उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
गणेश चतुर्थी 2027
Ganesh Chaturthi 2027
आज चाँद से नज़र बचानी है, और गणेश को घर लाना है।
गणेश चतुर्थी 2027 में 4 सितंबर, शनिवार को है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 3 सितंबर, दोपहर 2:20 से 4 सितंबर, दोपहर 12:26 तक है। मध्याह्न की पूजा का समय सुबह 11:04 से दोपहर 1:36 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
छत पर एक बच्चा ऊपर देखने को सिर उठाता है।
दादी उसका कंधा पकड़कर रोक लेती हैं। आज ऊपर मत देखना, आज चाँद नहीं देखते।
नीचे रसोई में भाप उठ रही है। मोदक पक रहे हैं, भीतर नारियल और गुड़।
दोपहर को पूजा होगी। उसी पहर, कहते हैं, गणेश जन्मे थे।
गली के मोड़ पर ढोल रुक रुककर बज रहा है।
बच्चा ज़मीन की ओर देखते देखते पूछता है: चाँद ने ऐसा क्या किया था?
दादी मोदक की थाली उसकी ओर कर देती हैं। पहले भोग। कहानी लंबी है, और हर घर में थोड़ी अलग सुनाई जाती है।
2027 में कब
गणेश चतुर्थी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़4 सितंबर, शनिवार
तिथिभाद्रपद शुक्ल चतुर्थी3 सितंबर, दोपहर 2:20 से 4 सितंबर, दोपहर 12:26 तक
नक्षत्रचित्रासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:01
सूर्यास्तशाम 6:40
चंद्रोदयसुबह 9:41
- मध्याह्न
- सुबह 11:04 से दोपहर 1:36 तकदिन के पाँच हिस्सों में तीसरा, दोपहर का समय।
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शुभकामना
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पहचान
गणेश चतुर्थी क्या है
गणेश चतुर्थी भादों यानी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि, चतुर्थी को होती है। मान्यता है कि गणेश इसी पक्ष में, दिन के बीच वाले पहर में जन्मे थे। सूरज उगने से डूबने तक के समय को पाँच हिस्सों में बाँटें, तो बीच वाला हिस्सा मध्याह्न कहलाता है, और गणेश की पूजा इसी पहर में होती है। इसे विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ भी कहते हैं। घरों में यह छोटी सी पूजा है, और मोहल्लों में बड़ा उत्सव। उत्सव दस दिन चलता है और अनंत चतुर्दशी को मूर्ति पानी में विदा होती है, पर बहुत से घर डेढ़, तीन, पाँच या सात दिन में ही विदा कर देते हैं।
कथा
गणेश चतुर्थी की कथा
शिव पुराण में कथा आती है। एक दिन पार्वती नहाने जा रही थीं। उन्होंने अपनी देह पर लगे उबटन से एक बालक गढ़ा, उसमें प्राण डाले और उसे अपना बेटा कहा। कुछ कहने वाले उबटन को हल्दी का बताते हैं, कुछ देह का मैल। पार्वती ने उसे द्वार पर खड़ा किया और कहा: जब तक मैं नहा रही हूँ, किसी को भीतर मत आने देना।
तभी शिव आए। बालक ने उन्हें भी रोक दिया। वह शिव को जानता ही नहीं था। शिव ने अपने गण भेजे, बालक ने सबको हरा दिया। बात बढ़ती गई, देवता तक आ गए। आख़िर शिव ने त्रिशूल से बालक का सिर काट दिया। फिर जब बात समझ आई, तो जो पहला सिर मिला, वह एक हाथी का था, एक दाँत वाले हाथी का। वही सिर जोड़कर शिव ने बालक को फिर जिला दिया, उसे अपने गणों का मुखिया बनाया और नाम दिया गणेश। और तय हुआ कि हर पूजा में सबसे पहले इसी की पूजा होगी।
अब चाँद की बात। लोक में कहते हैं कि एक बार गणेश अपने चूहे पर सवार होकर लौट रहे थे। रास्ते में साँप दिखा, चूहा डरकर भागा, और गणेश गिर पड़े। ऊपर चंद्रमा यह देखकर ज़ोर से हँस दिया। गणेश ने उसे शाप दिया। पंचांगों की परंपरा कहती है कि उसी शाप की वजह से जो भादों की शुक्ल चतुर्थी को चाँद देखता है, उस पर झूठा कलंक लगता है।
