पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027

क्रिसमस 2027

Christmas 2027

सराय में जगह नहीं थी। इसलिए एक चरनी।

इस बरस (2026) क्रिसमस 25 दिसंबर, शुक्रवार को है। क्रिसमस 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।

क्रिसमस 2027 में 25 दिसंबर, शनिवार को है।

क्रिसमस का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 5 प्रतिशत रोशन

साँस मुँह से निकलते ही धुआँ बन जाती है।

रात गहरी है, और पहाड़ की ठंड उँगलियों तक उतर आई है।

गिरजाघर के बाहर फ़र का एक पेड़ है, सौ बरस से भी पुराना। उसके नीचे बच्चों की एक टोली कैरल गा रही है।

भीतर मोमबत्तियाँ हैं। एक कोने में चरनी, यानी पशुओं के चारे की नाँद, और उसमें फूस पर लेटा एक नन्हा बच्चा।

ऊपर, छत से एक बड़ा तारा लटका है।

कोई दस्ताने उतारकर हाथ जोड़ता है। आधी रात का मिस्सा शुरू होने वाला है।

लूका लिखते हैं, उस रात भी कुछ चरवाहे खुले मैदान में जाग रहे थे, अपनी भेड़ों की रखवाली करते हुए।

2027 में कब

क्रिसमस 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़25 दिसंबर, शनिवार

नक्षत्रअनुराधासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 7:11

सूर्यास्तशाम 5:31

चंद्रोदयसुबह 4:53

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

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शुभकामना

क्रिसमस का शुभकामना कार्ड

क्रिसमस का शुभकामना कार्ड: क्रिसमस की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

क्रिसमस क्या है

क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को आता है, ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से। यह यीशु मसीह के जन्म की याद का दिन है। उनके जन्म की कथा लूका और मत्ती के सुसमाचारों में है। भारत में इस दिन दफ़्तर, स्कूल और बैंक बंद रहते हैं। ईसाई परिवारों के लिए इसकी धुरी आधी रात का मिस्सा, यानी मास, है; उसके साथ चरनी, तारा, कैरल और केक आते हैं। केरल में बहुत से लोग दिसंबर की शुरुआत से क्रिसमस तक उपवास भी रखते हैं।

कथा

क्रिसमस की कथा

लूका के सुसमाचार में कथा है। रोमी सम्राट औगुस्तुस ने हुक्म दिया कि सारी दुनिया के लोगों के नाम लिखे जाएँ, और हर कोई नाम लिखाने अपने अपने शहर गया। यूसुफ़ गलील के नासरत शहर से दाऊद के नगर बैतलहम गए, क्योंकि वे दाऊद के घराने के थे। साथ में मरियम थीं, जो माँ बनने वाली थीं। वहीं रहते हुए दिन पूरे हुए, और मरियम ने अपने पहले बेटे को जन्म दिया। उन्होंने उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में लिटा दिया, क्योंकि सराय में उनके लिए जगह नहीं थी।

उसी इलाक़े में कुछ चरवाहे रात को मैदान में अपनी भेड़ों की रखवाली कर रहे थे। अचानक प्रभु का एक स्वर्गदूत उनके सामने आया, चारों ओर प्रभु का तेज चमका, और वे बहुत डर गए। स्वर्गदूत ने कहा: डरो मत, मैं तुम्हें बड़ी ख़ुशी की ख़बर सुनाता हूँ, जो सब लोगों के लिए है। आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और वही मसीह प्रभु है (लूका 2, पद 10 और 11)। फिर स्वर्गदूतों की एक बड़ी टोली परमेश्वर की बड़ाई करने लगी, और धरती पर शांति की बात कही। चरवाहे बैतलहम गए, और उन्होंने बच्चे को चरनी में पाया।

