पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · कार्तिक शुक्ल द्वादशी

तुलसी विवाह 2027

Tulsi Vivah 2027

आँगन की तुलसी आज दुल्हन है, और दूल्हा एक छोटा सा पत्थर।

इस बरस (2026) तुलसी विवाह 21 नवंबर, शनिवार को है। तुलसी विवाह 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।

तुलसी विवाह 2027 में 11 नवंबर, गुरुवार को है। कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि 10 नवंबर, सुबह 9:12 से 11 नवंबर, सुबह 10:08 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 92 प्रतिशत रोशन

सावधान!

पंडित जी का एक शब्द, और सिंदूर में रँगे चावल हवा में उछलते हैं।

दाने तुलसी के गमले पर गिरते हैं। उस पर लाल चुनरी है, चूड़ियाँ हैं, एक छोटी सी बिंदी।

अब तक दोनों के बीच एक सफ़ेद कपड़ा तना था। वह हट जाता है।

उस ओर शालिग्राम हैं, पीली धोती में।

चारों ओर गन्ने खड़े हैं, ऊपर से बाँधे हुए। यही मंडप है।

एक पौधा, एक पत्थर। और उनके पीछे एक कथा, जिसमें एक पत्नी का शाप भी है और एक भगवान का वचन भी।

2027 में कब

तुलसी विवाह 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़11 नवंबर, गुरुवार

तिथिकार्तिक शुक्ल द्वादशी10 नवंबर, सुबह 9:12 से 11 नवंबर, सुबह 10:08 तक

नक्षत्रउत्तरा भाद्रपदसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:40

सूर्यास्तशाम 5:30

चंद्रोदयदोपहर 3:27

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शुभकामना

तुलसी विवाह का शुभकामना कार्ड

तुलसी विवाह का शुभकामना कार्ड: तुलसी विवाह की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

तुलसी विवाह क्या है

तुलसी विवाह आँगन की तुलसी का भगवान विष्णु से ब्याह है। दूल्हा ज़्यादातर शालिग्राम होते हैं, यानी वह पत्थर जिसे विष्णु का रूप माना जाता है, या फिर विष्णु या कृष्ण की पीतल की मूर्ति। यह ब्याह कार्तिक शुक्ल एकादशी, यानी देवउठनी, से कार्तिक पूर्णिमा तक कभी भी किया जा सकता है, और जगह के हिसाब से दिन बदलता है। बहुत से घरों में यह कार्तिक शुक्ल द्वादशी को होता है, जिसे उत्थान द्वादशी भी कहते हैं, और कई घरों में एकादशी को ही; कार्तिक पूर्णिमा इसका आख़िरी दिन है। चातुर्मास के बाद यही ब्याह शादियों के मौसम की शुरुआत माना जाता है।

कथा

तुलसी विवाह की कथा

पुराणों में यह कथा कई रूपों में आती है। स्कंद, पद्म और शिव पुराण में वृंदा की कथा है, और लोक में वह ऐसे सुनाई जाती है। एक बार शिव ने अपना तेज समुद्र में फेंक दिया। उससे एक बालक जन्मा, जो बड़ा होकर असुरों का राजा जालंधर बना। उसका ब्याह कालनेमि की बेटी वृंदा से हुआ। वृंदा अपने पति की बहुत सच्ची पत्नी थी, और जब तक उसका सत बना रहा, जालंधर को कोई हरा नहीं सकता था।

जालंधर का घमंड बढ़ता गया। वह छल से कैलाश पर पार्वती तक पहुँचना चाहता था, पर पार्वती ने उसे पहचान लिया, ओझल हो गईं और सारी बात विष्णु को बताई। जालंधर की ढाल वृंदा का सत था, इसलिए विष्णु ने भी छल किया। एक कथा में वे साधु बनकर जंगल में वृंदा से मिले, दूसरी में जालंधर का ही रूप लेकर उसके पास गए। वृंदा का सत टूटा, और उधर लड़ाई में शिव ने जालंधर को हरा दिया।

