जहाँ आज भी लंका जलती है
सुंदरकांड सिर्फ़ पढ़ा नहीं जाता, आज भी खेला जाता है। बनारस के पास रामनगर में पूरा क़स्बा मंच बन जाता है, और बलवंत गार्गी के समय लंका दहन देखने बीस हज़ार से ज़्यादा लोग आते थे। बाली में पचास साठ आदमी आग के चारों ओर घेरा बनाकर "चक" गाते हैं, थाईलैंड में हनुमान जी सफ़ेद मुखौटा पहनकर नाचते हैं, और केरल में इक्कीस दीयों की रोशनी में चमड़े की कठपुतलियाँ कंब रामायण खेलती हैं।

एक नज़र में
| कहाँ | क्या | लंका का पल | ख़ास बात |
|---|---|---|---|
| रामनगर, वाराणसी | रामलीला, लगभग 31 दिन | सोने की लंका को आग | पूरा क़स्बा मंच, दर्शक साथ चलते हैं |
| बाली, इंडोनेशिया | केचक | आग के घेरे में हनुमान, महल जलता है | पचास साठ आवाज़ें, कोई बाजा नहीं |
| थाईलैंड | खोन | रामकियेन के लंका प्रसंग | यूनेस्को सूची 2018, हनुमान का सफ़ेद मुखौटा |
| बैंकॉक | वाट फ्रा केव के चित्र | कमरा 32 से 34 | 178 चित्र |
| केरल | तोलपावकूत्तु | कंब रामायण के पद | इक्कीस दीये, चमड़े की कठपुतलियाँ |
| जावा | प्रंबनन की पट्टियाँ | जलती पूँछ, छत पर छलाँग | नवीं सदी का पत्थर |
रामनगर की रामलीला: पूरा क़स्बा मंच
वाराणसी के पास रामनगर की रामलीला इकतीस दिन चलती है (बलवंत गार्गी तीस बताते हैं)। पूरा क़स्बा कथा का नक्शा बन जाता है: अयोध्या, जनकपुरी, चित्रकूट, पंचवटी, और लंका के नाम की एक बड़ी जगह। दर्शक एक जगह से दूसरी जगह कथा के साथ चलते हैं।
काशी नरेश और उनका दरबार सजे हुए हाथियों पर आते हैं। रोशनी मिट्टी के तेल की लालटेनों और मशालों से होती है, माइक नहीं होता। दर्शक कुछ हज़ार से लेकर एक लाख तक होते हैं। बलवंत गार्गी ने लिखा था कि सोने की लंका को आग लगाने का दिन बीस हज़ार से ज़्यादा लोगों को खींचता था। रावण के पुतले का दहन अलग दिन होता है। यह रामलीला रामचरितमानस पर खेली जाती है।
बाली का केचक: आग के घेरे में हनुमान
केचक में पचास साठ आदमी घेरों में "चक, चक" गाते हैं, कोई बाजा नहीं होता। यह 1930 के आसपास वायन लिम्बक और वॉल्टर श्पीस के हाथों आज के रूप में आया, और बाली के पुराने सांघ्यांग नृत्य से निकला।
कथा में हनुमान जी को ज़िंदा जलाने के लिए आग के घेरे में डाल दिया जाता है। वे बच निकलते हैं और रावण का महल जला देते हैं। उलुवातु के मंदिर के पास यह हर शाम खेला जाता है।
थाईलैंड का खोन: सफ़ेद मुखौटे वाले हनुमान
खोन थाईलैंड का मुखौटा नृत्य नाटक है, जो रामकियेन खेलता है। यूनेस्को ने इसे 2018 में अपनी सूची में रखा। हनुमान जी का मुखौटा सफ़ेद है, उस पर हरा और गुलाबी रंग, खुले मुँह में दाँत दिखते हैं, और सिर पर बस एक छोटा मुकुट। खोन के कुल दो सौ से तीन सौ मुखौटे हैं, हर एक काग़ज़ की पंद्रह परतों से बना।
बैंकॉक के वाट फ्रा केव मंदिर में पूरी रामकियेन 178 चित्रों में बनी है, जिनके नीचे कविता के 224 पद लिखे हैं। ये चित्र राजा राम प्रथम के समय के माने जाते हैं, और कई राजाओं के समय, ख़ासकर राम पंचम के समय, इन्हें फिर से सँवारा गया। कमरा 32 से 34 तक हनुमान जी की लंका यात्रा है: समुद्र की राक्षसी, आकाश की राक्षसी, और फाँसी से बचाई गई सीता जी।
केरल का तोलपावकूत्तु: इक्कीस दीये, चमड़े की परछाइयाँ
तोलपावकूत्तु केरल का छाया कठपुतली नाटक है, जो कंब रामायण के पदों पर खेला जाता है। मंदिर के आँगन में बने ख़ास मंच, कूत्तुमाडम, में एक सफ़ेद पर्दे के पीछे नारियल के छिलकों में इक्कीस दीये जलते हैं, और चमड़े की कठपुतलियों की परछाइयाँ पर्दे पर नाचती हैं।
पूरा पाठ सात, इक्कीस, इकतालीस या इकहत्तर दिनों का होता है, और उसमें 71 पात्रों की लगभग 160 कठपुतलियाँ होती हैं। अच्छे पात्र हिरन की खाल से बनते थे और बुरे भैंस की खाल से। यह पलक्काड, त्रिशूर और मलप्पुरम के भद्रकाली मंदिरों में खेला जाता है।
पत्थर में: जावा का प्रंबनन
जावा के नवीं सदी के प्रंबनन मंदिर के शिव मंदिर पर रामायण की 24 पत्थर की पट्टियाँ हैं। पट्टी 20 में हनुमान जी पेड़ पर से सीता जी को देखते हैं, और पट्टी 21 में पूँछ में आग लिए एक छत पर कूदते हैं। यह जगह ककविन रामायण की धरती है।
इस पर और
हर कथा का अपना पन्ना है, और हर पात्र का भी।










