पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी

संवत्सरी 2027

Samvatsari 2027

साल भर का हिसाब, एक वाक्य में।

संवत्सरी 2027 में 4 सितंबर, शनिवार को है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 3 सितंबर, दोपहर 2:20 से 4 सितंबर, दोपहर 12:26 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

संवत्सरी का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 19 प्रतिशत रोशन

आज चूल्हा नहीं जला।

रसोई साफ़ है, बर्तन औंधे रखे हैं। घर में किसी ने सुबह से कुछ नहीं खाया।

मंदिर के बड़े कमरे में लोग दरी पर आसन लगाए हैं, पास पास, चुप।

प्रतिक्रमण चल रहा है। पूरे साल को पीछे मुड़कर देखा जा रहा है, धीरे धीरे।

जो कहा, जो किया, जो जाने अनजाने हो गया।

पाठ ख़त्म होता है। एक लड़का उठकर सीधा पड़ोस के दरवाज़े पर जाता है। पिछले महीने इसी घर के लड़के से उसकी लड़ाई हुई थी।

दरवाज़ा खुलता है। वह हाथ जोड़ता है: मिच्छामि दुक्कडम।

सामने वाला भी हाथ जोड़ देता है। साल का बोझ, दो लोगों के बीच, उतर जाता है।

2027 में कब

संवत्सरी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़4 सितंबर, शनिवार

तिथिभाद्रपद शुक्ल चतुर्थी3 सितंबर, दोपहर 2:20 से 4 सितंबर, दोपहर 12:26 तक

नक्षत्रचित्रासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:01

सूर्यास्तशाम 6:40

चंद्रोदयसुबह 9:41

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शुभकामना

संवत्सरी का शुभकामना कार्ड

संवत्सरी का शुभकामना कार्ड: मिच्छामि दुक्कडम्, मनु विश्रांति

अपनों को मिच्छामि दुक्कडम् भेजिए, इस बरस की तारीख़ और उस दिन की बात के साथ। कार्ड पर QR कोड है, जिससे तारीख़, कथा और मुहूर्त भी साथ पहुँचते हैं।

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पहचान

संवत्सरी क्या है

संवत्सरी श्वेतांबर जैनों के पर्युषण पर्व का आख़िरी और सबसे बड़ा दिन है। पर्युषण आठ दिन का होता है, और जैन स्रोत इस शब्द का अर्थ बताते हैं: सब दिशाओं से आकर एक जगह जुटना। संवत्सरी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है; कुछ स्रोत और परंपराएँ इसे चौथ, यानी चतुर्थी, को भी रखती हैं। संवत्सर का मतलब है साल, और यह पूरे साल के अपने दोषों पर लौटकर देखने और हर जीव से क्षमा माँगने का दिन है। दिगंबर जैन इन्हीं दिनों में दस दिन का दसलक्षण पर्व रखते हैं, और उसके बाद आश्विन कृष्ण पक्ष के पहले दिन क्षमावाणी, यानी क्षमा माँगने का दिन।

कथा

संवत्सरी की कथा

पर्युषण के दिनों में श्वेतांबर संघ में कल्पसूत्र पढ़ा जाता है, चौथे दिन से आख़िरी दिन तक। इसमें भगवान महावीर और दूसरे तीर्थंकरों का जीवन है। पाँचवें दिन वह हिस्सा आता है जिसमें रानी त्रिशला के सपनों और भगवान महावीर के जन्म की बात है, और उस दिन सपनों की ख़ुशी होती है। फिर दिन बीतते हैं, उपवास बढ़ते हैं, और आख़िर में आता है संवत्सरी का दिन।

इस दिन होता है संवत्सरी प्रतिक्रमण। प्रतिक्रमण का अर्थ है लौटना: जहाँ जहाँ कोई अपनी सीमा लाँघ गया, जाने में या अनजाने में, वहाँ से वापस आना। साल में एक बार यह पूरे साल का होता है, और इसमें श्रावक के छहों आवश्यक, यानी रोज़ के ज़रूरी काम, आ जाते हैं: सामायिक, यानी मन की पूरी समता; चौविसत्थो, यानी चौबीस तीर्थंकरों की स्तुति; वंदना, यानी साधु साध्वियों को प्रणाम; प्रतिक्रमण, यानी अपने भीतर देखना और पछताना; कायोत्सर्ग, यानी देह से ध्यान हटाकर आत्मा पर टिकना; और प्रत्याख्यान, यानी कुछ छोड़ने का प्रण।

प्रतिक्रमण के बाद जैन हर जीव से, दोस्त हो या रिश्तेदार, क्षमा माँगते हैं और कहते हैं: मिच्छामि दुक्कडम। यह प्राकृत है; संस्कृत में इसे मिथ्या मे दुष्कृतम् कहेंगे। मिथ्या यानी बेअसर, मे यानी मेरा, दुष्कृतम् यानी बुरा किया हुआ। पूरा अर्थ: मेरा जो भी बुरा किया हुआ है, वह बेअसर हो जाए। आचार्य हेमचंद्र ने अपने योगशास्त्र में इस वाक्य के अक्षरों को खोलकर पढ़ा है: मि से मिउ मद्दव, यानी कोमलता, और दु से दुगंछामि अप्पाणं, यानी मैं अपने उस रूप से घिन करता हूँ जिसने बुरा किया।

