उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी
जया पार्वती व्रत 2027
Jaya Parvati Vrat 2027
पाँच दिन नमक नहीं। एक कटोरी में गेहूँ उगते रहते हैं।
जया पार्वती व्रत 2027 में 16 जुलाई, शुक्रवार को है। आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि 15 जुलाई, दोपहर 2:41 से 16 जुलाई, शाम 4:35 तक है। प्रदोष काल शाम 7:21 से रात 9:45 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
रसोई में नमक का डिब्बा बंद रखा है। पाँच दिन यह नहीं खुलेगा।
पूजा की जगह मिट्टी की एक छोटी कटोरी है। उसमें गेहूँ के दाने, कल ही बोए हुए।
सुबह एक लड़की उन पर थोड़ा सा पानी छिड़कती है, जैसे सोते बच्चे को जगाना हो।
दूसरे दिन मिट्टी में बारीक दरारें। तीसरे दिन हरी नोकें।
शाम की रोटी फीकी है। लड़की कुछ नहीं कहती। सहेलियाँ भी यही खा रही हैं।
पाँचवीं रात कोई नहीं सोता। भजन चलते हैं, आरती होती है।
छठी सुबह जवारे पानी में उतरते हैं। और कथा एक ब्राह्मण की है, जो फूल तोड़ने जंगल गया था और लौटा नहीं।
2027 में कब
जया पार्वती व्रत 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़16 जुलाई, शुक्रवार
तिथिआषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी15 जुलाई, दोपहर 2:41 से 16 जुलाई, शाम 4:35 तक
नक्षत्रज्येष्ठासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:34
सूर्यास्तशाम 7:21
चंद्रोदयशाम 5:51
- प्रदोष काल
- शाम 7:21 से रात 9:45 तकसूर्यास्त के बाद के दो घंटे चौबीस मिनट।
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शुभकामना
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पहचान
जया पार्वती व्रत क्या है
जया पार्वती व्रत गुजरात का व्रत है। यह आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होता है और पाँच दिन चलकर कृष्ण पक्ष की तृतीया पर पूरा होता है; गुजरात में इस शुरुआत के दिन को आषाढ़ सुद तेरस कहते हैं। इसे ज़्यादातर कुँवारी लड़कियाँ अच्छे वर के लिए रखती हैं, और ब्याही औरतें भी सुखी घर और पति की लंबी उम्र के लिए। पाँचों दिन नमक बिल्कुल नहीं खाते। पहले दिन मिट्टी की कटोरी में गेहूँ बोते हैं, जिन्हें जवारा कहते हैं, और पाँच दिन उन्हीं की पूजा होती है। कहते हैं, यह व्रत सबसे पहले पार्वती ने शिव को पाने के लिए रखा था। इसी का बहुत क़रीबी व्रत है गौरी व्रत, जिसे सौराष्ट्र में मोळाकत कहते हैं: वह आषाढ़ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक, पाँच दिन चलता है, और उसे बहुत छोटी उम्र की लड़कियाँ भी रखती हैं। दोनों इतने पास हैं कि कई जगह लोग एक को दूसरे के नाम से पुकार लेते हैं, और कुछ इलाक़ों में मोळाकत भी तेरस से ही शुरू होता है।
कथा
जया पार्वती व्रत की कथा
कथा कहती है कि इस व्रत की शुरुआत पार्वती से हुई। शिव को पति के रूप में पाने के लिए उन्होंने यही व्रत किया था। बहुत बाद में सीता ने भी पार्वती की पूजा की, और मन का वर पाया। फिर कथा एक घर पर आती है। कौडिन्य नाम के नगर में वामन नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सत्या के साथ रहता था। घर में धन की कमी नहीं थी, पर कोई बच्चा नहीं था, और यही दुख दोनों को खाए जाता था।
