पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · तुला संक्रांति

काति बिहू 2027

Kati Bihu 2027

खेत में आकाश बंति, आँगन में तुलसी का दीया।

काति बिहू 2027 में 18 अक्टूबर, सोमवार को है। सूर्य रात 2:09 पर तुला राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।

काति बिहू का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

सूर्य तुला राशि में, और उस शाम का चाँद

साँझ उतर आई है। धान के खेत अभी हरे हैं, पकने में देर है।

मेड़ पर एक लंबा बाँस गड़ा है। उसकी नोक पर सरसों के तेल का दीया। इसे आकाश बंति कहते हैं, आसमान का दीया।

आँगन में नई लगी तुलसी के आगे मिट्टी का साकि जलता है। साकि यानी छोटा दीया।

औरतें धीमे सुर में नाम गा रही हैं।

बच्चे एक और दीया लेकर भोराल की ओर दौड़ते हैं, जहाँ धान रखा जाता है।

भोराल लगभग ख़ाली है। यह कमी का महीना है, कोंगाली का महीना।

फिर भी दीया वहीं रखा जाता है, जहाँ अभी कुछ नहीं है। उम्मीद को भरा भंडार नहीं चाहिए, बस एक लौ।

2027 में कब

काति बिहू 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़18 अक्टूबर, सोमवार

संक्रांतिसूर्य तुला राशि मेंरात 2:09

नक्षत्रकृत्तिकासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:23

सूर्यास्तशाम 5:49

चंद्रोदयरात 7:30

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

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शुभकामना

काति बिहू का शुभकामना कार्ड

काति बिहू का शुभकामना कार्ड: काति बिहू की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

काति बिहू क्या है

काति बिहू असम के तीन बिहू में से एक है। यह उस दिन पड़ता है जब सूरज तुला राशि में जाता है, यानी काति महीने की संक्रांति। इसका दिन सूरज से तय होता है, तिथि से नहीं। इसे कोंगाली बिहू कहते हैं, क्योंकि कोंगाली का मतलब है कंगाल, ख़ाली हाथ: इस समय पिछली फ़सल लगभग ख़त्म हो चुकी होती है, घर में खाने को कम होता है, और नया धान अभी खेत में हरा खड़ा होता है। इसलिए यह बिहू दीयों और प्रार्थना का है: तुलसी के आगे, खेत में, और धान के भंडार में।

कथा

काति बिहू की कथा

काति बिहू की कथा किसी एक ग्रंथ में बँधी नहीं, यह किसान के घर की कथा है। धान खेत में खड़ा है, पर पका नहीं। भंडार ख़ाली होने को है। कीड़े लगे, बाढ़ आए, तो साल भर की मेहनत चली जाए। इस बीच के डर को असम दीयों से पार करता है, और लक्ष्मी से प्रार्थना करता है कि फ़सल कटने तक बची रहे।

तुलसी के आगे दीया क्यों? ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार तुलसी लक्ष्मी का धरती वाला रूप हैं, और उनकी कथा राधा और कृष्ण से जुड़ती है। इसीलिए काति बिहू की शाम घर घर तुलसी की पूजा होती है, और कई घरों में इसी दिन नई तुलसी लगाकर उसके आगे पहला दीया जलाया जाता है।

और आकाश बंति, बाँस की नोक पर टँगा वह दीया? इसके बारे में कई बातें कही जाती हैं। एक, कि यह देवताओं को चढ़ाया गया दीया है, आने वाले महीनों की आशीष के लिए। दूसरी, कि यह पुरखों को स्वर्ग की राह दिखाता है। और किसान यह भी कहते हैं कि खेत की यह रोशनी धान के दुश्मन कीड़ों को खींचकर ख़त्म कर देती है।

कहाँ कैसे

काति बिहू कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • लखीमपुर

    शाम को घर घर नई लगी तुलसी के आगे दीये जलते हैं और भक्ति गीत गाए जाते हैं। किसान परिवार खेतों में लक्ष्मी के नाम आकाश बंति जलाते हैं।

  • धेमाजी

    काति बिहू से पहले और बाद में लक्ष्मी सभाएँ होती हैं, और पूजा की पवित्र मिट्टी भोराल यानी धान के भंडार में रखी जाती है।

