उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · माघ अमावस्या
मौनी अमावस्या 2027
Mauni Amavasya 2027
आज का सबसे बड़ा दान: एक दिन की चुप्पी।
मौनी अमावस्या 2027 में 6 फ़रवरी, शनिवार को है। माघ अमावस्या तिथि 5 फ़रवरी, शाम 7:06 से 6 फ़रवरी, रात 9:26 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
होंठ बंद हैं, पर उँगलियाँ चल रही हैं। माला का एक एक दाना आगे सरकता है।
भोर से पहले की ठंड में हज़ारों लोग रेत पर चल रहे हैं। बस पैरों की आवाज़ है, और पानी की।
किसी के मुँह से एक शब्द नहीं। जाप मन के भीतर चल रहा है।
किनारे पहुँचकर एक दादी पहले सिर पर पानी डालती हैं। फिर डुबकी।
यहाँ गंगा और यमुना मिलती हैं। तीसरी नदी, सरस्वती, कहते हैं, दिखती नहीं, पर है।
पोता कुछ पूछना चाहता है। दादी उसके होंठों पर उँगली रख देती हैं।
आज ज़ुबान को छुट्टी है। आज बस कान खुले हैं।
इसी रेत पर, मानस कहता है, एक माघ के बाद एक मुनि ने दूसरे के पाँव पकड़कर उन्हें रोक लिया था। और रामकथा शुरू हुई थी।
2027 में कब
मौनी अमावस्या 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़6 फ़रवरी, शनिवार
तिथिमाघ अमावस्या5 फ़रवरी, शाम 7:06 से 6 फ़रवरी, रात 9:26 तक
नक्षत्रश्रवणसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 7:07
सूर्यास्तशाम 6:04
चंद्रोदयसुबह 6:52
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
मौनी अमावस्या क्या है
मौनी अमावस्या माघ महीने की अमावस्या है, यानी माघ के कृष्ण पक्ष का आख़िरी दिन, जब चाँद बिल्कुल नहीं दिखता। इसे माघी अमावस्या भी कहते हैं। मौनी शब्द मौन से बना है, यानी चुप रहना। इस दिन लोग सूरज निकलने से पहले नदी में नहाते हैं, और सबसे बड़ा स्नान प्रयाग के त्रिवेणी संगम पर होता है, जहाँ गंगा और यमुना मिलती हैं और सरस्वती को छिपी हुई माना जाता है। नहाने के बाद लोग जितना हो सके चुप रहते हैं: कोई पूरा दिन, कोई बस कम बोलकर। प्रयाग के माघ मेले का यह सबसे बड़ा स्नान है, और कुंभ या अर्धकुंभ के बरस में इसी दिन अखाड़ों के साधु क्रम से संगम में उतरते हैं, जिसे अब अमृत स्नान कहते हैं। हर अमावस्या की तरह यह दिन पितरों का भी है।
कथा
मौनी अमावस्या की कथा
पंचांगों में एक मान्यता है कि मनु, जिन्हें पहला मनुष्य और मानव जाति का आदि पिता कहा जाता है, इसी अमावस्या को जन्मे थे। कुछ लोग मौनी नाम को भी मनु से जोड़ते हैं। यह परंपरा की बात है। किसी ग्रंथ में इसका पक्का ठिकाना नहीं मिलता।
माघ में प्रयाग का क्या हाल होता है, यह तुलसीदास रामचरितमानस के बालकांड में कहते हैं: 'माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई॥' यानी माघ में जब सूरज मकर राशि में होता है, तब सब लोग तीर्थों के राजा प्रयाग में आते हैं। आगे मानस बताता है कि हर बरस मुनियों के झुंड पूरा माघ नहाते हैं, और फिर अपने अपने आश्रम लौट जाते हैं: 'प्रति संबत अति होइ अनंदा। मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा॥'
लोक में मान्यता है कि मौनी अमावस्या को संगम का पानी अमृत जैसा हो जाता है, और माघ भर नहाने से कई जन्मों का बोझ उतरता है। पर इस दिन का असली व्रत पानी से ज़्यादा ज़ुबान का है। बोलना बंद होता है तो मन भीतर की ओर मुड़ता है, और यही इस दिन का काम है। इसीलिए जो संगम नहीं पहुँच पाते, उनके लिए भी रास्ता खुला है: पास की कोई नदी, या घर के नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल, और फिर दिन भर की चुप्पी।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में मौनी अमावस्या
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
रामचरितमानस
अवधी · Ramcharitmanas
रामचरितमानस की कथा कहने वाली कई आवाज़ों में एक आवाज़ ठीक माघ मेले के बाद, प्रयाग में खुलती है। बालकांड में तुलसीदास बताते हैं कि प्रयाग में भरद्वाज मुनि रहते थे, 'भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा। तिन्हहि राम पद अति अनुरागा॥', यानी जिन्हें राम के चरणों से गहरा प्रेम था। एक बरस, 'एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए॥', पूरा माघ नहाकर सब मुनि अपने आश्रम चले गए, पर भरद्वाज ने ज्ञानी याज्ञवल्क्य मुनि के पाँव पकड़कर उन्हें रोक लिया, 'जागबलिक मुनि परम बिबेकी। भरद्वाज राखे पद टेकी॥'। फिर भरद्वाज ने उनसे राम के बारे में पूछा, और याज्ञवल्क्य ने कथा कहनी शुरू की। यानी मानस में रामकथा का एक दरवाज़ा उसी रेत पर खुलता है जहाँ आज भी माघ का मेला लगता है।