मत्ती के सुसमाचार में कथा का दूसरा हिस्सा है। पूरब से कुछ ज्ञानी यरूशलेम पहुँचे और पूछने लगे: यहूदियों का जो राजा जन्मा है, वह कहाँ है? हमने उसका तारा उगते देखा है। यह सुनकर राजा हेरोदेस घबरा गया। धर्मगुरुओं ने बताया कि वह यहूदिया के बैतलहम में जन्मेगा।

ज्ञानी चल पड़े, और वही तारा उनके आगे आगे चला, और उस घर के ऊपर जाकर रुक गया जहाँ बच्चा था। तारे को देखकर उनकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने बच्चे को उसकी माँ मरियम के साथ देखा, सिर झुकाया, और सोना, लोबान और गंधरस भेंट किया। फिर सपने में चेतावनी पाकर वे दूसरे रास्ते से अपने देश लौट गए।

कहाँ कैसे

क्रिसमस: कहाँ और कैसे

  • गोवा

    कैथोलिक परिवार आधी रात के मिस्सा में जाते हैं, जिसे यहाँ मिस्सा दे गालो कहते हैं और जो अक्सर भोर के क़रीब तक चलता है; बॉम जीसस बेसिलिका और से कैथेड्रल में हज़ारों लोग आते हैं। गलियों में कैरल गाने वाले ग़रीबों को खिलाने के लिए चंदा जुटाते हैं, और घरों में नवंबर से ब्रांडी में भीगे प्लम केक तैयार रहते हैं।

  • केरल

    बच्चे टोलियों में मोमबत्ती लेकर घर घर कैरल गाते हैं। गिरजाघरों के बाहर रोशन चरनी सजती है, घरों पर तारे टँगते हैं, और कोच्चि में आधी रात के मिस्सा के बाद पटाखे छूटते हैं।

  • शिलॉन्ग, मेघालय

    क्रिसमस पूरे महीने चलता है। पुलिस बाज़ार में ख़रीदारी होती है, ऑल सेंट्स कैथेड्रल के सौ बरस पुराने फ़र के नीचे बच्चे कैरल गाते हैं, और बैंड गॉस्पेल संगीत बजाते हैं। आधी रात का मिस्सा कड़ी ठंड में होता है।

  • कोलकाता, पार्क स्ट्रीट

    पार्क स्ट्रीट रोशनी और तारों से सजती है। सेंट पॉल्स कैथेड्रल में आधी रात का मिस्सा होता है और दूर तक कैरल सुनाई देते हैं; बो बैरक्स में एंग्लो इंडियन परिवार अपने पुराने ढंग से क्रिसमस रखते हैं, और नाहूम की बेकरी से प्लम केक ख़रीदे जाते हैं।

  • मिज़ोरम, आइज़ोल

    क्रिसमस बाज़ार लगते हैं, गिरजाघरों में आराधना होती है, और बाक़ी जगहों के शोर के मुक़ाबले यहाँ का क्रिसमस शांत रहता है।

  • मुंबई, बांद्रा

    ईस्ट इंडियन समुदाय की बेकरियाँ केक, कुकी और ब्रेड बनाती हैं, घरों पर तारे के आकार की कंदीलें टँगती हैं, और माउंट मैरी बेसिलिका में आधी रात का मिस्सा होता है।

रीत

क्रिसमस के दिन क्या करते हैं

  1. केरल में बहुत से लोग दिसंबर की शुरुआत से क्रिसमस तक उपवास रखते हैं।
  2. घरों में चरनी सजती है, लूका की कथा की तरह, चरनी में लेटे बच्चे के साथ।
  3. घरों पर तारे और लालटेनें टँगती हैं, और क्रिसमस ट्री सजता है; दक्षिण भारत में कई जगह उसकी जगह केले या आम का पेड़ होता है, और छतों पर मिट्टी के दीये जलते हैं।
  4. कैरल गाने वाली टोलियाँ रात को घर घर जाती हैं।
  5. क्रिसमस से पहले की रात गिरजाघरों में आधी रात का मिस्सा होता है।
  6. केक और मिठाइयाँ पड़ोसियों और दोस्तों में बाँटी जाती हैं।
  7. कैरल टोलियाँ और गिरजाघर ग़रीबों को खिलाने के लिए दान जुटाते हैं।

