उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मीन संक्रांति
फूलदेई 2027
Phooldei 2027
सुबह दरवाज़ा खोला, तो देहरी पर वसंत रखा था।
फूलदेई 2027 में 15 मार्च, सोमवार को है। सूर्य सुबह 7:00 पर मीन राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
दरवाज़ा खुलता है। देहरी पर पीले फूल हैं, कुछ लाल भी।
साथ में चावल के कुछ दाने। देहरी कल ही गोबर और मिट्टी से लीपी गई थी।
नीचे पगडंडी पर छोटे पैरों की आवाज़। हाथों में रिंगाल की टोकरियाँ।
टोकरियों में पीली प्योली, लाल बुरांश और सरसों।
बच्चे अगले घर की देहरी पर झुकते हैं और गाते हैं: फूल देई, छम्मा देई।
घर की औरत भीतर से गुड़, चावल और कुछ सिक्के लेकर आती है।
पहाड़ में कहते हैं, यह पीला फूल एक राजकुमारी की याद है, जिसे अपना जंगल कभी नहीं भूला।
2027 में कब
फूलदेई 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़15 मार्च, सोमवार
संक्रांतिसूर्य मीन राशि मेंसुबह 7:00
नक्षत्ररोहिणीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:32
सूर्यास्तशाम 6:29
चंद्रोदयसुबह 10:53
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
फूलदेई क्या है
फूलदेई उत्तराखंड का बच्चों का त्योहार है, गढ़वाल और कुमाऊँ दोनों में। यह चैत्र महीने के पहले दिन आता है, सूरज वाले पंचांग से, यानी मीन संक्रांति को, जिस दिन सूरज मीन राशि में जाता है। पहाड़ में बहुत से लोग इसे नए साल की शुरुआत भी मानते हैं। बच्चे, जिन्हें फुलारी या फुल्यारी कहते हैं, सुबह सुबह घर घर जाकर देहरी पर फूल और चावल रखते हैं और आशीष का गीत गाते हैं। मान्यता है कि देहरी पर रखे फूल घर में बरकत और आशीर्वाद लाते हैं। कुमाऊँ में इसे फुलदेई कहते हैं और गढ़वाल में फूल संग्राद; इसके और नाम हैं फूल संक्रांति और चैत्र संक्रांति। कई जगह यह एक सुबह का त्योहार है, और कुछ इलाक़ों में बच्चे वसंत भर, लगभग पूरा महीना, फूल रखते हैं।
कथा
फूलदेई की कथा
पहाड़ में प्योली के फूल की एक लोक कथा कही जाती है। जंगल में एक राजकुमारी रहती थी, प्योली। जंगल के पंछी और जानवर उसे बहुत प्यार करते थे, और वह उन्हें। फिर उसका ब्याह एक दूर देश में हो गया।
नए घर में उसका मन नहीं लगा। उसे अपना जंगल याद आता रहा, इतना कि वह बीमार पड़ गई, और फिर नहीं रही। उसकी आख़िरी इच्छा थी कि उसे उसके अपने पेड़ों के बीच दबाया जाए। जहाँ उसे दबाया गया, वहाँ एक पीला फूल खिला। लोगों ने उस फूल को प्योली नाम दिया, उसी की याद में।
बच्चों के गीत के बोल छोटे हैं, पर हर बोल एक आशीष है: ‘फूल देई, छम्मा देई, दैणी द्वार, भरि भकार।’ फूल देई का मतलब है, यह देहरी फूलों से भरी रहे और शुभ रहे। छम्मा देई, यह देहरी क्षमा करे और सबकी रक्षा करे। दैणी द्वार, यह द्वार सबके लिए फलने वाला हो। और भरि भकार, हर घर का अनाज का भंडार भरा रहे।
इसी महीने से भिटौली भी शुरू होती है, जिसमें भाई अपनी ब्याही बहनों के घर तोहफ़े लेकर जाते हैं। यानी चैत्र का महीना पहाड़ में देहरी से देहरी तक चलता है: बच्चे फूल लेकर, भाई भिटौली लेकर।
कहाँ कैसे