कहाँ कैसे
मौनी अमावस्या कहाँ कैसे मनाया जाता है
प्रयाग का त्रिवेणी संगम
माघ भर लोग संगम की रेत पर कल्पवास करते हैं, यानी वहीं रहकर रोज़ भोर से पहले नहाते हैं। मौनी अमावस्या माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान है, और कुंभ के बरस में इस दिन अखाड़े क्रम से संगम में उतरते हैं।
हरिद्वार और काशी
जो प्रयाग नहीं पहुँचते, वे हरिद्वार और काशी के घाटों पर गंगा में नहाते हैं, या किसी भी पास की पवित्र नदी में।
नदी के घाट
हर अमावस्या की तरह आज भी घाट पर पितरों के लिए तिल मिले जल से तर्पण होता है।
घर पर
जो कहीं नहीं जा सकते, वे नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लेते हैं, और घर पर ही मौन रखकर जाप और कथा का पाठ करते हैं।
रीत
मौनी अमावस्या के दिन क्या करते हैं
- नहाने से पहले संकल्प लिया जाता है, यानी मन में ठाना जाता है कि आज का व्रत किस तरह निभेगा।
- सूरज निकलने से पहले नदी में स्नान होता है, और पहले सिर पर पानी डाला जाता है।
- फिर उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है, यानी लोटे से जल चढ़ाया जाता है।
- नहाने के बाद से जितना हो सके मौन रखा जाता है; समय जाप, ध्यान और कथा के पाठ में जाता है।
- विष्णु की पूजा होती है, और पीपल की भी।
- पितरों का नाम लेकर तिल मिले जल से तर्पण किया जाता है, और कई घर उनकी याद में खाना अलग रखते हैं।
- तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आँवला, गरम कपड़े, कंबल और अन्न का दान होता है।
- दिन भर लोग झगड़े, चुगली और ग़ुस्से से दूर रहते हैं। अपनी सेहत और घर का काम देखकर, जो जितना निभा सके, उतना निभाता है।
रसोई
मौनी अमावस्या का खाना
- तिल के लड्डू इस दिन के दान की सबसे जानी मानी चीज़।
- आँवला तिल के साथ दान में दिया जाने वाला फल।
सवाल जवाब
मौनी अमावस्या 2027: पूछे जाने वाले सवाल
मौनी अमावस्या 2027 कब है?
मौनी अमावस्या 2027 में 6 फ़रवरी, शनिवार को है। माघ अमावस्या तिथि 5 फ़रवरी, शाम 7:06 से 6 फ़रवरी, रात 9:26 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
मौनी अमावस्या पर मौन क्यों रखते हैं?
मौनी शब्द मौन से बना है, यानी चुप रहना। चुप रहने से मन भीतर की ओर मुड़ता है, इसलिए नहाने के बाद लोग पूरा दिन, या जितना हो सके, बिना बोले जाप और ध्यान में बिताते हैं।
मौनी अमावस्या पर संगम में नहाने का क्या महत्व है?
मान्यता है कि इस दिन संगम का पानी अमृत जैसा हो जाता है और नहाने से पुराने पाप धुलते हैं। इसीलिए यह प्रयाग के माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान है।
क्या मौनी अमावस्या पर घर पर नहा सकते हैं?
हाँ। जो नदी तक नहीं जा सकते, वे नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर घर पर नहाते हैं, और फिर मौन और जाप रखते हैं।
मौनी अमावस्या पर क्या दान करें?
तिल और तिल के लड्डू, तिल का तेल, आँवला, गरम कपड़े, कंबल और अन्न। ये ज़रूरतमंदों और ब्राह्मणों को दिए जाते हैं।
मौनी अमावस्या का मनु से क्या रिश्ता है?
एक मान्यता है कि पहले मनुष्य कहे जाने वाले मनु इसी दिन जन्मे थे, और कुछ लोग मौनी नाम को भी मनु से जोड़ते हैं। यह परंपरा की बात है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Mahakumbh stampede: What is Mauni Amavasya? (The Week)माघी अमावस्या नाम, संगम का पानी अमृत होने की मान्यता, सिर पर पहले पानी, तिल और आँवले का दान
- Mauni Amavasya (Shubh Panchang)मौन का अर्थ, मनु के जन्म की मान्यता, माघ मेला, चुगली और ग़ुस्से से दूरी
- Mauni Amavasya (PanchangBodh)संकल्प, अर्घ्य, कल्पवास, अमृत स्नान, पीपल पूजा, तिल से तर्पण, घर पर गंगाजल
- Shri Ram Charit Manas, Bal Kand (sanskritdocuments.org)बालकांड दोहा 43 और 44 के बीच की चौपाइयाँ: भरद्वाज, माघ में प्रयाग, याज्ञवल्क्य
- एक बार भरि मकर नहाए (भारतडिस्कवरी)भरद्वाज का याज्ञवल्क्य को रोकना
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।