उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · कार्तिक शुक्ल षष्ठी
छठ पूजा 2027
Chhath Puja 2027
डूबते सूरज को भी अर्घ्य, उगते को भी। और बीच में एक पूरी रात, घाट के नाम।
इस बरस (2026) छठ पूजा 15 नवंबर, रविवार को है। छठ पूजा 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।
छठ पूजा 2027 में 4 नवंबर, गुरुवार को है। कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि 3 नवंबर, रात 7:32 से 4 नवंबर, रात 9:38 तक है। संध्या अर्घ्य शाम 5:34 पर सूर्यास्त के समय, और उषा अर्घ्य अगली सुबह सुबह 6:36 पर सूर्योदय के समय। समय नई दिल्ली के हैं।
पानी कमर तक है। कार्तिक का पानी, ठंडा।
दोनों हाथों में बाँस का सूप। उस पर ठेकुआ, केला, नारियल, और गन्ने का एक टुकड़ा।
पश्चिम में सूरज नीचे उतर रहा है, बड़ा और नारंगी।
किनारे पर औरतें गा रही हैं। कोई भोजपुरी में, कोई मैथिली में, कोई मगही में।
आज डूबते सूरज को अर्घ्य है। कल भोर में यही औरतें फिर इसी पानी में होंगी, उगते सूरज के लिए।
कल शाम खरना की खीर के बाद से मुँह में पानी की एक बूँद नहीं गई। फिर भी हाथ नहीं काँपते।
लोक कहता है, यही अर्घ्य कभी सीता ने दिया, कभी कर्ण ने, कभी द्रौपदी ने। आज वही जल इन हाथों में है।
2027 में कब
छठ पूजा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़4 नवंबर, गुरुवार
तिथिकार्तिक शुक्ल षष्ठी3 नवंबर, रात 7:32 से 4 नवंबर, रात 9:38 तक
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:35
सूर्यास्तशाम 5:34
चंद्रोदयसुबह 11:47
- नहाय खाय
- 2 नवंबर, मंगलवारपहला दिन: नहाकर सात्विक खाना।
- खरना
- 3 नवंबर, बुधवारदूसरा दिन: शाम को खीर और रोटी, फिर निर्जल व्रत।
- संध्या अर्घ्य
- 4 नवंबर, शाम 5:34तीसरा दिन: डूबते सूरज को अर्घ्य।
- उषा अर्घ्य
- 5 नवंबर, सुबह 6:36चौथा दिन: उगते सूरज को अर्घ्य, फिर पारण।
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शुभकामना
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पहचान
छठ पूजा क्या है
छठ सूरज देव और छठी मैया की पूजा है। यह कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी का पर्व है, पर पूजा चार दिन चलती है: चतुर्थी को नहाय खाय, पंचमी को खरना, षष्ठी की शाम डूबते सूरज को संध्या अर्घ्य, और सप्तमी की भोर उगते सूरज को उषा अर्घ्य। सबसे बड़ी छठ बिहार में होती है, फिर झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई वाले मधेस में। मैथिल, भोजपुरिया, मगही बोलने वाले और थारू लोग इसे रखते हैं। व्रत रखने वाले को परवैतिन कहते हैं; ज़्यादातर औरतें यह व्रत रखती हैं, पर मर्द भी रखते हैं। चैत के महीने में भी एक छठ होती है, पर कार्तिक वाली सबसे बड़ी है।
कथा
छठ पूजा की कथा
छठी मैया कौन हैं, इस पर कई बातें कही जाती हैं। मार्कंडेय पुराण के हवाले से कहा जाता है कि वे प्रकृति की देवी हैं और सूरज देव की बहन। एक मान्यता उन्हें ब्रह्मा की मानस पुत्री कहती है, और कोई उन्हें प्रकृति का छठा रूप। लोग मानते हैं कि वे बच्चों की रखवाली करती हैं, उन्हें लंबी उम्र और अच्छी सेहत देती हैं। उनकी एक पुरानी कथा राजा प्रियव्रत की है। राजा और रानी मालिनी के कोई संतान नहीं थी। एक ऋषि की दी हुई खीर के बाद बेटा हुआ, पर वह जन्म से ही बेजान था। राजा दुख में टूट चुके थे, तभी छठी मैया प्रकट हुईं और बच्चे को जीवन दे दिया। कहते हैं, तभी से संतान की आस रखने वाले उनकी पूजा करते हैं।
बिहार में सीता की कथा सबसे ज़्यादा कही जाती है, और यह लोक की मान्यता है। कहते हैं कि लंका से अयोध्या लौटने के बाद, दीवाली बीतने पर, राम और सीता ने उपवास रखा और सीता ने सूर्य षष्ठी की पूजा की; एक कथा कहती है कि उन्होंने छह दिन तक लगातार सूरज की उपासना की, और बाद में लव और कुश का जन्म हुआ। मुंगेर में मान्यता है कि सीता ने छठ यहीं की थी, और गंगा के बीच एक चट्टान पर बना सीताचरण मंदिर इसी आस्था का बड़ा ठिकाना है। चंपारण और नेपाल के मधेस में लोग मानते हैं कि सीता ने यह पर्व नारायणी नदी के किनारे वाल्मीकि आश्रम में रहते हुए किया।
