पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आश्विन पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा 2027

Sharad Purnima 2027

चाँद सोलह कलाओं में, खीर छत पर, और ब्रज में बाँसुरी।

शरद पूर्णिमा 2027 में 14 अक्टूबर, गुरुवार को है। आश्विन पूर्णिमा तिथि 14 अक्टूबर, शाम 6:50 से 15 अक्टूबर, शाम 7:17 तक है। चाँद शाम 4:57 निकलेगा। समय नई दिल्ली के हैं।

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पूर्णिमा: उस रात पूरा चाँद

चाँदनी आँगन के पत्थर पर धीरे धीरे आगे सरकती है।

मंदिर की जाली आज खुली छोड़ी गई है, ताकि वह भीतर तक आ सके।

भीतर ठाकुर जी पूरे सफ़ेद में हैं।

और आज बाँसुरी उनके होंठों पर है। साल में बस आज।

दर्शन तब तक खुले रहेंगे, जब तक चाँदनी उनके पैरों तक न पहुँच जाए।

बाहर छतों पर खीर के कटोरे रखे हैं, रात भर खुले आसमान के नीचे।

सुबह वही खीर प्रसाद बनकर घर घर बँटेगी।

एक ही चाँद। कहीं खीर के कटोरे में उतरता है, कहीं गरबे के घेरे में, कहीं एक बाँसुरी की तान में।

2027 में कब

शरद पूर्णिमा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़14 अक्टूबर, गुरुवार

तिथिआश्विन पूर्णिमा14 अक्टूबर, शाम 6:50 से 15 अक्टूबर, शाम 7:17 तक

नक्षत्रउत्तरा भाद्रपदसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:21

सूर्यास्तशाम 5:53

चंद्रोदयशाम 4:57

चंद्रोदय
शाम 4:57नई दिल्ली में चाँद निकलने का समय। बादल हों तो इसी समय अर्घ्य देते हैं।

पूर्णिमा तिथि 14 अक्टूबर की शाम 6:50 से 15 अक्टूबर की शाम 7:17 तक है। शरद पूर्णिमा चाँदनी की रात का त्योहार है, और पूरी पूर्णिमा वाली रात 14 अक्टूबर की है, इसलिए खीर, जागरण और कोजागरी पूजा 14 अक्टूबर की रात को हैं। सूर्योदय वाली पूर्णिमा, यानी स्नान, दान, व्रत और वाल्मीकि जयंती, 15 अक्टूबर को है।

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शुभकामना

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पहचान

शरद पूर्णिमा क्या है

शरद पूर्णिमा आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है, बरसात ख़त्म होने के बाद की पूर्णिमा। मान्यता है कि साल में बस इसी रात चाँद अपनी सोलहों कलाओं के साथ निकलता है, इसलिए इस दिन चंद्र देव की पूजा होती है और खीर चाँदनी में रखी जाती है। इसका व्रत कौमुदी व्रत भी कहलाता है; ब्रज में यह रात रास पूर्णिमा है, क्योंकि भागवत के अनुसार कृष्ण ने गोपियों के साथ रास शरद की ऐसी ही रात में किया था, और गुजरात में इसे शरद पूनम कहते हैं। पूरब में यही रात कोजागरी लक्ष्मी पूजा की है, और इसी दिन आदिकवि वाल्मीकि की जयंती भी होती है।

कथा

शरद पूर्णिमा की कथा

भागवत पुराण के दसवें स्कंध में, उनतीसवें से तैंतीसवें अध्याय तक, रास की कथा है। शुकदेव जी राजा परीक्षित को सुनाते हैं। शरद की रातें थीं, और वन में मल्लिका के फूल खिले थे। 'भगवानपि ता रात्रीः शारदोत्फुल्लमल्लिकाः। वीक्ष्य रन्तुं मनश्चक्रे योगमायामुपाश्रितः॥' (भागवत 10.29.1) यानी भगवान ने भी शरद की वे रातें देखीं, जिनमें मल्लिका खिली थी, और अपनी योगमाया का सहारा लेकर लीला करने का मन बनाया।

तभी पूरब में चाँद उगा। भागवत कहता है, जैसे बहुत दिनों बाद लौटा कोई अपनी प्रिया के मुँह पर लाल रंग लगा दे, वैसे ही चाँद ने अपनी ठंडी किरणों से पूरब का मुँह लाल कर दिया, और देखने वालों का दुख धो दिया (10.29.2)। कृष्ण ने वह पूरा गोल चाँद देखा, कुमुद के खिलते फूल देखे, चाँदनी में रंगा वन देखा, और बाँसुरी उठा ली (10.29.3)।

