पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

महाशिवरात्रि 2027

Maha Shivratri 2027

जो रात भर जागा, उसने अनजाने में भी पूजा कर ली।

महाशिवरात्रि 2027 में 6 मार्च, शनिवार को है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 6 मार्च, दोपहर 12:04 से 7 मार्च, दोपहर 1:47 तक है। निशीथ काल की पूजा 7 मार्च, रात 12:08 से रात 12:57 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 3 प्रतिशत रोशन

घंटा एक बार बजता है। फिर रात चुप।

काले पत्थर के लिंग पर दूध की धार अभी सूखी नहीं। ऊपर एक बेल पत्र, एक ही डंठल पर तीन पत्तियाँ।

आज रात यहाँ कोई नहीं सोता। रात चार हिस्सों में बँटी है, चार प्रहर, और हर प्रहर में फिर से पूजा।

एक बच्चा माँ की गोद में ऊँघता है। माँ उसे हल्के से हिलाती हैं: अभी तीसरा प्रहर बाक़ी है।

आधी रात के पास घंटे तेज़ हो जाते हैं। लोग कहते हैं, इसी पहर शिव लिंग बनकर प्रकट हुए थे।

पुराण में एक शिकारी की कथा है, जो ऐसी ही एक रात भूखा प्यासा बेल के पेड़ पर जागता रहा।

उसे पता भी नहीं था कि नीचे शिव हैं।

पत्ते गिरते रहे। सुबह तक वह शिकारी नहीं रहा।

2027 में कब

महाशिवरात्रि 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़6 मार्च, शनिवार

तिथिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी6 मार्च, दोपहर 12:04 से 7 मार्च, दोपहर 1:47 तक

नक्षत्रधनिष्ठासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:42

सूर्यास्तशाम 6:24

चंद्रोदयसुबह 5:25

निशीथ काल
7 मार्च, रात 12:08 से रात 12:57 तकआधी रात के आसपास का मुहूर्त, रात के पंद्रह हिस्सों में आठवाँ।
पहला प्रहर
शाम 6:24 से रात 9:28 तकरात के चार हिस्सों में पहला।
दूसरा प्रहर
6 मार्च, रात 9:28 से 7 मार्च, रात 12:32 तकरात के चार हिस्सों में दूसरा।
तीसरा प्रहर
7 मार्च, रात 12:32 से रात 3:36 तकरात के चार हिस्सों में तीसरा।
चौथा प्रहर
7 मार्च, रात 3:36 से सुबह 6:40 तकरात के चार हिस्सों में चौथा।

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पहचान

महाशिवरात्रि क्या है

महाशिवरात्रि फागुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात है। हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि कहलाती है, और इनमें फागुन वाली सबसे बड़ी है, महाशिवरात्रि। दक्षिण भारत के पंचांग, जहाँ महीना अमावस्या पर पूरा होता है, इसी रात को माघ की कृष्ण चतुर्दशी कहते हैं; महीने का नाम अलग है, पर दिन वही। व्रत सुबह संकल्प से शुरू होता है, और शिव की पूजा रात में होती है: या तो एक बार, निशीथ काल में, या पूरी रात को चार प्रहरों में बाँटकर चार बार। निशीथ काल आधी रात के पास का वह समय है जब, मान्यता के अनुसार, शिव धरती पर लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। चारों प्रहर और निशीथ काल का समय इस पन्ने पर गिनकर दिया गया है।

कथा

महाशिवरात्रि की कथा

शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता के चालीसवें अध्याय में यह कथा है, और वहाँ इसका पहला श्लोक है: 'पुरा कश्चिद्वने भिल्लो नाम्ना ह्यासीद्गुरुद्रुहः।' यानी बहुत पहले वन में गुरुद्रुह नाम का एक भील रहता था। वह ताक़तवर था, क्रूर था, रोज़ हिरन मारता और चोरी करता। एक दिन घर में माँ, बाप और पत्नी भूखे थे। वह सारा दिन वन में भटका, पर कुछ हाथ न आया। शाम को वह पानी लेकर एक तालाब के पास गया और बेल के पेड़ पर चढ़ गया, कि रात में कोई जानवर पानी पीने आएगा। वह रात शिवरात्रि थी, और उसे यह पता नहीं था। पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था।

