उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027
ईद उल अज़हा 2027
Eid ul Adha (Bakrid) 2027
एक बाप का सपना, और एक बेटे का जवाब: अब्बा, जो हुक्म है वही कीजिए।
ईद उल अज़हा 2027 में 17 मई, सोमवार को होने की उम्मीद है। पक्की तारीख़ चाँद दिखने पर तय होती है, इसलिए एक दिन आगे पीछे हो सकती है।
दरवाज़े पर दस्तक।
बाहर पड़ोस का एक लड़का खड़ा है, हाथ में कपड़े से ढका एक कटोरदान।
अम्मी ने भेजा है, वह कहता है, और कटोरदान आगे बढ़ा देता है।
सुबह ईदगाह से लौटे लोगों के कपड़े अब भी कलफ़ से कड़क हैं।
आज दिन भर यही चलेगा। एक हिस्सा घर में रहेगा। एक रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाएगा। एक उनके घर, जिनके यहाँ आज चूल्हा मुश्किल से जलता।
गली के एक सिरे से दूसरे तक कटोरदान आ जा रहे हैं।
और हर हिस्से के पीछे एक पुरानी बात है: एक बाप ने सपना देखा था, और बेटे ने कहा था, आप मुझे सब्र करने वालों में पाएँगे।
2027 में कब
ईद उल अज़हा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़17 मई, सोमवार
नक्षत्रहस्तसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:30
सूर्यास्तशाम 7:06
चंद्रोदयशाम 4:17
भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची में ईद उल अज़हा 17 मई को है, चाँद के हिसाब से इसमें एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है।
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शुभकामना
ईद उल अज़हा का शुभकामना कार्ड

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पहचान
ईद उल अज़हा क्या है
ईद उल अज़हा, जिसे भारत में बकरीद कहते हैं, इस्लामी कैलेंडर के आख़िरी महीने ज़िल हिज्जा की दसवीं तारीख़ को होती है। यह हज के दिनों में आती है, जब दुनिया भर से मुसलमान मक्का पहुँचते हैं। इसे क़ुर्बानी की ईद कहते हैं: यह हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की उस फ़रमाँबरदारी की याद है, जब वे अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे को क़ुर्बान करने को तैयार हो गए थे। इस्लामी महीना नया चाँद दिखने से शुरू होता है, इसलिए हिसाब से निकाली गई तारीख़ चाँद के हिसाब से एक दिन आगे पीछे हो सकती है।
कथा
ईद उल अज़हा की कथा
यह वाक़िआ क़ुरआन की सूरह अस साफ़्फ़ात (सूरह 37, आयत 102 से 107) में है। हज़रत इब्राहीम का बेटा जब इतना बड़ा हुआ कि बाप के साथ काम में दौड़ धूप कर सके, तब इब्राहीम ने उससे कहा: बेटे, मैंने सपने में देखा है कि मैं तुम्हें क़ुर्बान कर रहा हूँ। अब तुम सोचकर बताओ, तुम्हारी क्या राय है?
बेटे ने जवाब दिया: يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ (सूरह 37, आयत 102)। मतलब: अब्बा, आपको जो हुक्म मिला है, वही कीजिए। अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे सब्र करने वालों में पाएँगे।
फिर जब दोनों ने हुक्म के आगे सिर झुका दिया, और इब्राहीम ने बेटे को माथे के बल लिटा दिया, तभी पुकार आई: ऐ इब्राहीम, तुमने अपना सपना सच कर दिखाया। हम नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला देते हैं। सच में यह एक खुली आज़माइश थी। और हमने एक बड़ी क़ुर्बानी देकर उस बेटे को छुड़ा लिया (आयत 103 से 107)।
क़ुरआन इन आयतों में बेटे का नाम नहीं लेता; आम तौर पर मुसलमान उन्हें हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) मानते हैं। परंपरा में कहा जाता है कि बेटे की जगह एक मेंढा आ गया। इसी याद में आज भी जिनकी हैसियत है, वे ईद की नमाज़ के बाद भेड़ या बकरे की क़ुर्बानी करते हैं, और उसका गोश्त तीन हिस्सों में बाँटते हैं, ताकि अपने साथ दूसरों का भी हिस्सा रहे।
कहाँ कैसे
ईद उल अज़हा: कहाँ और कैसे
ईदगाहें और मस्जिदें