फूलदेई कहाँ कैसे मनाया जाता है
कुमाऊँ
यहाँ इसे फुलदेई कहते हैं। सुबह बच्चे घर घर जाकर देहरी पर फूल और चावल रखते हैं और आशीष गाते हैं।
गढ़वाल
यहाँ यह फूल संग्राद कहलाता है, यानी फूलों की संक्रांति।
पहाड़ के वे गाँव जहाँ यह महीने भर चलता है
बच्चे वसंत भर देहरियों पर फूल रखते हैं, और आख़िरी दिन हर देहरी पर कम से कम पाँच रंग के फूल रखे जाते हैं।
रीत
फूलदेई के दिन क्या करते हैं
- त्योहार से पहले के दिनों में बच्चे रिंगाल, यानी पहाड़ी बाँस, की टोकरियों में खेतों, जंगलों और बग़ीचों से फूल जमा करते हैं।
- टोकरियों में पीली प्योली, लाल बुरांश और सरसों होती है, और आड़ू, आलूबुख़ारा, ख़ुबानी, बादाम, नाशपाती और सेब के फूल भी।
- घर की औरतें देहरी को गोबर और मिट्टी से लीपकर साफ़ करती हैं।
- सुबह बच्चे नहाकर घर घर जाते हैं और देहरी पर फूल और चावल रखते हैं।
- फूल रखते हुए वे गाते हैं: फूल देई, छम्मा देई, दैणी द्वार, भरि भकार।
- घर की औरत बच्चों को सई, चावल, गुड़ और कुछ पैसे देती है।
- इसी महीने से भिटौली शुरू होती है, जब भाई ब्याही बहनों के घर तोहफ़े लेकर जाते हैं।
रसोई
फूलदेई का खाना
- सई चावल के आटे, दही और गुड़ से बनी मीठी चीज़, जो बच्चों को दी जाती है।
- चावल के आटे की पापड़ी बच्चों के हिस्से की मिठाई।
- आटे और गुड़ का हलवा फूल रखने आए बच्चों के लिए।
सवाल जवाब
फूलदेई 2027: पूछे जाने वाले सवाल
फूलदेई 2027 कब है?
फूलदेई 2027 में 15 मार्च, सोमवार को है। सूर्य सुबह 7:00 पर मीन राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
फूलदेई कब मनाई जाती है?
चैत्र महीने के पहले दिन, सूरज वाले पंचांग से, यानी मीन संक्रांति को। पहाड़ में बहुत से लोग इसे नए साल का पहला दिन भी मानते हैं।
फूल देई छम्मा देई का मतलब क्या है?
यह बच्चों का आशीष है: देहरी फूलों से भरी और शुभ रहे, क्षमा करे और रक्षा करे, द्वार सबके लिए फलने वाला हो, और अनाज का भंडार भरा रहे।
फूलदेई पर कौन से फूल रखे जाते हैं?
पीली प्योली, लाल बुरांश और सरसों, और साथ में आड़ू, ख़ुबानी, बादाम, नाशपाती और सेब जैसे पेड़ों के फूल।
प्योली के फूल की कथा क्या है?
लोक कथा है कि प्योली नाम की एक राजकुमारी का ब्याह दूर हुआ, और वह अपने जंगल की याद में चल बसी। जहाँ उसे दबाया गया, वहाँ एक पीला फूल खिला, जिसे प्योली कहा गया।
फुलारी किसे कहते हैं?
फूलदेई पर घर घर फूल रखने वाले बच्चों को फुलारी या फुल्यारी कहते हैं। बदले में उन्हें सई, गुड़, चावल और पैसे मिलते हैं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Phool Dei, Uttarakhand's festival of flowers, Down To Earthगढ़वाल और कुमाऊँ, महीने भर का चलन, फूलों के नाम, पाँच रंग, पैसे, पापड़ी और हलवा, बरकत की मान्यता
- Phool Dei, Colors of Uttarakhandचैत्र का पहला दिन, फुल्यारी, रिंगाल, देहरी लीपना, सई, भिटौली, प्योली की कथा
- Phool Dei, Bhakti Bharatमीन संक्रांति, फुलारी, फूल संग्राद और और नाम, फूल देई छम्मा देई के बोलों के मतलब
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।