पहले प्रहर में एक प्यासी हिरनी आई। उसने धनुष उठाया, और हिलने से पानी और बेल के पत्ते नीचे लिंग पर गिरे। पहले प्रहर की पूजा अनजाने में हो गई। हिरनी ने कहा, मुझे जाने दो, बच्चों को बहन के पास छोड़ आऊँ, फिर लौट आऊँगी, और उसने क़समें खाईं। उसने उसे जाने दिया। दूसरे प्रहर में उसकी बहन आई, फिर वही हुआ, पत्ते गिरे, वादा हुआ, वह भी गई। तीसरे प्रहर में एक मोटा हिरन आया; पत्ते फिर गिरे, और अब शिकारी का मन बदलने लगा। चौथे प्रहर में पूरा झुंड, बच्चों समेत, अपने वादे निभाने लौटा। उन्हें देखकर उसका दिल भर आया, पत्ते आख़िरी बार गिरे, और उसने सबको छोड़ दिया।

तभी शिव प्रकट हुए। उन्होंने शिकारी को गुह नाम दिया, और कहा कि तुम शृंगवेरपुर की राजधानी में सुख से रहोगे, तुम्हारा वंश बढ़ेगा, और वहाँ तुम्हारे घर राम आएँगे: 'गृहे रामस्तव व्याध समायास्यति निश्चितम्।' यानी हे व्याध, राम निश्चित ही तुम्हारे घर आएँगे। हिरन भी पशु जन्म से छूटकर स्वर्ग गए। गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण में भी ऐसी ही कथाएँ हैं, बस नाम अलग: एक में राजा सुंदरसेनक, दूसरे में चंड नाम का शिकारी।

दूसरी कथा ज्योति के खंभे की है, जिसे शिव पुराण, लिंग पुराण और वायु पुराण से जोड़ा जाता है। ब्रह्मा और विष्णु में बहस हुई कि बड़ा कौन। तभी उनके बीच आग का एक बहुत बड़ा खंभा खड़ा हो गया। ब्रह्मा हंस बनकर ऊपर उड़े, विष्णु वराह, यानी सूअर, बनकर नीचे खोदते गए। किसी को छोर नहीं मिला। विष्णु ने हार मान ली, पर ब्रह्मा ने ऊपर से गिरते केतकी के फूल को गवाह बनाकर झूठ कहा कि मैंने चोटी देख ली। तब खंभे से शिव निकले, और झूठ के कारण ब्रह्मा को शाप मिला कि उनकी पूजा मंदिरों में नहीं होगी। तीसरी बात लोक की है: बहुत से लोग मानते हैं कि फागुन अमावस से पहले की यही रात शिव और पार्वती के ब्याह की रात है, जब सती ने हिमालय के घर पार्वती बनकर जन्म लिया, तप किया, और शिव को फिर पाया।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में महाशिवरात्रि

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

रामचरितमानस

अवधी · Ramcharitmanas

रामचरितमानस के लंकाकांड की शुरुआत में, समुद्र पर पुल बनने से पहले, राम किनारे पर शिवलिंग थापते हैं और विधि से उसकी पूजा करते हैं, और कहते हैं कि शिव जितना प्यारा मुझे दूसरा कोई नहीं: 'लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा॥' फिर वे उस जगह का नाम लेकर कहते हैं: 'जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं॥', यानी जो रामेश्वर के दर्शन करेंगे, वे देह छोड़कर मेरे लोक जाएँगे। मानस में रामेश्वरम की नींव यहीं पड़ती है। वाल्मीकि रामायण में लिंग थापने का यह प्रसंग इस तरह नहीं मिलता; यह तुलसी की कथा का अपना दृश्य है, जहाँ लंका जाने से पहले राम शिव के आगे झुकते हैं।

कहाँ कैसे

महाशिवरात्रि कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • उत्तर भारत

    यहाँ के पंचांग इसे फागुन की कृष्ण चतुर्दशी कहते हैं। एक दिन पहले एक बार खाना, शिवरात्रि का पूरा व्रत, शाम का दूसरा स्नान, और रात भर की पूजा।

  • दक्षिण भारत

    यहाँ यही रात माघ की कृष्ण चतुर्दशी कहलाती है, पर दिन वही रहता है। शिव मंदिरों की पश्चिमी दीवार पर अक्सर लिंगोद्भव की मूर्ति होती है: आग के लिंग से निकलते शिव, नीचे वराह और ऊपर हंस।

  • तिरुवन्नामलै, तमिलनाडु

    अरुणाचल पुराण कहता है कि आग का खंभा बने शिव की गरमी तीनों लोक सह न सके, तो देवताओं के कहने पर वे ठंडे होकर अरुणाचल पहाड़ बन गए। जिस शिवरात्रि को यह हुआ, उसे लिंगोद्भव का दिन कहा जाता है।

  • कश्मीर

    कश्मीरी पंडित यह रात एक दिन पहले, त्रयोदशी को, हेरथ के नाम से रखते हैं, वटुक के घड़ों और अखरोटों के साथ, और उनके यहाँ चतुर्दशी दावत का दिन है।