एक दिन नारद मुनि उनके घर आए। दोनों ने उनसे उपाय पूछा। नारद ने कहा: तुम्हारे नगर के दक्षिण में जो जंगल है, वहाँ एक पेड़ के नीचे शिव और पार्वती लिंग के रूप में हैं। वहाँ कोई पूजा करने नहीं जाता। तुम जाओ, और उनकी पूजा करो। वामन और सत्या ने ऐसा ही किया। पूरे पाँच बरस वे उस शिवलिंग की पूजा पूरे नियम से करते रहे।
एक दिन वामन पूजा के लिए फूल तोड़ रहा था कि एक साँप ने उसे डस लिया। वह वहीं जंगल में गिर पड़ा। शाम हुई, वह घर नहीं लौटा। सत्या उसे ढूँढती हुई जंगल पहुँची और देखा कि पति बेसुध पड़ा है। वह रोई, बहुत रोई, और उसी शिवलिंग के आगे पार्वती को पुकारती रही।
पार्वती ने उसकी पुकार सुन ली। वे देवताओं के साथ प्रकट हुईं और वामन के मुँह में अमृत डाला। वामन की आँखें खुल गईं, जैसे वह नींद से जागा हो। कथा के एक रूप में उसे शिव जिलाते हैं। दोनों ने देवी की पूजा की, और देवी ने वर माँगने को कहा। उन्होंने संतान माँगी। पार्वती बोलीं: जया पार्वती का व्रत करो। उन्होंने व्रत किया, और उनके घर रत्न नाम का बेटा हुआ। यही कथा व्रत के पाँचों दिन, हर दिन पढ़ते हैं।
व्रत
जया पार्वती व्रत का व्रत कैसे रखें
- पहले दिन सुबह नहाकर शिव पार्वती के आगे पाँच दिन के व्रत का संकल्प लेते हैं।
- पाँचों दिन नमक बिल्कुल नहीं खाते; कुछ घरों में टमाटर, मसाले और सब्ज़ियाँ भी नहीं, और कुछ में अनाज भी नहीं।
- जो खा सकते हैं, वह है गेहूँ का आटा, दूध, घी और फल।
- बहुत सी लड़कियाँ दिन में बस पानी पीती हैं, और शाम की पूजा के बाद एक ही बार खाना खाती हैं।
- हर दिन जया पार्वती की कथा पढ़ती या सुनती हैं।
- कई घरों में इन दिनों ज़मीन पर सोते हैं, और नाख़ून काटने, बाल धोने और तेल लगाने से बचते हैं; यह हर घर की अपनी रीत है।
- पाँचवीं रात जागरण होता है: लड़कियाँ रात भर जागकर भजन और आरती करती हैं।
- यह व्रत लगातार पाँच, सात, नौ, ग्यारह या बीस बरस तक रखते हैं।
पारण: व्रत कैसे खोलें
व्रत छठी सुबह खुलता है। रात भर के जागरण के बाद लड़कियाँ नहाती हैं, जवारे विसर्जित करती हैं, और सुबह की पूजा करती हैं। उसके बाद पूरा खाना खाते हैं: नमक वाला, सब्ज़ी और गेहूँ की रोटी के साथ। पाँच दिन बाद जीभ पर पहला नमक, यही इस व्रत का पारण है। जिस बरस व्रत की गिनती पूरी होती है, उस बरस उद्यापन की पूजा के बाद ही खाना खाते हैं।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में जया पार्वती व्रत
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
रामचरितमानस
अवधी · Ramcharitmanas
