पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आषाढ़ शुक्ल दशमी

भानु जयंती 2027

Bhanu Jayanti 2027

एक घसियारे का कुआँ, और एक कवि की अपनी ज़बान में रामकथा।

भानु जयंती 2027 में 13 जुलाई, मंगलवार को है। आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि 12 जुलाई, सुबह 11:41 से 13 जुलाई, दोपहर 12:09 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

भानु जयंती का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 78 प्रतिशत रोशन

पहाड़ी स्कूल का आँगन। एक बच्ची माइक के आगे खड़ी है, और कविता की दूसरी पंक्ति भूल गई है।

पीछे से कोई दबी आवाज़ में बताता है। वह मुस्कुराकर आगे बढ़ती है।

पंक्ति नेपाली में है। उसकी दादी भी यही पंक्ति जानती हैं, और दादी की दादी भी।

सामने टँगी तस्वीर में एक पुराने कवि हैं, जिनके नाम पर आज छुट्टी है।

उन्होंने कोई नई कथा नहीं लिखी। वही पुरानी रामकथा, बस उस बोली में जिसमें माँ लोरी गाती थी।

कथा वही रही। बस इस बार वह पहाड़ के घर की भाषा में घर लौटी।

2027 में कब

भानु जयंती 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़13 जुलाई, मंगलवार

तिथिआषाढ़ शुक्ल दशमी12 जुलाई, सुबह 11:41 से 13 जुलाई, दोपहर 12:09 तक

नक्षत्रविशाखासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:32

सूर्यास्तशाम 7:21

चंद्रोदयदोपहर 3:05

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

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शुभकामना

भानु जयंती का शुभकामना कार्ड

भानु जयंती का शुभकामना कार्ड: भानु जयंती की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

भानु जयंती क्या है

भानु जयंती नेपाली भाषा के आदिकवि भानुभक्त आचार्य का जन्मदिन है। यह नेपाली पंचांग में असार महीने की उनतीस तारीख़ को आती है, जो अंग्रेज़ी कैलेंडर में तेरह जुलाई के आसपास पड़ती है। भानुभक्त का जन्म विक्रम संवत 1871, यानी सन 1814, में आज के तनहुँ ज़िले के चुँडी रम्घा गाँव में हुआ और वे चौवन बरस जिए। उन्होंने संस्कृत की रामायण को सीधी सादी नेपाली में कहा, और इसी से नेपाली को अपनी पहली बड़ी रामकथा मिली। यह दिन नेपाल, सिक्किम, दार्जिलिंग और दुनिया भर के नेपाली बोलने वाले लोग मनाते हैं, और सिक्किम में इस दिन सरकारी छुट्टी होती है।

कथा

भानु जयंती की कथा

भानुभक्त एक खाते पीते ब्राह्मण घर में जन्मे थे। लोक में उनके कवि बनने की एक कहानी बहुत सुनाई जाती है। कहते हैं, जब वे लगभग बाईस बरस के थे, उनकी मुलाक़ात एक घसियारे से हुई, यानी घास काटकर बेचने वाले एक ग़रीब आदमी से। वह आदमी घास बेच बेचकर थोड़ा थोड़ा पैसा जोड़ रहा था, और उस पैसे से लोगों के पीने के पानी के लिए एक कुआँ खुदवाना चाहता था, ताकि उसके जाने के बाद भी कोई उसे याद रखे।

भानुभक्त के पास उस आदमी से कहीं ज़्यादा था। पर उस दिन उन्हें लगा कि उन्होंने लोगों के लिए अब तक कुछ नहीं किया। जिसके पास बस घास थी, वह कुआँ दे रहा था। और जिसके पास सब कुछ था, उसने क्या दिया? कहते हैं, इसी सवाल ने उनसे कविता लिखवाई, और उन्होंने तय किया कि वे शब्दों से लोगों की सेवा करेंगे: संस्कृत की कथाओं को उस भाषा में लाएँगे जो आम लोग बोलते हैं।

उस समय धर्म की बात संस्कृत में ही लिखी जाती थी, और आम आदमी उसे पढ़ नहीं पाता था। भानुभक्त ने पूरी रामायण संस्कृत से सीधी नेपाली में कही। उनकी रामायण पहले ज़बानी फैली, लोगों के मुँह से मुँह तक, और पूरी छपी सन 1887 में, उनके जाने के बाद। नेपाल में उन्हें आदिकवि कहते हैं, यानी पहला कवि, क्योंकि उन्हें नेपाली में मन की बात कविता में कहने वाला पहला बड़ा कवि माना जाता है।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में भानु जयंती

