उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मकर संक्रांति
माघ बिहू 2027
Magh Bihu 2027
रात भर दावत। भोर में आग। और राख वापस खेत को।
माघ बिहू 2027 में 15 जनवरी, शुक्रवार को है। सूर्य 14 जनवरी, रात 9:10 पर मकर राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
कोहरे के बीच एक झोंपड़ी के भीतर से लाल रोशनी छनती है।
झोंपड़ी पुआल, बाँस और पत्तों की है, कटे हुए धान के खेत में खड़ी। इसे भेलाघर कहते हैं।
आज उरुका है, बिहू से पहले की रात। भीतर लड़के आग घेरकर जमे हैं, कड़ाही में मछली पक रही है।
पास ही पुआल और हरे बाँस का एक ऊँचा ढाँचा खड़ा है। यह मेजी है।
रात भर कोई नहीं सोता। भोर होते ही सब नहाते हैं, और मेजी में आग दी जाती है।
लपटों में पीठा और चिड़वा जाता है। ठंडी राख पेड़ों और खेतों पर बिखरती है।
एक पुरानी बोली में कहते हैं, इस आग का धुआँ पुरखों को लेकर ऊपर उड़ जाता है। हर आग के पीछे एक कहानी, जो धुएँ के साथ चलती है।
2027 में कब
माघ बिहू 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़15 जनवरी, शुक्रवार
संक्रांतिसूर्य मकर राशि में14 जनवरी, रात 9:10
नक्षत्ररेवतीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 7:15
सूर्यास्तशाम 5:46
चंद्रोदयसुबह 11:17
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
माघ बिहू क्या है
माघ बिहू असम का फ़सल का त्योहार है, जब धान कट चुका होता है और भंडार भरे होते हैं। इसे भोगाली बिहू और माघर दोमाही भी कहते हैं। भोगाली नाम भोग से है, यानी खाने पीने और मौज का, क्योंकि यह दावतों का बिहू है। यह दिन चाँद की तिथि से नहीं, सूरज से चलता है: असमिया पूह महीने के आख़िरी दिन की रात उरुका होती है, और अगली भोर, माघ महीने का पहला दिन, बिहू। यही मकर संक्रांति का दिन है, इसलिए यह हर बरस जनवरी के बीच में आता है। पहले यह त्योहार पूरे माघ महीने चलता था, अब मुख्य रूप से एक दिन रखा जाता है। बोडो, चुटिया, ताई अहोम, मिसिंग, देओरी और बहुत से समुदाय इसे अपनी अपनी रीत से रखते हैं।
कथा
माघ बिहू की कथा
माघ बिहू की कोई एक पोथी वाली कथा नहीं है। इसकी कथा खेत की है: फ़सल घर आ गई, अब धरती, आग और पुरखों का धन्यवाद। उरुका शब्द के बारे में माना जाता है कि यह देओरी चुटिया बोली के उरुकुवा से आया है, जिसका मतलब है ख़त्म होना। यानी फ़सल का काम ख़त्म हुआ, पूह का महीना ख़त्म हुआ।
मेजी शब्द पर जानकारों की दो राय हैं। एक राय कहती है कि यह बहुत पुरानी तिब्बती बर्मी बोलियों के आग वाले शब्द से निकला है। दूसरी राय देओरी चुटिया बोली के मिदि ये जि से जोड़ती है: मिदि यानी पुरखे देवता, ये यानी आग, और जि यानी उड़ जाना। इस राय में मेजी का धुआँ वह रास्ता है जिससे पुरखों की आत्माएँ ऊपर लौट जाती हैं। इसीलिए मेजी के आगे पुरखे देवताओं की प्रार्थना होती है।
देओरी लोगों की एक लोक कथा भी है। उसमें कहते हैं कि सृष्टि की शुरुआत में एक आदि पिता ने अपने आप को सबके लिए दे दिया था, और मेजी उसी की चिता की आग की याद है। इसलिए यह आग सिर्फ़ आग की पूजा नहीं, एक याद है। यह भी माना जाता है कि यह आग सूरज के उत्तर की ओर चलने, उत्तरायण, से जुड़ी है।
खामती लोग भी माघ की पूनम के आसपास ऐसी ही आग जलाते हैं, जिसे वे बुद्ध से जोड़ते हैं। एक ही मौसम, एक ही आग, और हर समुदाय की अपनी बात।
कहाँ कैसे
माघ बिहू कहाँ कैसे मनाया जाता है
असम के गाँव
