पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · भाद्रपद शुक्ल तृतीया

हरतालिका तीज 2027

Hartalika Teej 2027

एक सहेली ने हाथ पकड़ा, और जंगल ने रास्ता दिया।

हरतालिका तीज 2027 में 3 सितंबर, शुक्रवार को है। भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 2 सितंबर, शाम 4:51 से 3 सितंबर, दोपहर 2:20 तक है। सुबह की पूजा का समय (प्रातः काल) सुबह 6:00 से सुबह 8:32 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

हरतालिका तीज का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 11 प्रतिशत रोशन

माँ, आज पानी भी नहीं?

माँ सिर हिलाती है। आज नहीं। कल सुबह, पूजा के बाद।

चौकी पर लाल कपड़ा बिछा है। उस पर नदी की गीली रेत से बनी तीन छोटी मूर्तियाँ: शिव, पार्वती, गणेश।

शिव के आगे बेलपत्र और धतूरा। पार्वती के आगे चूड़ियाँ, सिंदूर, मेहंदी।

रात गहरी होती जाती है। कोई सोता नहीं। भजन चलते रहते हैं।

बच्चा फिर पूछता है: हरतालिका का मतलब क्या?

माँ कहती है: जिसे सहेली ले गई। और फिर कथा शुरू होती है, जैसे हर बरस, जैसे हर घर में।

2027 में कब

हरतालिका तीज 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़3 सितंबर, शुक्रवार

तिथिभाद्रपद शुक्ल तृतीया2 सितंबर, शाम 4:51 से 3 सितंबर, दोपहर 2:20 तक

नक्षत्रहस्तसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:00

सूर्यास्तशाम 6:41

चंद्रोदयसुबह 8:36

प्रातः काल
सुबह 6:00 से सुबह 8:32 तकसूर्योदय के बाद दिन का पहला पाँचवाँ हिस्सा।

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कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

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शुभकामना

हरतालिका तीज का शुभकामना कार्ड

हरतालिका तीज का शुभकामना कार्ड: हरतालिका तीज की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

हरतालिका तीज क्या है

हरतालिका तीज भादों के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है, और इसमें हस्त नक्षत्र को शुभ माना जाता है। नाम तीन टुकड़ों से बना है: हरत यानी हर ले जाना, आलिका यानी सहेली, और तीज यानी तृतीया तिथि। यह सावन भादों की तीन बड़ी तीजों में आख़िरी है। सुहागिनें यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं, और कुँवारी लड़कियाँ शिव जैसे वर के लिए। व्रत निर्जल होता है: चौबीस घंटे न अन्न, न पानी, और यह अगली सुबह पूजा के बाद ही खुलता है। इसे गौरी तृतीया भी कहते हैं। यह सबसे ज़्यादा उत्तर भारत में, ख़ासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में, और नेपाल में रखा जाता है; गुजरात में इसे केवड़ा तीज और कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गौरी हब्बा कहते हैं।

कथा

हरतालिका तीज की कथा

व्रत की कथा में शिव ख़ुद पार्वती को उनका पिछला जन्म याद दिलाते हैं। तब तुम राजा हिमालय के घर शैलपुत्री बनकर जन्मी थीं, शिव कहते हैं। बचपन से ही तुमने मुझे पाने के लिए तप शुरू कर दिया था: पहले बारह बरस, फिर चौंसठ बरस और।

बेटी को ऐसे तप करते देख पिता की चिंता बढ़ती गई। तभी नारद मुनि आए और बोले कि वे विष्णु की ओर से विवाह का प्रस्ताव लाए हैं। यह बात सच नहीं थी, पर हिमालय राज मान गए। शैलपुत्री यह सुनकर अपनी एक सहेली के साथ घर से निकल गईं। दोनों घने जंगल में चली गईं, और नदी किनारे की एक गुफा में रहकर तप करती रहीं।

शिव उनके तप से ख़ुश हुए और उनसे विवाह का वचन दिया। अगले दिन, भादों के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, शैलपुत्री और उनकी सहेली ने शिव के लिए व्रत रखा। उधर हिमालय राज को लगा कि उनकी बेटी को कोई हर ले गया है। वे अपने लोगों के साथ ढूँढते हुए वहाँ पहुँचे। शैलपुत्री ने कहा: मैं घर तभी लौटूँगी जब आप मेरा विवाह शिव से करने का वचन देंगे। पिता ने वचन दिया।

सहेली उन्हें जंगल ले गई थी, और पिता ने इसे हरण समझा था, इसीलिए इस दिन का नाम हरतालिका पड़ा। एक कथन यह भी है कि पार्वती ने वहाँ अपने बालों से लिंग बनाकर शिव को पूजा था। कथा जो भी रूप ले, अंत एक ही है: तप पूरा हुआ, और शिव ने पार्वती को अपना लिया।

कहाँ कैसे

हरतालिका तीज कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • उत्तर प्रदेश और बिहार

    हरतालिका तीज का सबसे ज़्यादा चलन यहीं है। औरतें निर्जल व्रत रखती हैं, रेत या मिट्टी के शिव, पार्वती और गणेश बनाकर पूजती हैं, और रात भर जागकर कथा और भजन सुनती हैं।

