उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आश्विन शुक्ल दशमी
दशहरा 2027
Dussehra 2027
आज एक रावण जलेगा। पर कथाओं में रावण एक नहीं।
दशहरा 2027 में 9 अक्टूबर, शनिवार को है। आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:05 से दोपहर 2:52 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
मैदान में एक आदमी पीठ के बल लेटा है। बाँस का।
दस सिर अलग पड़े हैं, अभी जुड़े नहीं। उन पर काग़ज़ चिपकाया जा रहा है।
एक बच्चा एक सिर की मूँछ पर उँगली फेरता है। गोंद अभी गीला है।
शाम तक इसे खड़ा कर दिया जाएगा, और रात को आग।
बच्चा पूछता है, इसे राम मारेंगे?
पास खड़े बाबा कहते हैं, यहाँ राम। पर एक पुरानी कथा में यह काम लक्ष्मण करते हैं, और एक में तो इसके दस सिर थे ही नहीं।
बच्चा पुतले को देखता है। हर कथा का अपना रावण, और हर रावण की अपनी लंका।
2027 में कब
दशहरा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़9 अक्टूबर, शनिवार
तिथिआश्विन शुक्ल दशमी9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक
नक्षत्रउत्तराषाढ़ासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:18
सूर्यास्तशाम 5:58
चंद्रोदयदोपहर 2:29
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:05 से दोपहर 2:52 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
- अपराह्न
- दोपहर 1:18 से दोपहर 3:38 तकदिन के पाँच हिस्सों में चौथा।
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शुभकामना
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पहचान
दशहरा क्या है
दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहते हैं, आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी को आता है, शारदीय नवरात्रि के ठीक बाद। यह राम की रावण पर और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत का दिन माना जाता है। पंचांग कहता है कि इस दिन की पूजा अपराह्न में होनी चाहिए, यानी दोपहर के बाद वाले हिस्से में, और इसी दिन शमी पूजा, अपराजिता पूजा और सीमा अवलंघन की रीत है। उत्तर भारत में रामलीला इसी रात पूरी होती है और रावण, कुंभकर्ण और इंद्रजीत के पुतले जलाए जाते हैं। पर हर जगह यह रावण का दिन नहीं: मैसूरु में यह देवी चामुंडेश्वरी का दिन है, और बस्तर में देवी दंतेश्वरी का, जहाँ कोई पुतला नहीं जलता।
कथा
दशहरा की कथा
उत्तर भारत की ज़्यादातर रामलीलाएँ तुलसीदास के रामचरितमानस पर चलती हैं, और विजयादशमी की रात उनका आख़िरी पन्ना है: राम रावण को मारते हैं, और मैदान में खड़ा पुतला आग पकड़ता है। यह वही कथा है जो सबसे ज़्यादा सुनी गई है। पर रामकथा अकेली नहीं।
जैन परंपरा की सबसे पुरानी रामकथा, विमलसूरि का प्राकृत में लिखा पउमचरिय, रावण को बिल्कुल दूसरी आँख से देखती है। यहाँ राक्षस कोई दैत्य नहीं, विद्याधरों का एक वंश है, यानी ख़ास विद्याओं वाले लोग, और लंका के इस वंश को ही राक्षस कहा जाने लगा। वे अहिंसा का व्रत रखते हैं, और रावण बीसवें तीर्थंकर मुनिसुव्रत का भक्त है। उसके दस सिर भी नहीं थे: उसकी माँ ने उसके गले में नौ मोतियों की एक माला पहनाई, जिसमें उसका चेहरा नौ बार और झलकता था, इसलिए वह दशमुख कहलाया।
