़ी पड़वा क्या है
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र का नया साल है। यह चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आता है। गुड़ी का मतलब है झंडा: एक लंबे बाँस पर रेशमी कपड़ा, नीम और आम की टहनियाँ, फूलों की माला, और सबसे ऊपर उल्टा रखा चाँदी, काँसे या ताँबे का कलश। इसे घर के बाहर, खिड़की या दरवाज़े के पास ऊँचा लगाते हैं, जीत और अच्छे साल की निशानी के तौर पर। मान्यता है कि यह बुराई को दूर रखती है और घर में बरकत लाती है। गोवा और कोंकण के हिंदू इसी दिन को संवत्सर पाडवो कहते हैं, और केरल तक फैले कोंकणी घर भी इसे इसी नाम से मानते हैं। यह वसंत के आने और रबी की फ़सल कटने का समय भी है।
कथा
गुड़ी पड़वा की कथा
महाराष्ट्र में इस दिन के साथ सबसे ज़्यादा जो कथा सुनाई जाती है, वह राजा शालिवाहन की है। मान्यता है कि जब शालिवाहन लड़ाई जीतकर अपनी राजधानी पैठण लौटे, तो लोगों ने उनके स्वागत में घर घर गुड़ी उठाई। यह भी माना जाता है कि शालिवाहन शक, यानी शक संवत की गिनती, इसी जीत के आसपास शुरू हुई। इसीलिए गुड़ी को विजय का झंडा कहा जाता है।
एक दूसरी कथा राम की है। कुछ लोग मानते हैं कि यह दिन रावण पर जीत के बाद अयोध्या में राम के राज्याभिषेक की याद है, और गुड़ी उसी स्वागत का झंडा है। एक और मान्यता कहती है कि त्रेता युग में इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को राम ने किष्किंधा के राजा बाली को मारकर सुग्रीव को उनका राज्य लौटाया था। इसलिए इस दिन को कई लोग विजय का दिन भी कहते हैं।
महाराष्ट्र के गाँवों में इस दिन की एक अलग ही शक्ल है। कई जगह गुड़ी को काँवड़ की तरह कंधे पर उठाकर शिव मंदिर तक ले जाया जाता है, कभी कभी पहाड़ी चढ़कर। वहाँ के लोग इस दिन को शिव के नाच से भी जोड़ते हैं।
और कहते हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज के राज में भी इस त्योहार को बढ़ावा मिला, मराठों की जीत की ख़ुशी के तौर पर। इस तरह एक ही झंडे में कई जीतें बँधी हैं: एक राजा की, एक अवतार की, और हर उस घर की जो नया साल अपनी खिड़की पर टाँगता है।
कहाँ कैसे
गुड़ी पड़वा कहाँ कैसे मनाया जाता है
महाराष्ट्र के शहर
घरों के बाहर गुड़ी, दरवाज़ों पर आम और अशोक के पत्तों का तोरण, आँगन में रंगोली। मुंबई जैसे शहरों की सड़कों पर रंग बिरंगे जुलूस निकलते हैं और नाच गाना होता है।
महाराष्ट्र के गाँव
कई गाँवों में गुड़ी को काँवड़ बनाकर कंधे पर उठाते हैं और शिव मंदिर तक ले जाते हैं, कहीं कहीं पहाड़ी की चोटी तक।
गोवा
यहाँ यह संवत्सर पाडवो है। हरे या पीले ज़री वाले कपड़े की गुड़ी बनती है, ऊपर ताँबे या चाँदी का तांब्या उल्टा, और इसे अक्सर दरवाज़े या खिड़की की दाहिनी तरफ़ लगाते हैं। गोवा का शिगमो उत्सव इसी दिन पूरा होता है, और कुछ गाँवों में रात को रणमाले खेले जाते हैं।
नानोडा, बिचोलीम (गोवा)
पाडवो से एक दिन पहले यहाँ घोडे मोडणी नाम का लोक नाच होता है।
गाँवडोंगरी (गोवा)
वेळीप समाज के कुँवारे लड़के दिन्या जात्रा में चलते हैं, हाथ में फूलों से सजी दिनो पौधे की छड़ी लेकर।
केरल के कोंकणी घर
केरल में बसे कोंकणी हिंदू भी इस दिन को संवत्सर पाडवो कहकर नए साल की तरह मानते हैं।
रीत
गुड़ी पड़वा के दिन क्या करते हैं
