पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · भाद्रपद शुक्ल पंचमी

नुआखाई 2027

Nuakhai 2027

नया धान पहले माँ का, फिर घर का।

नुआखाई 2027 में 5 सितंबर, रविवार को है। भाद्रपद शुक्ल पंचमी तिथि 4 सितंबर, दोपहर 12:26 से 5 सितंबर, सुबह 11:18 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

नुआखाई का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 28 प्रतिशत रोशन

आधी रात को बस रुकती है। दरवाज़ा खुलता है।

थैले उतरते हैं, बच्चे उतरते हैं, नींद में भी मुस्कुराते लोग उतरते हैं।

कोई शहर में नौकरी करता है, कोई और राज्य में। आज सब लौट रहे हैं।

आँगन लिपा हुआ है। कोठरी में नए धान की गंध है।

कल लगन की घड़ी पर नया चावल पहले माँ समलेश्वरी को जाएगा।

फिर घर का सबसे बड़ा आदमी सबको अपने हाथ से थोड़ा थोड़ा देगा।

और छोटे झुककर बड़ों के पाँव छुएँगे। इसी को यहाँ जुहार कहते हैं।

2027 में कब

नुआखाई 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़5 सितंबर, रविवार

तिथिभाद्रपद शुक्ल पंचमी4 सितंबर, दोपहर 12:26 से 5 सितंबर, सुबह 11:18 तक

नक्षत्रस्वातीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:01

सूर्यास्तशाम 6:39

चंद्रोदयसुबह 10:44

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।

Google कैलेंडर में जोड़ें

  • मुफ़्त
  • कोई साइन अप नहीं
  • नाम, नंबर या ईमेल नहीं
  • जब चाहें हटा दें

दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल · सिर्फ़ यह दिन

सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।

शुभकामना

नुआखाई का शुभकामना कार्ड

नुआखाई का शुभकामना कार्ड: नुआखाई की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

अपनों को नुआखाई की शुभकामनाएँ भेजिए, इस बरस की तारीख़ और उस दिन की बात के साथ। कार्ड पर QR कोड है, जिससे तारीख़, कथा और मुहूर्त भी साथ पहुँचते हैं।

WhatsApp पर भेजेंकार्ड डाउनलोड करें

फ़ोन पर बटन दबाते ही कार्ड सीधे WhatsApp में चला जाता है, बधाई और लिंक के साथ।

पहचान

नुआखाई क्या है

नुआखाई पश्चिमी ओड़िशा का खेती का त्योहार है, जिसमें मौसम का नया धान पहली बार खाया जाता है। संबलपुरी में नुआ का मतलब है नया, और खाई का मतलब है खाना। यह भादों यानी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है, गणेश चतुर्थी के अगले दिन। संबलपुर, बरगढ़, कालाहांडी, बलांगीर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, सुबर्णपुर, बौध और नुआपाड़ा में यह सबसे बड़ा दिन है, और पास के झारखंड के सिमडेगा और छत्तीसगढ़ में भी मनता है। पुजारी पंचांग देखकर लगन यानी शुभ घड़ी तय करते हैं, और उसी घड़ी पर नया अन्न पहले देवी को चढ़ता है। ओड़िशा सरकार इस दिन छुट्टी देती है।

कथा

नुआखाई की कथा

नुआखाई के पीछे किसी एक ग्रंथ की कथा नहीं है। यह खेत की कथा है। जो धान महीनों धूप और बारिश में पका, उसका पहला दाना अपने मुँह में डालने से पहले देवी को दिया जाता है। मान्यता है कि यह रीत पश्चिमी ओड़िशा के आदिवासी समाज से आई, और धीरे धीरे पूरे इलाक़े का त्योहार बन गई। इसलिए इसकी तैयारी में आदिवासी और हिंदू, दोनों रीतियाँ मिली हुई दिखती हैं।

लोक में कहते हैं कि इस त्योहार को पटना राज्य के पहले चौहान राजा रमई देव के समय बड़ा रूप मिला। पर कौन सी सदी, इस पर लिखने वाले एक नहीं हैं: कोई बारहवीं सदी कहता है, कोई चौदहवीं। इतना सब मानते हैं कि इसकी शुरुआत की ठीक बात समय में कहीं खो गई है।

संबलपुर में इसका केंद्र माँ समलेश्वरी का मंदिर है, जिन्हें संबलपुर की माँ कहा जाता है। लगन की घड़ी आती है तो मंदिर के मुख्य पुजारी नुआ अन्न, जिसे नबान्न भी कहते हैं, माँ को चढ़ाते हैं। उसके बाद ही घर घर में चूल्हे पर नया चावल पकता है। पहले माँ, फिर गाँव का देवता, फिर घर का देवता और लक्ष्मी, और फिर परिवार।

