पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आश्विन शुक्ल अष्टमी

दुर्गा अष्टमी 2027

Durga Ashtami 2027

दो तिथियों के बीच का एक पल, जब एक सौ आठ दीये एक साथ जलते हैं।

दुर्गा अष्टमी 2027 में 7 अक्टूबर, गुरुवार को है। आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि 7 अक्टूबर, सुबह 4:14 से 8 अक्टूबर, सुबह 6:28 तक है। संधि पूजा 8 अक्टूबर, सुबह 6:04 से सुबह 6:52 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 50 प्रतिशत रोशन

एक दीया जलता है। फिर उसकी लौ से दूसरा।

फिर तीसरा, चौथा। पुजारी जी के होंठ गिनती में हिल रहे हैं।

पंडाल में कोई नहीं बोलता। बस ढाक, धीमे, फिर तेज़।

थाल में कमल रखे हैं, एक सौ आठ, गिने हुए।

बाहर पंचांग की घड़ी चल रही है: अष्टमी जा रही है, नवमी आ रही है।

इसी बीच के पल में, कथा कहती है, देवी के माथे से एक और देवी निकली थीं।

एक सौ आठवाँ दीया जलता है। और पूरा पंडाल रोशनी से भर जाता है।

2027 में कब

दुर्गा अष्टमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़7 अक्टूबर, गुरुवार

तिथिआश्विन शुक्ल अष्टमी7 अक्टूबर, सुबह 4:14 से 8 अक्टूबर, सुबह 6:28 तक

नक्षत्रपूर्वाषाढ़ासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:17

सूर्यास्तशाम 6:01

चंद्रोदयदोपहर 1:11

संधि पूजा
8 अक्टूबर, सुबह 6:04 से सुबह 6:52 तकअष्टमी के आख़िरी चौबीस मिनट और नवमी के पहले चौबीस मिनट।

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शुभकामना

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पहचान

दुर्गा अष्टमी क्या है

दुर्गा अष्टमी, जिसे महा अष्टमी भी कहते हैं, आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की आठवीं तिथि है, शारदीय नवरात्रि का आठवाँ दिन। इस दिन नवदुर्गा में महागौरी की पूजा होती है। उत्तर भारत में यह कन्या पूजन का बड़ा दिन है, और कई लोग इसी दिन नवरात्रि का व्रत खोलते हैं। बंगाल की दुर्गा पूजा में यह पुष्पांजलि का दिन है, और अष्टमी के आख़िरी चौबीस मिनट और नवमी के पहले चौबीस मिनट, कुल अड़तालीस मिनट में संधि पूजा होती है। उसका समय इस पन्ने पर ऊपर दिया है।

कथा

दुर्गा अष्टमी की कथा

देवी माहात्म्य में, जो मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है, शुंभ और निशुंभ नाम के दो असुर भाइयों की कथा है। उस लड़ाई के बीच उनके दो सेनापति, चंड और मुंड, सेना लेकर देवी के सामने आए। तब देवी के माथे से एक और देवी निकलीं: काली।

काली ने उस सेना को तहस नहस कर दिया, और चंड और मुंड दोनों को मार डाला। तब देवी ने उनसे कहा: तुम चंड और मुंड को लेकर आई हो, इसलिए दुनिया तुम्हें चामुंडा के नाम से जानेगी। बंगाल में मान्यता है कि यह लड़ाई ठीक उस पल हुई जब अष्टमी ख़त्म हो रही थी और नवमी शुरू हो रही थी। इसी पल को संधि क्षण कहते हैं, और संधि पूजा देवी के इसी चामुंडा रूप के प्रकट होने की याद है। एक सौ आठ कमल और एक सौ आठ दीये इसी पूजा के लिए जुटाए जाते हैं।

और इसी दिन जिस महागौरी की पूजा होती है, उनकी कथा अलग है। कहते हैं जब शिव ने उन्हें गंगाजल से नहलाया, तो वे एकदम उजली हो गईं, इसीलिए नाम पड़ा महागौरी। यह रूप शांति का, और मन के साफ़ होने का माना जाता है।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में दुर्गा अष्टमी

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

कृत्तिवासी रामायण

बांग्ला · Krittivasi Ramayan

कृत्तिवासी रामायण में लंका की रखवाली करने वाली लंकिनी नहीं हैं, ख़ुद देवी चामुंडा हैं। और वे हनुमान का नाम सुनते ही बिना लड़े लंका छोड़कर कैलास चली जाती हैं। यानी जिस चामुंडा की अष्टमी की संधि पूजा में एक सौ आठ दीयों से आराधना होती है, बांग्ला की इस रामकथा में वही लंका के द्वार पर खड़ी हैं, और राम के दूत के आते ही रास्ता छोड़ देती हैं।

