उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मकर संक्रांति
भोगी 2027
Bhogi 2027
आग में पुराना जाता है। आँगन में नया उतरता है।
भोगी 2027 में 14 जनवरी, गुरुवार को है। सूर्य रात 9:10 पर मकर राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
उधड़े किनारों वाली एक चटाई दरवाज़े से बाहर आती है। पीछे पीछे एक टूटा हुआ मोढ़ा।
अभी अँधेरा है। गली के बीच लकड़ियों और उपलों का ढेर पहले से लगा है।
कोई उसमें घिसी हुई कमीज़ डालता है, कोई दीमक खाया तख़्ता।
आग पकड़ती है। चेहरों पर लाल रोशनी, पीठ पर अभी भी ठंड।
तेलुगु घरों में इस आग को भोगी मंटलु कहते हैं, यानी भोगी की लपटें।
एक दादी हाथ सेंकते हुए कहती हैं: जो पुराना हो गया, उसे आज जाने दो।
पुराना जलता है। पर कथा कोई आग में नहीं डालता। वह अगली सुबह फिर सुनाई जाती है।
2027 में कब
भोगी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़14 जनवरी, गुरुवार
संक्रांतिसूर्य मकर राशि मेंरात 9:10
नक्षत्रउत्तरा भाद्रपदसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 7:15
सूर्यास्तशाम 5:45
चंद्रोदयसुबह 10:47
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
भोगी क्या है
भोगी संक्रांति के त्योहार का पहला दिन है, और मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आता है। तमिलनाडु में यह मार्गऴि महीने का आख़िरी दिन है, और अगले दिन से तै महीना और पोंगल शुरू होता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह संक्रांति के चार दिनों में पहला है। कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी लोग यह दिन रखते हैं। यह दिन किसी तिथि से नहीं, सूरज से चलता है: जिस दिन सूरज मकर राशि में जाता है, उसके एक दिन पहले भोगी। इसीलिए यह चाँद वाले त्योहारों की तरह हर बरस आगे पीछे नहीं खिसकता, जनवरी के बीच में ही रहता है। इस दिन लोग घर का पुराना और टूटा सामान निकालकर भोर की आग में डालते हैं, घर धोते और सजाते हैं, और बारिश के देवता इंद्र को याद करते हैं।
कथा
भोगी की कथा
भोगी की कोई एक पोथी वाली कथा नहीं है। जो है, वह खेत और घर की बात है। तमिल परंपरा में यह दिन इंद्र का माना जाता है, जो बादलों और बारिश के देवता हैं। किसान इस दिन उनसे अगले बरस के लिए अच्छी बारिश और भरी फ़सल माँगते हैं। तेलुगु और कन्नड़ घरों में इंद्र के साथ अग्नि को भी याद करते हैं, क्योंकि भोर की आग इस दिन की सबसे बड़ी बात है। कुछ लोग इस दिन हल और खेती के औज़ारों की भी पूजा करते हैं।
आग में पुराना डालने के पीछे एक सीधी सी बात है। मार्गऴि का महीना ख़त्म हो रहा है, और कल से नया महीना, नई फ़सल, नई रसोई। तो घर का कचरा ही नहीं, जो टूट गया, घिस गया, बेकार पड़ा है, सब बाहर। लोक में कहते हैं, इसके साथ पुरानी कड़वाहट, पुराने झगड़े और मन का बोझ भी छोड़ दो, और नए सिरे से शुरू करो।
पोंगल के दिनों में इंद्र की एक और कथा भी सुनाई जाती है, जो भागवत पुराण की है। गोकुल के लोग बारिश के लिए इंद्र को पूजते थे। कृष्ण ने उनसे कहा कि उस गोवर्धन पहाड़ को, जंगल को और गायों को पूजो, जिनसे तुम्हारा घर चलता है। इंद्र नाराज़ हुए और आँधी पानी भेजा। तब कृष्ण ने पहाड़ उठा लिया और सबको उसके नीचे बचा लिया। कहानी यही सिखाती है कि जो धरती देती है, उसका धन्यवाद करो।
कहाँ कैसे
भोगी कहाँ कैसे मनाया जाता है
तमिलनाडु
मार्गऴि के आख़िरी दिन भोर में आग जलती है, घर धोकर रंगा जाता है और दरवाज़े पर आम के पत्ते बँधते हैं। कई जगह अब पुराना सामान जलाने का चलन कम हो गया है।
कोंगु नाडु, पश्चिमी तमिलनाडु
यहाँ घर की छत पर नीम और दो जंगली पौधों के पत्ते बाँधे जाते हैं। इसे काप्पु कट्टु कहते हैं, यानी रक्षा का बंधन।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
