पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मकर संक्रांति

मट्टू पोंगल 2027

Mattu Pongal 2027

आज की थाली पहले उनकी, जो साल भर हल खींचते हैं।

मट्टू पोंगल 2027 में 16 जनवरी, शनिवार को है। सूर्य 14 जनवरी, रात 9:10 पर मकर राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।

मट्टू पोंगल का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

सूर्य मकर राशि में, और उस शाम का चाँद

एक गीली थूथन हथेली से गुड़ का टुकड़ा उठा लेती है।

गाय अभी तालाब से नहाकर लौटी है। पीठ से पानी टपक रहा है।

सींगों पर नया रंग चढ़ा है, और नोक पर चमकती धातु की टोपी।

गले में फूलों की माला, मोतियों की लड़ी, और घंटियाँ। हर क़दम पर बजती हैं।

माथे पर हल्दी और कुमकुम। कोई आम के पत्ते से उस पर केसर का पानी छिड़कता है।

फिर एक बूढ़ा किसान झुककर उसके पैर छूता है और कपूर की लौ घुमाता है।

कहते हैं, एक बार एक बैल ने भगवान का संदेसा उलटा सुना दिया था। तब से वह खेत में है, आदमी के साथ।

2027 में कब

मट्टू पोंगल 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़16 जनवरी, शनिवार

संक्रांतिसूर्य मकर राशि में14 जनवरी, रात 9:10

नक्षत्रअश्विनीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 7:15

सूर्यास्तशाम 5:47

चंद्रोदयसुबह 11:51

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।

Google कैलेंडर में जोड़ें

  • मुफ़्त
  • कोई साइन अप नहीं
  • नाम, नंबर या ईमेल नहीं
  • जब चाहें हटा दें

दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल · सिर्फ़ यह दिन

सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।

शुभकामना

मट्टू पोंगल का शुभकामना कार्ड

मट्टू पोंगल का शुभकामना कार्ड: मट्टू पोंगल की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

अपनों को मट्टू पोंगल की शुभकामनाएँ भेजिए, इस बरस की तारीख़ और उस दिन की बात के साथ। कार्ड पर QR कोड है, जिससे तारीख़, कथा और मुहूर्त भी साथ पहुँचते हैं।

WhatsApp पर भेजेंकार्ड डाउनलोड करें

फ़ोन पर बटन दबाते ही कार्ड सीधे WhatsApp में चला जाता है, बधाई और लिंक के साथ।

पहचान

मट्टू पोंगल क्या है

मट्टू पोंगल पोंगल के चार दिनों में तीसरा दिन है, थाई पोंगल के ठीक अगले दिन। तमिल में माडु या मट्टू का मतलब है मवेशी, और यह दिन गाय बैलों का है: गाय जो दूध और खाद देती है, और बैल जो हल खींचता है। यह दिन भी तिथि से नहीं, सूरज से चलता है, क्योंकि पोंगल का पूरा क्रम मकर संक्रांति, यानी तै महीने के पहले दिन, से बँधा है। इसलिए यह भी हर बरस जनवरी के बीच में आता है। इस दिन मवेशियों को नहलाकर सजाया जाता है, उनकी पूजा होती है, उन्हें मीठा पोंगल खिलाया जाता है, और तमिलनाडु के कई गाँवों में जल्लीकट्टू होता है। आंध्र प्रदेश का कनुमा भी लगभग ऐसा ही दिन है।

कथा

मट्टू पोंगल की कथा

मट्टू पोंगल की सबसे जानी हुई कथा लोक की है, शिव और उनके बैल नंदी की। कहते हैं, एक बार शिव ने नंदी को धरती पर संदेसा देकर भेजा कि लोगों से कहना, रोज़ नहाओ, और महीने में एक बार खाओ। नंदी धरती पर पहुँचे और बात उलट गई। उन्होंने कहा, रोज़ खाओ, और महीने में एक बार नहाओ।