और अंत? पउमचरिय में रावण को राम नहीं, लक्ष्मण मारते हैं। जैन परंपरा में राम आठवें बलभद्र हैं, लक्ष्मण उनके वासुदेव, और रावण प्रतिवासुदेव, और प्रतिवासुदेव का अंत वासुदेव के हाथ होता है। इस काम के लिए लक्ष्मण को लंबे समय तक नरक भोगना पड़ता है, और रावण भी नरक जाता है, जबकि राम जैन मुनि बनकर मोक्ष पाते हैं। कन्नड़ में नागचंद्र की जैन रामकथा, रामचंद्र चरित पुराण, भी यही रास्ता लेती है: वहाँ भी रावण को लक्ष्मण मारते हैं, और रावण एक दुखी नायक है।
और कुछ दशहरे रावण तक जाते ही नहीं। कुल्लू में पुतला नहीं जलता; झाड़ियों का एक ढेर जलाया जाता है, जिसे लंका का जलना माना जाता है, और राम पूरी कुल्लू घाटी के सबसे बड़े देवता माने जाते हैं। बस्तर का पचहत्तर दिन का दशहरा देवी दंतेश्वरी और उनकी बहन मावली देवी के मिलने का उत्सव है। मैसूरु में देवी चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर जीत मनाई जाती है। एक ही दशमी, और हर जगह उसकी अपनी कथा।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में दशहरा
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
रामचरितमानस
अवधी · Ramcharitmanas
दशहरे की रात मैदानों में जो खेला जाता है, वह ज़्यादातर रामचरितमानस का लंकाकांड है। उत्तर भारत की रामलीलाएँ इसी पर चलती हैं, और रावण का पुतला इसी कथा के अंत की तरह जलता है। यूनेस्को ने सन 2008 में रामलीला को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर माना।
पउमचरिय
प्राकृत, जैन परंपरा · Paumachariya
पउमचरिय, विमलसूरि की प्राकृत में लिखी सबसे पुरानी जैन रामकथा, लंका के लोगों को राक्षस नहीं, विद्याधर कहती है, और इसके रावण के दस सिर नहीं, मोतियों की माला में झलकते नौ चेहरे हैं। सबसे बड़ा फ़र्क़: यहाँ रावण को राम नहीं, लक्ष्मण मारते हैं, और उसके बाद लक्ष्मण और रावण दोनों नरक जाते हैं, जबकि राम मोक्ष पाते हैं। दशहरे पर यह कथा याद दिलाती है कि रावण को देखने की आँख भी परंपरा से बदलती है।
रामचंद्र चरित पुराण
कन्नड़ · Ramachandra Charita Purana
नागचंद्र की रामचंद्र चरित पुराण कन्नड़ की सबसे पुरानी बची हुई रामकथा है, जैन परंपरा की, लगभग सन 1100 की। इसे पंप रामायण भी कहते हैं, क्योंकि नागचंद्र को अभिनव पंप कहा गया। यहाँ भी रावण को लक्ष्मण मारते हैं, और रावण खलनायक नहीं, एक दुखी नायक है। जिस रात उत्तर भारत में पुतला जलता है, कन्नड़ की यह पुरानी कथा उसी रावण के लिए दुख करती है।
सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में
कहाँ कैसे
दशहरा कहाँ कैसे मनाया जाता है
रामनगर, वाराणसी
काशी नरेश की यह रामलीला लगभग एक महीना, इकतीस दिन, चलती है और उसमें पूरा रामचरितमानस पढ़ा जाता है।
कोटा और उत्तर भारत के मैदान
दशहरे की रात रावण, कुंभकर्ण और इंद्रजीत के बड़े पुतले आतिशबाज़ी के साथ जलाए जाते हैं।
मैसूरु (कर्नाटक)
जंबू सवारी में सजे हाथी पर सोने के मंडप में देवी चामुंडेश्वरी निकलती हैं, और जुलूस बन्नीमंटप पहुँचता है, जहाँ बन्नी यानी शमी के पेड़ की पूजा होती है। रात को मशालों की परेड, पंजिना कवायत्तु, होती है।
कुल्लू (हिमाचल प्रदेश)
यहाँ दशहरा तब शुरू होता है जब बाक़ी देश में ख़त्म होता है। गाँव गाँव से लोग अपने देवताओं को लेकर आते हैं, और हर देवता का अपना तंबू लगता है। रावण का पुतला नहीं जलता, झाड़ियों का ढेर लंका के जलने की तरह जलाया जाता है।
बस्तर (छत्तीसगढ़)