  • डिमौ

    लोग घरों, खेतों और भोराल घरों में दीये जलाते हैं, और अच्छी फ़सल की प्रार्थना होती है। बच्चे भी बड़ों के साथ दीये जलाते हैं।

  • बोको, कामरूप

    तुलसी के नीचे दीये जलते हैं, धान के खेतों पर आकाश बंति, और औरतें नाम प्रसंग यानी भक्ति गायन की अगुवाई करती हैं।

  • राभा और देउरी समुदाय

    राभा लोग बिहू से पहले के दिनों में खेत में धान के पौधों के पास दीये जलाते हैं। देउरी लोग लक्ष्मी पूजा करते हैं, जब माना जाता है कि लक्ष्मी फ़सल में आ बसती हैं, और औरतें देवी के गीत गाती हैं।

रीत

काति बिहू के दिन क्या करते हैं

  1. साँझ को तुलसी के आगे मिट्टी का साकि जलाया जाता है; कई घरों में इसी दिन नई तुलसी लगाई जाती है।
  2. धान के खेतों में ऊँचे बाँस की नोक पर सरसों के तेल वाला आकाश बंति जलाया जाता है।
  3. खेत में धान के पास दीये रखकर प्रार्थना होती है कि फ़सल कीड़ों और आपदा से बची रहे।
  4. भोराल घर यानी धान के भंडार में भी दीया जलाया जाता है।
  5. नामघरों में नाम प्रसंग, नागारा नाम और ओजापालि जैसी पुरानी प्रस्तुतियाँ होती हैं।
  6. कुछ लोग इस दिन व्रत रखते हैं।
  7. छोटे इस दिन बड़ों और बुज़ुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं।

सवाल जवाब

काति बिहू 2027: पूछे जाने वाले सवाल

काति बिहू 2027 कब है?

काति बिहू 2027 में 18 अक्टूबर, सोमवार को है। सूर्य रात 2:09 पर तुला राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।

काति बिहू को कोंगाली बिहू क्यों कहते हैं?

कोंगाली का मतलब है कंगाल या ख़ाली हाथ। इस समय पुराना धान लगभग ख़त्म होता है और नया अभी खेत में होता है, इसलिए भंडार लगभग ख़ाली रहते हैं।

आकाश बंति क्या है?

धान के खेत में ऊँचे बाँस की नोक पर जलाया जाने वाला सरसों के तेल का दीया। इसे देवताओं को चढ़ाया दीया भी माना जाता है और पुरखों को राह दिखाने वाला भी।

काति बिहू पर तुलसी के आगे दीया क्यों जलाते हैं?

तुलसी को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। काति बिहू की शाम तुलसी के आगे दीया जलाकर घर और फ़सल की ख़ुशहाली की प्रार्थना की जाती है।

काति बिहू किस दिन होता है?

तुला संक्रांति को, जिस दिन सूरज तुला राशि में जाता है। इसका दिन सूरज से तय होता है, चाँद की तिथि से नहीं। यह असम के तीन बिहू में से एक है, रोंगाली और भोगाली के बीच वाला।

काति बिहू पर भोराल में दीया क्यों रखते हैं?

भोराल धान का भंडार है, जो इस समय लगभग ख़ाली होता है। उसमें दीया जलाकर प्रार्थना की जाती है कि आने वाली फ़सल से वह फिर भर जाए।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. The Spiritual Essence of Kati Bihu, The Sentinelतुला संक्रांति, कोंगाली का मतलब, तुलसी और ब्रह्मवैवर्त पुराण, धेमाजी, राभा, देउरी, नामघर
  2. Kati Bihu celebrated in Lakhimpur, Demow, The Sentinelनई तुलसी, आकाश बंति, कीड़ों से रक्षा, भोराल घर में दीये, बड़ों का आशीर्वाद
  3. Assam: Kati Bihu celebrated across state, The Sentinelसाकि, बोको और कछाखाना, नाम प्रसंग, व्रत
  4. Kati Bihu, Vajiram and Raviआकाश बंति में सरसों का तेल और बाँस, पुरखों की राह, कोंगाली
  5. Rongali Bihu: The Cultural Facet of Assamese Community, Abhijna e-Museumअसम के तीन बिहू

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।