जया पार्वती की कथा में बस इतना आता है कि सीता ने पार्वती को पूजकर मन का वर पाया। रामचरितमानस के बालकांड में यही बात पूरा दृश्य बन जाती है। जनक की फुलवारी में राम को देखने के बाद सीता गिरिजा के मंदिर जाती हैं और विनती करती हैं: "जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी॥" यानी पर्वतराज की बेटी, तुम्हारी जय, जो शिव के मुख को वैसे देखती हो जैसे चकोर चाँद को। तुलसीदास लिखते हैं कि सीता की विनती और प्रेम से भवानी पिघल गईं, उनकी माला खिसककर गिरी और मूर्ति मुस्कुरा दी। फिर गौरी बोलीं: "सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥" यानी सीता, मेरा आशीर्वाद सच्चा है, तुम्हारे मन की इच्छा पूरी होगी। गुजरात की लड़कियाँ जो वर इन पाँच दिनों में माँगती हैं, मानस की सीता वही वर उसी देवी से माँग रही थीं।
कहाँ कैसे
जया पार्वती व्रत कहाँ कैसे मनाया जाता है
सौराष्ट्र
यहाँ यह व्रत मोळाकत या गौरी व्रत के नाम से जाना जाता है। पहले दिन लड़कियाँ सात तरह के बीज बोती हैं, पाँचों दिन उन्हें पानी देती हैं, और पाँचवें दिन उगे हुए अंकुर सहेलियों और रिश्तेदारों में बाँट देती हैं। कुछ इलाक़ों में लड़कियाँ इन दिनों बस शाम को एक बार खाती हैं।
बाक़ी गुजरात
यहाँ इसे जया पार्वती व्रत कहते हैं। गेहूँ के जवारे बोते हैं, और रुई की एक माला, जिसे नागला कहते हैं, कुमकुम से सजाकर रोज़ सुबह की पूजा में चढ़ाते हैं।
गुजरात के शहर
इन पाँच दिनों में स्कूल जाने वाली लड़कियों को रंग बिरंगे कपड़ों में स्कूल आने की छूट मिलती है। बाज़ार में बिना नमक के केले के वेफ़र ख़ूब बिकते हैं, और जो घर में जवारे न बो सके, वह बाज़ार से उगे हुए पौधे ले आता है।
गुजराती घर
यह व्रत माँ से बेटी तक पहुँचता है: जैसे माँ रखती आई, वैसे ही बेटी रखती है।
रीत
जया पार्वती व्रत के दिन क्या करते हैं
- पहले दिन मिट्टी की एक छोटी कटोरी में गेहूँ के दाने बोकर उसे पूजा की जगह रखते हैं; कुछ घरों में गेहूँ की जगह सात तरह के अनाज और दालें बोते हैं।
- पाँचों दिन हर सुबह जवारों को पानी देते हैं और उनकी पूजा करते हैं।
- रुई की माला, यानी नागला, कुमकुम से सजाकर रोज़ सुबह पूजा में रखते हैं।
- पार्वती की मूर्ति पर कुमकुम और हल्दी लगती है, शिवलिंग पर बेलपत्र और सफ़ेद और लाल फूल चढ़ते हैं, और दीया जलता है।
- शाम को प्रदोष के समय बहुत सी लड़कियाँ शिव मंदिर जाती हैं, और वहाँ फिर भजन होते हैं।
- छठी सुबह नहाकर उगे हुए जवारे गमले से निकालते हैं और नदी, तालाब या वाव में, यानी सीढ़ियों वाली बावड़ी में, विसर्जित करते हैं।
- उस दिन लड़कियाँ अच्छे कपड़े पहनकर माताजी के मंदिर जाती हैं।
- जिस बरस व्रत पूरा होता है, उस बरस सुहागिनों को सिंदूर और सुहाग की चीज़ें देते हैं, और किसी ब्राह्मण जोड़े को खाना खिलाते हैं।
रसोई
जया पार्वती व्रत का खाना
- बिना नमक की रोटी और सब्ज़ी व्रत के दिनों में शाम का खाना।
- बिना नमक के केले के वेफ़र इन दिनों गुजरात के बाज़ारों में इनकी माँग बढ़ जाती है।
- दूध, घी, फल और गेहूँ का आटा व्रत में खाने लायक़ चीज़ें।
- नमक वाला पूरा खाना, सब्ज़ी और गेहूँ की रोटी छठी सुबह, व्रत खोलने का खाना।
सवाल जवाब
जया पार्वती व्रत 2027: पूछे जाने वाले सवाल
जया पार्वती व्रत 2027 कब है?
