पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा

गोवर्धन पूजा 2027

Govardhan Puja 2027

जिस दिन एक पहाड़ छाता बना, और गाँव ने इंद्र की जगह पहाड़ को पूजा।

इस बरस (2026) गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को है। गोवर्धन पूजा 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।

गोवर्धन पूजा 2027 में 30 अक्टूबर, शनिवार को है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 29 अक्टूबर, शाम 7:07 से 30 अक्टूबर, शाम 5:52 तक है। सुबह की पूजा का समय (प्रातः काल) सुबह 6:31 से सुबह 8:45 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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अमावस्या: उस रात आकाश में चाँद नहीं

आसमान आज बिल्कुल साफ़ है। एक भी बादल नहीं।

घर के आगे ज़मीन पर गोबर का एक छोटा सा पहाड़ बन रहा है।

उस पर टहनियाँ खोंसते हैं। ये पेड़ हैं।

किनारे पर छोटी छोटी गायें।

फूल चढ़ते हैं। फिर दीया।

मंदिर में आज ठाकुर जी के आगे खाने का पहाड़ लगेगा, परत दर परत।

कहते हैं, एक बार सात दिन तक बादल नहीं थमे थे। तब कृष्ण ने पूरा पहाड़ अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया था।

2027 में कब

गोवर्धन पूजा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़30 अक्टूबर, शनिवार

तिथिकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा29 अक्टूबर, शाम 7:07 से 30 अक्टूबर, शाम 5:52 तक

नक्षत्रस्वातीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:31

सूर्यास्तशाम 5:38

चंद्रोदयसुबह 7:11

प्रातः काल
सुबह 6:31 से सुबह 8:45 तकसूर्योदय के बाद दिन का पहला पाँचवाँ हिस्सा।
सायं काल
दोपहर 3:25 से शाम 5:38 तकसूर्यास्त से पहले दिन का आख़िरी पाँचवाँ हिस्सा।

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शुभकामना

गोवर्धन पूजा का शुभकामना कार्ड

गोवर्धन पूजा का शुभकामना कार्ड: गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

गोवर्धन पूजा क्या है

गोवर्धन पूजा कार्तिक के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को होती है, दीवाली के अगले दिन, पाँच दिन के त्योहार का चौथा दिन। यह कृष्ण के गोवर्धन पहाड़ उठाने की याद का दिन है, और इसी दिन अन्नकूट होता है, यानी अन्न का पहाड़: कृष्ण के आगे छप्पन या एक सौ आठ तरह के पकवान पहाड़ की तरह सजाए जाते हैं। कुछ ग्रंथ गोवर्धन पूजा और अन्नकूट को एक ही मानते हैं, तो कुछ के लिए गोवर्धन पूजा दिन भर चलने वाले अन्नकूट का एक हिस्सा है। ब्रज, यानी मथुरा, वृंदावन, गोकुल और गोवर्धन का इलाक़ा, इसका सबसे बड़ा घर है, और राजस्थान का नाथद्वारा भी। इसी तिथि को महाराष्ट्र और कर्नाटक में बली प्रतिपदा और गुजरात में नया साल होता है।

कथा

गोवर्धन पूजा की कथा

भागवत पुराण में कथा है। ब्रज में गोवर्धन पहाड़ी के पास के ग्वाले हर बरस, शरद में, बारिश और तूफ़ान के देवता इंद्र की पूजा करते थे। कृष्ण चाहते थे कि इंद्र का घमंड टूटे, इसलिए उन्होंने गाँव वालों से कहा कि इंद्र की पूजा छोड़ दो। कथा यह भी कहती है कि कृष्ण ने ख़ुद पहाड़ का रूप लेकर गाँव का चढ़ाया भोग स्वीकार किया। इसीलिए आज भी पहाड़ के आगे अन्न का पहाड़ लगता है।

इंद्र को बहुत ग़ुस्सा आया। उसने गोकुल पर तूफ़ान और भारी बारिश भेज दी। तब कृष्ण ने गोवर्धन पहाड़ को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया, और पूरा गाँव, लोग और गायें, सब उसके नीचे आ गए, जैसे किसी बड़े छाते के नीचे। सात दिन तक तूफ़ान चलता रहा। सात दिन बाद इंद्र ने देखा कि गोकुल का कोई कुछ नहीं बिगड़ा, तो उसने हार मान ली और तूफ़ान रोक दिया।

गोवर्धन ब्रज की एक छोटी पहाड़ी है, मथुरा के पास। भक्त उसे गिरिराज जी कहते हैं, और पुष्टिमार्ग के मंदिरों में आज गिरिराज जी को तिलक लगाया जाता है। इस पहाड़ी के चारों ओर घूमने और उसे भोग लगाने की रीत को परंपरा चैतन्य महाप्रभु से जोड़ती है।

कहाँ कैसे

गोवर्धन पूजा कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • गोवर्धन, ब्रज

    भक्त पहाड़ी के चारों ओर पैदल परिक्रमा करते हैं, और रास्ते के छोटे छोटे मंदिरों पर फूल और भोग चढ़ाते हैं। कुछ भक्त पूरी परिक्रमा दंडवत करते हुए करते हैं, यानी हर क़दम पर ज़मीन पर लेटकर प्रणाम, और उसमें दस से बारह दिन लग जाते हैं।

  • मथुरा

    पुष्टिमार्ग के द्वारकाधीश मंदिर में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट होता है, और शाम को अन्नकूट के दर्शन होते हैं। मथुरा के चौबे ब्राह्मण भी इस दिन बड़ी गिनती में जुटते हैं।