- सुबह तेल लगाकर नहाते हैं और नए कपड़े पहनते हैं।
- घर साफ़ होता है, दरवाज़ों पर आम और अशोक के पत्तों का तोरण बँधता है, और आँगन में फूलों और रंगों की रंगोली बनती है।
- एक लंबे बाँस पर पीला, हरा या लाल रेशमी कपड़ा बाँधा जाता है, साथ में नीम और आम की टहनियाँ और फूलों की माला।
- बाँस की नोक पर चाँदी, काँसे या ताँबे का कलश उल्टा रखा जाता है।
- गुड़ी को घर के आगे, खिड़की या दरवाज़े के पास ऊँचाई पर खड़ा किया जाता है।
- दिन की शुरुआत नीम से होती है: नीम की पत्तियाँ, गुड़, इमली और धनिए के बीज मिलाकर खाए जाते हैं।
- कई घरों में रामरक्षा स्तोत्र और सुंदरकांड का पाठ होता है, और सूर्य की पूजा भी।
रसोई
गुड़ी पड़वा का खाना
- नीम की चटनी नीम की पत्तियाँ, गुड़, इमली और धनिया; कड़वा, मीठा, खट्टा, सब एक साथ।
- पूरन पोली मीठी भरवाँ रोटी, जिसे इस त्योहार की पहचान माना जाता है।
- श्रीखंड दही से बनी मीठी चीज़।
- शक्कर भात मीठे चावल।
- आमरस पके आम का रस, इस मौसम का पहला।
- सेवइयों की खीर और कणंगाची खीर गोवा के कोंकणी घरों की खीर।
सवाल जवाब
गुड़ी पड़वा 2027: पूछे जाने वाले सवाल
गुड़ी पड़वा 2027 कब है?
गुड़ी पड़वा 2027 में 7 अप्रैल, बुधवार को है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 7 अप्रैल, सुबह 5:21 से 8 अप्रैल, सुबह 4:29 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
गुड़ी पड़वा पर गुड़ी क्यों लगाते हैं?
गुड़ी जीत का झंडा मानी जाती है। मान्यता है कि यह राजा शालिवाहन की जीत की याद है, और यह भी कि यह बुराई को दूर रखती है और घर में अच्छा साल लाती है।
गुड़ी कैसे बाँधी जाती है?
एक लंबे बाँस पर रेशमी कपड़ा, नीम और आम की टहनियाँ और फूलों की माला बाँधते हैं, और सबसे ऊपर चाँदी, काँसे या ताँबे का कलश उल्टा रखते हैं। फिर इसे घर के बाहर ऊँचा खड़ा करते हैं।
गुड़ी पड़वा पर नीम क्यों खाते हैं?
नीम के कड़वे और गुड़ के मीठे को साथ खाने का मतलब है कि साल में मीठे और कड़वे, दोनों तरह के दिन आएँगे। नीम को सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है।
संवत्सर पाडवो क्या है?
यह गोवा और कोंकण के हिंदुओं का नाम है गुड़ी पड़वा के लिए। गोवा में इसी दिन शिगमो उत्सव भी पूरा होता है।
गुड़ी पड़वा और उगादी में क्या रिश्ता है?
दोनों एक ही दिन, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आते हैं। महाराष्ट्र में यह गुड़ी पड़वा है, और आंध्र, तेलंगाना और कर्नाटक में उगादी।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Gudi Padwa, Wikipedia (with Maharashtra Tourism and other references)गुड़ी कैसे बनती है, शालिवाहन, राम का राज्याभिषेक, गाँवों की काँवड़, कोंकणी नाम
- New Year in Spring, The Goanगोवा की गुड़ी और तांब्या, नीम का लेप, शिगमो, रणमाले, घोडे मोडणी, दिन्या जात्रा, कोंकणी पकवान
- Gudi Padwa, The Quintराम के अयोध्या लौटने की मान्यता, तेल स्नान, रंगोली, जुलूस
- आज है गुड़ी पड़वा, नवभारतबाली और सुग्रीव की मान्यता, तोरण, पाठ, पूरन पोली, श्रीखंड, शक्कर भात
- Gudi Padwa significance, SOTCशिवाजी महाराज के समय की बात, आमरस, मुंबई के जुलूस
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।