उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी
रामायण मास 2027
Ramayana Masam 2027
बारिश का पूरा एक महीना। और हर शाम, एक तोता थोड़ी सी कथा और कहता है।
रामायण मास 2027 में 17 जुलाई, शनिवार को है। आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी तिथि 16 जुलाई, शाम 4:35 से 17 जुलाई, शाम 6:49 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
छप्पर के किनारे से बारिश की धार गिर रही है। लगातार, बिना रुके।
भीतर पीतल का लंबा दीया जल रहा है। उसकी लौ हवा में ज़रा काँपती है।
दीये के आगे एक पोथी खुली है। बीच में कल की जगह पर एक धागा रखा है।
एक औरत धागा हटाती है और पढ़ना शुरू करती है, धीमे, गाकर।
कथा कोई आदमी नहीं सुना रहा। कथा में एक तोता बोल रहा है।
आज इतना ही। कल फिर इसी दीये के आगे, इसी बारिश में, अगला हिस्सा।
महीने के आख़िरी दिन कथा पूरी होगी। और अगले बरस, फिर पहले पन्ने से।
2027 में कब
रामायण मास 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़17 जुलाई, शनिवार
तिथिआषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी16 जुलाई, शाम 4:35 से 17 जुलाई, शाम 6:49 तक
नक्षत्रमूलसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:34
सूर्यास्तशाम 7:20
चंद्रोदयशाम 6:37
- रामायण मास (केरल)
- 17 जुलाई से 16 अगस्तपूरा काल।
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
रामायण मास क्या है
रामायण मास केरल में कर्किडकम महीने का नाम है। कर्किडकम मलयालम पंचांग का आख़िरी महीना है, और यह जुलाई अगस्त में, बरसात के बीच पड़ता है। पुराने समय में यह कठिन महीना माना जाता था: खेती का काम धीमा पड़ जाता था और बीमारियाँ ज़्यादा होती थीं। इसी महीने केरल के हिंदू घरों में हर शाम पीतल का दीया, निलविलक्कु, जलाकर सोलहवीं सदी के कवि तुंचत्तु एषुत्तच्छन की अध्यात्म रामायणम् किलिप्पाट्टु का एक हिस्सा पढ़ा जाता है, इस हिसाब से कि महीने के पहले दिन से आख़िरी दिन तक पूरी कथा हो जाए। इसी महीने राम और उनके तीन भाइयों के मंदिरों की नालम्बलम यात्रा होती है।
कथा
रामायण मास की कथा
एषुत्तच्छन की यह रामायण संस्कृत की अध्यात्म रामायण का मलयालम रूप है। अध्यात्म रामायण दर्शन की तरफ़ झुकी कथा है, जो शिव और पार्वती की बातचीत के रूप में चलती है, और जिसमें राम ब्रह्म हैं और सीता माया। एषुत्तच्छन ने इस कथा को एक नई शक्ल दी: इसे सुनाने वाला कोई आदमी नहीं, एक तोता है। इसी ढंग को किलिप्पाट्टु कहते हैं, तोते के मुँह से कही गई कथा।
इस कथा में अपनी कई बातें हैं। इसका सुंदरकांडम् अकेला कांड है जो कलकांचि नाम के छंद में है। और लंका के द्वार पर हनुमान को रोकने वाली का नाम यहाँ लंकालक्ष्मी है, और उसके हिस्से का नाम ही उसकी मुक्ति पर रखा गया है। लोक में मान्यता है कि जिस घर में कर्किडकम भर यह पाठ होता है, वहाँ बरसात की बीमारी और बुरा वक़्त नहीं टिकता।
नालम्बलम की कथा भी इसी महीने से जुड़ी है। केरल के लोक में कहते हैं कि राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की चार मूर्तियाँ समुद्र किनारे बहकर आईं। वक्कायिल कैमल नाम के एक सामंत को सपने में किसी ने समुद्र किनारे जाने को कहा, और वहाँ उन्हें ये मूर्तियाँ मिलीं। एक दूसरी कथा इन मूर्तियों को द्वारका से जोड़ती है, कृष्ण की उस नगरी से जो द्वापर के अंत में समुद्र में डूब गई। आज चारों भाई चार अलग मंदिरों में हैं, और कर्किडकम में एक ही दिन में, तय क्रम से, चारों के दर्शन की रीत है।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में रामायण मास
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु
मलयालम · Adhyatma Ramayanam Kilippattu
अध्यात्म रामायणम् किलिप्पाट्टु वही ग्रंथ है जो रामायण मास में घर घर पढ़ा जाता है, कर्किडकम के पहले दिन से आख़िरी दिन तक, थोड़ा थोड़ा रोज़। सोलहवीं सदी के तुंचत्तु एषुत्तच्छन की यह रचना मलयालम की वह कथा है जिसे एक तोता सुनाता है। इसका सुंदरकांडम् कलकांचि छंद में है, और लंका के द्वार पर पहरा देने वाली यहाँ लंकालक्ष्मी है।
