पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · माघ शुक्ल पंचमी

वसंत पंचमी 2027

Vasant Panchami 2027

आज कलम पूजा में है, और कोई नन्हा हाथ पहला अक्षर लिखेगा।

वसंत पंचमी 2027 में 11 फ़रवरी, गुरुवार को है। माघ शुक्ल पंचमी तिथि 11 फ़रवरी, रात 3:05 से 12 फ़रवरी, रात 3:19 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

वसंत पंचमी का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 22 प्रतिशत रोशन

कलम आज लिखेगी नहीं।

वह किताबों के ढेर पर रखी है, देवी के आगे। साथ में कुछ पेंसिलें और एक पुरानी पोथी।

देवी को पीले कपड़े पहनाए गए हैं। खिड़की के बाहर सरसों के खेत भी पीले हैं।

एक छोटी बच्ची पीली फ़्रॉक में है। उसका हाथ किसी बड़े के हाथ में है।

स्लेट पर खड़िया चलती है, बड़े के हाथ के सहारे। एक टेढ़ी लकीर। फिर दूसरी।

अ बन जाता है।

हर कथा कभी किसी पहले अक्षर से शुरू हुई थी। आज वही दिन है।

2027 में कब

वसंत पंचमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़11 फ़रवरी, गुरुवार

तिथिमाघ शुक्ल पंचमी11 फ़रवरी, रात 3:05 से 12 फ़रवरी, रात 3:19 तक

नक्षत्ररेवतीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 7:03

सूर्यास्तशाम 6:08

चंद्रोदयसुबह 9:20

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शुभकामना

वसंत पंचमी का शुभकामना कार्ड

वसंत पंचमी का शुभकामना कार्ड: वसंत पंचमी की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

वसंत पंचमी क्या है

वसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है। यह विद्या, वाणी, संगीत और कला की देवी सरस्वती की पूजा का दिन है, और वसंत के आने का भी। घरों, मंदिरों और स्कूलों में सुबह सरस्वती पूजा होती है, देवी को पीले कपड़े पहनाए जाते हैं, और लोग भी पीला पहनते और पीला खाते हैं, क्योंकि इस मौसम में सरसों के खेत पीले होते हैं। कई घरों में छोटे बच्चे इसी दिन पहला अक्षर लिखते हैं, जिसे अक्षर आरंभ या विद्यारंभ कहते हैं; बंगाल में इसे हाते खोड़ी कहते हैं। इस दिन को मदन पंचमी भी कहते हैं, क्योंकि यह कामदेव से भी जुड़ा है।

कथा

वसंत पंचमी की कथा

देवी भागवत पुराण के नौवें स्कंध में कथा है कि इस धरती पर सरस्वती की पूजा सबसे पहले श्रीकृष्ण ने शुरू की। उन्होंने देवी से कहा कि हर बरस माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को लोग तुम्हारी पूजा करेंगे, कलश पर या किताबों पर तुम्हें बुलाकर, और तुम्हारा ध्यान करेंगे। यह कहकर उन्होंने ख़ुद सबसे पहले सरस्वती की पूजा की। उसके बाद ब्रह्मा, विष्णु, महेश, देवता और मुनि, सब उनकी पूजा करने लगे।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी यही बात आती है, कि माघ शुक्ल पंचमी की सरस्वती पूजा श्रीकृष्ण की ठहराई हुई है। वहाँ पूजा का ढंग भी लिखा है: पहले गणेश, सूर्य, अग्नि, विष्णु, शिव और पार्वती की पूजा, फिर कलश या किताब में सरस्वती का आवाहन। और उस पूजा में सब कुछ सफ़ेद होता है: सफ़ेद फूल, सफ़ेद चंदन, सफ़ेद कपड़ा। देवी भागवत यह भी कहता है कि जिस दिन किसी की पढ़ाई शुरू हो, उस दिन भी सरस्वती को पूजना चाहिए। बच्चों का पहला अक्षर इसी बात से जुड़ता है।

ऋग्वेद में सरस्वती के लिए एक छोटी सी प्रार्थना है: ‘प्र णो देवी सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। धीनामवित्र्यवतु॥’ (ऋग्वेद 6.61.4)। मतलब: देवी सरस्वती, जो अन्न और बल से भरी हैं, हमारी बुद्धि की रक्षा करें।

इस दिन की एक कथा कामदेव की भी है, इसीलिए इसे मदन पंचमी कहते हैं। कथा है कि कामदेव को शिव के मन में पार्वती के लिए प्रेम जगाने भेजा गया, और शिव ने उन्हें भस्म कर दिया। एक परंपरा कहती है कि शिव ने उन्हें वसंत पंचमी के दिन फिर से जीवन दिया।

कहाँ कैसे

वसंत पंचमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • बंगाल

    स्कूलों और घरों में सरस्वती पूजा होती है, और छोटे बच्चे पहली बार अक्षर लिखते हैं, जिसे हाते खोड़ी कहते हैं। बांग्लादेश के स्कूल कॉलेजों में भी इस दिन छुट्टी और पूजा होती है।

