पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आषाढ़ पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा 2027

Guru Purnima 2027

जिसने अँधेरा हटाया, आज उसके पाँव।

गुरु पूर्णिमा 2027 में 18 जुलाई, रविवार को है। आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 17 जुलाई, शाम 6:49 से 18 जुलाई, रात 9:15 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

गुरु पूर्णिमा का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

पूर्णिमा: उस रात पूरा चाँद

एक जोड़ी खड़ाऊँ, लकड़ी की। चारों ओर फूल।

आश्रम में आज इन्हीं की पूजा है। कहते हैं, ये व्यास की हैं।

बाहर बारिश अभी अभी थमी है। आँगन के पानी में पूरा चाँद काँप रहा है।

एक लड़का अपने संगीत के गुरु के आगे झुकता है। हाथ में थोड़े फूल, एक फल।

गुरु कुछ नहीं कहते। बस अपना तानपुरा उसकी ओर बढ़ा देते हैं।

गु यानी अँधेरा। रु यानी उसे हटाने वाला।

आज उसे याद करने का दिन है जिसने एक वेद को चार में बाँटा, ताकि लोग उसे सँभाल सकें।

और जिसने एक कथा इतनी बड़ी कही कि उसके भीतर राम की एक पूरी छोटी कथा समा गई।

2027 में कब

गुरु पूर्णिमा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़18 जुलाई, रविवार

तिथिआषाढ़ पूर्णिमा17 जुलाई, शाम 6:49 से 18 जुलाई, रात 9:15 तक

नक्षत्रपूर्वाषाढ़ासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:35

सूर्यास्तशाम 7:20

चंद्रोदयशाम 7:18

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शुभकामना

गुरु पूर्णिमा का शुभकामना कार्ड

गुरु पूर्णिमा का शुभकामना कार्ड: गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

गुरु पूर्णिमा क्या है

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ महीने की पूर्णिमा है। हिंदू परंपरा में यह महर्षि वेद व्यास का जन्मदिन माना जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। गुरु शब्द दो हिस्सों से समझाया जाता है: गु यानी अँधेरा या अज्ञान, और रु यानी उसे हटाने वाला। इस दिन शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं, विद्यार्थी अपने शिक्षकों का आदर करते हैं, और आश्रमों में व्यास पूजा होती है। बौद्ध इस पूर्णिमा को भगवान बुद्ध के पहले उपदेश की याद में रखते हैं, और जैन परंपरा में इसे वह दिन बताया जाता है जब भगवान महावीर को उनके पहले शिष्य गौतम स्वामी मिले। लोक में यह भी कहा जाता है कि किसान इसी दिन आने वाली अच्छी बारिश के लिए धन्यवाद देते थे।

कथा

गुरु पूर्णिमा की कथा

हिंदू परंपरा में व्यास को महागुरु कहा जाता है, और इसकी वजह उनके काम में है। वेद पहले एक था; व्यास ने उसे चार हिस्सों में बाँटा। उन्होंने महाभारत रची, और पुराणों की रचना भी उन्हीं से जोड़ी जाती है। यानी जो ज्ञान बिखरा था या बहुत बड़ा था, उसे उन्होंने ऐसे बाँटा कि लोग उसे पढ़ सकें, याद रख सकें, आगे दे सकें। गुरु का काम भी यही है, और इसीलिए उनके जन्मदिन को गुरुओं का दिन माना गया। कुछ आश्रमों में आज भी खड़ाऊँ की पूजा होती है, जिन्हें व्यास की खड़ाऊँ माना जाता है।

बौद्ध परंपरा में आषाढ़ की यह पूर्णिमा उस दिन की याद है जब भगवान बुद्ध ने बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बोध पाने के बाद, सारनाथ में, अपने पहले पाँच शिष्यों को पहला उपदेश दिया। उसी उपदेश से संघ बना, यानी भिक्षुओं का समुदाय। बौद्ध इस दिन उपोसथ रखते हैं, बुद्ध की शिक्षाओं को याद करते हैं, और कुछ भिक्षु इस दिन से ध्यान या दूसरी साधना शुरू करते हैं।

जैन परंपरा से जोड़कर कुछ जगह यह भी बताया जाता है कि यह वह दिन है जब चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने गौतम स्वामी को अपना पहला शिष्य स्वीकार किया, और महावीर उनके गुरु बने। इस तरह एक ही पूर्णिमा तीन परंपराओं में अलग अलग रूप में आती है, और हर एक में किसी ने किसी को रास्ता दिखाया।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में गुरु पूर्णिमा

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

महाभारत, रामोपाख्यान

संस्कृत · Ramopakhyana (Mahabharata)