कहाँ कैसे

दुर्गा अष्टमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • बंगाल के पंडाल

    सुबह पुष्पांजलि होती है, जिसे बंगाल में अंजलि भी कहते हैं: लोग हाथों में फूल लेकर मंत्रों के साथ मिलकर देवी को चढ़ाते हैं। फिर संधि क्षण पर संधि पूजा, ढाक के साथ।

  • उत्तर भारत के घर

    छोटी बच्चियों को देवी का रूप मानकर घर बुलाया जाता है, उन्हें हलवा, पूरी और चना खिलाया जाता है और तोहफ़े दिए जाते हैं। कई घर इसी के बाद व्रत खोलते हैं।

  • केरल

    अष्टमी की शाम पूजा वेप्पु होती है: किताबें, क़लम और औज़ार देवी के आगे रख दिए जाते हैं, और सरस्वती पूजा शुरू होती है।

रीत

दुर्गा अष्टमी के दिन क्या करते हैं

  1. सुबह महागौरी की पूजा होती है।
  2. बंगाल में पंडालों में पुष्पांजलि होती है, फूल और मंत्र के साथ।
  3. अष्टमी और नवमी के मिलन के अड़तालीस मिनट में संधि पूजा होती है।
  4. संधि पूजा में एक सौ आठ मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं और एक सौ आठ कमल चढ़ाए जाते हैं।
  5. उत्तर भारत में कन्या पूजन होता है: बच्चियों को देवी मानकर खिलाया जाता है और तोहफ़े दिए जाते हैं।
  6. बहुत से लोग नवरात्रि का व्रत इसी दिन कन्या पूजन के बाद खोलते हैं।

रसोई

दुर्गा अष्टमी का खाना

  • हलवा कन्या पूजन में बच्चियों को परोसा जाने वाला मीठा।
  • पूरी हलवे के साथ।
  • चना कन्या पूजन की थाली का तीसरा हिस्सा, हलवे और पूरी के साथ।

सवाल जवाब

दुर्गा अष्टमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

दुर्गा अष्टमी 2027 कब है?

दुर्गा अष्टमी 2027 में 7 अक्टूबर, गुरुवार को है। आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि 7 अक्टूबर, सुबह 4:14 से 8 अक्टूबर, सुबह 6:28 तक है। संधि पूजा 8 अक्टूबर, सुबह 6:04 से सुबह 6:52 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

संधि पूजा क्या है?

अष्टमी के आख़िरी चौबीस मिनट और नवमी के पहले चौबीस मिनट, यानी कुल अड़तालीस मिनट में होने वाली पूजा। मान्यता है कि इसी पल देवी के चामुंडा रूप ने चंड और मुंड को मारा था।

संधि पूजा में एक सौ आठ दीये और कमल क्यों?

यह संधि पूजा की पुरानी रीत है, और एक सौ आठ की गिनती को देवी के एक सौ आठ नामों से जोड़ा जाता है। इसलिए एक सौ आठ मिट्टी के दीये जलते हैं और एक सौ आठ कमल चढ़ते हैं।

कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?

दोनों दिन होता है। उत्तर भारत में बहुत से घर अष्टमी को कन्या पूजन करके व्रत खोलते हैं, और कुछ घर नवमी को।

दुर्गा अष्टमी को किस देवी की पूजा होती है?

नवदुर्गा के आठवें रूप, महागौरी की।

चामुंडा नाम कैसे पड़ा?

चंड और मुंड नाम के दो असुरों को मारने से। देवी माहात्म्य की कथा में काली ने इन दोनों को मारा, और तब देवी ने उन्हें चामुंडा नाम दिया।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Maha Ashtami significance and Sandhi Puja vidhi, Shubh Panchangतिथि, अड़तालीस मिनट, एक सौ आठ दीये और कमल, कन्या पूजन, महागौरी, पुष्पांजलि
  2. Durga Puja, Wikipediaअष्टमी की पुष्पांजलि, संधि पूजा में चामुंडा की याद
  3. Devi Mahatmya, Wikipediaदेवी के माथे से काली, चंड और मुंड का अंत
  4. Akaal Bodhan, Bharatpediaसंधि क्षण में चंड मुंड का वध
  5. Navaratri, Wikipediaसंधि पूजा के दीये, कन्या पूजन, केरल में अष्टमी को किताबें
  6. Nava Durga: the nine forms, SmartPujaमहागौरी और गंगाजल
  7. Saraswati Puja in Kerala, HinduPadदुर्गाष्टमी की शाम पूजा वेप्पु
  8. Significance of offering 108 lotuses to Maa Durga, Boldskyएक सौ आठ फूल और देवी के एक सौ आठ नाम

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।