पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

नरक चतुर्दशी 2027

Narak Chaturdashi 2027

सूरज से पहले तेल, उबटन और गुनगुना पानी। फिर पैर के अँगूठे के नीचे एक कड़वा फल।

इस बरस (2026) नरक चतुर्दशी 8 नवंबर, रविवार को है। नरक चतुर्दशी 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।

नरक चतुर्दशी 2027 में 28 अक्टूबर, गुरुवार को है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 27 अक्टूबर, रात 10:50 से 28 अक्टूबर, रात 8:49 तक है। अभ्यंग स्नान का समय सुबह 5:02 से सुबह 6:30 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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अमावस्या: उस रात आकाश में चाँद नहीं

हल्दी और चंदन की गंध। अभी सूरज नहीं निकला।

गुनगुना तिल का तेल सिर से पैर तक, फिर उबटन, फिर गरम पानी।

नहाकर निकलते ही पैर का अँगूठा एक छोटे, कड़वे फल पर पड़ता है। कच्च।

कहते हैं, यह नरकासुर है।

दूर दक्षिण के किसी घर में घर के बड़े बच्चों को थपकी देकर जगाते हैं: गंगा स्नानम्।

उस घर में दीवाली आज ही है। पटाखे नहाने के साथ ही शुरू हो जाते हैं।

एक ही सुबह। कहीं वह छोटी दीवाली है, कहीं रूप चौदस, कहीं पूरी दीपावली।

2027 में कब

नरक चतुर्दशी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़28 अक्टूबर, गुरुवार

तिथिकार्तिक कृष्ण चतुर्दशी27 अक्टूबर, रात 10:50 से 28 अक्टूबर, रात 8:49 तक

नक्षत्रहस्तसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:30

सूर्यास्तशाम 5:40

चंद्रोदयसुबह 5:02

अभ्यंग स्नान
सुबह 5:02 से सुबह 6:30 तकचतुर्दशी की सुबह, चंद्रोदय से सूर्योदय तक।

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शुभकामना

नरक चतुर्दशी का शुभकामना कार्ड

नरक चतुर्दशी का शुभकामना कार्ड: नरक चतुर्दशी की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

नरक चतुर्दशी क्या है

नरक चतुर्दशी कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी है, दीवाली के पाँच दिनों में दूसरा दिन; गुजराती, मराठी, तेलुगु और कन्नड़ पंचांगों में यही आश्विन कृष्ण चतुर्दशी कहलाती है। इसे छोटी दीवाली, रूप चौदस और काली चौदस भी कहते हैं। इस दिन का सबसे बड़ा काम अभ्यंग स्नान है, यानी सूरज निकलने से पहले, जब चतुर्दशी तिथि हो और चाँद आसमान में हो, तेल मलकर और उबटन लगाकर नहाना। मान्यता है कि इसी दिन कृष्ण और सत्यभामा ने नरकासुर को मारा था। अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में हनुमान जयंती भी इसी तिथि को, दीवाली से एक दिन पहले, होती है।

कथा

नरक चतुर्दशी की कथा

भागवत पुराण के दसवें स्कंध में नरकासुर की कथा है, और लोक में यह कई रंगों में सुनाई जाती है। नरकासुर भूदेवी, यानी धरती माँ, का बेटा था, और प्रागज्योतिषपुर पर राज करता था। लोक कथा में कहते हैं कि उसे वरदान था, उसे बस उसकी माँ ही मार सकती है। इसी भरोसे उसने धरती और स्वर्ग दोनों पर हाथ डाला, देवमाता अदिति के कुंडल छीन लिए, और सोलह हज़ार कन्याओं को अपने महल में क़ैद कर लिया।

देवता कृष्ण के पास गए। कृष्ण अपनी रानी सत्यभामा को साथ लेकर नरकासुर से लड़ने निकले। लोक कथाएँ, ख़ासकर दक्षिण की, कहती हैं कि सत्यभामा भूदेवी का ही रूप थीं, इसलिए आख़िरी तीर उन्हीं का चला, और वरदान भी सच रहा। नरकासुर गिरा, और क़ैद की सोलह हज़ार कन्याएँ आज़ाद हुईं।