  • नाथद्वारा, राजस्थान

    यहाँ और मथुरा के मंदिरों में ठाकुर जी को पहले दूध से नहलाते हैं, फिर सुंदर कपड़े और गहने पहनाते हैं। नाथद्वारा में कृष्ण के आगे लगा अन्नकूट अठारहवीं सदी के आख़िर के एक चित्र में भी दिखता है।

  • ब्रज के गाँव

    कई जगह ग्वालों की बिरादरी का कोई आदमी एक गाय और एक बैल के साथ पहाड़ी का चक्कर लगाता है, और उसके पीछे गाँव के परिवार चलते हैं।

  • गुजरात

    वैष्णव हवेलियों और मंदिरों में भगवान के आगे बड़ा अन्नकूट लगता है, जो बाद में प्रसाद बनकर बँटता है। यहाँ यही दिन नए साल का भी है।

रीत

गोवर्धन पूजा के दिन क्या करते हैं

  1. गोबर से गोवर्धन पहाड़ी बनाते हैं, उस पर टहनियाँ और घास पेड़ों की तरह खोंसते हैं, और आसपास छोटी छोटी गायें रखते हैं।
  2. फिर गोबर के इस पहाड़ को फूलों से सजाकर पूजते हैं।
  3. मंदिरों में ठाकुर जी को दूध से नहलाकर नए कपड़े और गहने पहनाते हैं।
  4. छप्पन या एक सौ आठ तरह के पकवान बनते हैं और परतों में सजते हैं: मिठाइयाँ मूर्ति के सबसे पास, और बीच में पके अन्न का एक ढेर, जो गोवर्धन है।
  5. पुष्टिमार्ग में गिरिराज जी को तिलक लगाते हैं, और जिससे जितना बन पड़े, उतना चढ़ाता है।
  6. पूजा के बाद अन्नकूट प्रसाद बनकर सबमें बँटता है।
  7. ब्रज में भक्त गोवर्धन पहाड़ी की परिक्रमा करते हैं।

रसोई

गोवर्धन पूजा का खाना

  • छप्पन भोग छप्पन तरह के पकवान, जो शाम को ठाकुर जी के आगे परतों में सजते हैं।
  • अन्नकूट बीच में पके अन्न का ढेर, गोवर्धन का रूप, जिसके चारों ओर बाक़ी पकवान रखे जाते हैं।

सवाल जवाब

गोवर्धन पूजा 2027: पूछे जाने वाले सवाल

गोवर्धन पूजा 2026 में कब है?

गोवर्धन पूजा 2026 में 10 नवंबर, मंगलवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड गोवर्धन पूजा 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।

गोवर्धन पूजा 2027 कब है?

गोवर्धन पूजा 2027 में 30 अक्टूबर, शनिवार को है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 29 अक्टूबर, शाम 7:07 से 30 अक्टूबर, शाम 5:52 तक है। सुबह की पूजा का समय (प्रातः काल) सुबह 6:31 से सुबह 8:45 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है?

भागवत पुराण की कथा की याद में, जब कृष्ण ने इंद्र की भेजी बारिश और तूफ़ान से गोकुल को बचाने के लिए गोवर्धन पहाड़ अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया था, और सात दिन तक थामे रखा।

अन्नकूट क्या है?

अन्नकूट का मतलब है अन्न का पहाड़। इस दिन छप्पन या एक सौ आठ तरह के पकवान बनाकर ठाकुर जी के आगे पहाड़ की तरह सजाए जाते हैं, और बाद में प्रसाद में बाँटे जाते हैं।

गोवर्धन पूजा में गोबर का पहाड़ क्यों बनाते हैं?

क्योंकि यह उसी पहाड़ की पूजा है जिसने गाँव और गायों को बचाया था। गोबर से पहाड़ी बनती है, उस पर टहनियाँ पेड़ बनती हैं और पास में छोटी गायें रखी जाती हैं।

दंडवत परिक्रमा क्या होती है?

इसमें भक्त हर क़दम पर ज़मीन पर पूरा लेटकर प्रणाम करते हुए गोवर्धन पहाड़ी का चक्कर लगाते हैं। ऐसी परिक्रमा में दस से बारह दिन लग सकते हैं।

गोवर्धन पूजा, बली प्रतिपदा और गुजराती नया साल एक ही दिन क्यों हैं?

तीनों कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को पड़ते हैं, दीवाली के अगले दिन। ब्रज और उत्तर भारत इस दिन गोवर्धन और अन्नकूट रखते हैं, महाराष्ट्र और कर्नाटक बली प्रतिपदा, और गुजरात अपना नया साल।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Govardhan Puja (Wikipedia)तिथि, भागवत की कथा, सात दिन, छोटी उँगली, अन्नकूट और छप्पन भोग, गोबर का गोवर्धन, मथुरा और नाथद्वारा, परिक्रमा और दंडवत, चैतन्य महाप्रभु, गिरिराज जी को तिलक
  2. Govardhan Puja: 4th Day of Diwali (SmartPuja)गोबर के पहाड़ की फूलों से पूजा, छप्पन या एक सौ आठ पकवान, दूध से स्नान, पाडवा और बली प्रतिपदा उसी दिन
  3. Mathura celebrates Govardhan Puja (The Hitavada)द्वारकाधीश मंदिर, शाम के अन्नकूट दर्शन, गोवर्धन की परिक्रमा
  4. Gujarati New Year: Bestu Varas (HinduTone)गुजरात की वैष्णव हवेलियों का अन्नकूट और प्रसाद, नए साल के दिन गोवर्धन पूजा

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।