और इस कलंक की सबसे बड़ी कहानी कृष्ण की है। भागवत पुराण के दसवें स्कंध के छप्पनवें अध्याय में कथा है: सूर्य ने सत्राजित को स्यमंतक मणि दी। सत्राजित का भाई प्रसेन उसे पहनकर शिकार पर गया, और एक शेर ने उसे मार डाला। उस शेर को भालुओं के राजा जांबवान ने मारा और मणि अपने बच्चे को खिलौने की तरह दे दी। इधर सत्राजित ने कहा, कृष्ण ने मणि के लिए मेरे भाई को मारा। कृष्ण अपना नाम साफ़ करने निकले, गुफा तक पहुँचे, और अट्ठाईस दिन जांबवान से लड़े। आख़िर जांबवान ने उन्हें पहचाना, मणि लौटाई और अपनी बेटी जांबवती का ब्याह उनसे किया। कृष्ण ने मणि सत्राजित को लौटा दी, और सत्राजित ने शर्मिंदा होकर अपनी बेटी सत्यभामा का ब्याह उनसे किया। भागवत में चाँद का ज़िक्र नहीं आता। चाँद वाली कड़ी पंचांगों की परंपरा जोड़ती है: वहाँ कहा गया है कि नारद ने कृष्ण को बताया कि उन्होंने भादों की शुक्ल चतुर्थी का चाँद देखा था, इसीलिए यह कलंक लगा, और कृष्ण ने गणेश चतुर्थी का व्रत रखा। भूल से चाँद दिख जाए तो पंचांग यह श्लोक बताते हैं: "सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥" यानी शेर ने प्रसेन को मारा, और शेर को जांबवान ने मारा। मेरे नन्हे बच्चे, मत रो, यह स्यमंतक अब तेरा ही है।
कहाँ कैसे
गणेश चतुर्थी कहाँ कैसे मनाया जाता है
पुणे, महाराष्ट्र
उन्नीसवीं सदी के आख़िरी बरसों में पुणे से गणेश घर से निकलकर गली में आए, सबके लिए खुले पंडालों में, और यहीं से दस दिन वाला सार्वजनिक उत्सव चला। विसर्जन के जुलूस में सबसे आगे कसबा गणपति चलते हैं।
लालबाग, मुंबई
लालबाग का राजा 1934 में वहाँ की मछुआरों की बस्ती ने शुरू किया। दर्शन की कतार घंटों लंबी होती है, और लोग दूर दूर से इस एक मूर्ति को देखने आते हैं।
गोवा
गोवा में इस उत्सव को चवथ कहते हैं। औरतें व्रत रखती हैं और पार्वती और शिव की पूजा करती हैं, घुमट और पखावज बजते हैं। कई घरों में यह पाँच दिन का होता है, और भोग में नेवरी चढ़ती है।
कर्नाटक
यहाँ गणेश से पहले गौरी आती हैं: गणेश चतुर्थी से पहले गौरी का त्योहार होता है, इसलिए इसे गौरी गणेश कहते हैं। गणेश को कडुबु चढ़ता है, कटहल के पत्तों में भाप से पका।
रीत
गणेश चतुर्थी के दिन क्या करते हैं
- चतुर्थी के दिन गणेश की मूर्ति घर या पंडाल में लाकर उसकी स्थापना की जाती है।
- दोपहर के मध्याह्न पहर में षोडशोपचार पूजा होती है, यानी सोलह चीज़ों से की जाने वाली पूरी पूजा।
- भोग में मोदक चढ़ते हैं, जिन्हें गणेश का सबसे प्यारा भोग माना जाता है।
- चतुर्थी तिथि में उगा चाँद नहीं देखते, चाहे तिथि उसके डूबने से पहले ही ख़त्म हो जाए।
- भूल से चाँद दिख जाए तो स्यमंतक वाला श्लोक पढ़ते हैं।
- डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन बाद गाजे बाजे के साथ जुलूस निकलता है और मूर्ति पानी में विसर्जित होती है।
रसोई
गणेश चतुर्थी का खाना
- मोदक चावल या गेहूँ के आटे की पोटली, भीतर कसा नारियल, गुड़ और मेवे, भाप में पकी या तली हुई।
- उकडीचे मोदक महाराष्ट्र का भाप वाला मोदक, चावल के आटे में नारियल और गुड़।
- नेवरी गोवा का तला हुआ मीठा, वहाँ गणेश का सबसे पहला भोग।
- कडुबु कर्नाटक का भोग, कटहल के पत्तों में लपेटकर भाप से पका।
सवाल जवाब
गणेश चतुर्थी 2027: पूछे जाने वाले सवाल
गणेश चतुर्थी 2027 कब है?