महाभारत की ओर से दो कथाएँ आती हैं। कर्ण सूरज के बेटे थे। लोक में कहते हैं कि वे रोज़ घंटों पानी में खड़े होकर सूरज को अर्घ्य देते थे, और बहुत से लोग मानते हैं कि इस पर्व की शुरुआत उन्हीं से हुई। घाट पर पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने की जो रीत है, उसे इसी से जोड़ा जाता है।
दूसरी कथा द्रौपदी की है। कहते हैं कि जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा, और उन्हें राज्य वापस मिला। एक कथा में ऋषि धौम्य ने वनवास के दिनों में उन्हें कार्तिक की षष्ठी को सूरज पूजने को कहा था। रांची के नगड़ी गाँव में एक झरने के पास मान्यता है कि द्रौपदी ने यहीं सूरज की पूजा की थी, वहाँ की कथा में कुरुक्षेत्र की जीत के लिए, और उस जगह आज भी छठ होती है। कथाएँ अलग अलग वजह बताती हैं, पर हर एक में कोई न कोई पानी में खड़ा होकर सूरज को जल दे रहा है।
कहाँ कैसे
छठ पूजा कहाँ कैसे मनाया जाता है
बिहार
यहाँ यह सबसे बड़ा पर्व है। गंगा और दूसरी नदियों के घाट, तालाब और पोखर व्रतियों से भर जाते हैं, और कई लोग घर से घाट तक दंडवत करते हुए, यानी बार बार ज़मीन पर लेटकर, पहुँचते हैं।
मुंगेर
मान्यता है कि सीता ने छठ यहीं की थी। गंगा के बीच एक चट्टान पर सीताचरण मंदिर है, जो यहाँ के लोगों की आस्था का बड़ा ठिकाना है।
झारखंड
घरों में परिवार साथ मिलकर सूप और प्रसाद तैयार करते हैं। रांची के नगड़ी गाँव में, जहाँ मान्यता है कि द्रौपदी ने झरने के पास सूरज की पूजा की थी, आज भी छठ होती है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश
यहाँ भी चारों दिन उसी नियम से रखे जाते हैं, और घाटों पर भोजपुरी के छठ गीत गूँजते हैं।
नेपाल का मधेस और तराई
मधेस, कोशी, लुंबिनी जैसे प्रदेशों में छठ होती है, और अब काठमांडू घाटी में भी। यहाँ मान्यता है कि सीता ने यह पर्व नारायणी नदी के किनारे वाल्मीकि आश्रम में रहते हुए किया था।
दिल्ली, मुंबई और समंदर पार
जहाँ जहाँ बिहार और पूरब के लोग जाकर बसे, छठ भी साथ गई: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, और अमेरिका, मॉरीशस, सिंगापुर तक।
रीत
छठ पूजा के दिन क्या करते हैं
- नहाय खाय: नहाकर घर, आँगन और घाट तक का रास्ता साफ़ होता है, और व्रती अरवा चावल, चने की दाल और लौकी का सादा खाना खाते हैं, जिसे कद्दू भात कहते हैं।
- खरना: दिन भर का उपवास, फिर शाम को गुड़ की खीर और रोटी, और उसके बाद लगभग छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत, यानी पानी भी नहीं।
- सारा प्रसाद बिना नमक, प्याज़ और लहसुन के बनता है: ठेकुआ, चावल के लड्डू, मौसम के फल, गन्ना।
- प्रसाद बाँस के सूप और दउरा में सजाया जाता है, और साथ में मिट्टी का एक छोटा दीया रहता है।
- संध्या अर्घ्य: षष्ठी की शाम व्रती पानी में खड़े होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देते हैं और छठी मैया को प्रसाद चढ़ाते हैं।
- कई घरों में कोसी भरी जाती है: पाँच से सात गन्ने बाँधकर छतरी जैसा घेरा बनता है, उसके नीचे दीये जलते हैं, और ठेकुआ और फल रखे जाते हैं।
- रात को छठ के गीत गाए जाते हैं और व्रत की कथा पढ़ी जाती है।
- उषा अर्घ्य और पारण: सप्तमी की भोर उगते सूरज को अर्घ्य, बच्चों और घर की सलामती की माँग, और फिर थोड़ा प्रसाद और पानी लेकर व्रत खुलता है।
रसोई
छठ पूजा का खाना
- ठेकुआ गेहूँ के आटे, गुड़ और घी का कड़क मीठा, तला हुआ, छठ का सबसे पहचाना प्रसाद।
- कद्दू भात नहाय खाय का सादा खाना, अरवा चावल, चने की दाल और लौकी।
- रसियाव खरना की शाम की गुड़ वाली खीर, जो रोटी के साथ खाई जाती है।
- कसार के लड्डू पिसे चावल या गेहूँ को गुड़ के साथ बाँधकर बने लड्डू।
सवाल जवाब
छठ पूजा 2027: पूछे जाने वाले सवाल
छठ पूजा 2026 में कब है?