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

भानुभक्त रामायण

नेपाली · Bhanubhakta Ramayana

भानुभक्त रामायण नेपाल की पहली बड़ी रामकथा है, जिसे भानुभक्त आचार्य ने उन्नीसवीं सदी में नेपाली में रचा। इसका सबसे बड़ा क़दम यह था कि कथा संस्कृत से निकलकर आम लोगों की ज़बान में आ गई। पहले यह ज़बानी फैली, और पूरी छपी सन 1887 में, कवि के जाने के बाद। भानु जयंती इसी रामायण के कवि का दिन है, और लोक कथा कहती है कि यह रामायण एक घसियारे के कुएँ से शुरू हुई।

कहाँ कैसे

भानु जयंती कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • नेपाल

    असार उनतीस को पूरे नेपाल में भानु जयंती मनाई जाती है, और भानुभक्त को आदिकवि के रूप में याद किया जाता है।

  • सिक्किम

    यहाँ यह सरकारी छुट्टी का दिन है, बैंक और ज़्यादातर दफ़्तर बंद रहते हैं। कविता पाठ की प्रतियोगिताएँ और साहित्य सम्मेलन होते हैं, और कभी यह उत्सव पूरे एक हफ़्ते चलता था, जिसमें नेपाल और बाहर से नेपाली के लेखक आते थे।

  • दार्जिलिंग

    सिक्किम और दार्जिलिंग के इलाक़े में नेपाली आपस की भाषा है, और यहाँ भी भानु जयंती बड़े मन से मनती है।

  • नागालैंड, मेघालय और पड़ोसी देश

    नागालैंड और मेघालय के नेपाली बोलने वाले लोग, और म्यांमार और भूटान जैसे देशों के नेपाली समुदाय भी हर बरस यह दिन मनाते हैं।

रीत

भानु जयंती के दिन क्या करते हैं

  1. जगह जगह कविता पाठ की प्रतियोगिताएँ होती हैं।
  2. नेपाली भाषा और साहित्य पर सम्मेलन होते हैं।
  3. नेपाल और बाहर से नेपाली के लेखक और कवि एक जगह जुटते हैं।
  4. सिक्किम में सरकारी छुट्टी रहती है, बैंक और ज़्यादातर दफ़्तर बंद होते हैं।
  5. भानुभक्त को आदिकवि, यानी नेपाली के पहले कवि, के रूप में याद किया जाता है।

सवाल जवाब

भानु जयंती 2027: पूछे जाने वाले सवाल

भानु जयंती 2027 कब है?

भानु जयंती 2027 में 13 जुलाई, मंगलवार को है। आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि 12 जुलाई, सुबह 11:41 से 13 जुलाई, दोपहर 12:09 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

भानु जयंती नेपाली पंचांग में किस दिन होती है?

नेपाली पंचांग के असार महीने की उनतीस तारीख़ को, जो अंग्रेज़ी कैलेंडर में तेरह जुलाई के आसपास पड़ती है।

भानुभक्त आचार्य कौन थे?

नेपाली भाषा के आदिकवि, जिनका जन्म सन 1814 में तनहुँ ज़िले के चुँडी रम्घा में हुआ। उन्होंने संस्कृत की रामायण को सीधी नेपाली में कहा।

भानुभक्त को आदिकवि क्यों कहते हैं?

क्योंकि वे पहले कवि माने जाते हैं जिन्होंने नेपाली भाषा में मन के भाव कविता में कहे। उनसे पहले लिखा हुआ साहित्य ज़्यादातर संस्कृत में था।

घसियारे और कुएँ की कहानी क्या है?

लोक में कहते हैं कि एक ग़रीब घसियारा घास बेचकर लोगों के लिए कुआँ खुदवा रहा था, ताकि उसे याद रखा जाए। यह देखकर भानुभक्त को लगा कि उन्होंने लोगों के लिए कुछ नहीं किया, और वे नेपाली में रामायण लिखने लगे।

क्या भानु जयंती पर सिक्किम में छुट्टी होती है?

हाँ, सिक्किम में यह सरकारी छुट्टी का दिन है, और बैंक और ज़्यादातर दफ़्तर बंद रहते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Bhanu Jayanti, Hamro Patro blogअसार उनतीस, जन्म और गाँव, घसियारे की कहानी, आदिकवि, नेपाल और दार्जिलिंग
  2. Bhanujayanti, Hamro Patroकुआँ और घसियारा, संस्कृत से नेपाली रामायण
  3. Bhanu Jayanti in Sikkim, Office Holidaysसिक्किम की छुट्टी, बाईस बरस की उम्र, कविता पाठ, साहित्य सम्मेलन
  4. What is Bhanu Jayanti, Eastern Mirrorजन्म और मृत्यु के बरस, नेपाल, सिक्किम, दार्जिलिंग, नागालैंड, मेघालय, म्यांमार, भूटान

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।