पचहत्तर दिन का यह दशहरा देवी दंतेश्वरी और उनकी बहन मावली देवी के मिलने का उत्सव है। रावण का कोई पुतला नहीं जलता; मावली देवी के लिए रथ बनता है और खींचकर ले जाया जाता है, और रीतियाँ आदिवासी भक्त और कलाकार निभाते हैं।
महाराष्ट्र
लोग सीमोल्लंघन करते हैं, यानी गाँव की सीमा पार करके आपटा के पत्ते लाते हैं, और शाम को एक दूसरे के घर जाकर उन्हें सोने की तरह बाँटते हैं।
रीत
दशहरा के दिन क्या करते हैं
- पूजा अपराह्न में होती है, यानी दोपहर के बाद वाले हिस्से में; उसका समय इस पन्ने पर ऊपर दिया है।
- शमी पूजा होती है। महाभारत की कथा है कि पांडवों ने अज्ञातवास में अपने हथियार शमी के पेड़ में छिपाए थे।
- अपराजिता पूजा होती है, यानी उस देवी की जिसे कोई हरा न सके।
- सीमा अवलंघन, यानी गाँव या नगर की सीमा पार करने की रीत निभाई जाती है।
- औज़ारों और हथियारों की पूजा, आयुध पूजा, भी इन्हीं दिनों होती है।
- रात को रामलीला का अंत होता है और रावण, कुंभकर्ण और इंद्रजीत के पुतले जलते हैं।
- महाराष्ट्र में आपटा के पत्ते सोना कहकर बाँटे जाते हैं।
सवाल जवाब
दशहरा 2027: पूछे जाने वाले सवाल
दशहरा 2027 कब है?
दशहरा 2027 में 9 अक्टूबर, शनिवार को है। आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:05 से दोपहर 2:52 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
दशहरा क्यों मनाया जाता है?
यह राम की रावण पर और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत का दिन माना जाता है। यह आश्विन शुक्ल दशमी को, नवरात्रि के बाद आता है।
बस्तर दशहरा में रावण क्यों नहीं जलता?
क्योंकि बस्तर का दशहरा रावण का नहीं, देवी दंतेश्वरी और उनकी बहन मावली देवी का उत्सव है, जो पचहत्तर दिन चलता है।
कुल्लू दशहरा कब होता है?
जब बाक़ी देश में दशहरा ख़त्म होता है, तब कुल्लू का शुरू होता है। यहाँ पुतला नहीं, झाड़ियों का ढेर लंका की तरह जलता है।
जैन रामायण में रावण को कौन मारता है?
लक्ष्मण। पउमचरिय में रावण को लक्ष्मण मारते हैं, फिर लक्ष्मण और रावण दोनों नरक जाते हैं, और राम मुनि बनकर मोक्ष पाते हैं।
दशहरे पर शमी की पूजा क्यों होती है?
महाभारत की कथा है कि पांडवों ने अज्ञातवास में अपने हथियार शमी के पेड़ में छिपाए थे। मैसूरु के बन्नीमंटप में आज भी इसी पेड़ की पूजा होती है।
क्या रावण के सच में दस सिर थे?
कथा पर निर्भर है। पउमचरिय कहता है कि उसके गले की मोतियों की माला में उसका चेहरा नौ बार झलकता था, इसलिए वह दशमुख कहलाया।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Vijayadashami, Drik Panchangराम और दुर्गा की जीत, अपराह्न, शमी पूजा, अपराजिता पूजा, सीमा अवलंघन
- How Dussehra is celebrated across India, eSamskritiकुल्लू, बस्तर, मैसूरु, कोटा
- Ramlila, Wikipediaरामलीला मानस पर, रामनगर, यूनेस्को सन 2008, पुतला दहन
- Mysore Dasara, Wikipediaजंबू सवारी, सोने का मंडप, बन्नीमंटप, पांडव और शमी, मशाल परेड
- Navaratri, Wikipediaरावण, कुंभकर्ण और इंद्रजीत के पुतले, आयुध पूजा
- Ayudha Puja, Wikipediaसीमोल्लंघन, आपटा के पत्ते सोने की तरह
- Paumachariya, Indianetzoneविद्याधर, अहिंसा, मुनिसुव्रत, दस सिर की माला, लक्ष्मण का रावण को मारना
- Rama in Jainism, Wikipediaबलभद्र, वासुदेव और प्रतिवासुदेव, लक्ष्मण और रावण नरक में, राम का मोक्ष, नौ मोतियों की माला
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।