रीत

महाशिवरात्रि के दिन क्या करते हैं

  1. शिवरात्रि से एक दिन पहले, त्रयोदशी को, बस एक बार खाना खाया जाता है।
  2. शिवरात्रि की सुबह नहाकर पूरे दिन के व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  3. शाम को पूजा या मंदिर जाने से पहले दूसरी बार स्नान होता है।
  4. रात को शिव की पूजा होती है: एक बार निशीथ काल में, या चार बार, हर प्रहर में एक बार।
  5. शिवलिंग पर जल और बेल पत्र चढ़ाए जाते हैं, वही दो चीज़ें जो शिकारी के हाथ से अनजाने में गिरी थीं।
  6. रात भर जागरण होता है, जैसे गुरुद्रुह चारों प्रहर जागता रहा।
  7. अगले दिन नहाकर, सूरज निकलने के बाद और चतुर्दशी ख़त्म होने से पहले व्रत खोला जाता है; कुछ लोग मानते हैं कि चतुर्दशी बीतने के बाद ही खोलना चाहिए।

सवाल जवाब

महाशिवरात्रि 2027: पूछे जाने वाले सवाल

महाशिवरात्रि 2027 कब है?

महाशिवरात्रि 2027 में 6 मार्च, शनिवार को है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 6 मार्च, दोपहर 12:04 से 7 मार्च, दोपहर 1:47 तक है। निशीथ काल की पूजा 7 मार्च, रात 12:08 से रात 12:57 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

महाशिवरात्रि की चार प्रहर पूजा क्या है?

पूरी रात को चार बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है, जिन्हें प्रहर कहते हैं, और हर प्रहर में एक बार शिव की पूजा होती है। जो चार बार नहीं कर सकते, वे निशीथ काल में एक बार पूजा करते हैं।

शिवरात्रि का निशीथ काल क्या है?

निशीथ काल आधी रात के पास का समय है। मान्यता है कि इसी समय शिव धरती पर लिंग के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए एक बार की पूजा इसी समय सबसे अच्छी मानी जाती है।

महाशिवरात्रि का व्रत कब खोलें?

अगले दिन नहाकर, सूरज निकलने के बाद और चतुर्दशी तिथि ख़त्म होने से पहले। एक दूसरी राय यह है कि व्रत चतुर्दशी बीतने के बाद खोला जाए।

शिवरात्रि पर बेल पत्र क्यों चढ़ाते हैं?

शिव पुराण की कथा में शिकारी गुरुद्रुह बेल के पेड़ पर जागता रहा, और उसके हिलने से बेल के पत्ते और पानी नीचे शिवलिंग पर गिरते रहे। अनजाने में हुई इसी पूजा से शिव प्रसन्न हुए।

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या फ़र्क़ है?

हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि है। फागुन की कृष्ण चतुर्दशी, जिसे दक्षिण के पंचांग माघ की कहते हैं, महाशिवरात्रि है।

रामेश्वरम का शिवलिंग किसने थापा?

रामचरितमानस के लंकाकांड के अनुसार, समुद्र पर पुल बनाने से पहले राम ने ख़ुद वहाँ शिवलिंग थापकर उसकी पूजा की, और कहा कि जो रामेश्वर के दर्शन करेंगे वे मेरे लोक जाएँगे।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Maha Shivaratri date and time (Drik Panchang)फागुन और माघ के नाम, निशीथ काल, चार प्रहर, त्रयोदशी को एक बार खाना, संकल्प, दूसरा स्नान, पारण का नियम
  2. Shiva Purana, Kotirudra Samhita, Adhyaya 40 (VedaPath)गुरुद्रुह की पूरी कथा, चारों प्रहर, हिरनों के वादे, गुह नाम, शृंगवेरपुर और राम वाला श्लोक
  3. Shiva Purana 4.40.4 (VedaPath)कथा का पहला श्लोक
  4. Maha Shivratri story (BAPS Kids)बेल पत्र और पानी का गिरना, गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण के मिलते जुलते रूप
  5. Lingodbhavamurti, Lord Shiva's iconic form (HinduPad)ज्योति के खंभे की कथा, हंस और वराह, केतकी का झूठ, शिव, लिंग और वायु पुराण
  6. Lingodbhava (Wikipedia)लिंगोद्भव मूर्ति की जगह, अरुणाचल पुराण और लिंगोद्भव का दिन
  7. Legend of Mahashivratri: the marriage of Shiva and Parvati (The Sentinel)शिव पार्वती के ब्याह की लोक मान्यता, फागुन अमावस से पहले का दिन
  8. Shri Ram Charit Manas, Lanka Kand (sanskritdocuments.org)लंकाकांड के दोहा 1 और 2 के बाद की चौपाइयाँ: लिंग थापना और रामेश्वर

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।