उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · चैत्र कृष्ण अष्टमी
शीतला अष्टमी 2027
Sheetala Ashtami 2027
साल में एक दिन रसोई की आग को भी छुट्टी।
शीतला अष्टमी 2027 में 30 मार्च, मंगलवार को है। चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि 29 मार्च, शाम 5:12 से 30 मार्च, रात 7:40 तक है। सुबह की पूजा का समय (प्रातः काल) सुबह 6:14 से सुबह 8:43 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
थाली छूने पर ठंडी लगती है।
पुए, मीठे चावल, दही, राबड़ी। सब कल रात के बने।
चूल्हा पोंछकर रखा है। आज उसमें आग नहीं होगी।
दादी थाली उठाती हैं। पीछे पीछे बच्चे, हाथ में जल का लोटा।
होली को जहाँ आग जली थी, आज वहीं ठंडा भोग चढ़ता है।
घर लौटकर पहले बड़े प्रसाद लेते हैं। फिर सब, वही ठंडा खाना।
गर्मी दरवाज़े पर है। उससे पहले, एक दिन, पूरा घर ठंडा खाता है।
कथा कहती है, एक बार पूरा गाँव जला था। बचा बस वह घर, जहाँ यह थाली ठंडी रखी गई थी।
2027 में कब
शीतला अष्टमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़30 मार्च, मंगलवार
तिथिचैत्र कृष्ण अष्टमी29 मार्च, शाम 5:12 से 30 मार्च, रात 7:40 तक
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:14
सूर्यास्तशाम 6:38
चंद्रोदयरात 1:27
- प्रातः काल
- सुबह 6:14 से सुबह 8:43 तकसूर्योदय के बाद दिन का पहला पाँचवाँ हिस्सा।
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पहचान
शीतला अष्टमी क्या है
शीतला अष्टमी चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी है, उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के हिसाब से, यानी होली के कोई आठ दिन बाद, जब जाड़ा जा रहा होता है और गर्मी आ रही होती है। अमांत पंचांग में यही दिन फाल्गुन की कृष्ण अष्टमी कहलाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा होती है, जिनके नाम में ही शीतल, यानी ठंडक है। बहुत जगह इसे बसौड़ा या बसोरा कहते हैं, क्योंकि इस दिन एक दिन पहले का बना, ठंडा, बासी खाना ही माता को चढ़ता है और वही खाया जाता है; चूल्हा नहीं जलता। सब घर अष्टमी को ही नहीं पूजते: बहुत से परिवार यही पूजा एक दिन पहले सप्तमी को करते हैं, जिसे शीतला सप्तमी कहते हैं, और कुछ जगह होली के बाद का पहला सोमवार या शुक्रवार चुना जाता है। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और गुजरात में यह दिन सबसे ज़्यादा माना जाता है।
कथा
शीतला अष्टमी की कथा
शीतला अष्टमी की कथा लोक की कथा है, किसी पुराण की नहीं, और घर घर में थोड़े अलग ढंग से कही जाती है। राजस्थान में जो कथा कही जाती है, वह ऐसे चलती है। एक गाँव में एक बुढ़िया थी, जो हर शीतला अष्टमी पर माता की पूजा करती थी। वह माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाती, और भोग के बाद ही ख़ुद खाती। गाँव में और कोई शीतला माता को नहीं पूजता था।
एक दिन गाँव में आग लग गई। आग बुझी तो देखा, सारे घर जल गए हैं, बस बुढ़िया का घर बचा है। गाँव वाले हैरान होकर उसके पास पहुँचे: तेरा घर कैसे बचा? बुढ़िया बोली, मैं बसौड़े के दिन माता को ठंडा भोग लगाती हूँ, और उसके बाद ही खाती हूँ। माता के प्रताप से ही मेरा घर बचा है। तब गाँव वालों ने ठान लिया कि अब हर शीतला अष्टमी पर सब माता को पूजेंगे, ठंडा भोग लगाएँगे, और फिर वही प्रसाद खाएँगे।
शीतला सप्तमी की एक और कथा कही जाती है। एक घर में सास थी और दो बहुएँ, जिनके हाल ही में बच्चे हुए थे। उस दिन घर में बासी खाना ही खाना था, पर बहुओं को डर लगा कि बासी खाने से बच्चे बीमार होंगे। उन्होंने ताज़ी रोटियाँ सेंक लीं, चूरमा बनाया और खा लिया; सास ने बासी खाने को कहा तो बहाने बना दिए। माता रूठ गईं, और दोनों बच्चे नहीं रहे। सास को सच पता चला तो उसने दोनों को घर से निकाल दिया।