बाँसुरी की आवाज़ गाँव तक पहुँची तो गोपियाँ जो कर रही थीं, वहीं छोड़कर चल पड़ीं। किसी का गाय दुहना अधूरा रह गया, किसी का दूध चूल्हे पर उबलता रह गया, किसी के पकवान आँच पर छूट गए, कोई बच्चे को खिलाते खिलाते उठ गई। घर वालों ने रोका, पर वे नहीं रुकीं। वन में कृष्ण ने उनसे पूछा कि क्यों आई हो, और कहा कि रात डरावनी है, घर लौट जाओ, तुम्हारे घर वाले तुम्हें ढूँढ रहे होंगे। गोपियों ने जवाब दिया: 'मैवं विभोऽर्हति भवान् गदितुं नृशंसं' (10.29.31), यानी हे प्रभु, ऐसी कठोर बात आपके मुँह से अच्छी नहीं लगती।

फिर रास शुरू हुआ। मान्यता है कि कृष्ण ने अपने उतने रूप कर लिए जितनी गोपियाँ थीं, ताकि हर गोपी के साथ एक कृष्ण हों, और वह रात इतनी लंबी कर दी कि ब्रह्मा की एक रात के बराबर हो गई। इसीलिए ब्रज में यह पूर्णिमा रास पूर्णिमा कहलाती है, और इसी रात की याद में आज भी चाँदनी को मंदिरों के भीतर बुलाया जाता है।

कहाँ कैसे

शरद पूर्णिमा कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • वृंदावन, बाँके बिहारी मंदिर

    साल में बस इसी दिन बिहारी जी के होंठों पर बाँसुरी होती है; बाक़ी दिन वह सिंहासन के पास रखी रहती है। वे पूरे सफ़ेद में, महारास वाले रूप में होते हैं, आँगन की जाली खोल दी जाती है, और दर्शन तब तक चलते हैं जब तक चाँदनी उनके पैरों तक न पहुँचे।

  • ब्रज

    यहाँ यह रात रास पूर्णिमा है। मंदिरों में भगवान को सफ़ेद पोशाक पहनाई जाती है, राधा कृष्ण की पूजा होती है, और लोग खीर बनाकर चाँदनी में रखते हैं।

  • गुजरात

    यहाँ यह रात शरद पूनम है, और खुली चाँदनी में गरबा होता है।

  • स्वामिनारायण मंदिर

    भगवान को दूध पौंआ का भोग लगता है, यानी गाढ़े दूध में भिगोया पोहा, और फिर वही प्रसाद बँटता है। भक्त बाजों के साथ कीर्तन गाते हैं और रास खेलते हैं।

  • राजस्थान

    औरतें पूरे चाँद से मेल खाते सफ़ेद कपड़े और चाँदी के गहने पहनती हैं।

  • काशी

    शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक आकाशदीप जलाए जाते हैं, यानी ऊँचे बाँस पर टँगे दीये, और गंगा किनारे दीपदान होता है।

रीत

शरद पूर्णिमा के दिन क्या करते हैं

  1. बहुत से लोग दिन भर उपवास रखते हैं और रात को चाँद निकलने के बाद पूजा करते हैं।
  2. इस दिन चंद्र देव की पूजा होती है, और राधा कृष्ण की पूजा को सबसे ऊपर माना जाता है।
  3. भगवान को सफ़ेद कपड़े पहनाए जाते हैं, चाँद की सफ़ेदी की तरह।
  4. गाय के दूध, चावल और चीनी की खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखी जाती है।
  5. सुबह वही खीर भोग लगाकर परिवार और पड़ोस में प्रसाद की तरह बाँटी जाती है।
  6. जिन नई ब्याहताओं को साल भर पूर्णिमा के व्रत रखने का संकल्प लेना हो, वे इसी पूर्णिमा से शुरू करती हैं।
  7. मंदिरों में रास के भजन गाए जाते हैं, और कई जगह लोग रात भर जागते हैं।

रसोई

शरद पूर्णिमा का खाना

  • खीर गाय के दूध, चावल और चीनी की, जो रात भर चाँदनी में रखी जाती है और सुबह खाई जाती है।
  • दूध पौंआ गाढ़े दूध में भिगोया पोहा, गुजरात के स्वामिनारायण मंदिरों का शरद पूनम का भोग।
  • नारियल का दूध और चिउड़ा आधी रात को भगवान और पितरों को चढ़ाकर मेहमानों में बाँटा जाता है।

सवाल जवाब

शरद पूर्णिमा 2027: पूछे जाने वाले सवाल

शरद पूर्णिमा 2027 कब है?