सुबह ईद की नमाज़ होती है, फिर ख़ुत्बा। लोग अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनकर आते हैं और नमाज़ के बाद गले मिलते हैं।
दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद और मुंबई
ईद से पहले के दिनों में बकरों की मंडियाँ भर जाती हैं और बाज़ारों में देर तक चहल पहल रहती है।
केरल
अमन और ख़ुशहाली की ख़ास दुआएँ, ईद की नमाज़, आलिमों के ख़ुत्बे, तोहफ़ों का लेन देन, और दोस्तों व ज़रूरतमंदों को खाना खिलाना इस दिन की पहचान है।
घर और मोहल्ले
क़ुर्बानी का गोश्त तीन हिस्सों में बँटता है, और एक हिस्सा मोहल्ले के ज़रूरतमंदों तक पहुँचाया जाता है। मेहमानों को घर बुलाकर खाना खिलाया जाता है।
रीत
ईद उल अज़हा के दिन क्या करते हैं
- सुबह घर के सब लोग अपने सबसे अच्छे या नए कपड़े पहनते हैं।
- ईदगाह या मस्जिद में ईद की नमाज़ पढ़ी जाती है, फिर ख़ुत्बा होता है।
- नमाज़ के बाद लोग गले मिलते हैं और ईद मुबारक कहते हैं।
- जिनकी हैसियत है, वे नमाज़ के बाद भेड़ या बकरे की क़ुर्बानी करते हैं।
- गोश्त के तीन हिस्से होते हैं: एक घर के लिए, एक रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के लिए, और एक ग़रीबों और ज़रूरतमंदों के लिए।
- दान और ज़रूरतमंदों की मदद इस दिन का बड़ा हिस्सा है।
- घर पर दावत होती है, और हर धर्म के मेहमानों को खाने पर बुलाया जाता है।
रसोई
ईद उल अज़हा का खाना
- मटन बिरयानी दावत की सबसे जानी मानी थाली।
- मटन क़ोरमा और क़ीमा घर घर पकने वाले सालन।
- भुनी कलेजी ईद के दिन का एक ख़ास पकवान।
- शीर ख़ुरमा और खीर खाने के बाद का मीठा।
सवाल जवाब
ईद उल अज़हा 2027: पूछे जाने वाले सवाल
ईद उल अज़हा 2027 कब है?
ईद उल अज़हा 2027 में 17 मई, सोमवार को होने की उम्मीद है। पक्की तारीख़ चाँद दिखने पर तय होती है, इसलिए एक दिन आगे पीछे हो सकती है।
बकरीद क्यों मनाते हैं?
यह हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की याद है, जो अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे को क़ुर्बान करने को तैयार हो गए थे। अल्लाह ने बेटे को एक बड़ी क़ुर्बानी के बदले छुड़ा लिया, यह क़ुरआन की सूरह 37 में है।
क़ुर्बानी का गोश्त कितने हिस्सों में बाँटते हैं?
तीन हिस्सों में: एक हिस्सा अपने घर के लिए, एक रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के लिए, और एक ग़रीबों और ज़रूरतमंदों के लिए।
ईद उल अज़हा का हज से क्या रिश्ता है?
ईद उल अज़हा ज़िल हिज्जा की दसवीं तारीख़ को होती है, जो हज के दिनों में पड़ती है। उस वक़्त दुनिया भर से हाजी मक्का में होते हैं।
क़ुरआन में इब्राहीम और उनके बेटे का वाक़िआ कहाँ है?
सूरह अस साफ़्फ़ात में, सूरह 37 की आयत 102 से 107 तक। वहाँ बेटा कहता है: अब्बा, आपको जो हुक्म मिला है, वही कीजिए।
क्या बकरीद की तारीख़ भी चाँद से तय होती है?
हाँ। ज़िल हिज्जा का महीना नया चाँद दिखने से शुरू होता है, और उसकी दसवीं तारीख़ को ईद होती है। इसलिए तारीख़ एक दिन आगे पीछे हो सकती है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Surah As-Saffat, verse 102, Quran.comआयत 102 का अरबी पाठ और मतलब
- Quran, Surah 37, verses 102 to 108, Sahih International, legacy.quran.comआयत 102 से 107 का पूरा क्रम
- Eid ul Adha, Incredible India (Ministry of Tourism)ज़िल हिज्जा की दसवीं, हज, नमाज़, गोश्त के तीन हिस्से, पकवान
- Bakrid, Kerala Tourism 1000 festivalsहज़रत इस्माईल का नाम, तीन हिस्से, केरल में दुआ और दावत
- Eid ul Adha: significance of Bakrid, Business Todayआख़िरी महीना, हज, ईदगाह की नमाज़, बकरों की मंडियाँ
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।