अब आदमी रोज़ खाने लगा, तो उसे बहुत ज़्यादा अनाज चाहिए था। इतना अनाज अकेले हाथों से कैसे उगता? तब शिव ने नंदी से कहा: ग़लती तुम्हारी, तो अब धरती पर जाओ और हल खींचकर किसान की मदद करो। लोक मानता है कि तभी से बैल खेत में है, और इसीलिए इस दिन उसका धन्यवाद होता है। कुछ इलाक़ों में नंदी को बसव भी कहते हैं।

इस दिन ग्वाले कृष्ण को भी याद करते हैं, और बारिश वाले इंद्र को भी। मवेशियों की भलाई इन्हीं से माँगी जाती है। पका हुआ पोंगल पहले पार्वती और गणेश को चढ़ता है।

जल्लीकट्टू का नाम सल्लि यानी सिक्के और कट्टु यानी पोटली से बना है, क्योंकि बैल के सींगों पर सिक्कों की पोटली बँधी होती थी और नौजवान उसे छुड़ाने दौड़ते थे। पुराने संगम ग्रंथों में इसे एरु तऴुवुतल कहा गया है, यानी बैल को गले लगाना। बाद में यह एक घेरे में बैल का कूबड़ पकड़कर टिके रहने का खेल बन गया। इसमें चोट और जान का ख़तरा रहा है, इसलिए यह अदालतों तक पहुँचा: 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई, 2017 में नया अध्यादेश लाकर इसे फिर चालू किया गया, और 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इसे बचाने वाले तमिलनाडु के क़ानूनों को सही ठहराया।

कहाँ कैसे

मट्टू पोंगल कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • तमिलनाडु के गाँव

    सुबह मवेशियों को तालाब पर नहलाया जाता है, सींग रंगे जाते हैं, और फिर बाजे के साथ उन्हें गाँव की गलियों में घुमाया जाता है। एक घुमंतू आदमी सजे हुए बैल को लेकर घर घर आता है, जिसे बूम बूम माट्टुक्कारन कहते हैं, और उसे खाना, अनाज या कपड़ा दिया जाता है।

  • मदुरै ज़िला

    अलंगानल्लूर, पालमेडु और अवनियापुरम जल्लीकट्टू के लिए जाने जाते हैं, और इनमें अलंगानल्लूर सबसे मशहूर है। कुछ गाँवों में यह काणुम पोंगल के दिन होता है।

  • तमिल ब्राह्मण घर

    यहाँ औरतें और लड़कियाँ कनु पिडि रखती हैं: हल्दी के पत्तों पर सफ़ेद, पीले और लाल चावल के छोटे गोले रखकर कौवों को खिलाती हैं और भाइयों की भलाई माँगती हैं।

  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

    यहाँ संक्रांति के दिनों में कनुमा होता है, जो मवेशियों का दिन है। इन्हीं दिनों सजे हुए बैलों की गंगिरेद्दुलु टोली भी निकलती है।

रीत

मट्टू पोंगल के दिन क्या करते हैं

  1. सुबह गाय बैलों को नहलाया जाता है, कहीं हल्दी के पानी और शिकाकाई से।
  2. उनके सींग चमकाकर रंगे जाते हैं, और कई जगह सींगों पर धातु की टोपी चढ़ती है।
  3. गले में फूलों की माला, मोती, घंटियाँ और अनाज की बालियाँ बाँधी जाती हैं, और माथे पर हल्दी कुमकुम लगता है।
  4. आम के पत्ते से उन पर केसर का पानी छिड़ककर बुरी नज़र से बचाव माँगा जाता है।
  5. लोग झुककर मवेशियों के पैर और माथा छूते हैं और कपूर से आरती करते हैं।
  6. पोंगल पहले पार्वती और गणेश को चढ़ता है, फिर मवेशियों को शक्करै पोंगल, गुड़, केला, गन्ना और शहद खिलाया जाता है।
  7. कई घरों में औरतें कौवों और गौरैयों के लिए चावल के गोले रखकर कहती हैं: काक्कैक्कु पिडि, कुरुविक्कु पिडि, यानी यह गोला कौवे का, यह गौरैया का।

रसोई

मट्टू पोंगल का खाना

  • शक्करै पोंगल चावल, मूँग दाल, गुड़ और मेवे, जो आज पहले मवेशियों को खिलाया जाता है।
  • केला, गन्ना और गुड़ मवेशियों की आज की थाली।
  • रंगीन चावल के गोले कनु पिडि के लिए हल्दी और कुमकुम से रंगे चावल, कौवों के लिए।

सवाल जवाब

मट्टू पोंगल 2027: पूछे जाने वाले सवाल

मट्टू पोंगल 2027 कब है?

