उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आश्विन शुक्ल दशमी
भरत मिलाप 2027
Bharat Milap 2027
चौदह बरस का इंतज़ार, और एक पल जिसमें पूरा शहर साँस रोक लेता है।
भरत मिलाप 2027 में 10 अक्टूबर, रविवार को है। आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
इतनी भीड़। और एकदम चुप।
छतों पर लोग, मुँडेरों पर लोग, पेड़ों की डालों पर बच्चे। कोई कुछ नहीं बोलता।
मैदान के एक सिरे पर चार छोटे लड़के खड़े हैं, राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न बने।
दो दौड़ते हैं। दो दौड़ते हैं। बीच में मिलते हैं।
और तब शोर फूटता है, जैसे किसी ने बाँध खोल दिया हो।
एक बूढ़ी औरत आँचल से आँखें पोंछती है। उसने यह हर बरस देखा है, और हर बरस यही होता है।
कथा सबको पता है। फिर भी हर बरस वह पल पहली बार जैसा आता है।
2027 में कब
भरत मिलाप 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़10 अक्टूबर, रविवार
तिथिआश्विन शुक्ल दशमी9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक
नक्षत्रश्रवणसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:19
सूर्यास्तशाम 5:57
चंद्रोदयदोपहर 3:01
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
भरत मिलाप क्या है
भरत मिलाप वह दिन है जब रामलीला में राम और भरत चौदह बरस बाद मिलते हैं। यह दशहरे, यानी विजयादशमी, के अगले दिन होता है, रामलीला के क्रम के हिसाब से। सबसे जानी हुई भरत मिलाप लीला वाराणसी की नाटी इमली की है, जिसमें काशी नरेश हाथी पर निकलते हैं और यादव समाज के लोग पुष्पक विमान अपने कंधों पर उठाते हैं। भरत मिलाप नाम उस पहले मिलन के लिए भी आता है जब भरत चित्रकूट जाकर राम से मिले थे और उनकी खड़ाऊँ लेकर लौटे थे।
कथा
भरत मिलाप की कथा
कथा दो मिलनों की है। पहले में भरत वन गए राम से मिलने चित्रकूट जाते हैं। राम लौटते नहीं, तो भरत उनकी चरण पादुका, यानी खड़ाऊँ, लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें सिंहासन पर रखते हैं। चित्रकूट के इसी मिलन को भी भरत मिलाप कहते हैं। मानस का अयोध्याकांड नंदीग्राम में खड़ाऊँ के राज पर ख़त्म होता है।
फिर चौदह बरस बीतते हैं। रामचरितमानस का उत्तरकांड यहीं से खुलता है: “रहेउ एक दिन अवधि अधारा।” अवधि का बस एक दिन बचा है, और भरत का मन डूब रहा है। लोग राम के बिछोह में सूख गए हैं, “कृस तन राम बियोग”। तब हनुमान ब्राह्मण का रूप लेकर भरत के पास पहुँचते हैं, और तुलसी लिखते हैं: “बिप्र रूप धरि पवन सुत आइ गयउ जनु पोत।” यानी पवन के बेटे ब्राह्मण बनकर ऐसे आए, जैसे डूबते आदमी के लिए नाव।
और फिर मिलन। मानस कहता है: “परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए॥” यानी भरत ज़मीन पर गिर पड़े, उठाने पर भी नहीं उठे, तब दया के सागर राम ने उन्हें ज़ोर से उठाकर छाती से लगा लिया। वाराणसी की नाटी इमली पर यही पल खेला जाता है, और पुष्पक विमान, जो राम को लंका से लाया, यादवों के कंधों पर वहाँ पहुँचता है।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में भरत मिलाप
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
रामचरितमानस
अवधी · Ramcharitmanas