लोक कथा आगे कहती है कि मरते मरते नरकासुर को अपने किए पर पछतावा हुआ। उसने माँगा कि उसकी मौत का दिन रोने से नहीं, रोशनी और ख़ुशी से याद किया जाए। एक रूप में उसने यह भी माँगा कि जो इस दिन शुभ स्नान करे, उसे नरक का दुख न भोगना पड़े। कृष्ण ने बात मान ली। कहते हैं, तभी से इस चतुर्दशी को सूरज से पहले का स्नान होता है और शाम को दीये जलते हैं।

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में

लंका दहन।

कहाँ कैसे

नरक चतुर्दशी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • महाराष्ट्र

    यहाँ नरक चतुर्दशी दीवाली का पहला दिन है। सूरज से पहले तेल और उटणे, यानी उबटन, से अभ्यंग स्नान होता है, और नहाने के बाद कारीट नाम का कड़वा जंगली फल पैर के अँगूठे से कुचलते हैं, मानो नरकासुर को कुचल रहे हों। उसके बीज माथे पर लगाए जाते हैं और गूदे की एक बूँद चखी जाती है।

  • तमिलनाडु

    यहाँ दीपावली इसी दिन है, अमावस्या को नहीं। भोर से पहले बड़े 'गंगा स्नानम्' कहकर सबको जगाते हैं, तिल का गुनगुना तेल लगता है, फिर बेसन, हल्दी और चंदन का नलुगु लेप, और नहाते ही पटाखे शुरू हो जाते हैं। नहाने के बाद रेशमी कपड़े पहने जाते हैं और घर की मालकिन पहला दीया जलाती हैं।

  • गोवा

    घास और पटाखों से भरे कागज़ के नरकासुर के पुतले सुबह तड़के जलाए जाते हैं। फिर सुगंधित तेल से स्नान होता है, और कड़वा कारीट पैर से कुचला जाता है।

  • कर्नाटक

    दीपावली इसी दिन सुबह के तेल स्नान और आरती से शुरू होती है, और बलि पाड्यमी तक चलती है।

  • राजस्थान

    यह रूप चौदस है, जिसे सौंदर्य दिवस भी कहते हैं। औरतें सेहत और रूप के लिए पूजा करती हैं, और सूरज से पहले का उबटन वाला स्नान इसी नाम से जुड़ा है।

  • गुजरात

    यह काली चौदस है, जिसमें काली माँ की पूजा होती है। इसी दिन दीवाली की हनुमान पूजा भी होती है।

रीत

नरक चतुर्दशी के दिन क्या करते हैं

  1. सूरज निकलने से पहले उठते हैं, जब चतुर्दशी हो और चाँद दिख रहा हो।
  2. पूरे शरीर पर तेल मलते हैं, ज़्यादातर तिल का। फिर हल्दी, चंदन, बेसन और गुलाब जल का उबटन लगाकर गरम पानी से नहाते हैं।
  3. महाराष्ट्र और गोवा में नहाने के बाद कड़वा कारीट पैर के अँगूठे से कुचला जाता है।
  4. नहाकर साफ़ या नए कपड़े पहने जाते हैं, और परिवार साथ में भरपेट नाश्ता करता है।
  5. शाम को यम के नाम एक दीया जलता है, कि घर में किसी को नरक का दुख और अकाल मौत न मिले। कुछ घर यह दीया धनतेरस की शाम ही जला लेते हैं।
  6. शाम को घर में दीये जलाए जाते हैं, और पितरों के लिए भी दीये रखे जाते हैं।
  7. कई घरों में हनुमान जी को नारियल चढ़ाया जाता है।

रसोई

नरक चतुर्दशी का खाना

  • इडली और डोसा तमिलनाडु में गंगा स्नानम् के बाद का नाश्ता।
  • मीठा पोंगल और वड़ै दीपावली की सुबह की थाली।
  • अधिरसम, मुरुक्कु, सीडै और मिक्सचर दीपावली की तमिल मिठाइयाँ और नमकीन।

सवाल जवाब

नरक चतुर्दशी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

नरक चतुर्दशी 2026 में कब है?

