उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · वैशाख पूर्णिमा
बुद्ध पूर्णिमा 2027
Buddha Purnima 2027
एक पूरा चाँद, और उसके नीचे तीन बातें: जन्म, जागना, जाना।
बुद्ध पूर्णिमा 2027 में 20 मई, गुरुवार को है। वैशाख पूर्णिमा तिथि 19 मई, शाम 4:03 से 20 मई, शाम 4:29 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
एक पत्ता गिरता है। दिल जैसी शक्ल, आगे एक लंबी पतली नोक।
नीचे पत्थर पर लोग चल रहे हैं, धीरे, घड़ी की सुई की दिशा में, पेड़ के चारों ओर।
कोई आँखें मूँदे छाँव में चुपचाप टिका है। उसके होंठ भी नहीं हिलते।
एक भिक्षु आगे आते हैं। कुछ फूल रखते हैं, फिर एक मोमबत्ती जलाते हैं।
ऊपर अभी पूरा चाँद नहीं निकला। पर सबको पता है, आज निकलेगा।
कहते हैं, इसी पेड़ के नीचे एक आदमी ने कई दिन ध्यान किया, और फिर जाग गया।
और यही चाँद, परंपरा कहती है, उसके जन्म की रात भी था, और उसके जाने की रात भी।
2027 में कब
बुद्ध पूर्णिमा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़20 मई, गुरुवार
तिथिवैशाख पूर्णिमा19 मई, शाम 4:03 से 20 मई, शाम 4:29 तक
नक्षत्रविशाखासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:28
सूर्यास्तशाम 7:08
चंद्रोदयशाम 7:19
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
बुद्ध पूर्णिमा क्या है
बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वेसाक भी कहते हैं, वैशाख महीने की पूर्णिमा को आती है, जो अंग्रेज़ी कैलेंडर में ज़्यादातर अप्रैल या मई में पड़ती है। बौद्ध परंपरा, ख़ासकर थेरवाद, इसे तीन बार धन्य दिन कहती है, क्योंकि भगवान बुद्ध के जीवन की तीन बड़ी घटनाएँ इसी पूरे चाँद से जुड़ी मानी जाती हैं: लुंबिनी में जन्म, बोधगया में बोधि, यानी जागना, और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण, यानी देह छोड़कर आख़िरी मुक्ति। 1999 में संयुक्त राष्ट्र ने भी इस दिन को मान्यता दी, और भारत में इस दिन सरकारी छुट्टी होती है।
कथा
बुद्ध पूर्णिमा की कथा
बौद्ध कथा है कि लुंबिनी में, जो आज नेपाल में है, एक राजकुमार का जन्म हुआ। उसका नाम था सिद्धार्थ गौतम। बरसों बाद, अपनी खोज में चलते चलते, वे बोधगया पहुँचे।
वहाँ वे एक पेड़ के नीचे ध्यान में टिक गए, कई दिनों तक। और वैशाख की पूर्णिमा को उन्हें बोधि हुई, वह जागना जिसके बाद वे बुद्ध कहलाए। वह पेड़ आज बोधि वृक्ष कहलाता है, और उसके पास का महाबोधि मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर में गिना जाता है। वहाँ से बुद्ध सारनाथ गए, बनारस के पास, और अपना पहला उपदेश दिया। इसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहते हैं, यानी धर्म का पहिया घुमाना।
अस्सी बरस की उमर में वे कुशीनगर पहुँचे, मल्लों के साल वन में। उन्होंने अपने शिष्य आनंद से कहा, दो साल के पेड़ों के बीच मेरे लिए बिस्तर लगा दो, और कुशीनगर के मल्लों को ख़बर कर दो। परंपरा कहती है कि वहीं, वैशाख की पूर्णिमा को, उन्होंने देह छोड़ी।
पालि परंपरा में महापरिनिब्बान की कथा में उनके आख़िरी शब्द यूँ आते हैं: हन्द दानि भिक्खवे आमन्तयामि वो: वयधम्मा सङ्खारा, अप्पमादेन सम्पादेथ। इसका अर्थ है: सुनो भिक्षुओ, मैं तुमसे कहता हूँ, जो कुछ भी बना है, वह बिखरता है। लगन से, बिना ढील दिए, अपना रास्ता पूरा करो।
कहाँ कैसे
बुद्ध पूर्णिमा: कहाँ और कैसे
बोधगया, बिहार
दुनिया भर से बौद्ध यहाँ महाबोधि मंदिर और बोधि वृक्ष तक आते हैं। लोग पेड़ के नीचे ध्यान करते हैं और घड़ी की सुई की दिशा में उसकी परिक्रमा करते हैं।
सारनाथ, उत्तर प्रदेश
जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया। इस दिन लोग धमेख स्तूप के पास प्रार्थना और ध्यान के लिए जुटते हैं।
कुशीनगर, उत्तर प्रदेश
जहाँ, परंपरा के अनुसार, बुद्ध ने दो साल के पेड़ों के बीच देह छोड़ी। इस दिन यहाँ, और नालंदा और राजगीर में भी, बहुत लोग जुटते हैं।
सिक्किम, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर बंगाल और महाराष्ट्र
मंदिर और विहार सजते हैं, बुद्ध के जागने की याद में लालटेनें जलती हैं, और कई विहार हर आने वाले को मुफ़्त खाना और चाय देते हैं।
थाईलैंड
यहाँ लालटेनें और रोशनी इस दिन की पहचान हैं, और लोग करुणा और आज़ादी के निशान के रूप में पिंजरों के पक्षी आज़ाद करते हैं।
रीत
बुद्ध पूर्णिमा के दिन क्या करते हैं
- सुबह बौद्ध मंदिरों और विहारों में प्रार्थना और ध्यान से दिन शुरू होता है।
- मंदिर और विहार सजाए जाते हैं, और बुद्ध के जागने की याद में दीये और लालटेनें जलाई जाती हैं।
- लोग सुत्त पढ़ते हैं, यानी बुद्ध के उपदेश, और मिलकर उनका पाठ करते हैं।
- पूजा की जगह पर फूल, फल और मोमबत्तियाँ रखी जाती हैं।
- भिक्षुओं और ग़रीबों के लिए खाना ले जाया जाता है।
- बोधगया में लोग बोधि वृक्ष की परिक्रमा घड़ी की सुई की दिशा में करते हैं।
- कुछ लोग व्रत रखते हैं, और ज़रूरतमंदों को खाना, कपड़े या पैसे देते हैं।
- कुछ जगह पिंजरों के पक्षी आज़ाद किए जाते हैं, करुणा के निशान के रूप में।
सवाल जवाब
बुद्ध पूर्णिमा 2027: पूछे जाने वाले सवाल
बुद्ध पूर्णिमा 2027 कब है?
बुद्ध पूर्णिमा 2027 में 20 मई, गुरुवार को है। वैशाख पूर्णिमा तिथि 19 मई, शाम 4:03 से 20 मई, शाम 4:29 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?
बौद्ध परंपरा के अनुसार वैशाख की इसी पूर्णिमा से भगवान बुद्ध का जन्म, उनकी बोधि और उनका महापरिनिर्वाण, तीनों जुड़े हैं। इसलिए इसे तीन बार धन्य दिन कहते हैं।
वेसाक क्या है?
वेसाक बुद्ध पूर्णिमा का ही दूसरा नाम है। 1999 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मान्यता दी।
भगवान बुद्ध को ज्ञान कहाँ मिला था?
बोधगया, बिहार में, बोधि वृक्ष के नीचे। वहीं आज महाबोधि मंदिर है।
भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश कहाँ दिया?
सारनाथ में, बनारस के पास। इसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहते हैं, यानी धर्म का पहिया घुमाना।
भगवान बुद्ध के आख़िरी शब्द क्या थे?
पालि में: वयधम्मा सङ्खारा, अप्पमादेन सम्पादेथ। यानी जो कुछ भी बना है, वह बिखरता है; लगन से, बिना ढील दिए, अपना रास्ता पूरा करो।
भगवान बुद्ध ने देह कहाँ छोड़ी?
कुशीनगर में, मल्लों के साल वन में, दो साल के पेड़ों के बीच। परंपरा के अनुसार तब उनकी उमर अस्सी बरस थी।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Vesak Celebration, Drishti IASतीन बार धन्य दिन, लुंबिनी, बोधगया, कुशीनगर, सारनाथ का पहला उपदेश, संयुक्त राष्ट्र की मान्यता, छुट्टी
- Budh Purnima: Celebrating the Enlightened One, Memerakiलुंबिनी, बोधि वृक्ष के नीचे कई दिन ध्यान, परिक्रमा, धमेख स्तूप, अस्सी बरस, दान, पक्षी आज़ाद करना
- Buddha Purnima, ELINEPAवैशाख पूर्णिमा, सजावट, लालटेनें, मुफ़्त खाना और चाय, सुत्त पाठ, भारत की जगहें
- Mahaparinirvana, Buddha Tooth Relic Templeसाल वन, दो साल के पेड़, आनंद, आख़िरी शब्द पालि में
- Maha Parinibbana: the passing away of Lord Buddha on a full moon night, Sunday Timesवैशाख की पूर्णिमा को देह छोड़ना, कुशीनगर, आनंद
- Atthami Bucha, Thailand Foundationआख़िरी शब्दों का पूरा पालि वाक्य और उसका अर्थ
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।