व्यास की रची महाभारत के भीतर, वन पर्व में, एक पूरी रामकथा है: रामोपाख्यान। इसे मार्कंडेय ऋषि वनवास में युधिष्ठिर को सुनाते हैं, और यह सात सौ चार श्लोकों में पूरी हो जाती है। यानी जिस व्यास को आज के दिन गुरु मानकर पूजा जाता है, उनकी कथा ने राम की कथा को भी अपने भीतर जगह दी, एक कहानी के भीतर दूसरी कहानी की तरह।

कहाँ कैसे

गुरु पूर्णिमा कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • आश्रम और मठ

    व्यास पूजा होती है, मंत्र और भजन गाए जाते हैं, गुरु गीता पढ़ी जाती है, और कुछ आश्रमों में व्यास की मानी जाने वाली खड़ाऊँ की पूजा होती है। शिष्य अपने गुरु के पास जाते हैं और गुरु भाइयों का भी आदर होता है।

  • संगीत और कला की शिक्षा

    संगीत सीखने वाले इस दिन अपने गुरुओं का आदर करते हैं, गुरु शिष्य परंपरा की याद में।

  • स्कूल और कॉलेज

    विद्यार्थी शिक्षकों को फूल, फल या छोटी भेंट देते हैं, और उनके लिए कविताएँ और भाषण होते हैं।

  • बौद्ध विहार

    बौद्ध इस दिन उपोसथ रखते हैं और बुद्ध के पहले उपदेश और उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं।

  • गाँव और खेत

    लोक कथा है कि किसान इस दिन आने वाली अच्छी बारिश के लिए धन्यवाद देते थे।

रीत

गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करते हैं

  1. सुबह जल्दी नहाकर प्रार्थना की जाती है, और लोग मंदिर या सत्संग में जाते हैं।
  2. व्यास पूजा होती है, जिसमें मंत्र, भजन और गुरु गीता का पाठ होता है।
  3. गुरु को फूल, फल और भेंट दी जाती है, और प्रसाद और चरणामृत बँटता है।
  4. पाद्य पूजा होती है, यानी गुरु के चरणों की पूजा।
  5. बहुत से लोग इस दिन सेवा करते हैं और मिलकर भोजन कराते हैं।
  6. कुछ लोग पूरे दिन का उपवास रखते हैं।
  7. कई लोग इसी दिन गुरु से दीक्षा लेकर नई साधना या पढ़ाई शुरू करते हैं।

सवाल जवाब

गुरु पूर्णिमा 2027: पूछे जाने वाले सवाल

गुरु पूर्णिमा 2027 कब है?

गुरु पूर्णिमा 2027 में 18 जुलाई, रविवार को है। आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 17 जुलाई, शाम 6:49 से 18 जुलाई, रात 9:15 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

हिंदू परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा को महर्षि वेद व्यास का जन्मदिन माना जाता है, जिन्होंने वेदों को चार हिस्सों में बाँटा और महाभारत रची। इसलिए यह दिन व्यास पूर्णिमा भी कहलाता है।

गुरु शब्द का क्या मतलब है?

गु का मतलब अँधेरा या अज्ञान, और रु का मतलब उसे हटाने वाला। यानी गुरु वह है जो अज्ञान का अँधेरा हटाए।

बौद्ध धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा का क्या महत्व है?

बौद्ध परंपरा में इस दिन भगवान बुद्ध ने बोधगया में बोध पाने के बाद सारनाथ में अपने पहले पाँच शिष्यों को पहला उपदेश दिया, और संघ बना। बौद्ध इस दिन उपोसथ रखते हैं।

जैन धर्म में गुरु पूर्णिमा का क्या महत्व है?

जैन परंपरा में इसे वह दिन बताया जाता है जब भगवान महावीर ने गौतम स्वामी को अपना पहला शिष्य बनाया और उनके गुरु बने।

गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?

सुबह नहाकर गुरु और भगवान की पूजा करें, गुरु को फूल, फल या भेंट दें, गुरु गीता का पाठ करें, और हो सके तो सेवा करें। कुछ लोग इस दिन उपवास भी रखते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Guru Purnima (Hindu American Foundation)आषाढ़ पूर्णिमा, व्यास का जन्मदिन, सारनाथ का पहला उपदेश, महावीर और गौतम स्वामी, पूजा और उपवास
  2. Guru Purnima festival guide (BankBazaar)व्यास और वेदों का बँटवारा, पुराण, पहले पाँच शिष्य और संघ, उपोसथ, व्यास की खड़ाऊँ, गुरु गीता, संगीत के गुरु, पाद्य पूजा, किसानों की लोक कथा
  3. Why Guru Purnima is dedicated to teachers (Free Press Journal)गु और रु का अर्थ, व्यास पूर्णिमा, गौतम स्वामी, सुबह स्नान, सत्संग, शिक्षकों को भेंट

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।