नरक चतुर्दशी 2026 में 8 नवंबर, रविवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड नरक चतुर्दशी 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।

नरक चतुर्दशी 2027 कब है?

नरक चतुर्दशी 2027 में 28 अक्टूबर, गुरुवार को है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 27 अक्टूबर, रात 10:50 से 28 अक्टूबर, रात 8:49 तक है। अभ्यंग स्नान का समय सुबह 5:02 से सुबह 6:30 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली क्यों कहते हैं?

यह दीवाली की अमावस्या से ठीक एक दिन पहले, पाँच दिन के त्योहार का दूसरा दिन है, और इस शाम भी दीये जलाए जाते हैं। इसीलिए उत्तर भारत में इसे छोटी दीवाली कहते हैं।

अभ्यंग स्नान क्या है और कब करते हैं?

अभ्यंग स्नान का मतलब है पूरे शरीर पर तेल मलकर और उबटन लगाकर नहाना। यह नरक चतुर्दशी को सूरज निकलने से पहले किया जाता है, जब चतुर्दशी तिथि हो और चाँद दिख रहा हो।

नरक चतुर्दशी पर कारीट क्यों फोड़ते हैं?

महाराष्ट्र और गोवा में नहाने के बाद कड़वा कारीट फल पैर के अँगूठे से कुचला जाता है। यह नरकासुर को मारने का निशान माना जाता है, और मन की बुरी बातों को कुचलने का भी।

तमिलनाडु में दीपावली इसी दिन क्यों होती है?

तमिलनाडु में दीपावली परंपरा से नरक चतुर्दशी की सुबह ही होती है, नरकासुर पर जीत की याद में। सुबह का तेल स्नान वहाँ गंगा स्नानम् कहलाता है, क्योंकि उसे गंगा में नहाने जितना पवित्र माना जाता है।

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस क्यों कहते हैं?

राजस्थान में यह नाम सूरज से पहले के उबटन वाले स्नान से जुड़ा है, जो सेहत और रूप के लिए होता है। वहाँ औरतें इस दिन रूप चौदस की पूजा करती हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Aromatic Ubtan for Abhyanga Snan (Ugaoo)महाराष्ट्र का अभ्यंग स्नान, कारीट का फल, भागवत की नरकासुर कथा, प्रागज्योतिषपुर, नरक से बचने का वर
  2. Narak Chaturdashi: history (Outlook India)भूदेवी का बेटा, माँ से ही मौत का वरदान, सोलह हज़ार कन्याएँ, सत्यभामा, आख़िरी इच्छा, यम का दीया, पितरों के दीये
  3. Narak Chaturdashi (PanchangBodh)अदिति के कुंडल, सूरज से पहले का तेल स्नान, दक्षिण की ओर यम का दीया, रूप चौदस, तमिल दीपावली
  4. Diwali in Tamil Nadu: Naraka Chaturdashi and Sacred Oil Baths (Hindutone)गंगा स्नानम्, तिल का तेल, नलुगु, पटाखे, नए कपड़े, पहला दीया, तमिल नाश्ता, सत्यभामा का तीर
  5. Narak Chaturdashi, Kali Chaudas, Hanuman Jayanti, Roop Chaudas (HinduPad)पंचांगों में आश्विन और कार्तिक नाम, राजस्थान की रूप चौदस, गुजरात की हनुमान पूजा
  6. Hanuman Jayanti: Drik Panchangहनुमानगढ़ी, अयोध्या में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा
  7. What is Abhyanga Snan (The Free Press Journal)उबटन में हल्दी, चंदन, बेसन, गुलाब जल; सूरज से पहले का स्नान
  8. Naraka Chaturdashi (Wikipedia)चाँद रहते स्नान का नियम, गोवा के पुतले और कारीट, कर्नाटक, नाश्ता, शाम के दीये, हनुमान जी को नारियल

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।