जब वृंदा को छल का पता चला, उसने विष्णु को शाप दिया: तुम पत्थर हो जाओ। विष्णु ने शाप माना और शालिग्राम बन गए। दुनिया का काम रुकने लगा। देवी देवताओं ने विनती की, तो वृंदा ने शाप लौटा लिया, और ख़ुद चिता की आग में समा गई। जहाँ वह राख हुई, वहाँ तुलसी का पौधा उगा। विष्णु ने कहा, तुमने मुझे लक्ष्मी से भी ज़्यादा चाहा है, तुम तुलसी बनकर सदा मेरे साथ रहोगी। और वचन दिया कि हर साल इसी समय वे तुलसी से ब्याह करेंगे।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी तुलसी की कथा है, थोड़े अलग रूप में: वहाँ तुलसी विष्णु की भक्त हैं, छल से उनका सत टूटता है, उनका सार तुलसी का पौधा और गंडकी नदी बनता है, और विष्णु शालिग्राम बनते हैं। कथाएँ अलग अलग हैं, पर हर एक का अंत एक ही आँगन में होता है: पौधा और पत्थर, साथ।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में तुलसी विवाह

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

रामचरितमानस

अवधी · Ramcharitmanas

तुलसीदास के रामचरितमानस में कथा भक्ति की ओर झुकती है, और वहाँ तुलसी भक्ति की पहचान बनती है। सुंदरकांड में हनुमान सीता को ढूँढते हुए लंका के घर घर देखते हैं, और विभीषण का घर तुलसी से पहचाना जाता है: राक्षसों के नगर में एक आँगन, जहाँ तुलसी उगी है। जिस पौधे का आज आँगन में ब्याह होता है, उसी ने लंका में राम के एक भक्त का पता दिया।

कहाँ कैसे

तुलसी विवाह कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • महाराष्ट्र

    तुलसी और विष्णु के बीच एक सफ़ेद कपड़ा पकड़ा जाता है, पुरोहित मंगल अष्टक के मंत्र पढ़ते हैं, और सावधान शब्द पर दोनों पर सिंदूर मिले चावल बरसाए जाते हैं। प्रसाद में गन्ना, नारियल के टुकड़े, फल और मूँगफली बँटती है।

  • गुजरात

    मंदिरों में सजावट और भजनों के साथ ब्याह होता है। कहा जाता है कि सौराष्ट्र के दो राम मंदिरों में यह और बड़े ढंग से होता है: दुल्हन वाले मंदिर से दूल्हे वाले मंदिर को न्योता जाता है, देवउठनी के दिन लालजी, यानी विष्णु की मूर्ति, पालकी में बारात लेकर जाते हैं, रात भर भजन होते हैं, और अगली सुबह बारात तुलसी को लेकर लौटती है।

  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

    तेलुगु घरों में यह ब्याह ख़ास तौर पर कार्तिक शुक्ल द्वादशी को होता है, जिसे क्षीराब्धि द्वादशी कहते हैं, और यहाँ विष्णु आँवले की एक टहनी के रूप में तुलसी के चौरे में रखे जाते हैं।

  • कर्नाटक

    यहाँ इसे तुलसी हब्बा कहते हैं; लोग मंदिरों और घरों में जुटकर भजन गाते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं।

  • उत्तर प्रदेश और राजस्थान

    घरों में ही ब्याह का मंडप बनता है, और तुलसी को घर के अपने एक सदस्य की तरह माना जाता है।

  • सौंजा, बिहार

    यहाँ के प्रभु धाम में यह तीन दिन चलता है, एकादशी से त्रयोदशी तक, जिसमें रामायण या रामचरितमानस का पाठ, शोभा यात्रा और छप्पन भोग होता है।

रीत

तुलसी विवाह के दिन क्या करते हैं

  1. शाम तक व्रत रखते हैं, और शाम को ब्याह शुरू होता है।
  2. तुलसी के गमले या चौरे के चारों ओर गन्नों का मंडप बनता है, और रंगोली और फूलों से सजावट होती है।
  3. तुलसी को लाल चुनरी या साड़ी, चूड़ियाँ, बिंदी और गहने पहनाते हैं। कहीं कहीं काग़ज़ का एक छोटा चेहरा भी लगाते हैं, बिंदी और नथ वाला।
  4. शालिग्राम को नहलाकर पीली धोती पहनाते हैं और तुलसी के पास रखते हैं।
  5. दोनों को सूत के धागे से जोड़ते हैं, और अक्षत और सिंदूर बरसाते हैं।
  6. तुलसी को साड़ी, हल्दी, सिंदूर और मंगलसूत्र, और विष्णु को चंदन, कपड़े और जनेऊ चढ़ते हैं।
  7. जिस जोड़े के बेटी नहीं, वह तुलसी के माँ बाप बनकर कन्यादान करता है।
  8. आख़िर में तुलसी की आरती होती है और प्रसाद बँटता है।