कहाँ कैसे

नुआखाई कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • संबलपुर

    समलेश्वरी मंदिर में लगन की घड़ी पर पहला भोग चढ़ता है, और पूरा शहर उसी घड़ी का इंतज़ार करता है। शाम को भेटघाट होता है, जहाँ लोग मिलते हैं और डालखाई और रसरकेली जैसे संबलपुरी नाच होते हैं।

  • बरगढ़, बलांगीर और कालाहांडी

    गाँवों में पहले गाँव के देवता के मंदिर में पूजा होती है, फिर घर में। बाहर काम करने गए बेटे बेटियाँ इसी दिन के लिए घर लौटते हैं।

  • सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, नुआपाड़ा और बौध

    यहाँ भी नए कपड़े पहनकर परिवार नया अन्न साथ खाता है, और बड़े छोटों को आशीर्वाद देते हैं।

  • झारखंड का सिमडेगा और छत्तीसगढ़

    ओड़िशा से लगे सिमडेगा में नुआखाई मनाई जाती है, और छत्तीसगढ़ में इसे नवाखाई पर्व कहते हैं।

  • तटीय ओड़िशा

    समुद्र किनारे वाले ओड़िशा में नए अन्न का यही भाव नबान्न के नाम से आता है।

रीत

नुआखाई के दिन क्या करते हैं

  1. तैयारी कोई पंद्रह दिन पहले शुरू होती है, और नौ रीतियों में चलती है, जिन्हें वहाँ नौ रंग कहते हैं।
  2. बेहेरेन: दिन तय करने के लिए गाँव में सभा बुलाने की मुनादी होती है।
  3. लगन देखा: नया चावल खाने की ठीक घड़ी तय होती है, और डाक हाका यानी न्योता भेजा जाता है।
  4. सफ़ा सुतुरा और लिपा पुछा: घर की सफ़ाई और लिपाई होती है, फिर घिना बिका यानी ख़रीदारी।
  5. नुआ धान खुजा: खेत में पकी नई फ़सल ढूँढी जाती है, और बलि पका में प्रसाद देवता तक ले जाकर पक्का संकल्प किया जाता है।
  6. नुआखाई: लगन पर नया अन्न देवी को चढ़ता है, फिर घर का सबसे बड़ा सदस्य सबको नुआ बाँटता है।
  7. जुहार भेट: छोटे बड़ों को प्रणाम करते हैं, तोहफ़े दिए लिए जाते हैं, और शाम को नाच गाना होता है।

रसोई

नुआखाई का खाना

  • नुआ नए धान का पका चावल, जो देवी को चढ़ने के बाद पूरा परिवार साथ खाता है।
  • अरसा पीठा चावल से बनने वाला पीठा, जो इस दिन ख़ास बनता है।

सवाल जवाब

नुआखाई 2027: पूछे जाने वाले सवाल

नुआखाई 2027 कब है?

नुआखाई 2027 में 5 सितंबर, रविवार को है। भाद्रपद शुक्ल पंचमी तिथि 4 सितंबर, दोपहर 12:26 से 5 सितंबर, सुबह 11:18 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

नुआखाई का मतलब क्या है?

नुआ का मतलब नया और खाई का मतलब खाना। यानी नए धान को पहली बार खाने का त्योहार।

नुआखाई किस तिथि को होती है?

भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को, यानी गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन।

नुआखाई जुहार क्या होता है?

नया अन्न खाने के बाद छोटे अपने बड़ों को प्रणाम करते हैं और बड़े उन्हें आशीर्वाद देते हैं। दोस्त और रिश्तेदार भी एक दूसरे को जुहार कहते हैं।

नुआखाई में किस देवी की पूजा होती है?

संबलपुर की माँ समलेश्वरी की। लगन की घड़ी पर उनके मंदिर के मुख्य पुजारी नया अन्न यानी नबान्न चढ़ाते हैं।

लगन क्या है?

पुजारी पंचांग देखकर जो शुभ घड़ी तय करते हैं, उसे लगन कहते हैं। नया चावल उसी घड़ी पर पहले देवी को चढ़ता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Nuakhai, Wikipediaनौ रीतियाँ, ज़िले, समलेश्वरी को नबान्न, अरसा पीठा, रमई देव की लोक परंपरा
  2. Nuakhai Juhar, Drishti IASनाम का मतलब, पंचमी तिथि, लगन, आदिवासी जड़ें, सिमडेगा और छत्तीसगढ़
  3. Nuakhai, IAS Gyanकिसानों का पहला अन्न समलेश्वरी को, तटीय ओड़िशा का नबान्न
  4. Nuakhai, Bhakti Bharatगाँव के देवता से घर के देवता और लक्ष्मी तक पूजा, नए कपड़े, जुहार, छुट्टी

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।