रामचरितमानस में भरत मिलाप दो जगह है। अयोध्याकांड के अंत में भरत खड़ाऊँ लेकर लौटते हैं और नंदीग्राम में रहकर उनके नाम पर राज करते हैं। और उत्तरकांड की शुरुआत में, जब अवधि का एक दिन बचा है, हनुमान ब्राह्मण के भेस में ख़बर लाते हैं, और फिर राम ज़मीन पर पड़े भरत को उठाकर गले लगाते हैं। उत्तर भारत की रामलीलाएँ मानस पर चलती हैं, और काशी की भरत मिलाप लीला भी तुलसीदास के शिष्य मेघा भगत से जोड़ी जाती है।
सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में
कहाँ कैसे
भरत मिलाप कहाँ कैसे मनाया जाता है
नाटी इमली, वाराणसी
दशहरे के अगले दिन यहाँ भरत मिलाप की लीला होती है। लगभग पाँच हज़ार किलो का पुष्पक विमान यादव समाज के लोग अपने कंधों पर उठाते हैं, और आयोजक इस लीला को चार सौ बरस से भी पुराना गिनते हैं।
काशी की गलियाँ
काशी नरेश सजे हाथी पर बड़े जुलूस के साथ शहर का चक्कर लगाते हैं।
रामनगर किला, वाराणसी
नाटी इमली के साथ रामनगर किले पर भी यह दिन मनाया जाता है, और दोनों जगह सामूहिक भोज होते हैं।
कोसी कलाँ, मथुरा
इस दिन यहाँ मेला लगता है, जिसमें बहुत से लोग जुटते हैं।
रीत
भरत मिलाप के दिन क्या करते हैं
- दशहरे के अगले दिन रामलीला का भरत मिलाप वाला दृश्य खेला जाता है।
- वाराणसी में यादव समाज के लोग पुष्पक विमान को कंधों पर उठाकर लीला स्थल तक ले जाते हैं।
- काशी नरेश हाथी पर निकलते हैं, और लोग जुलूस देखने छतों और गलियों में जमा होते हैं।
- नाटी इमली और रामनगर किले पर सामूहिक भोज होते हैं।
- घर में पढ़ना हो तो मानस के उत्तरकांड के पहले दोहे और चौपाइयाँ इसी मिलन की हैं।
सवाल जवाब
भरत मिलाप 2027: पूछे जाने वाले सवाल
भरत मिलाप 2027 कब है?
भरत मिलाप 2027 में 10 अक्टूबर, रविवार को है। आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
भरत मिलाप कब होता है?
दशहरे के अगले दिन, रामलीला के क्रम में। वाराणसी की नाटी इमली की लीला इसी दिन होती है।
नाटी इमली का भरत मिलाप क्यों प्रसिद्ध है?
यहाँ लगभग पाँच हज़ार किलो का पुष्पक विमान यादव समाज के लोग कंधों पर उठाते हैं, काशी नरेश हाथी पर निकलते हैं, और यह लीला चार सौ बरस से ज़्यादा पुरानी गिनी जाती है।
काशी का भरत मिलाप किसने शुरू किया?
परंपरा इसे तुलसीदास के शिष्य मेघा भगत से जोड़ती है, जिनका नाम कहीं कहीं मेधा भगत भी लिखा मिलता है।
भरत मिलाप कितनी बार होता है?
कथा में दो बार: पहली बार चित्रकूट में, जब भरत राम की खड़ाऊँ लेकर लौटे, और दूसरी बार चौदह बरस बाद, जब राम लंका से लौटे। नाटी इमली की लीला दूसरे मिलन की है।
मानस में राम और भरत का मिलन कहाँ है?
उत्तरकांड की शुरुआत में। वहाँ भरत ज़मीन पर गिर पड़ते हैं और राम उन्हें उठाकर गले लगाते हैं: परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Kashi Bharat Milap, Drik Panchangदशहरे का अगला दिन, नाटी इमली और रामनगर किला, काशी नरेश, यादव समाज, विमान का वज़न, खड़ाऊँ, कोसी कलाँ
- Historic Bharat Milap in Varanasi, Deccan Heraldनाटी इमली, यादव भाई, पाँच टन का पुष्पक विमान, लीला की उम्र
- Ramcharitmanas, Uttara Kanda prakarana 1, Vedapathएक दिन की अवधि, ब्राह्मण रूप में हनुमान, राम भरत मिलन की पंक्तियाँ
- Ramcharitmanas, Ayodhya Kanda, Vedapathअयोध्याकांड के अंत में नंदीग्राम में खड़ाऊँ का राज
- Ramlila, Wikipediaरामलीलाएँ मानस पर, तुलसी के शिष्य मेघा भगत
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।