  • नेपाल

    नेपाल के कई हिस्सों में भी यह तीज रखी जाती है।

  • गुजरात

    यहाँ इसे केवड़ा तीज कहते हैं, और औरतें भगवान को केवड़े के फूल चढ़ाती हैं।

  • कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु

    यहाँ यह गौरी हब्बा है, यानी गौरी का त्योहार। औरतें स्वर्ण गौरी व्रत रखती हैं और सुखी घर गृहस्थी के लिए माता गौरी से प्रार्थना करती हैं।

रीत

हरतालिका तीज के दिन क्या करते हैं

  1. पूजा की जगह साफ़ करके फूलों और रंगोली से सजाई जाती है, और लाल कपड़ा बिछाकर लकड़ी की चौकी रखी जाती है।
  2. नदी की रेत या मिट्टी से, कहीं काली मिट्टी से, शिव, पार्वती और गणेश की तीन मूर्तियाँ बनाकर चौकी पर रखी जाती हैं।
  3. पानी भरा कलश रखा जाता है, उसमें सुपारी और एक सिक्का।
  4. शिव को बेलपत्र, धतूरा, धोती और नींबू जैसा फल चढ़ता है; पार्वती को सुहाग की पिटारी, यानी चूड़ियाँ, सिंदूर और मेहंदी।
  5. औरतें नए कपड़े, हरे या लाल, पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और सोलह शृंगार करती हैं।
  6. कथा सुनी जाती है और आरती होती है; फिर रात भर जागरण, भजन और कीर्तन।
  7. सुबह आरती के बाद पार्वती को सिंदूर चढ़ाया जाता है, किसी ब्राह्मण को सुहाग की चीज़ें दी जाती हैं, और व्रत खुलता है।

रसोई

हरतालिका तीज का खाना

  • हलवा रात भर के जागरण और सुबह की पूजा के बाद इसी से व्रत खोला जाता है।

सवाल जवाब

हरतालिका तीज 2027: पूछे जाने वाले सवाल

हरतालिका तीज 2027 कब है?

हरतालिका तीज 2027 में 3 सितंबर, शुक्रवार को है। भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 2 सितंबर, शाम 4:51 से 3 सितंबर, दोपहर 2:20 तक है। सुबह की पूजा का समय (प्रातः काल) सुबह 6:00 से सुबह 8:32 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

हरतालिका का मतलब क्या है?

हरत यानी हर ले जाना और आलिका यानी सहेली। कथा है कि पार्वती की सहेली उन्हें जंगल ले गई थी, और पिता ने इसे हरण समझा था, इसलिए इस दिन का नाम हरतालिका पड़ा।

हरतालिका तीज का निर्जल व्रत कैसे रखते हैं?

चौबीस घंटे न कुछ खाया जाता है, न पानी पिया जाता है। रात भर जागरण होता है, और व्रत अगली सुबह पूजा के बाद ही खुलता है।

हरतालिका तीज की पूजा में मूर्तियाँ किससे बनती हैं?

नदी की रेत या मिट्टी से शिव, पार्वती और गणेश की तीन छोटी मूर्तियाँ बनाई जाती हैं, और उन्हें लाल कपड़े वाली चौकी पर रखकर पूजा जाता है।

क्या कुँवारी लड़कियाँ हरतालिका तीज रख सकती हैं?

हाँ। सुहागिनें यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं, और कुँवारी लड़कियाँ शिव जैसा वर पाने के लिए।

गौरी हब्बा क्या है?

कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इसी दिन को गौरी हब्बा कहते हैं। औरतें स्वर्ण गौरी व्रत रखकर माता गौरी से सुखी घर गृहस्थी माँगती हैं।

हरतालिका तीज का व्रत कब और कैसे खोलते हैं?

अगली सुबह आरती करके पार्वती को सिंदूर चढ़ाया जाता है, और फिर हलवे से व्रत खोला जाता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Drik Panchang: Hartalika Vrat legendपूरी व्रत कथा: शैलपुत्री, नारद, सहेली, गुफा, पिता का वचन, नाम का अर्थ
  2. Bhakti Bharat: Hartalika Teejहस्त नक्षत्र, रेत और काली मिट्टी की मूर्तियाँ, जागरण, हलवे से पारण, केवड़ा तीज, गौरी हब्बा
  3. SmartPuja: Hartalika Teej pujaनिर्जल व्रत, पूजा विधि के क्रम, कलश, सुहाग पिटारी, कपड़े और शृंगार
  4. SmartPuja: Hartalika Teej puja muhurat and vrat vidhiचौबीस घंटे का निर्जल व्रत, सुबह पारण, जागरण
  5. R-Astro: Hartalika Teejनिर्जल व्रत, रेत या मिट्टी की मूर्तियाँ, हरी चूड़ियाँ, नाम का अर्थ
  6. eSamskriti: Teej, a delightful and colourful array of eventsउत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल; बालों से लिंग वाला कथन

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।