जया पार्वती व्रत 2027 में 16 जुलाई, शुक्रवार को है। आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि 15 जुलाई, दोपहर 2:41 से 16 जुलाई, शाम 4:35 तक है। प्रदोष काल शाम 7:21 से रात 9:45 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
जया पार्वती व्रत में क्या खाएँ?
नमक बिल्कुल नहीं। गेहूँ का आटा, दूध, घी और फल खाते हैं, और बहुत सी लड़कियाँ शाम को एक बार बिना नमक की रोटी और सब्ज़ी खाती हैं। कुछ घरों में सब्ज़ियाँ और अनाज भी छोड़ देते हैं।
जया पार्वती व्रत और गौरी व्रत (मोळाकत) में क्या फ़र्क़ है?
दोनों बहुत पास के व्रत हैं, दोनों पाँच दिन के और बिना नमक के। गौरी व्रत आषाढ़ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक चलता है और बहुत छोटी लड़कियाँ भी रखती हैं; जया पार्वती त्रयोदशी से कृष्ण पक्ष की तृतीया तक चलता है।
जया पार्वती व्रत कितने साल रखते हैं?
लगातार पाँच, सात, नौ, ग्यारह या बीस बरस तक। कम से कम पाँच बरस रखने की बात कही जाती है।
क्या शादीशुदा औरतें जया पार्वती व्रत रख सकती हैं?
हाँ। कुँवारी लड़कियाँ इसे अच्छे वर के लिए रखती हैं, और ब्याही औरतें सुखी घर और पति की लंबी उम्र के लिए।
जवारे का क्या करते हैं?
पाँच दिन हर सुबह पानी देकर उनकी पूजा होती है। छठी सुबह उन्हें गमले से निकालकर नदी, तालाब या बावड़ी में विसर्जित कर देते हैं।
जया पार्वती का जागरण कब होता है?
व्रत की पाँचवीं रात। लड़कियाँ रात भर जागकर भजन और आरती करती हैं, और अगली सुबह व्रत खोलती हैं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Drik Panchang: Jaya Parvati Vratतिथि का नियम, पाँच दिन, जवारा, नमक नहीं, जागरण, छठी सुबह का पारण, बरसों की गिनती, गुजरात
- Shubh Panchang: Jaya Parvati Vrat Kathaपूरी कथा: पार्वती, सीता, वामन और सत्या, नारद, साँप, अमृत, रत्न; सात अनाज, वाव, ब्राह्मण जोड़े को भोजन
- Shubh Panchang: Jaya Parvati Vrat Prarambhपूजा का सामान, एक समय भोजन, घर घर की रीतें, प्रदोष में शिव मंदिर, उद्यापन, माँ से बेटी तक
- Wikipedia: Jaya Parvati vratगेहूँ के जवारे, नागला, खाने लायक चीज़ें, माताजी का मंदिर, कथा का शिव वाला रूप
- Drik Panchang: Gauri Vrat (Gujarati)गौरी व्रत: एकादशी से पूर्णिमा, पाँच दिन, कुँवारी लड़कियाँ
- Hindu Blog: Molakat Vrat and Jagran in Gujaratसौराष्ट्र का मोळाकत, सात बीज, अंकुर बाँटना, शाम का एक भोजन, जया पार्वती से समानता
- eNewsroom: Gauri Vrat in Gujaratछोटी लड़कियाँ, दिन में बस पानी, बिना नमक की रोटी सब्ज़ी, केले के वेफ़र, बाज़ार के पौधे, स्कूल में रंगीन कपड़े
- Aaj Tak: रामचरितमानस में सीता का गौरी पूजनमानस की चौपाइयाँ: सीता की विनती, माला का खिसकना, गौरी का आशीर्वाद
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।