शरद पूर्णिमा 2027 में 14 अक्टूबर, गुरुवार को है। आश्विन पूर्णिमा तिथि 14 अक्टूबर, शाम 6:50 से 15 अक्टूबर, शाम 7:17 तक है। चाँद शाम 4:57 निकलेगा। समय नई दिल्ली के हैं।

शरद पूर्णिमा पर खीर चाँदनी में क्यों रखते हैं?

मान्यता है कि इस रात चाँद सोलहों कलाओं में होता है और उसकी चाँदनी में अमृत होता है, जो खीर में उतर आता है। गीता में कृष्ण कहते हैं: 'पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः' (गीता 15.13), यानी मैं रस भरा चाँद बनकर सारी वनस्पतियों को पालता हूँ।

चाँद की सोलह कलाएँ क्या होती हैं?

मान्यता है कि हर कला इंसान के एक गुण की तरह है, और सोलहों कलाएँ मिलकर पूरा व्यक्तित्व बनाती हैं। कहा जाता है कि कृष्ण सोलह कलाओं के साथ जन्मे थे और राम बारह के साथ, और चाँद सोलहों कलाओं में साल में बस शरद पूर्णिमा को दिखता है।

शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

भागवत पुराण के दसवें स्कंध के उनतीसवें से तैंतीसवें अध्याय में कथा है कि शरद की चाँदनी रात में कृष्ण ने बाँसुरी बजाई और गोपियों के साथ रास किया। इसीलिए ब्रज में यह रात रास पूर्णिमा कहलाती है।

क्या शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूजा एक ही दिन होती हैं?

ज़्यादातर बरस हाँ, क्योंकि दोनों आश्विन की एक ही पूर्णिमा की रात हैं। उत्तर और पश्चिम में इस रात चाँद, खीर और रास की बात होती है, और बंगाल, ओड़िशा और असम में लक्ष्मी की पूजा। कोजागरी का दिन इस नियम से तय होता है कि आधी रात को पूर्णिमा हो, इसलिए किसी बरस दोनों के दिन अलग भी पड़ सकते हैं।

बाँके बिहारी जी बाँसुरी कब धारण करते हैं?

वृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में बस शरद पूर्णिमा को बिहारी जी के होंठों पर बाँसुरी होती है। उस दिन वे सफ़ेद पोशाक में होते हैं और दर्शन तब तक होते हैं जब तक चाँदनी उनके पैरों तक न पहुँच जाए।

शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे रखते हैं?

लोग दिन भर उपवास रखते हैं, रात को चंद्र देव और राधा कृष्ण की पूजा करते हैं, और चाँदनी में खीर रखकर अगली सुबह उसे प्रसाद की तरह खाते हैं। इसे कौमुदी व्रत भी कहते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Sharad Purnima: Drik Panchangसोलह कलाएँ, कृष्ण और राम की कलाएँ, खीर, रास पूर्णिमा, कौमुदी व्रत, नई ब्याहताओं के पूर्णिमा व्रत, शरद पूनम नाम
  2. Srimad Bhagavatam, Canto 10, Chapter 29 (shlokam.org)भागवत 10.29.1 से 3 के श्लोक, गोपियों का काम छोड़कर जाना, कृष्ण का घर लौटने को कहना
  3. श्रीमद्भागवतान्तर्गतं प्रणयगीतम् (sanskritdocuments.org)गोपियों का जवाब, भागवत 10.29.31
  4. Sharad Purnima: why keep kheer under the moon (Amar Ujala)चाँदनी में अमृत की मान्यता, गीता का श्लोक, काशी के आकाशदीप
  5. Shri Banke Bihari Temple and Sharad Purnima Festival (Hindu Blog)बिहारी जी की बाँसुरी, सफ़ेद पोशाक, खुली जाली, पैरों तक चाँदनी
  6. Sharad Poonam (Swaminarayan)दूध पौंआ का भोग, रास और कीर्तन, भागवत 10.29 से 33
  7. Sharad Purnima ki raat BSF soldiers ke sath (Utsav, Government of India)शरद पूर्णिमा की रात गरबा, बरसात का अंत, रास की कथा
  8. Kojagiri Purnima: The Free Press Journalउपवास और चाँद की पूजा, राजस्थान के सफ़ेद कपड़े और चाँदी के गहने, आधी रात का नारियल का दूध और चिउड़ा

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।