पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · कार्तिक पूर्णिमा

देव दीपावली 2027

Dev Deepawali 2027

दीवाली के पंद्रह दिन बाद काशी की एक रात, जो देवताओं के नाम है।

इस बरस (2026) देव दीपावली 24 नवंबर, मंगलवार को है। देव दीपावली 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।

देव दीपावली 2027 में 14 नवंबर, रविवार को है। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 13 नवंबर, सुबह 9:56 से 14 नवंबर, सुबह 8:56 तक है। प्रदोष काल शाम 5:28 से रात 7:52 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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पूर्णिमा: उस रात पूरा चाँद

चप्पू पानी में उतरता है, और पानी पर पड़ी एक लौ टूटकर हिलने लगती है।

नाव धीरे धीरे बीच धार में आती है।

किनारे पर घाट के बाद घाट, सीढ़ी के बाद सीढ़ी, और हर सीढ़ी पर मिट्टी के दीये।

दक्षिण में रविदास घाट से उत्तर में राजघाट तक, एक भी सीढ़ी अँधेरी नहीं।

दशाश्वमेध पर आरती उठती है। शंख की आवाज़ पानी पर दूर तक चली आती है।

मल्लाह चप्पू रोक लेता है। नाव अपने आप बहती है।

कहते हैं, आज रात देवता ख़ुद गंगा में नहाने उतरते हैं। और काशी उनके लिए हर सीढ़ी पर एक दीया रख देती है।

2027 में कब

देव दीपावली 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़14 नवंबर, रविवार

तिथिकार्तिक पूर्णिमा13 नवंबर, सुबह 9:56 से 14 नवंबर, सुबह 8:56 तक

नक्षत्रभरणीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:43

सूर्यास्तशाम 5:28

चंद्रोदयशाम 5:24

प्रदोष काल
शाम 5:28 से रात 7:52 तकसूर्यास्त के बाद के दो घंटे चौबीस मिनट।

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शुभकामना

देव दीपावली का शुभकामना कार्ड

देव दीपावली का शुभकामना कार्ड: देव दीपावली की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

देव दीपावली क्या है

देव दीपावली काशी की रात है, कार्तिक पूर्णिमा की, दीवाली के पंद्रह दिन बाद। मान्यता है कि इस रात देवता धरती पर उतरकर गंगा में नहाते हैं और काशी को आशीष देते हैं। इस दिन को त्रिपुरा पूर्णिमा स्नान भी कहते हैं। यह शिव की त्रिपुरासुर पर जीत की याद भी है। इस रात गंगा के घाट, दक्षिण में रविदास घाट से उत्तर में राजघाट तक, दस लाख से ज़्यादा मिट्टी के दीयों से जलते हैं। प्रबोधिनी एकादशी से शुरू होने वाला पाँच दिन का गंगा महोत्सव भी इसी रात पूरा होता है।

कथा

देव दीपावली की कथा

देव दीपावली की जड़ उसी कथा में है जो कार्तिक पूर्णिमा के पन्ने पर पूरी लिखी है। कार्तिक की इसी पूर्णिमा को शिव ने त्रिपुरासुर के तीन नगर एक तीर से गिराए, और देवताओं को अपना राज वापस मिला। उस जीत पर देवताओं ने स्वर्ग में दीये जलाए। इसीलिए यह रात देव दीपावली कहलाई, यानी देवताओं की दीवाली। दीवाली राम के अयोध्या लौटने की रात है; देव दीपावली देवताओं के उतरने की।

लोक कहता है कि तब से हर साल इसी पूर्णिमा को देवता धरती पर उतरते हैं और गंगा में नहाते हैं। काशी उनके स्वागत में घाटों पर दीये रखती है। लोग इन्हीं दीयों के साथ अपने पुरखों को भी याद करते हैं, और घर के लिए शांति और भलाई माँगते हैं।

घाटों को इस तरह एक साथ जलाने की आज वाली रीत दशाश्वमेध घाट से शुरू हुई, 1991 में, और अब पूरा किनारा जलता है। इसी रात दशाश्वमेध घाट पर अमर जवान ज्योति पर फूल मालाएँ रखकर देश के शहीदों को भी याद किया जाता है।

कहाँ कैसे

देव दीपावली कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • दशाश्वमेध घाट

    यहाँ की गंगा आरती इस रात की सबसे बड़ी आरती है, जिसे इक्कीस युवा ब्राह्मण पुजारी और चौबीस युवतियाँ करती हैं। यहीं अमर जवान ज्योति पर शहीदों को फूल चढ़ाए जाते हैं।

  • रविदास घाट से राजघाट तक

    गंगा का पूरा किनारा, घाट दर घाट, मिट्टी के दीयों से जलता है, और उनकी परछाईं गंगा पर पड़ती है।