  • ओड़िशा

    चार पाँच बरस के बच्चे इस दिन से पढ़ाई शुरू करते हैं, जिसे खड़ी छुआँ या विद्यारंभ कहते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में होम और यज्ञ होते हैं।

  • बिहार

    मंदिरों में और घरों में सरस्वती पूजा होती है, और देव के सूर्य मंदिर में इस दिन उत्सव होता है।

  • पंजाब

    बसंत के मौसम में पतंगें उड़ती हैं, लोग पीले कपड़े पहनते हैं और सरसों के खेतों की याद में पीले चावल खाते हैं।

  • नेपाल

    लोग मंदिरों में जाते हैं और घरों में सरस्वती की पूजा करते हैं।

  • कच्छ, गुजरात

    यहाँ यह दिन प्रेम से, कामदेव और रति से जोड़ा जाता है।

रीत

वसंत पंचमी के दिन क्या करते हैं

  1. सरस्वती पूजा सूरज निकलने से दोपहर तक, पूर्वाह्न में, सबसे अच्छी मानी जाती है।
  2. देवी की मूर्ति या चित्र को पीले कपड़े पहनाए जाते हैं।
  3. पुराण के ढंग में पहले गणेश, सूर्य, अग्नि, विष्णु, शिव और पार्वती की पूजा होती है, फिर कलश या किताब में सरस्वती का आवाहन।
  4. पूजा में सफ़ेद फूल, सफ़ेद चंदन और सफ़ेद कपड़ा चढ़ता है, और भोग में मक्खन, दही, दूध और सफ़ेद तिल।
  5. विद्यार्थी अपनी किताबें, कलम और पेंसिलें देवी के आगे रखते हैं, ताकि उन पर आशीर्वाद रहे।
  6. छोटे बच्चे इस दिन पहला अक्षर लिखते हैं; बंगाल में इसे हाते खोड़ी और ओड़िशा में खड़ी छुआँ कहते हैं।
  7. लोग पीले कपड़े पहनते हैं और घर में पीले पकवान बनते हैं।
  8. कई घरों में शाम को कविता और संगीत की महफ़िल जमती है।

रसोई

वसंत पंचमी का खाना

  • केसर का हलवा सरस्वती को चढ़ने वाली पीली मिठाई।
  • पीले चावल पंजाब में सरसों के खेतों की याद में।

सवाल जवाब

वसंत पंचमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

वसंत पंचमी 2027 कब है?

वसंत पंचमी 2027 में 11 फ़रवरी, गुरुवार को है। माघ शुक्ल पंचमी तिथि 11 फ़रवरी, रात 3:05 से 12 फ़रवरी, रात 3:19 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

वसंत पंचमी क्यों मनाते हैं?

यह विद्या, वाणी और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा का दिन है, और वसंत के आने का भी। लोग पीला पहनते हैं, और बच्चे पहला अक्षर लिखते हैं।

वसंत पंचमी पर पीला रंग क्यों पहनते हैं?

यह वसंत का रंग है: इस समय सरसों के खेत पीले होते हैं। पीला सरस्वती का प्रिय रंग भी माना जाता है, इसलिए लोग पीला पहनते और पीला खाते हैं।

हाते खोड़ी क्या है?

बंगाली हिंदू घरों की रीत, जिसमें छोटा बच्चा वसंत पंचमी के दिन पहली बार अक्षर लिखता है। ओड़िशा में इसी को खड़ी छुआँ कहते हैं।

सरस्वती की पूजा सबसे पहले किसने की?

देवी भागवत पुराण के नौवें स्कंध में कथा है कि धरती पर सरस्वती की पूजा सबसे पहले श्रीकृष्ण ने की; उसके बाद ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सब देवता और मुनि उन्हें पूजने लगे।

वसंत पंचमी को मदन पंचमी क्यों कहते हैं?

मदन कामदेव का नाम है। एक परंपरा कहती है कि शिव ने भस्म हुए कामदेव को इसी दिन फिर जीवन दिया, इसलिए यह दिन उनसे भी जुड़ा है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. The Devi Bhagavatam, Book 9, Chapter 4 (sacred-texts mirror)श्रीकृष्ण की पहली सरस्वती पूजा, माघ शुक्ल पंचमी, कलश और किताब, पढ़ाई शुरू होने के दिन की पूजा
  2. Brahma Vaivarta Purana, Essence of Puranas, Kamakotiश्रीकृष्ण की ठहराई पूजा, छह देवताओं की पहले पूजा, सफ़ेद फूल, चंदन और भोग
  3. Vasant Panchami, Wikipediaतिथि, पीला रंग, हाते खोड़ी और खड़ी छुआँ, बंगाल, पंजाब, नेपाल, कच्छ, मदन पंचमी
  4. Vasanta Panchami, Adi Vedaपूर्वाह्न का समय, किताबें और कलम, केसर का हलवा, देव सूर्य मंदिर, कामदेव को जीवन
  5. Suddha Saraswati Puja, Gaudiya Missionऋग्वेद का सरस्वती मंत्र, कृष्ण का वरदान

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।