इस दिन बहुत से जैन पूरा उपवास रखते हैं, क्योंकि इसे जैन पंचांग का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। जैन शिक्षा की किताबें बताती हैं कि आख़िरी दिन का उपवास ज़रूरी माना गया है, और आख़िरी तीन दिन लगातार उपवास करने को अट्ठम तप कहते हैं। जो पूरा उपवास न कर सकें, उनके लिए दिन में एक बार खाना भी सीमित उपवास गिना जाता है।

कहाँ कैसे

संवत्सरी: कहाँ और कैसे

  • श्वेतांबर जैन संघ

    पर्युषण के आठ दिन कल्पसूत्र का पाठ, उपवास और प्रवचन चलते हैं, और आख़िरी दिन संवत्सरी प्रतिक्रमण होता है।

  • जैन घर

    बहुत से घरों में इस दिन पूरा उपवास रहता है। प्रतिक्रमण के बाद घर के लोग, दोस्त और रिश्तेदार एक दूसरे से मिच्छामि दुक्कडम कहते हैं।

  • दूर बसे लोग

    जो पास नहीं हैं, उन्हें क्षमा माँगने के कार्ड और संदेश भेजे जाते हैं, जिन पर मिच्छामि दुक्कडम लिखा होता है।

रीत

संवत्सरी के दिन क्या करते हैं

  1. दिन भर पूरा उपवास, या जितना बन पड़े उतना; एक बार खाना भी सीमित उपवास गिना जाता है।
  2. पर्युषण में पढ़े जा रहे कल्पसूत्र का पाठ इसी दिन पूरा होता है।
  3. संवत्सरी प्रतिक्रमण होता है, जिसमें पूरे साल के जाने अनजाने दोषों पर लौटकर देखा जाता है।
  4. प्रतिक्रमण में छहों आवश्यक आते हैं: सामायिक, चौबीस तीर्थंकरों की स्तुति, वंदना, प्रतिक्रमण, कायोत्सर्ग और प्रत्याख्यान।
  5. उसके बाद हर जीव से, घर वालों, दोस्तों और रिश्तेदारों से, मिच्छामि दुक्कडम कहकर क्षमा माँगी जाती है।
  6. कुछ लोग इसके लिए खमत खामणा, खमाउ सा या उत्तम क्षमा भी कहते हैं।
  7. दूर बसे लोगों को क्षमा के कार्ड और संदेश भेजे जाते हैं।

सवाल जवाब

संवत्सरी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

संवत्सरी 2027 कब है?

संवत्सरी 2027 में 4 सितंबर, शनिवार को है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 3 सितंबर, दोपहर 2:20 से 4 सितंबर, दोपहर 12:26 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

संवत्सरी क्या है?

यह श्वेतांबर जैनों के पर्युषण पर्व का आख़िरी दिन है, जब साल भर का प्रतिक्रमण होता है और हर जीव से क्षमा माँगी जाती है। इसे जैन पंचांग का सबसे पवित्र दिन माना जाता है।

मिच्छामि दुक्कडम का मतलब क्या है?

यह प्राकृत का वाक्य है, संस्कृत में मिथ्या मे दुष्कृतम्। मतलब: मेरा जो भी बुरा किया हुआ है, वह बेअसर हो जाए। आम बोली में इसे यूँ समझते हैं: मुझसे भूल हुई, मुझे क्षमा करो।

संवत्सरी प्रतिक्रमण क्या होता है?

साल में एक बार होने वाला प्रतिक्रमण, जिसमें पूरे साल के जाने अनजाने दोषों पर लौटकर देखा जाता है और पछतावा किया जाता है। इसमें श्रावक के छहों आवश्यक आ जाते हैं।

संवत्सरी किस तिथि को होती है?

भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को। कुछ परंपराएँ और स्रोत इसे चतुर्थी, यानी चौथ, को रखते हैं।

संवत्सरी पर उपवास क्यों रखा जाता है?

संवत्सरी को जैन पंचांग का सबसे पवित्र दिन माना जाता है, और पर्युषण के आख़िरी दिन का उपवास ज़रूरी माना गया है। जो पूरा उपवास न कर सकें, वे दिन में एक बार खाकर सीमित उपवास रखते हैं।

पर्युषण कितने दिन का होता है?

श्वेतांबर जैनों में आठ दिन का, जिसका आख़िरी दिन संवत्सरी है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Paryushan and Das Lakshana Parva, Jain eLibrary (JAINA Education)आठ और दस दिन, पर्युषण का अर्थ, कल्पसूत्र का पाठ, पाँचवाँ दिन, उपवास, अट्ठम तप, दसलक्षण के गुण, क्षमा के कार्ड
  2. Samvatsari, Wikipediaभाद्रपद शुक्ल पंचमी और चतुर्थी, संवत्सरी प्रतिक्रमण, पूरा उपवास, क्षमा के शब्द, दिगंबर क्षमावाणी
  3. Micchami Dukkadam, Wikipediaशब्दों का अर्थ, संस्कृत रूप, हेमचंद्र के योगशास्त्र की व्याख्या, कब कहा जाता है
  4. Pratikramana, Wikipediaप्रतिक्रमण का अर्थ, छह आवश्यक, साल का प्रतिक्रमण
  5. Kshamavaani, Wikipediaदिगंबर क्षमावाणी, आश्विन कृष्ण का पहला दिन
  6. Samvatsari Parva, Journals of Indiaभाद्रपद शुक्ल पंचमी, कल्पसूत्र में पाँचवें दिन जन्म की बात

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।