रसोई

तुलसी विवाह का खाना

  • गन्ना मंडप भी इसी का, और महाराष्ट्र के प्रसाद में भी।
  • आँवला भोग में चढ़ता है, और तेलुगु घरों में इसकी टहनी ख़ुद विष्णु का रूप बनती है।
  • इमली तुलसी विवाह के प्रसाद में बँटने वाली चीज़ों में।
  • शकरकंद नैवेद्य में चढ़ने वाला मौसमी कंद।
  • मूँगफली और नारियल के टुकड़े महाराष्ट्र के प्रसाद में गन्ने और फलों के साथ।

सवाल जवाब

तुलसी विवाह 2027: पूछे जाने वाले सवाल

तुलसी विवाह 2026 में कब है?

तुलसी विवाह 2026 में 21 नवंबर, शनिवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड तुलसी विवाह 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।

तुलसी विवाह 2027 कब है?

तुलसी विवाह 2027 में 11 नवंबर, गुरुवार को है। कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि 10 नवंबर, सुबह 9:12 से 11 नवंबर, सुबह 10:08 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

तुलसी विवाह किस दिन करना चाहिए?

देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक कभी भी। बहुत से घरों में यह कार्तिक शुक्ल द्वादशी को होता है, कई में एकादशी को, और कार्तिक पूर्णिमा इसका आख़िरी दिन है।

तुलसी विवाह में दूल्हा कौन होता है?

भगवान विष्णु, ज़्यादातर शालिग्राम के रूप में; कहीं विष्णु, कृष्ण या बलराम की पीतल की मूर्ति या चित्र। तेलुगु घरों में आँवले की टहनी विष्णु का रूप बनती है।

तुलसी और शालिग्राम की कथा क्या है?

पुराणों की कथा में वृंदा, जालंधर की पत्नी, का सत विष्णु के छल से टूटता है। वृंदा विष्णु को पत्थर होने का शाप देती है, ख़ुद तुलसी बनती है, और विष्णु वचन देते हैं कि हर साल शालिग्राम रूप में उससे ब्याह करेंगे।

तुलसी विवाह में कन्यादान कौन करता है?

अक्सर ऐसा जोड़ा जिसके बेटी नहीं है। वे तुलसी के माँ बाप बनकर कन्यादान करते हैं, और माना जाता है कि इससे कन्यादान का पुण्य मिलता है।

तुलसी विवाह का मंडप किससे बनता है?

गन्ने से। तुलसी के गमले या चौरे के चारों ओर गन्ने खड़े करके ऊपर से बाँधे जाते हैं, और उसे फूलों और रंगोली से सजाया जाता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Tulasi Vivaha (Bharatpedia)एकादशी से पूर्णिमा, द्वादशी और क्षीराब्धि द्वादशी, स्कंद, पद्म और शिव पुराण, महाराष्ट्र की सफ़ेद चादर और मंगल अष्टक, सौराष्ट्र, आँवले की टहनी, सौंजा, कन्यादान
  2. Tulsi Vivah Pauranik Katha (Bhakti Bharat)शिव का तेज, जालंधर और वृंदा, साधु का रूप, शाप, तुलसी का उगना, विष्णु का वचन
  3. Tulsi Vivah: puja vidhi (SmartPuja)पद्म पुराण की कथा, गन्ने का मंडप, लाल चुनरी, पीली धोती, अक्षत और सिंदूर, इमली, आँवला, शकरकंद
  4. Tulasi Vivaha, Uttana Dwadashi (I'm Voyager)महाराष्ट्र और गुजरात के मंदिर, कर्नाटक का तुलसी हब्बा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के घर, जालंधर का रूप
  5. Kartika Purnima (Wikipedia)ब्रह्मवैवर्त पुराण में तुलसी, गंडकी और शालिग्राम, पूर्णिमा आख़िरी दिन
  6. Prabodhini Ekadashi: rituals (Shubh Panchang)शादियों के मौसम की शुरुआत, गन्ने का मंडप, कन्यादान का पुण्य

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।