मट्टू पोंगल 2027 में 16 जनवरी, शनिवार को है। सूर्य 14 जनवरी, रात 9:10 पर मकर राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।

मट्टू पोंगल क्यों मनाया जाता है?

मट्टू पोंगल उन गाय बैलों का धन्यवाद है जो किसान के साथ खेत में काम करते हैं और घर को दूध देते हैं। इस दिन उन्हें नहलाकर, सजाकर, पूजकर मीठा खिलाया जाता है।

मट्टू पोंगल की कथा क्या है?

लोक कथा है कि नंदी ने शिव का संदेसा उलटा सुना दिया: रोज़ नहाने और महीने में एक बार खाने की जगह रोज़ खाने को कह दिया। तब शिव ने नंदी को धरती पर हल खींचने भेजा, ताकि आदमी के लिए इतना अनाज उग सके।

जल्लीकट्टू क्या है?

जल्लीकट्टू तमिलनाडु का पुराना खेल है जिसमें बैल को भीड़ में छोड़ा जाता है और नौजवान उसका कूबड़ पकड़कर टिके रहने की कोशिश करते हैं। यह आमतौर पर मट्टू पोंगल को होता है, और 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे बचाने वाले तमिलनाडु के क़ानून को सही ठहराया।

कनु पिडि क्या है?

कनु पिडि में औरतें और लड़कियाँ हल्दी के पत्तों पर रंगीन चावल के गोले रखकर कौवों को खिलाती हैं, और भाइयों और पूरे परिवार की भलाई माँगती हैं। कहते हैं कौवा कभी अकेला नहीं खाता, वैसे ही परिवार साथ रहे।

मट्टू पोंगल और कनुमा में क्या फ़र्क़ है?

दोनों मवेशियों के दिन हैं। तमिलनाडु में इसे मट्टू पोंगल कहते हैं, और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में संक्रांति के दिनों में आने वाला ऐसा ही दिन कनुमा कहलाता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Mattu Pongal, Wikipediaनहलाना, सींग और धातु की टोपी, माला घंटी बालियाँ, केसर का पानी, आरती, पार्वती गणेश, कृष्ण और इंद्र, काक्कैक्कु पिडि, कुछ गाँवों में काणुम पोंगल पर जल्लीकट्टू
  2. Jallikattu, Wikipediaनाम का अर्थ, एरु तऴुवुतल, मदुरै के गाँव, 2014, 2017 और 2023 के फ़ैसले
  3. Pongal festival, Mythlokशिव और नंदी की कथा, नंदी का बसव नाम
  4. Mattu Pongal 2025, Free Press Journalतीसरा दिन, सजावट, खाना, नंदी के ग़लत संदेसे वाली लोक कथा
  5. How Pongal is celebrated over four days, eSamskritiकनु पिडि के रंगीन चावल, कौवा अकेला नहीं खाता, बूम बूम माट्टुक्कारन
  6. Significance of Mattu Pongal, Hindu Blogगाय दूध और खाद, बैल हल, सिक्कों की पोटली, आंध्र का कनुमा
  7. Makar Sankranti and regional celebrations, Anantam IASआंध्र तेलंगाना में गंगिरेद्दुलु बैलों की टोली
  8. Pongal (festival), Wikipediaहल्दी पानी, शिकाकाई, कुमकुम, मवेशियों को पोंगल गुड़ शहद केला, कनु पिडि में भाइयों की भलाई

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।