रसोई

क्रिसमस का खाना

  • प्लम केक केरल में पड़ोसियों में बँटता है, गोवा में हफ़्तों पहले से ब्रांडी में भिगोया जाता है।
  • बेबिंका गोवा की सबसे जानी मानी मिठाई।
  • दोदोल गोवा की एक और ख़ास मिठाई।
  • पोर्क सोरपोतेल और पुलाव गोवा के क्रिसमस भोज के पकवान।
  • नेय्यप्पम केरल के क्रिसमस का एक मीठा पकवान।
  • कप्पा बिरयानी और स्ट्यू केरल के क्रिसमस की थाली।

सवाल जवाब

क्रिसमस 2027: पूछे जाने वाले सवाल

क्रिसमस 2026 में कब है?

क्रिसमस 2026 में 25 दिसंबर, शुक्रवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड क्रिसमस 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।

क्रिसमस 2027 कब है?

क्रिसमस 2027 में 25 दिसंबर, शनिवार को है।

क्रिसमस पर चरनी क्यों सजाते हैं?

लूका के सुसमाचार के अनुसार यीशु के जन्म के बाद मरियम ने उन्हें चरनी में लिटाया था, क्योंकि सराय में जगह नहीं थी। घरों और गिरजाघरों की चरनी उसी रात की याद है।

क्रिसमस का तारा किस बात की याद दिलाता है?

मत्ती के सुसमाचार में पूरब से आए ज्ञानियों को एक तारा रास्ता दिखाता है और उस घर के ऊपर रुकता है जहाँ बच्चा था। केरल से मुंबई तक घरों पर तारे टाँगे जाते हैं।

आधी रात का मिस्सा क्या है?

क्रिसमस की रात गिरजाघरों में होने वाली आराधना। गोवा में इसे मिस्सा दे गालो कहते हैं, और कोलकाता का सेंट पॉल्स कैथेड्रल और बांद्रा का माउंट मैरी बेसिलिका इसके लिए जाने जाते हैं।

गोवा में क्रिसमस पर क्या खाते हैं?

पोर्क सोरपोतेल, पुलाव, टर्की या चिकन, घर का बना फ़्रूट केक और वाइन, और मीठे में बेबिंका और दोदोल।

भारत में क्रिसमस देखने की जानी मानी जगहें कौन सी हैं?

गोवा, केरल, शिलॉन्ग, कोलकाता का पार्क स्ट्रीट, मुंबई का बांद्रा, आइज़ोल और कोहिमा। कोहिमा में रात के मेले, अलाव और कैरल होते हैं, और घरों में केक और चाय परोसी जाती है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Luke 2, King James Version, Blue Letter Bibleलूका 2: बैतलहम, चरनी, सराय, चरवाहे, स्वर्गदूत का संदेश
  2. Matthew 2, King James Version, Blue Letter Bibleमत्ती 2: ज्ञानी, तारा, हेरोदेस, सोना, लोबान और गंधरस
  3. From Kerala to Goa, here's how India celebrates Christmas, Outlook Travellerमिस्सा दे गालो, केरल की कैरल टोलियाँ और चरनी, शिलॉन्ग, पार्क स्ट्रीट, दक्षिण के दीये और पेड़, केरल का खाना
  4. 8 best places in India to enjoy Christmas, Outlook Travellerगोवा का खाना और कैरल, कोच्चि, शिलॉन्ग का फ़र, कोलकाता, बांद्रा की कंदीलें
  5. When is Christmas, IndiaBonds25 दिसंबर, गोवा के आधी रात के मिस्सा, ब्रांडी में भीगे प्लम केक, छुट्टी
  6. Indian cities known for Christmas celebrations, Curly Talesआइज़ोल, कोहिमा, केरल का उपवास और चरनी, बेबिंका

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।