बहुएँ बच्चों को लेकर एक बरगद के नीचे जा टिकीं। वहाँ दो बहनें आईं, ओरी और शीतला, जिनके सिर में जुएँ थीं और वे बहुत परेशान थीं। बहुओं को दया आई, और उन्होंने उनकी जुएँ निकाल दीं। बहनों ने आशीष दिया, तुम्हारी गोद भरी रहे। बहुएँ रो पड़ीं: भरी गोद तो उजड़ गई। तब शीतला बोलीं, बुरे काम की सज़ा तो भुगतनी ही पड़ती है। बहुएँ समझ गईं कि यही माता हैं, और उनके पाँवों में गिरकर माफ़ी माँगी।
माता का मन पसीज गया, और उन्होंने दोनों बच्चों को फिर से ज़िंदा कर दिया। बहुएँ ख़ुशी ख़ुशी घर लौटीं, और गाँव वाले देखकर दंग रह गए। कथा कहती है कि उस दिन से पूरा गाँव शीतला माता को पूजने लगा और उनका व्रत रखने लगा।
व्रत
शीतला अष्टमी का व्रत कैसे रखें
- सुबह व्रत का संकल्प लिया जाता है, यानी मन में पक्का किया जाता है कि आज माता का व्रत है।
- जब तक माता को भोग न लग जाए, घर में कोई कुछ नहीं खाता।
- भोग के बाद दिन भर वही ठंडा खाना खाया जाता है जो एक दिन पहले बना था; गरम या ताज़ा कुछ नहीं।
- जो परिवार सप्तमी को पूजते हैं, उनके लिए यही सब एक दिन पहले होता है; गुजरात में भी सातम से पहले की छठ ही रांधने का दिन है।
पारण: व्रत कैसे खोलें
शीतला अष्टमी का व्रत किसी घड़ी पर नहीं, भोग पर खुलता है। सुबह की पूजा में माता को एक दिन पहले बना ठंडा भोग लगता है, और उसके बाद ही घर के लोग खाते हैं: पहले बड़े प्रसाद लेते हैं, फिर सब। व्रत उसी ठंडे खाने से खुलता है जो सप्तमी को बना था। इस दिन चूल्हा नहीं जलता, इसलिए कुछ ताज़ा पकाकर व्रत नहीं खोला जाता।
कहाँ कैसे
शीतला अष्टमी कहाँ कैसे मनाया जाता है
शील की डूँगरी, चाकसू के पास
जयपुर से कोई पैंतीस किलोमीटर दूर, चाकसू से पाँच किलोमीटर पर, एक टीले पर शीतला माता का मंदिर है, जिसमें लाल पत्थर की मूर्ति है। चैत्र के कृष्ण पक्ष में यहाँ कोई चौबीस घंटे का मेला लगता है, जिसमें पूरे राजस्थान से लोग आते हैं, और साथ में पशु मेला भी लगता है, जहाँ मवेशी सजाकर लाए जाते हैं।
गुरुग्राम
गुड़गाँव गाँव के शीतला माता मंदिर में साल में दो बार मेला लगता है, चैत्र में और आषाढ़ में, और भीड़ कुंभ जैसी बताई जाती है। मंदिर के पास एक तालाब है।
राजस्थान की रसोई
सप्तमी को खाना बनता है और अष्टमी को चूल्हा ठंडा रहता है। थाली में मीठा और नमकीन ओलिया, पचकूटा, केर सांगरी, बाजरे का सोगरा, दही बड़े, कांजी बड़े, पुए और राबड़ी रहती है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली
यहाँ यह बसौड़ा है। दही, गुड़ और राबड़ी भोग की मुख्य चीज़ें हैं, और पूजा उस जगह भी होती है जहाँ होलिका जली थी।
गुजरात
यहाँ इसका रूप शीतला सातम है। एक दिन पहले रांधण छठ होती है, यानी रांधने का दिन, जब खाना बनता है; सातम को चूल्हा नहीं जलता और पिछले दिन का खाना खाया जाता है।
रीत
शीतला अष्टमी के दिन क्या करते हैं
- सप्तमी को रसोई साफ़ की जाती है, और रात तक अगले दिन का सारा भोग बनाकर रख दिया जाता है।
- अष्टमी को चूल्हा या अँगीठी साफ़ करके बुझा ही रखा जाता है।
- माता को सप्तमी का बना भोग चढ़ता है: दही, गुड़, राबड़ी, पुए, मीठे चावल, और साथ में ठंडा जल।
- जहाँ होली पर होलिका जली थी, उस जगह पर भी पूजा होती है।
- शीतला माता की चालीसा, भजन और आरती होती है, और पूजा के बाद कथा पढ़ी जाती है।
- घर के बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।
रसोई
शीतला अष्टमी का खाना
- मीठा ओलिया दही और चावल से बना मीठा, सप्तमी को बनकर ठंडा किया हुआ।
- पचकूटा राजस्थान की सूखी, टिकने वाली सब्ज़ी, जो सप्तमी को ही बनती है।
- बाजरे का सोगरा बाजरे की मोटी रोटी।
- दही बड़े और कांजी बड़े खट्टे, ठंडे।
- पुए और गुलगुले तले हुए मीठे पकवान।
- राबड़ी बसौड़े के भोग की मुख्य चीज़ों में से एक।
- छाछ और ठंडाई पीने को।
सवाल जवाब
शीतला अष्टमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल
शीतला अष्टमी 2027 कब है?