अध्यात्म रामायण
संस्कृत · Adhyatma Ramayana
एषुत्तच्छन की रामायण की नींव संस्कृत की अध्यात्म रामायण है, जो शिव पार्वती के संवाद में चलती है और जिसमें राम ब्रह्म हैं और सीता माया। इसलिए केरल के घरों में जो रामकथा बरसात भर पढ़ी जाती है, वह भक्ति और दर्शन वाली कथा है: यहाँ लंका के द्वार पर रोकने वाली भी पहले से जानती है कि सीता जनक के घर जन्मी योगमाया हैं। इसका सुंदरकांड पाँच सर्गों का है।
कहाँ कैसे
रामायण मास कहाँ कैसे मनाया जाता है
केरल के घर
हर शाम निलविलक्कु के आगे परिवार जुटता है और अध्यात्म रामायणम् का एक हिस्सा पढ़ा जाता है, ताकि महीना ख़त्म होते होते पूरी कथा हो जाए।
केरल के मंदिर
पूरे महीने ख़ास पूजा, भजन और प्रवचन होते हैं, और रामायण का पाठ भी।
त्रिप्रयार, त्रिशूर
नालम्बलम यात्रा यहीं के श्रीराम मंदिर से शुरू होती है।
कूडलमाणिक्यम, इरिंजालकुडा
यात्रा का दूसरा पड़ाव भरत का मंदिर है। कूडलमाणिक्यम संस्कृत के संगमेश्वर का मलयालम रूप है।
तिरुमूषिक्कुलम, एर्णाकुलम
तीसरा पड़ाव लक्ष्मण का मंदिर है।
पायम्मल, इरिंजालकुडा के पास
आख़िरी पड़ाव शत्रुघ्न का मंदिर है। परंपरा यही है कि चारों मंदिर इसी क्रम में, एक ही दिन में देखे जाएँ।
रीत
रामायण मास के दिन क्या करते हैं
- कर्किडकम के पहले दिन से हर शाम निलविलक्कु, यानी पीतल का लंबा दीया, जलाया जाता है।
- दीये के आगे अध्यात्म रामायणम् किलिप्पाट्टु का उतना हिस्सा पढ़ा जाता है कि महीने के आख़िरी दिन कथा पूरी हो।
- घर घर राम का नाम और रामायण का पाठ सुनाई देता है।
- बरसात में शरीर को ताक़त देने के लिए जड़ी बूटियों वाली कर्किडक कंजी खाई जाती है।
- लोग भोर में उठते हैं, उपवास रखते हैं और विष्णु, शिव और भगवती के मंदिरों में जाते हैं।
- नालम्बलम यात्रा में त्रिप्रयार, कूडलमाणिक्यम, तिरुमूषिक्कुलम और पायम्मल के मंदिर इसी क्रम में, एक ही दिन में देखे जाते हैं।
रसोई
रामायण मास का खाना
- कर्किडक कंजी चावल, जड़ी बूटियों और मसालों से बना दवा जैसा दलिया, जो बरसात में रोग से बचाने के लिए खाया जाता है।
सवाल जवाब
रामायण मास 2027: पूछे जाने वाले सवाल
रामायण मास 2027 कब है?
रामायण मास 2027 में 17 जुलाई, शनिवार को है। आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी तिथि 16 जुलाई, शाम 4:35 से 17 जुलाई, शाम 6:49 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
कर्किडकम को रामायण मास क्यों कहते हैं?
क्योंकि इस पूरे महीने केरल के घरों में हर शाम रामायण का एक हिस्सा पढ़ा जाता है, और महीने के अंत तक पूरी कथा हो जाती है।
रामायण मास में कौन सी रामायण पढ़ी जाती है?
सोलहवीं सदी के कवि तुंचत्तु एषुत्तच्छन की अध्यात्म रामायणम् किलिप्पाट्टु, जो संस्कृत की अध्यात्म रामायण का मलयालम रूप है।
किलिप्पाट्टु का मतलब क्या है?
यह कथा कहने का वह ढंग है जिसमें कथा कोई आदमी नहीं, एक तोता सुनाता है। एषुत्तच्छन की रामायण इसी ढंग में है।
नालम्बलम यात्रा क्या है?
कर्किडकम में राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के चार मंदिरों के एक ही दिन में दर्शन: त्रिप्रयार, कूडलमाणिक्यम, तिरुमूषिक्कुलम और पायम्मल, इसी क्रम में।
कर्किडक कंजी क्या है?
चावल, जड़ी बूटियों और मसालों से बना दलिया, जो कर्किडकम की बरसात में सेहत के लिए खाया जाता है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Why Kerala reads the Ramayanam in Karkidakam, Deccan Chronicleरामायण मास, निलविलक्कु, रोज़ शाम का पाठ, महीने भर में पूरा, कठिन महीना, नालम्बलम
- Karkidakam begins in Kerala, Free Press Journalएषुत्तच्छन, कर्किडक कंजी, मंदिरों के भजन और प्रवचन, उपवास
- Nalambalam, Koodalmanikyam Devaswomचार मंदिर और उनका क्रम, कर्किडकम, संगमेश्वर नाम
- Nalampaladarshanam, Kerala Folkloreमूर्तियों की लोक कथा, वक्कायिल कैमल, द्वारका, पाठ से रक्षा की मान्यता
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।