गणेश चतुर्थी 2027 में 4 सितंबर, शनिवार को है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 3 सितंबर, दोपहर 2:20 से 4 सितंबर, दोपहर 12:26 तक है। मध्याह्न की पूजा का समय सुबह 11:04 से दोपहर 1:36 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
गणेश चतुर्थी पर चाँद क्यों नहीं देखना चाहिए?
मान्यता है कि गणेश ने चंद्रमा को शाप दिया था, इसलिए भादों की शुक्ल चतुर्थी का चाँद देखने से झूठा कलंक लगता है। कहते हैं कृष्ण पर स्यमंतक मणि की चोरी का झूठा आरोप इसी वजह से लगा था।
भूल से चाँद दिख जाए तो क्या करें?
पंचांग स्यमंतक कथा का यह श्लोक पढ़ने को कहते हैं: सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥
गणेश पूजा दोपहर में ही क्यों होती है?
मान्यता है कि गणेश का जन्म मध्याह्न में हुआ था, यानी दिन के पाँच हिस्सों में से बीच वाले में। इसलिए पूजा का मुहूर्त इसी पहर में निकाला जाता है।
गणेश उत्सव कितने दिन का होता है?
पूरा उत्सव दस दिन का होता है और अनंत चतुर्दशी को विसर्जन के साथ ख़त्म होता है। कई घर डेढ़, तीन, पाँच या सात दिन में ही गणेश को विदा कर देते हैं।
गणेश जी को मोदक क्यों चढ़ाते हैं?
मोदक को गणेश का सबसे प्यारा भोग माना जाता है। यह चावल या गेहूँ के आटे में नारियल और गुड़ भरकर बनता है।
गणेश का सिर हाथी का क्यों है?
शिव पुराण की कथा में शिव ने द्वार पर रोकने वाले बालक का सिर काट दिया था, और फिर जो पहला सिर मिला, वह एक हाथी का था। वही जोड़कर उन्होंने बालक को फिर जिलाया और गणों का मुखिया बनाया।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Ganesh Chaturthi, Drik Panchangतिथि का नियम, मध्याह्न पूजा, चाँद न देखना, स्यमंतक श्लोक, विसर्जन
- Ganesh Chaturthi, Encyclopaedia Britannicaभादों की चतुर्थी, दस दिन, घर और पंडाल, विसर्जन
- Srimad Bhagavatam 10.56: The Syamantaka Jewel, Vedabaseस्यमंतक मणि की पूरी कथा
- Hindu Mythology, Vedic and Puranic: Ganesa, sacred-textsशिव पुराण में द्वार, सिर और हाथी का सिर
- The Death and Rebirth of Ganesha (from the Shiva Purana)देह के मैल से बालक, गणों से लड़ाई, एक दाँत वाला हाथी, पहली पूजा
- Mythological anecdotes of Ganesha, Wikipediaहल्दी का उबटन, चूहे से गिरने और चंद्रमा के हँसने की लोक कथा
- Ganesh Chaturthi in Maharashtra, Bhakti Bharatलालबाग का राजा, पुणे के गणपति, उकडीचे मोदक
- Ganesh Chaturthi, Wikipediaगोवा का चवथ, कर्नाटक में पहले गौरी, मोदक, डेढ़ से दस दिन
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।