पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · कार्तिक शुक्ल द्वितीया

भाई दूज 2027

Bhai Dooj 2027

बहन का एक टीका, और यम के दरवाज़े पर काँटा।

इस बरस (2026) भाई दूज 11 नवंबर, बुधवार को है। भाई दूज 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।

भाई दूज 2027 में 31 अक्टूबर, रविवार को है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 30 अक्टूबर, शाम 5:52 से 31 अक्टूबर, शाम 5:14 तक है। अपराह्न का समय दोपहर 1:11 से दोपहर 3:24 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

भाई दूज का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 4 प्रतिशत रोशन

भाइयेर कपाले दिलाम फोंटा। जमेर दुआरे पड़लो काँटा।

बांग्ला की यह तुकबंदी कहती है: भाई के माथे पर टीका दिया, यम के दरवाज़े पर काँटा पड़ गया।

बहन की बाईं छोटी उँगली चंदन और दही में डूबती है, और भाई के माथे पर तीन बार उतरती है।

शंख बजता है। औरतें उलु देती हैं, गले से निकली लंबी, काँपती आवाज़।

दूर मथुरा में भाई बहन साथ साथ यमुना में डुबकी ले रहे हैं।

और नेपाल की किसी देहरी पर एक बहन भाई के चारों ओर तेल की लकीर खींच रही है।

कहते हैं, यह सब सबसे पहले एक बहन ने किया था। उसका नाम यमुना था, और भाई का यम।

2027 में कब

भाई दूज 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़31 अक्टूबर, रविवार

तिथिकार्तिक शुक्ल द्वितीया30 अक्टूबर, शाम 5:52 से 31 अक्टूबर, शाम 5:14 तक

नक्षत्रविशाखासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:32

सूर्यास्तशाम 5:37

चंद्रोदयसुबह 8:15

अपराह्न
दोपहर 1:11 से दोपहर 3:24 तकदिन के पाँच हिस्सों में चौथा।

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शुभकामना

भाई दूज का शुभकामना कार्ड

भाई दूज का शुभकामना कार्ड: भाई दूज की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

भाई दूज क्या है

भाई दूज कार्तिक के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को होती है, दीवाली के दो दिन बाद, पाँच दिन के त्योहार का आख़िरी दिन। बहनें भाई के माथे पर टीका लगाती हैं, उसे खिलाती हैं और उसकी लंबी उम्र माँगती हैं, और भाई बहन को उपहार देता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं, क्योंकि इसकी कथा मृत्यु के देवता यम और उनकी बहन यमुना की है। बंगाल में यह भाई फोंटा है, महाराष्ट्र में भाऊबीज, और नेपाल में तिहार का आख़िरी दिन, भाई टीका। कायस्थ समाज इसी तिथि को अपने कुलदेवता चित्रगुप्त की पूजा भी करता है।

कथा

भाई दूज की कथा

लोक में कथा है। मृत्यु के देवता यम और यमुना नदी भाई बहन हैं। कार्तिक की इसी द्वितीया को यम अपनी बहन से मिलने पहुँचे। यमुना ने भाई का बड़े प्यार से स्वागत किया, उसकी ख़ूब आवभगत की। यम बहन की आवभगत से ख़ुश हुए और उसे वर दिया। मथुरा के पुजारी यह वर ऐसे सुनाते हैं: जो भाई बहन, किसी भी उम्र के, यम द्वितीया को विश्राम घाट पर साथ साथ यमुना में नहाएँगे, उन पर यम के दूतों का कोप नहीं पड़ेगा।

बंगाल की भाई फोंटा वाली तुकबंदी भी यही कथा याद रखती है। उसमें आता है कि यमुना ने यम को फोंटा दिया, यानी माथे पर टीका, और यम अमर हो गए। उसी तरह बहन अपने भाई के लिए माँगती है कि यम का दरवाज़ा उसके लिए बंद रहे, वहाँ काँटे पड़ जाएँ। तुकबंदी के बोल घर घर थोड़े बदल जाते हैं।

नेपाल में इस दिन की अपनी कथा है। किरात राजा बलि हाङ बीमार पड़े, और उनकी बहन जमुना उनकी रखवाली करती रहीं। यमराज उनके प्राण लेने आए तो जमुना ने कहा, ठहरो, मुझे अपनी पूजा पूरी कर लेने दो। फिर उसने शर्त रखी: जब तक भाई के माथे का टीका न मिटे, यह पानी न सूखे और ये मखमली फूल न मुरझाएँ, तब तक उसे मत ले जाना। यमराज इंतज़ार करते रहे, आख़िर हार मान गए, और भाई को लंबी उम्र दे दी।

