पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आश्विन अमावस्या

महालया 2027

Mahalaya 2027

अँधेरे में एक रेडियो बजता है, और देवी के आने की ख़बर फैल जाती है।

महालया 2027 में 29 सितंबर, बुधवार को है। आश्विन अमावस्या तिथि 29 सितंबर, सुबह 10:56 से 30 सितंबर, सुबह 8:06 तक है। श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:35 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

अमावस्या: उस रात आकाश में चाँद नहीं

अभी रात है। घड़ी की सुइयाँ भी ठीक से नहीं दिखतीं।

किसी घर में रेडियो की खरखराहट होती है। फिर एक गहरी, धीमी आवाज़।

फिर संस्कृत के श्लोक, धीरे धीरे, जैसे कोई दूर से पुकार रहा हो।

बगल के घर में भी वही आवाज़। फिर उसके बगल में भी।

पूरी गली एक ही आवाज़ सुनकर जाग रही है।

उजाला होगा तो लोग घाट जाएँगे, पुरखों को जल देने।

एक पखवाड़ा पुरखों का ख़त्म हुआ। अब देवी का शुरू होगा।

2027 में कब

महालया 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़29 सितंबर, बुधवार

तिथिआश्विन अमावस्या29 सितंबर, सुबह 10:56 से 30 सितंबर, सुबह 8:06 तक

नक्षत्रउत्तरा फाल्गुनीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:13

सूर्यास्तशाम 6:10

चंद्रोदयसुबह 5:09

कुतुप मुहूर्त
सुबह 11:48 से दोपहर 12:35 तकदिन का आठवाँ मुहूर्त, श्राद्ध के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
रौहिण मुहूर्त
दोपहर 12:35 से दोपहर 1:23 तकदिन का नौवाँ मुहूर्त।
अपराह्न
दोपहर 1:23 से दोपहर 3:47 तकदिन के पाँच हिस्सों में चौथा।
पितृ पक्ष
16 से 29 सितंबरपूरा काल।

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पहचान

महालया क्या है

महालया उस अमावस्या का नाम है जिस पर पितृ पक्ष ख़त्म होता है। अमांत गिनती में यह भादों की अमावस्या है, और पूर्णिमांत गिनती में आश्विन की। इसे सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या कहते हैं, और यह सब पुरखों के लिए है, चाहे उनका देहांत किसी भी तिथि को हुआ हो। जिसका श्राद्ध पखवाड़े में छूट गया, वह इस दिन किया जा सकता है। बंगाल में यही दिन देवी पक्ष की शुरुआत है, और दुर्गा पूजा की गिनती यहीं से शुरू हो जाती है।

कथा

महालया की कथा

महालया की भोर में बंगाल के घरों में जो सुनाई देता है, वह चंडी पाठ है, यानी देवी माहात्म्य के श्लोक। यह मार्कंडेय पुराण के इक्यासीवें से तिरानवेवें अध्याय तक का हिस्सा है, सात सौ श्लोकों का, इसलिए इसे दुर्गा सप्तशती भी कहते हैं। इसमें कथा है कि महिषासुर से परेशान देवताओं ने अपना अपना तेज एक जगह जोड़ा, और उस तेज ने एक स्त्री का रूप ले लिया, बहुत सी बाँहों वाली। हर देवता ने उन्हें अपना हथियार दिया: चक्र, शंख, धनुष, बाण, तलवार, त्रिशूल, ढाल, गदा, कमल और पाश। हिमालय ने उन्हें सवारी के लिए शेर दिया।

बंगाल में कहते हैं कि महालया पर देवी दुर्गा कैलास से धरती की ओर चल पड़ती हैं। उसी दिन मूर्तिकार मिट्टी की मूर्तियों पर आँखें बनाते हैं, जिसे चक्षुदान कहते हैं, यानी आँखों का दान। मान्यता है कि आँखें बनते ही मूर्ति में देवी उतर आती हैं।

और पुरखों की बात भी उतनी ही पुरानी है। पितृ पक्ष के सोलह दिनों में जिसका जो दिन था, उसका श्राद्ध हुआ। अमावस्या उन सबके लिए है जिनकी तिथि किसी को याद नहीं। कहते हैं इस दिन का श्राद्ध उतना ही पुण्य देता है जितना गया में किया गया श्राद्ध।

कहाँ कैसे

महालया कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • कोलकाता के घाट

    हुगली के किनारे के घाटों पर भोर से लोग तर्पण करते हैं, यानी पुरखों के नाम से हाथ से जल छोड़ते हैं। शहर के अठारह घाटों पर इतनी भीड़ होती है कि वहाँ ख़ास इंतज़ाम करने पड़ते हैं।