शीतला अष्टमी 2027 में 30 मार्च, मंगलवार को है। चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि 29 मार्च, शाम 5:12 से 30 मार्च, रात 7:40 तक है। सुबह की पूजा का समय (प्रातः काल) सुबह 6:14 से सुबह 8:43 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
शीतला अष्टमी पर बासी खाना क्यों खाते हैं?
शीतला का मतलब ही ठंडक है। यह दिन जाड़े से गर्मी की ओर मुड़ने का है, और ठंडा खाना और बुझा चूल्हा शरीर और घर को ठंडा रखने का भाव है।
शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी में क्या फ़र्क़ है?
जो घर अष्टमी को पूजते हैं, उनके लिए सप्तमी खाना बनाने का दिन है और अष्टमी पूजा और ठंडा खाने का। बहुत से परिवार पूजा ही सप्तमी को करते हैं, और तब उसे शीतला सप्तमी कहते हैं।
क्या शीतला अष्टमी पर चूल्हा जला सकते हैं?
रीत यही है कि नहीं। चूल्हा साफ़ करके बुझा रखा जाता है, और उस दिन कुछ ताज़ा नहीं पकता।
बसौड़ा में क्या क्या बनता है?
दही, गुड़ और राबड़ी के साथ पुए, गुलगुले, मीठे और नमकीन ओलिया, मीठे चावल, पचकूटा, दही बड़े, कांजी बड़े और बाजरे की रोटी। सब एक दिन पहले बनकर ठंडा रखा जाता है।
शीतला माता के हाथ में झाड़ू और कलश क्यों है?
स्कंद पुराण के नाम से चलने वाला शीतलाष्टक कहता है: 'वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालङ्कृतमस्तकाम्॥' मतलब: मैं शीतला देवी को प्रणाम करता हूँ, जो गधे पर सवार हैं, दिशाएँ ही जिनके कपड़े हैं, जिनके हाथ में झाड़ू और कलश है और सिर पर सूप। लोक में झाड़ू को सफ़ाई का निशान माना जाता है।
शीतला अष्टमी के बाद बासी खाना क्यों नहीं खाते?
रीत यह है कि बासी खाना इसी दिन तक खाया जाता है, इसके बाद नहीं। आगे गर्मी आ रही है, और लोग इस दिन को एक याद की तरह देखते हैं कि अब मौसम के हिसाब से खाना और रहन सहन बदलना है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Sheetala Ashtami, Wikipediaचैत्र कृष्ण अष्टमी, होली के आठ दिन बाद, बसौड़ा, पहले का बना खाना, इस दिन के बाद बासी नहीं
- The Pioneer: Where devotion rests upon a cool platterसप्तमी को बनाना, अष्टमी को चूल्हा बंद, राजस्थान की थाली, राज्य, गुजरात की रांधण छठ और शीतला सातम, ठंडक का भाव
- Bhakti Bharat: Basodaबसौड़ा नाम, दही गुड़ राबड़ी, पूजा के क़दम, होलिका की जगह पूजा, बड़ों का प्रसाद, होली के बाद का सोमवार या शुक्रवार
- Shitalashtakam (Skanda Purana), sanskritdocuments.orgशीतलाष्टक का पहला श्लोक, गधे की सवारी, झाड़ू कलश और सूप
- Patrika: Sheetala Mata ki kathaबुढ़िया और जले गाँव की कथा, झाड़ू सफ़ाई का निशान, गर्मी के हिसाब से खाना
- Navbharat Live: Sheetla Saptami vrat kathaसास और दो बहुओं की कथा, ओरी और शीतला, शीतला सप्तमी
- IndiaNetzone: Sheetla Mata Fair, Rajasthanशील की डूँगरी का मंदिर और मेला, चाकसू और जयपुर से दूरी, पशु मेला
- District Gurugram: Sheetla Mata Mandirगुड़गाँव गाँव का मंदिर, चैत्र और आषाढ़ के मेले, तालाब
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।