कुछ लोग इस दिन को कृष्ण और सुभद्रा से भी जोड़ते हैं: नरकासुर को मारकर कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के घर गए, और सुभद्रा ने मिठाई और फूलों से उनका स्वागत किया और माथे पर तिलक लगाया। और यम के पास सबके कर्मों का हिसाब लिखने वाले चित्रगुप्त हैं, क़लम और दवात वाले, इसीलिए यम द्वितीया को उनकी पूजा भी होती है।

कहाँ कैसे

भाई दूज कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • विश्राम घाट, मथुरा

    भाई बहन साथ साथ यमुना में डुबकी लेते हैं; एक ही दिन में लाखों लोग नहाते हैं, ज़्यादातर विश्राम घाट पर, और कुछ बंगाली घाट और स्वामी घाट पर। नहाकर लोग घाट के पास यमराज और यमुना के पुराने मंदिर में दर्शन करते हैं, जिसे धर्मराज मंदिर भी कहते हैं।

  • बंगाल

    भाई फोंटा काली पूजा के दो दिन बाद होता है। बहन चंदन और दही का लेप अपनी बाईं छोटी उँगली से भाई के माथे पर तीन बार लगाती है, तुकबंदी बोलती है, और सिर पर धान और दूब रखती है; शंख बजते हैं और औरतें उलु देती हैं। कुछ परिवार इसे एक दिन पहले, प्रतिपदा को, भी करते हैं।

  • महाराष्ट्र

    यहाँ यह भाऊबीज है। जिन बहनों का भाई नहीं होता, वे चाँद की पूजा करती हैं, और जिनके भाई दूर हैं वे चाँद के ज़रिए भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना भेजती हैं; इसी से चाँद को प्यार से चंदामामा कहा जाता है। हरियाणा में भी यही रीत है।

  • नेपाल

    तिहार का आख़िरी दिन भाई टीका है। बहन भाई के माथे पर सात रंगों का खड़ा टीका लगाती है, जिसे सप्तरंगी टीका कहते हैं, उसके चारों ओर पहले तेल और फिर पानी की लकीर खींचती है, दरवाज़े के बाहर बिमिरो (एक बड़ा, नींबू जैसा फल) पूजकर उसके पास एक साबुत अखरोट तोड़ती है, और मखमली फूलों और दूब की माला पहनाती है।

  • कायस्थ घर, लखनऊ जैसे शहर

    कायस्थ समाज के कुलदेवता चित्रगुप्त हैं, और इस दिन उनकी पूजा के साथ क़लम, दवात और बही खातों की पूजा होती है। लखनऊ में यम द्वितीया को चित्रगुप्त की सामूहिक पूजा में क़लम दवात पूजी जाती है, छप्पन भोग चढ़ता है, और प्रसाद के साथ क़लमें बँटती हैं।

रीत

भाई दूज के दिन क्या करते हैं

  1. सुबह भाई बहन नहाते हैं; मथुरा में साथ साथ यमुना में।
  2. बहन भाई के माथे पर टीका लगाती है: बंगाल में चंदन और दही का, नेपाल में सात रंगों का।
  3. बहन भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना करती है; नेपाल में ख़ास तौर पर यमराज से।
  4. नेपाल में बहन भाई के चारों ओर तेल और पानी की लकीर खींचती है, ताकि बुरा साया पास न आए।
  5. बहन भाई को मिठाई और भरपेट खाना खिलाती है, और भाई बहन को उपहार देता है।
  6. जिन बहनों का भाई नहीं है, वे महाराष्ट्र और हरियाणा में चाँद की पूजा करती हैं।
  7. कायस्थ घरों में नई क़लम से काग़ज़ पर 'ॐ चित्रगुप्ताय नमः' लिखा जाता है, और क़लम, दवात और बही खातों पर रोली या चंदन लगाकर पूजा होती है।

रसोई

भाई दूज का खाना

  • लूची और आलूर दम भाई फोंटा का नाश्ता, यानी पूरी और आलू की सब्ज़ी।
  • इलिश और पाबदा भाई फोंटा की दोपहर की थाली की मछलियाँ, कई घरों में मुर्ग़ा या बकरे का मांस भी।
  • सेल रोटी नेपाल की गोल, तेल में तली रोटी, जो भाई टीका पर अखरोट और मिठाई के साथ परोसी जाती है।
  • सगुन नेपाल में भाई को मिलने वाला मसालों का पुड़ा; कहते हैं, यह कभी घर लौटते भाई के रास्ते का नाश्ता था।

सवाल जवाब

भाई दूज 2027: पूछे जाने वाले सवाल

भाई दूज 2026 में कब है?