  • बंगाल के घर

    भोर से पहले घर जागते हैं और रेडियो पर महिषासुरमर्दिनी सुनते हैं। यह कार्यक्रम आकाशवाणी कोलकाता से 1931 से हर महालया पर आता है, लगभग डेढ़ घंटे का, जिसमें दुर्गा सप्तशती के संस्कृत श्लोक, बांग्ला भक्ति गीत और देवी के धरती पर आने की कथा है।

  • मूर्तिकारों की कार्यशालाएँ

    गंगा की मिट्टी से बनी मूर्तियों पर इसी दिन आँखें बनाई जाती हैं। इसे चक्षुदान, बांग्ला में चोखु दान, कहते हैं।

  • पूरे देश में नदियों के किनारे

    जहाँ भी पितृ पक्ष माना जाता है, वहाँ यह सर्वपितृ अमावस्या है, सब पुरखों के श्राद्ध और तर्पण का दिन।

रीत

महालया के दिन क्या करते हैं

  1. भोर से पहले जागकर चंडी पाठ सुना जाता है, बहुत से घरों में रेडियो पर महिषासुरमर्दिनी।
  2. नदी या तालाब पर जाकर पुरखों के नाम से तर्पण किया जाता है।
  3. जिनका श्राद्ध पितृ पक्ष में छूट गया, या जिनकी तिथि याद नहीं, उनका श्राद्ध आज होता है।
  4. घर पर और पूजा मंडपों में भी पुरखों के लिए अन्न और जल अर्पित होता है।
  5. मूर्तिकार देवी की मूर्ति पर आँखें बनाते हैं, यह चक्षुदान है।
  6. इसी दिन से देवी पक्ष शुरू माना जाता है, और षष्ठी से दुर्गा पूजा के पाँच दिन चलते हैं।

सवाल जवाब

महालया 2027: पूछे जाने वाले सवाल

महालया 2027 कब है?

महालया 2027 में 29 सितंबर, बुधवार को है। आश्विन अमावस्या तिथि 29 सितंबर, सुबह 10:56 से 30 सितंबर, सुबह 8:06 तक है। श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:35 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

महालया क्या है?

महालया वह अमावस्या है जिस पर पितृ पक्ष ख़त्म होता है। बंगाल में यह देवी पक्ष की शुरुआत और दुर्गा पूजा की आहट का दिन है।

महालया पर रेडियो पर क्या आता है?

आकाशवाणी पर भोर में महिषासुरमर्दिनी नाम का कार्यक्रम आता है, जो 1931 से चल रहा है। इसमें दुर्गा सप्तशती के श्लोक, भक्ति गीत और देवी के आने की कथा होती है।

चक्षुदान क्या होता है?

महालया पर मूर्तिकार दुर्गा की मिट्टी की मूर्ति पर आँखें बनाते हैं। मान्यता है कि आँखें बनते ही मूर्ति में देवी का वास होता है।

महालया पर तर्पण क्यों करते हैं?

यह पितृ पक्ष का आख़िरी दिन है, सब पुरखों के लिए। जिनकी तिथि याद नहीं या जिनका श्राद्ध छूट गया, उनके लिए इसी दिन तर्पण और श्राद्ध होता है।

क्या महालया पर दुर्गा पूजा शुरू हो जाती है?

पूरी तरह नहीं। महालया से देवी पक्ष और पूजा की तैयारी शुरू होती है, पर पूजा के मुख्य पाँच दिन षष्ठी से दशमी तक होते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Mahisasuramardini (radio programme), Wikipedia1931 से आकाशवाणी कोलकाता, भोर का समय, श्लोक, गीत और कथा
  2. Mahalaya being observed across West Bengal, News On AIRपितृ पक्ष का अंत, देवी पक्ष की शुरुआत, तर्पण
  3. People offer tarpan on Mahalaya, EastMojoकोलकाता के अठारह घाट, हुगली, चोखु दान
  4. Durga Puja in Kolkata, UNESCOमहालया पर मूर्तियों पर आँखें बनाना, गंगा की मिट्टी
  5. Pitru Paksha, Wikipediaसर्वपितृ अमावस्या, गया जितना फल, बंगाल में देवी का उतरना
  6. Durga, Wikipediaदेवताओं का तेज, हथियार, हिमालय का शेर
  7. Devi Mahatmya, Wikipediaमार्कंडेय पुराण के अध्याय, सात सौ श्लोक, दुर्गा सप्तशती
  8. Durga Puja, Wikipediaमहालया पर कैलास से देवी का आना, पुरखों को अन्न और जल

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।