छठ पूजा 2026 में 15 नवंबर, रविवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड छठ पूजा 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।
छठ पूजा 2027 कब है?
छठ पूजा 2027 में 4 नवंबर, गुरुवार को है। कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि 3 नवंबर, रात 7:32 से 4 नवंबर, रात 9:38 तक है। संध्या अर्घ्य शाम 5:34 पर सूर्यास्त के समय, और उषा अर्घ्य अगली सुबह सुबह 6:36 पर सूर्योदय के समय। समय नई दिल्ली के हैं।
छठ में अर्घ्य कब कब दिया जाता है?
दो बार। षष्ठी की शाम डूबते सूरज को संध्या अर्घ्य, और सप्तमी की भोर उगते सूरज को उषा अर्घ्य। दोनों दिनों का सूर्यास्त और सूर्योदय इस पन्ने पर ऊपर दिया है।
छठी मैया कौन हैं?
मान्यता है कि वे प्रकृति की देवी और सूरज देव की बहन हैं; एक मान्यता उन्हें ब्रह्मा की मानस पुत्री कहती है। लोग मानते हैं कि वे बच्चों को लंबी उम्र और अच्छी सेहत देती हैं।
खरना क्या होता है?
छठ का दूसरा दिन। व्रती दिन भर उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर और रोटी खाते हैं। इसके बाद लगभग छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
छठ का व्रत कितने घंटे का होता है?
खरना के प्रसाद के बाद से उषा अर्घ्य तक, लगभग छत्तीस घंटे, बिना अन्न और बिना पानी के।
ठेकुआ किससे बनता है?
गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से, जिसे तलकर कड़क बनाया जाता है। इसमें नमक नहीं पड़ता, और यह छठ का सबसे ख़ास प्रसाद है।
क्या सीता ने छठ की थी?
यह बिहार और मधेस की लोक मान्यता है। मुंगेर में मानते हैं कि सीता ने छठ वहीं की, गंगा के बीच सीताचरण मंदिर इसी से जुड़ा है, और मधेस में इसे नारायणी के किनारे वाल्मीकि आश्रम से जोड़ा जाता है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Chhath (Wikipedia)चारों दिन, कद्दू भात, रसियाव, कोसी, परवैतिन, मुंगेर का सीताचरण, मधेस और नारायणी, नगड़ी में द्रौपदी, प्रियव्रत, नेपाल के प्रदेश
- छठ पूजा की पौराणिक कथाएँ (Navbharat Live)कर्ण का पानी में खड़े होकर अर्घ्य, द्रौपदी का व्रत, सीता की छह दिन की उपासना, राजा और रानी मालिनी, मार्कंडेय पुराण में छठी मैया
- छठी मैया और सूर्य पूजा (Amar Ujala)ब्रह्मा की मानस पुत्री, सूरज की बहन, कर्ण से शुरुआत, द्रौपदी और राजपाट, चतुर्थी से सप्तमी
- Chhath Puja: date, arghya, vidhi (Shubh Panchang)षष्ठी का नियम, चार दिन, सूप और दउरा, ठेकुआ, छठ गीतों की बोलियाँ, धौम्य ऋषि और द्रौपदी
- Chhath Puja (SmartPuja)छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत, ठेकुआ और गन्ना, घाट तक दंडवत, कर्ण और पांडवों की कथा
- Chhath Puja: significance of all four days and samagri (The Quint)हर दिन का काम, अरवा चावल की खीर, बाँस का सूप, पूजा का सामान
- Chhath Puja: dates, rituals, significance (Manyavar)नहाय खाय का खाना, खरना की खीर, झारखंड में साथ मिलकर सूप बनाना, छठी मैया
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।