पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मिथुन संक्रांति

राजा पर्व 2027

Raja Parba 2027

तीन दिन धरती आराम करेगी। हल नहीं चलेगा।

राजा पर्व 2027 में 14 जून, सोमवार को पहिली राजा से शुरू होता है, और 15 जून, मंगलवार को राजा संक्रांति है, जब सूर्य शाम 6:56 पर मिथुन राशि में जाता है। तीसरा दिन, भूदाह या बासी राजा, उसके अगले दिन है।

राजा पर्व का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

सूर्य मिथुन राशि में, और उस शाम का चाँद

सिल बट्टा धुलकर कोने में रखा है। तीन दिन इसे कोई नहीं छुएगा।

रसोई कल ही साफ़ हुई है। आज न कुछ कटेगा, न पिसेगा।

भोर से पहले लड़कियाँ हल्दी और तेल लगाकर नदी में नहा आई हैं। पैरों में आलता, माथे पर चंदन।

बरगद की डाल पर रस्सी का झूला बँधा है। एक लड़की उस पर है, बाक़ी उसे झुला रही हैं।

आज वह डोलीरानी है, झूले की रानी।

गीत में कोई बाजा नहीं। बस आवाज़ें, तीन तीन पंक्तियों की, सहेलियों की और आती हुई बारिश की बात।

खेत ख़ाली हैं। हल खूँटी पर टँगा है।

मान्यता है कि इन तीन दिनों धरती माँ, भूदेवी, के रज के दिन हैं। जो सबको खिलाती है, उसे भी आराम चाहिए।

चौथे दिन उनका स्नान होगा। फिर पहली बारिश के साथ बीज ज़मीन में जाएँगे।

2027 में कब

राजा पर्व 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

पहिली राजा

तारीख़14 जून, सोमवार

संक्रांतिसूर्य मिथुन राशि में15 जून, शाम 6:56

नक्षत्रचित्रासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:23

सूर्यास्तशाम 7:20

चंद्रोदयदोपहर 3:11

राजा संक्रांति

तारीख़15 जून, मंगलवार

संक्रांतिसूर्य मिथुन राशि मेंशाम 6:56

नक्षत्रस्वातीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:23

सूर्यास्तशाम 7:20

चंद्रोदयशाम 4:11

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शुभकामना

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पहचान

राजा पर्व क्या है

राजा पर्व, जिसे राजो भी कहते हैं, ओड़िशा का तीन दिन का त्योहार है, जो आषाढ़ के शुरू होने के साथ, सूरज के मिथुन राशि में जाने पर, आता है। पहला दिन पहिली राजा है। दूसरा दिन राजा संक्रांति या मिथुन संक्रांति है, आषाढ़ महीने का पहला दिन। तीसरा दिन भूदाह या बासी राजा है, जिसे शेष राजा भी कहते हैं। इससे एक दिन पहले सजबज होता है, घर और रसोई की सफ़ाई का दिन, और तीन दिन के बाद चौथे दिन बसुमती गाधुआ, यानी धरती माँ का स्नान। मान्यता है कि इन तीन दिनों भूदेवी रजस्वला होती हैं, इसलिए खेती का काम रुक जाता है। यह त्योहार तटीय ओड़िशा के खेतिहर लोगों में शुरू हुआ और अब पूरे राज्य में होता है। यह औरतों और लड़कियों का त्योहार है। इस पन्ने का पंचांग पहले दो दिन दिखाता है।

कथा

राजा पर्व की कथा

ओड़िशा की लोक मान्यता में धरती माँ, भूदेवी, भगवान जगन्नाथ की पत्नी हैं। जैसे औरत को हर महीने रज होता है, वैसे ही कहते हैं कि आषाढ़ की शुरुआत में भूदेवी तीन दिन रजस्वला रहती हैं। इन दिनों उन्हें छेड़ा नहीं जाता: खेत में हल नहीं चलता, बुवाई नहीं होती। माना जाता है कि इसी आराम में धरती फिर से उपजाऊ होती है। चौथे दिन, बसुमती गाधुआ पर, उनका रस्मी स्नान होता है, और उसके बाद, मानसून की पहली बारिश के साथ, बीज पड़ते हैं।

यही तीन दिन घर की कुँवारी लड़कियों के भी हैं। वे भी इन दिनों उसी तरह रहती हैं जैसे रज के दिनों में: घर के काम से छुट्टी, न कुछ काटना, न फाड़ना, न पकाना। पहले दिन भोर में नहाने के बाद वे त्योहार ख़त्म होने तक दोबारा नहीं नहातीं। पाँवों को लेकर दो तरह की बातें मिलती हैं: कुछ जगह कहते हैं कि लड़कियाँ नंगे पाँव न चलें, और कुछ जगह कहते हैं कि चप्पल न पहनें, ताकि धरती को चोट न लगे। दोनों के पीछे बात एक है: इन दिनों धरती पर धीरे से पाँव रखना है।

और फिर झूले। पेड़ों पर राजा दोली बँधती है, चार तरह की: राम दोली, चकरी दोली, पटा दोली और दंडी दोली। एक लड़की डोलीरानी चुनी जाती है, और बाक़ी उसे झुलाती हैं। झूलते हुए जो गीत गाए जाते हैं, वे पूजा के गीत नहीं, बस मन के हैं: तीन पंक्तियों के, उसी पल बने हुए, दोस्ती के, आती बारिश के, ब्याह के। कुछ गीतों में उस लाड़ की याद भी है जो ब्याह के बाद छूट जाता है। झूला यहाँ उसी आराम का हिस्सा है जो इन दिनों धरती को भी मिल रहा है।

