उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · फाल्गुन पूर्णिमा
होलिका दहन 2027
Holika Dahan 2027
आग वही, पर जो सच्चा था, उसे छू न सकी।
होलिका दहन 2027 में 22 मार्च, सोमवार को है। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 21 मार्च, शाम 6:22 से 22 मार्च, शाम 4:14 तक है। भद्रा सुबह 5:16 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
चौराहे पर लकड़ियों का ढेर रोज़ थोड़ा ऊँचा हो जाता है।
कोई सूखी टहनियाँ डाल गया, कोई पुराने लट्ठे। बच्चे हर शाम आकर उसे नापते हैं।
आज पूनम है। चाँद पूरा निकल आया है, पर ढेर को अभी कोई छूता नहीं।
बड़े पंचांग देख रहे हैं। भद्रा अभी बाक़ी है।
फिर कोई सिर हिलाता है। माचिस जलती है।
आग ऊपर उठती है, और गर्मी से सबके चेहरे एक क़दम पीछे हटते हैं।
एक दादी धीरे से कहती हैं: ऐसी ही आग के बीच एक बच्चे ने कहा था, पिताजी, मुझे तो ठंडक लग रही है।
2027 में कब
होलिका दहन 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़22 मार्च, सोमवार
तिथिफाल्गुन पूर्णिमा21 मार्च, शाम 6:22 से 22 मार्च, शाम 4:14 तक
नक्षत्रउत्तरा फाल्गुनीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:23
सूर्यास्तशाम 6:33
चंद्रोदयशाम 6:38
- भद्रा
- 21 मार्च, शाम 6:22 से 22 मार्च, सुबह 5:16 तकविष्टि करण, जिसमें शुभ काम नहीं किए जाते।
- प्रदोष काल
- शाम 6:33 से रात 8:57 तकसूर्यास्त के बाद के दो घंटे चौबीस मिनट।
- होलाष्टक
- 15 से 22 मार्चहोली से पहले के आठ दिन, जिनमें शुभ काम नहीं होते।
इस बरस पूर्णिमा 21 मार्च की शाम से शुरू होती है, पर उस पूरी रात भद्रा रहती है, और 22 मार्च को पूर्णिमा सूरज ढलने से पहले ख़त्म हो जाती है। इसलिए पंचांगों में दो राय हैं: कुछ पंचांग 21 मार्च की रात, भद्रा के आख़िरी हिस्से में, होलिका दहन बताते हैं; भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और यह पंचांग 22 मार्च की शाम बताते हैं, और रंगों की होली 23 मार्च को। अपने शहर का नियम अपने पंडित जी से पूछ लें।
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शुभकामना
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पहचान
होलिका दहन क्या है
होलिका दहन होली से पहले की रात है, फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को। इसे होलिका दीपक और छोटी होली भी कहते हैं। आग जलाने का समय दूसरे किसी भी त्योहार से ज़्यादा ध्यान से चुना जाता है: प्रदोष काल में, यानी सूरज डूबने के बाद, जब पूर्णिमा तिथि चल रही हो। पूर्णिमा के पहले आधे हिस्से में भद्रा रहती है, और भद्रा में कोई शुभ काम नहीं करते। इसलिए नियम यह है कि हो सके तो भद्रा बीत जाने के बाद ही आग जले। यह पन्ना इसी नियम से इस बरस का समय निकालकर ऊपर देता है। अगली सुबह रंगों वाली होली होती है, जिसे धुलंडी भी कहते हैं।
कथा
होलिका दहन की कथा
विष्णु पुराण के पहले अंश में, और भागवत पुराण के सातवें स्कंध में, प्रह्लाद की कथा है। प्रह्लाद असुरों के राजा हिरण्यकशिपु का बेटा था, और विष्णु का भक्त। पिता चाहता था कि बेटा विष्णु का नाम छोड़ दे। बेटा नहीं माना।
तब पिता ने उसे मारने के एक के बाद एक तरीक़े आज़माए। विष्णु पुराण में पहले दैत्य हथियारों से वार करते हैं, पर प्रह्लाद को दर्द तक नहीं होता। फिर ज़हरीले साँप उसे डसते हैं, और उनके दाँत टूट जाते हैं। फिर दिशाओं के हाथी उसे रौंदते हैं, और उनके दाँत उसकी छाती से टकराकर कुंद हो जाते हैं। तब राजा कहता है, इसे जला दो। दानव उसके चारों ओर लकड़ियों का बड़ा ढेर लगाते हैं और आग लगा देते हैं।
आग हवा से भड़कती है, और बीच से प्रह्लाद की आवाज़ आती है: ‘तातैष वह्निः पवनेरितोऽपि न मां दहत्यत्र समन्ततोऽहम्। पश्यामि पद्मास्तरणास्तृतानि शीतानि सर्वाणि दिशां मुखानि॥’ (विष्णु पुराण 1.17.47)। मतलब: पिताजी, हवा से भड़की यह आग भी मुझे नहीं जलाती। मुझे तो चारों दिशाएँ ठंडी दिखती हैं, जैसे हर ओर कमल के फूल बिछे हों। भागवत पुराण भी, सातवें स्कंध के पाँचवें अध्याय में, गिनाता है कि हिरण्यकशिपु ने हाथी, साँप, जादू टोना, ऊँचाई से गिराना, छल, क़ैद, ज़हर, भूखा रखना, बर्फ़, हवा, आग, पानी और पहाड़ के नीचे दबाना, सब आज़माया, और कोई तरीक़ा प्रह्लाद को मार न सका।