भोर में भोगी मंटलु जलती है, आँगन में मुग्गु बनते हैं और उन पर गोबर के गोब्बेम्मलु रखे जाते हैं। शाम को छोटे बच्चों पर भोगी पल्लु बरसाए जाते हैं, और कई घरों में गुड़ियों की सीढ़ी, बोम्मला कोलुवु, सजती है।
महाराष्ट्र
यहाँ भोगी के दिन बाजरे की रोटी पर तिल लगाकर मिली जुली सब्ज़ियों के साथ खाई जाती है।
कर्नाटक
यहाँ भी संक्रांति से एक दिन पहले भोगी रखी जाती है, और भोर की आग में पुराना डाला जाता है।
रीत
भोगी के दिन क्या करते हैं
- सूरज निकलने से पहले उठकर गली या आँगन में लकड़ी और उपलों की आग जलाई जाती है।
- घर का टूटा, पुराना और बेकार लकड़ी का सामान और पुराने कपड़े उस आग में डाले जाते हैं।
- प्लास्टिक और रबर जैसी चीज़ें आग में न डालें, उनका धुआँ ज़हरीला होता है; अब बहुत से लोग छोटी आग ही जलाते हैं।
- घर धोकर साफ़ किया जाता है, और दरवाज़े पर चावल के आटे से कोलम या मुग्गु बनता है।
- तेलुगु घरों में मुग्गु के बीच गोबर के छोटे गोले, गोब्बेम्मलु, रखकर उन पर दीये जलाते हैं।
- इंद्र और अग्नि को याद करके अच्छी बारिश और भरी फ़सल माँगी जाती है।
- शाम को तीन से छह बरस के बच्चों के सिर पर बेर, फूल, गन्ने के टुकड़े, गुड़ और सिक्के मिलाकर बरसाए जाते हैं। इसे भोगी पल्लु कहते हैं।
- छोटे बच्चे को ज़मीन पर रखे अरिसेलु, यानी चावल की मिठाई, पर चलाया जाता है, जैसे उसके पहले क़दम।
रसोई
भोगी का खाना
- अरिसेलु चावल के आटे और गुड़ की तेलुगु मिठाई, जो इन दिनों बहुत बनती है।
- शकरकंद की पोली तमिल घरों में भोगी पर बनने वाली मीठी रोटी।
- वडै और मीठा पोंगल भोगी की तमिल रसोई के साथी।
- तिल वाली बाजरे की रोटी महाराष्ट्र में भोगी की थाली, मिली जुली सब्ज़ी के साथ।
सवाल जवाब
भोगी 2027: पूछे जाने वाले सवाल
भोगी 2027 कब है?
भोगी 2027 में 14 जनवरी, गुरुवार को है। सूर्य रात 9:10 पर मकर राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
भोगी क्यों मनाते हैं?
भोगी पुराने को विदा करने और नई फ़सल के स्वागत का दिन है। भोर की आग में घर का पुराना सामान डाला जाता है, और इंद्र से अच्छी बारिश माँगी जाती है।
भोगी मंटलु क्या है?
तेलुगु में भोगी की भोर में जलने वाली आग को भोगी मंटलु कहते हैं। इसमें लकड़ी, उपले और घर का पुराना, टूटा लकड़ी का सामान जलाया जाता है।
भोगी पल्लु क्या होते हैं?
तेलुगु घरों में शाम को छोटे बच्चों के सिर पर बेर (रेगी पल्लु), फूल, भीगे चने, गन्ने के टुकड़े, गुड़ और सिक्के बरसाए जाते हैं। माना जाता है कि इससे बच्चे को नज़र नहीं लगती और लंबी उम्र मिलती है।
भोगी पर किस देवता की पूजा होती है?
भोगी इंद्र का दिन माना जाता है, जो बारिश के देवता हैं। तेलुगु और कन्नड़ घरों में अग्नि को भी याद किया जाता है।
भोगी मकर संक्रांति से कितने दिन पहले होती है?
भोगी मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आती है। तमिल पंचांग में यह मार्गऴि का आख़िरी दिन है, और इसके अगले दिन तै पोंगल।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Bhogi Pandigai, Drik Panchangसंक्रांति से एक दिन पहले, भोगी मंटलु, भोगी पल्लु, अरिसेलु, बोम्मला कोलुवु
- How Pongal is celebrated over four days, eSamskritiइंद्र का दिन, मार्गऴि का आख़िरी दिन, पुराने की आग, पोली और वडै
- Pongal (festival), Wikipediaमार्गऴि का आख़िरी दिन, घर की सफ़ाई, इंद्र, कोंगु नाडु का काप्पु कट्टु
- Bhogi, Wikipedia (Kiwix mirror)किन राज्यों में, पुराना लकड़ी का सामान, महाराष्ट्र की तिल वाली बाजरा रोटी
- Bhogi significance and celebrations, Vedantuगोब्बेम्मा, भोगी मुग्गुलु, औज़ारों की पूजा, प्लास्टिक न जलाने की बात
- Bhogi, Madhwa Sakhaइंद्र और अग्नि, भोगी मंटलु, मुग्गुलु और गोब्बेम्मलु
- Pongal festival, Mythlokपोंगल की कथाओं में भागवत की गोवर्धन वाली कथा, आम के पत्ते
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।