कहाँ कैसे

राजा पर्व कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • तटीय ओड़िशा के गाँव

    राजा पर्व यहीं के खेतिहर लोगों में शुरू हुआ। गाँवों में लड़कियाँ राजा घर नाम की एक जगह में मिलकर तैयार होती हैं, और गाँवों के बीच खेलों के मुक़ाबले होते हैं।

  • पुरी, बालासोर और कटक

    इन ज़िलों में यह त्योहार ख़ास तौर पर रखा जाता है, पेड़ों पर सजे झूलों, नए कपड़ों और घर के पीठों के साथ।

  • ब्रह्मगिरि, पुरी

    बाली हरचंडी मंदिर के पास पहिली राजा से बसुमती गाधुआ तक चार दिन मर्द इकट्ठा होकर देवी हरचंडी की पूजा करते हैं, जिसे राजा यात्रा कहते हैं।

  • पूरा ओड़िशा

    आज यह राज्य भर का त्योहार है। पुराने खेलों की जगह कई जगह वॉलीबॉल और क्रिकेट आ गए हैं, पर झूले और पीठे वैसे ही हैं।

रीत

राजा पर्व के दिन क्या करते हैं

  1. सजबज के दिन पूरा घर, ख़ासकर रसोई, साफ़ किया जाता है, और रसोई के औज़ार धोकर अलग रख दिए जाते हैं।
  2. पहिली राजा की भोर में लड़कियाँ हल्दी और तेल लगाकर नहाती हैं, नए कपड़े पहनती हैं, माथे पर चंदन और कुमकुम लगाती हैं, और पैरों में आलता।
  3. तीन दिन लड़कियाँ न कुछ काटती हैं, न पीसती हैं, न पकाती हैं, और घर के काम से छुट्टी पाती हैं।
  4. तीन दिन खेत में हल नहीं चलता और बुवाई नहीं होती।
  5. पेड़ों पर राजा दोली बँधती है, और लड़कियाँ झूलते हुए बिना बाजे के राजा गीत गाती हैं।
  6. लड़के बगुड़ी और कबड्डी खेलते हैं; लड़कियाँ ताश, पासे, पुची खेल और कौड़ी खेल।
  7. बसुमती गाधुआ के दिन औरतें रसोई का सिल पत्थर हल्दी के लेप, फूलों और सिंदूर से धोती हैं, धरती माँ के स्नान की तरह, और बुवाई की तैयारी में रस्मी हल चलता है।

रसोई

राजा पर्व का खाना

  • पोडा पीठा पोडा यानी जला हुआ; ऊपर से सिका हुआ पीठा, राजा का सबसे जाना माना पकवान।
  • राजा पान इन दिनों का ख़ास पान।
  • घर के पीठे पोडा पीठा के साथ और भी कई तरह के घर में बने पीठे।

सवाल जवाब

राजा पर्व 2027: पूछे जाने वाले सवाल

राजा पर्व 2027 कब है?

राजा पर्व 2027 में 14 जून, सोमवार को पहिली राजा से शुरू होता है, और 15 जून, मंगलवार को राजा संक्रांति है, जब सूर्य शाम 6:56 पर मिथुन राशि में जाता है। तीसरा दिन, भूदाह या बासी राजा, उसके अगले दिन है।

राजा पर्व किस बात का त्योहार है?

यह धरती माँ और औरतों का त्योहार है। मान्यता है कि आषाढ़ की शुरुआत में भूदेवी तीन दिन रजस्वला होती हैं, इसलिए खेती रुकती है, और चौथे दिन उनके स्नान के बाद बुवाई शुरू होती है।

राजा पर्व के तीन दिन कौन से हैं?

पहिली राजा, राजा संक्रांति या मिथुन संक्रांति, और भूदाह या बासी राजा। एक दिन पहले सजबज होता है, और चौथा दिन बसुमती गाधुआ है।

पोडा पीठा क्या है?

पोडा पीठा ओड़िशा का सिका हुआ पीठा है, जिसका नाम ही जले हुए से बना है। यह राजा पर्व के ख़ास पकवानों में है।

राजा पर्व में लड़कियाँ झूला क्यों झूलती हैं?

राजा दोली पर झूलना इन दिनों के आराम और मौज का निशान है। लड़कियाँ एक को डोलीरानी चुनकर झुलाती हैं और मन से बने राजा गीत गाती हैं।

बसुमती गाधुआ क्या है?

राजा के बाद का चौथा दिन, जब धरती माँ का रस्मी स्नान माना जाता है। औरतें रसोई का सिल पत्थर हल्दी, फूल और सिंदूर से धोती हैं, और खेतों में बुवाई की तैयारी शुरू होती है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Raja Parba: Songs of the Earth (LiveHistory India)सजबज, तीनों दिनों के नाम, बसुमती गाधुआ, भूदेवी, लड़कियों के नियम, चप्पल वाली बात, राजा दोली के चार नाम, डोलीरानी, गीत, पोडा पीठा, राजा पान, खेल, राजा घर, ब्रह्मगिरि
  2. Raja Mahotsav (Utsav, Government of India)मिथुन संक्रांति, भूदाह या बासी राजा, नदी में स्नान, नंगे पाँव न चलना, बरगद पर झूले, पोडा पीठा
  3. Odisha celebrates Raja Parba, a 3-day long festival (The Quint)भूदेवी जगन्नाथ की पत्नी, खेती का रुकना, वसुमती स्नान, दोबारा न नहाना, पुरी, बालासोर और कटक

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।