  • अस्सी घाट

    दशाश्वमेध के अलावा यहाँ भी बड़ी आरती होती है, और यह घाटों को देखने की अच्छी जगहों में गिना जाता है।

  • पंचगंगा घाट

    जलते घाटों को देखने की अच्छी जगहों में इसका नाम लिया जाता है।

  • चेत सिंह घाट

    यहाँ आतिशबाज़ी और रोशनी के खेल होते हैं।

  • गंगा की धार

    बहुत से लोग नाव से घाटों को देखते हैं; इस रात नावों की बहुत माँग होती है, इसलिए लोग पहले से नाव तय कर लेते हैं।

रीत

देव दीपावली के दिन क्या करते हैं

  1. कार्तिक भर गंगा में नहाने वाले इस दिन भी स्नान करते हैं, और शाम को गंगा को जलते दीये सौंपते हैं।
  2. शाम होते ही घाटों की सीढ़ियों पर मिट्टी के दीये रखकर जलाते हैं।
  3. दीये घाटों के अलावा मंदिरों, घरों और नावों पर भी जलते हैं, गंगा और शिव को अर्पण की तरह।
  4. दशाश्वमेध पर गंगा आरती होती है: शंख, मंत्र, धूप, और एक साथ उठते दीयों के थाल।
  5. लोग दीयों के साथ अपने पुरखों को याद करते हैं और घर की भलाई माँगते हैं।
  6. अमर जवान ज्योति पर शहीदों को फूल मालाएँ चढ़ाई जाती हैं।
  7. गंगा महोत्सव के आख़िरी दिन शास्त्रीय संगीत, नाच, नाव दौड़ और हाथ के कारीगरों का मेला होता है।

सवाल जवाब

देव दीपावली 2027: पूछे जाने वाले सवाल

देव दीपावली 2026 में कब है?

देव दीपावली 2026 में 24 नवंबर, मंगलवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड देव दीपावली 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।

देव दीपावली 2027 कब है?

देव दीपावली 2027 में 14 नवंबर, रविवार को है। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 13 नवंबर, सुबह 9:56 से 14 नवंबर, सुबह 8:56 तक है। प्रदोष काल शाम 5:28 से रात 7:52 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

देव दीपावली क्यों मनाई जाती है?

मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात देवता धरती पर उतरकर गंगा में नहाते हैं, और यह शिव की त्रिपुरासुर पर जीत की याद भी है, जिस पर देवताओं ने दीये जलाए थे।

देव दीपावली और दीवाली में क्या फ़र्क़ है?

दीवाली राम के अयोध्या लौटने की रात है। देव दीपावली उसके पंद्रह दिन बाद, कार्तिक पूर्णिमा को, देवताओं के धरती पर उतरने की रात है, और इसका घर काशी के घाट हैं।

देव दीपावली पर कौन से घाट जलते हैं?

दक्षिण में रविदास घाट से उत्तर में राजघाट तक, गंगा के लगभग सारे घाट दस लाख से ज़्यादा मिट्टी के दीयों से जलते हैं।

देव दीपावली की गंगा आरती कहाँ देखें?

सबसे बड़ी आरती दशाश्वमेध घाट पर होती है, और अस्सी घाट पर भी। बहुत से लोग नाव से बीच धार में रहकर घाटों और आरती को देखते हैं।

क्या देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा एक ही दिन है?

हाँ। देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा की ही रात है, जिसे काशी में घाटों पर दीये जलाकर रखा जाता है। दीये जलाने का शुभ समय इस पन्ने में सबसे ऊपर दिया है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Dev Deepavali, Varanasi (Wikipedia)देवताओं का गंगा में नहाना, त्रिपुरा पूर्णिमा स्नान, रविदास घाट से राजघाट, दस लाख से ज़्यादा दीये, दशाश्वमेध की आरती, शुरुआत, अमर जवान ज्योति, गंगा महोत्सव
  2. Illuminating the eternal spirit of Kashi (Incredible India)देवताओं का उतरना और काशी को आशीष, त्रिपुरासुर पर जीत, पुरखों की याद, आरती, नावें
  3. Dev Deepawali in Varanasi by the Ganga (Outlook Traveller)दिवाली और देव दीपावली का फ़र्क़, दशाश्वमेध, अस्सी और पंचगंगा घाट, चेत सिंह घाट, नावें
  4. Significance of Kartik Purnima (The Sentinel)त्रिपुरासुर पर जीत पर स्वर्ग में दीये, देव दीपावली नाम
  5. Kartik Pournima: a day when Gods celebrate Diwali (The Hitavada)त्रिपुरासुर का देवताओं को हराकर उनका राज लेना, गंगा किनारे दीये

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।