भाई दूज 2026 में 11 नवंबर, बुधवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड भाई दूज 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।

भाई दूज 2027 कब है?

भाई दूज 2027 में 31 अक्टूबर, रविवार को है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 30 अक्टूबर, शाम 5:52 से 31 अक्टूबर, शाम 5:14 तक है। अपराह्न का समय दोपहर 1:11 से दोपहर 3:24 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?

इस दिन की कथा यम और उनकी बहन यमुना की है। मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम बहन से मिलने आए और उसकी आवभगत से ख़ुश होकर वर दिया, इसलिए यह यम की द्वितीया कहलाई।

विश्राम घाट पर भाई बहन साथ क्यों नहाते हैं?

मथुरा की मान्यता है कि यम ने यमुना को वर दिया था कि जो भाई बहन यम द्वितीया को विश्राम घाट पर साथ नहाएँगे, उन पर यम के दूतों का कोप नहीं पड़ेगा। लोग अकाल मौत से बचने की आस में भी यह डुबकी लेते हैं।

भाई फोंटा कैसे होता है?

बंगाल में बहन बाईं छोटी उँगली से चंदन और दही का टीका भाई के माथे पर तीन बार लगाती है, तुकबंदी बोलती है, सिर पर धान और दूब रखती है, और फिर भाई को मिठाई और भरपूर खाना खिलाती है।

नेपाल के भाई टीका में तेल की लकीर क्यों खींचते हैं?

बहन भाई के चारों ओर पहले तेल और फिर पानी की लकीर खींचती है, ताकि बुरा साया पास न आए। नेपाल की कथा में बहन ने यम से कहा था कि जब तक भाई का टीका न मिटे, पानी न सूखे और फूल न मुरझाएँ, उसे मत ले जाना।

भाई दूज पर चित्रगुप्त पूजा क्यों होती है?

चित्रगुप्त यम के यहाँ सबके कर्मों का हिसाब लिखते हैं, इसलिए यम द्वितीया को उनकी पूजा होती है। कायस्थ समाज उन्हें कुलदेवता मानता है और इस दिन क़लम, दवात और बही खाते पूजता है।

जिस बहन का भाई न हो, वह भाई दूज कैसे करे?

महाराष्ट्र और हरियाणा में ऐसी बहनें चाँद की पूजा करती हैं, और जिनके भाई दूर हैं, वे चाँद के ज़रिए उसकी लंबी उम्र की प्रार्थना भेजती हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Devotees take holy dip in Yamuna on Bhai Dooj in Mathura (IANS)विश्राम घाट का स्नान, यम और यमुना, अकाल मौत से बचाव, घाट का यमराज यमुना मंदिर
  2. Devotees take holy dip in Yamuna on Yam Dwitiya (Outlook India)यमुना की आवभगत और यम का वर, बंगाली घाट और स्वामी घाट, धर्मराज मंदिर, लखनऊ की चित्रगुप्त और क़लम दवात पूजा
  3. Bhai Dooj (Wikipedia)तिथि, यम यमुना का मिलना, महाराष्ट्र और हरियाणा में चाँद की पूजा, चंदामामा, सप्तरंगी टीका, कृष्ण और सुभद्रा
  4. Bhai Phontaकाली पूजा के दो दिन बाद, चंदन और दही, बाईं छोटी उँगली से तीन बार, तुकबंदी, धान और दूब, शंख और उलु, लूची आलूर दम, इलिश
  5. Bhai Tika: celebrating sibling bonds (Nepal Traveller)सप्तरंगी टीका, तेल और पानी की लकीर, बिमिरो और अखरोट, मखमली माला, सगुन, बलि हाङ और जमुना की कथा
  6. Nepalis celebrate Bhaitika (The Himalayan Times)सरसों के तेल की लकीर, दूब और मखमली की माला, सेल रोटी और अखरोट, यम से मिला वर
  7. Chitragupta Puja (Drik Panchang)कार्तिक शुक्ल द्वितीया, कायस्थ समाज के कुलदेवता, क़लम दवात और बही खाते, यमराज के सहायक
  8. Chitragupta Puja: Kalam Dawat Puja (HinduTone)भाई दूज और यम द्वितीया के दिन चित्रगुप्त पूजा, ॐ चित्रगुप्ताय नमः लिखना, रोली चंदन से पूजा

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।