इन दोनों पुराणों में आग दानव लगाते हैं। होलिका की बात लोक कथा से आती है। लोक में कहते हैं कि होलिका हिरण्यकशिपु की बहन थी, और आग उसे जला नहीं सकती थी। वह प्रह्लाद को लेकर आग में जा टिकी। पर हुआ उल्टा: होलिका जल गई, और प्रह्लाद बच गया। उसी की याद में फाल्गुन पूर्णिमा की रात यह आग जलाई जाती है, इस भरोसे के साथ कि बुराई अपनी ही आग में जलती है।
कहाँ कैसे
होलिका दहन कहाँ कैसे मनाया जाता है
ब्रज
फाल्गुन पूर्णिमा की रात गाँव गाँव होलिका जलती है। ब्रज में ऐसी जगह भी है जहाँ पुजारी जलती आग के बीच से सकुशल निकल आते हैं, जैसे प्रह्लाद निकले थे।
बनारस और उत्तर भारत के कई पंडित
यहाँ एक अलग नियम भी माना जाता है: भद्रा आधी रात के बाद तक रहे, तो भद्रा उतरने तक रुको और फिर होलिका जलाओ।
देश भर के मोहल्ले और गाँव
होलिका दहन की रात आग जलती है, और उसके अगले दिन सुबह से रंग खेला जाता है।
रीत
होलिका दहन के दिन क्या करते हैं
- होलिका फाल्गुन पूर्णिमा को जलती है: सूरज डूबने के बाद, प्रदोष से आधी रात के बीच, जब पूर्णिमा तिथि चल रही हो।
- सबसे पहली पसंद वह समय है जब प्रदोष हो, पूर्णिमा चल रही हो, और भद्रा बीत चुकी हो।
- भद्रा प्रदोष पर छाई हो पर आधी रात से पहले उतर जाए, तो भद्रा उतरने के बाद आग जलाई जाती है।
- भद्रा आधी रात के बाद तक रहे, तो दहन भद्रा पूँछ में होता है, पर भद्रा मुख में कभी नहीं; भद्रा मुख में दहन पूरे नगर और देश के लिए अशुभ माना गया है।
- प्रदोष और आधी रात के बीच भद्रा पूँछ भी न मिले, तो प्रदोष में ही दहन कर लिया जाता है।
- यहाँ आधी रात का मतलब घड़ी वाली आधी रात नहीं, पंचांग की आधी रात है, जो सूरज डूबने और अगले दिन सूरज निकलने के ठीक बीच में आती है।
- अगली सुबह, यानी होलिका दहन के बाद वाले दिन, रंग खेला जाता है।
सवाल जवाब
होलिका दहन 2027: पूछे जाने वाले सवाल
होलिका दहन 2027 कब है?
होलिका दहन 2027 में 22 मार्च, सोमवार को है। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 21 मार्च, शाम 6:22 से 22 मार्च, शाम 4:14 तक है। भद्रा सुबह 5:16 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
होलिका दहन में भद्रा क्यों देखी जाती है?
भद्रा पूर्णिमा के पहले आधे हिस्से में रहती है, और उस समय शुभ काम नहीं किए जाते। माना जाता है कि ग़लत समय पर होलिका जलाना पूरे साल के लिए दुख लाता है, इसलिए इसका समय बाक़ी त्योहारों से ज़्यादा ध्यान से चुना जाता है।
भद्रा मुख और भद्रा पूँछ क्या हैं?
भद्रा के दो हिस्से। भद्रा मुख में होलिका दहन कभी नहीं होता, और जब भद्रा आधी रात के बाद तक हो, तब भद्रा पूँछ में दहन किया जा सकता है।
प्रह्लाद आग में क्यों नहीं जले?
विष्णु पुराण के अनुसार प्रह्लाद ने आग के बीच से कहा कि यह आग मुझे नहीं जलाती, चारों दिशाएँ ठंडी लगती हैं। उनकी रक्षा विष्णु की भक्ति ने की, जिन्हें वे हर चीज़ में और अपने भीतर देखते थे।
होलिका कौन थी?
लोक कथा में होलिका हिरण्यकशिपु की बहन है, जिसे आग नहीं जलाती थी। वह प्रह्लाद को लेकर आग में गई, पर ख़ुद जल गई और प्रह्लाद बच गए।
होलिका दहन और होली में क्या फ़र्क़ है?
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात की आग है। रंगों वाली होली, यानी धुलंडी, उसके अगले दिन खेली जाती है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Holika Dahan Muhurat rules, Drik Panchangप्रदोष, पूर्णिमा, भद्रा मुख, भद्रा पूँछ, बनारस का नियम, पंचांग की आधी रात, होलिका दीपक और छोटी होली नाम
- The Vishnu Purana, Book 1, Chapter 17 (Wilson), sacred-texts.comहथियार, साँप, हाथी और आग की परीक्षा, प्रह्लाद के शब्द
- Vishnu Purana, Amsha 1, Adhyaya 17, Vedapathश्लोक 46 और 47, आग का ढेर और ठंडी दिशाएँ
- Srimad Bhagavatam, Canto 7, Chapter 5, Vedapathश्लोक 43 और 44, मारने के सारे तरीक़े
- Different types of Holi in Vrindavan, VCMहोलिका की लोक कथा
- The colours of Holi in Braj, 30 Stadesफाल्गुन पूर्णिमा की आग, पुजारियों का आग से निकलना
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।