उरुका की शाम खेतों में भेलाघर और मेजी बनते हैं, गाँव के लड़के रात भेलाघर में काटते हैं, और भोर में दोनों को आग दी जाती है। कहते हैं, उस रात लड़के गाँव वालों की बाड़ी से सब्ज़ी उठा लाएँ तो उसे भी रीत ही माना जाता है।
गुवाहाटी और शहर
शहरों में खुली जगह और पुआल कम है, इसलिए बहुत से लोग बना बनाया मेजी ख़रीदते हैं। उरुका से पहले मछली, मांस, दूध, दही, चिड़वा और हुरुम के बाज़ारों में भीड़ होती है, और भोगाली मेले में पीठा लारू बिकता है।
मोरीगाँव
यहाँ के गाँवों में बहुत से भेलाघर औरतें बनाती हैं, और उन्हें हाथी और आदमी के झगड़े, पुरानी इमारतों और गाँव की बातों जैसी शक्लें दी जाती हैं।
अहतगुड़ी और बैद्यबोरी
यहाँ बिहू पर भैंसों की लड़ाई की पुरानी रीत है। जानवरों की इन लड़ाइयों पर बरसों से अदालतों में मामला चलता रहा है, इसलिए कई बरस यह बस रीत भर की छोटी सी लड़ाई रह गई।
बोडो, चुटिया, ताई अहोम और मिसिंग घर
उरुका की दावत के लिए हर समुदाय अपनी चावल की शराब बनाता है: चुटिया चुजी, ताई अहोम नाम लाओ, बोडो ज़ौ और मिसिंग आपोंग।
रीत
माघ बिहू के दिन क्या करते हैं
- उरुका से पहले खेत में पुआल, बाँस और पत्तों से भेलाघर और मेजी बनाए जाते हैं।
- उरुका की रात औरतें अगले दिन के लिए चिड़वा, पीठा, लारू और दही तैयार करती हैं।
- रात को भुज होता है, यानी दावत, जो कहीं घर भर की होती है और कहीं पूरे गाँव की।
- भोर में नहाकर मेजी में आग दी जाती है। इसे मेजी ज्वलुवा कहते हैं।
- मेजी के आगे पुरखे देवताओं की प्रार्थना होती है, और आग में पीठा, चिड़वा, अखोई, हुरुम और दही चढ़ाया जाता है।
- मेजी की राख पेड़ों और खेतों पर बिखेरी जाती है, ताकि मिट्टी उपजाऊ रहे।
- भेलाघर जलने के बाद माह कराई खाई जाती है, यानी भुने चावल और उड़द का मेल।
- दिन में टेकेली भोंगा, यानी मटकी फोड़ने का खेल, और मुर्ग़ों और अंडों की लड़ाई जैसे खेल होते हैं।
रसोई
माघ बिहू का खाना
- तिल पीठा तिल वाला चावल का पीठा, गुड़ के साथ।
- नारिकोल पीठा, घिला पीठा, टेकेली पीठा और सुंगा पीठा भोगाली की और पीठा किस्में।
- लारू नारियल के लड्डू, जो मेहमानों के आगे रखे जाते हैं।
- चिड़वा, दही और हुरुम उरुका की रात बनकर तैयार रहते हैं, और मेजी पर भी चढ़ते हैं।
- मछली, बत्तख़, मुर्ग़े और बकरे का मांस टेंगा, आलू पिटिका और भात के साथ, उरुका की दावत में।
- माह कराई भुने चावल और उड़द, भेलाघर जलने के बाद।
सवाल जवाब
माघ बिहू 2027: पूछे जाने वाले सवाल
माघ बिहू 2027 कब है?
माघ बिहू 2027 में 15 जनवरी, शुक्रवार को है। सूर्य 14 जनवरी, रात 9:10 पर मकर राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
उरुका क्या है?
उरुका माघ बिहू से पहले की रात है, पूह महीने का आख़िरी दिन। इस रात लोग भेलाघर और आग के पास मिलकर दावत करते हैं और अगले दिन का खाना बनाते हैं।
मेजी और भेलाघर में क्या फ़र्क़ है?
भेलाघर पुआल, बाँस और पत्तों की झोंपड़ी है जिसमें उरुका की रात दावत होती है। मेजी पुआल, लकड़ी और हरे बाँस का ऊँचा ढाँचा है, जिसके आगे पूजा होती है। बिहू की भोर में दोनों को आग दी जाती है।
माघ बिहू को भोगाली बिहू क्यों कहते हैं?
भोगाली नाम भोग से है, यानी खाना पीना और आनंद। फ़सल के बाद भंडार भरे होते हैं, इसलिए यह दावतों का बिहू है।
मेजी की राख का क्या करते हैं?
मेजी की राख पेड़ों और खेतों पर बिखेरी जाती है। माना जाता है कि इससे मिट्टी की उपज बढ़ती है।
माघ बिहू और मकर संक्रांति एक ही दिन क्यों होते हैं?
दोनों सूरज से चलते हैं। माघ बिहू असमिया माघ महीने का पहला दिन है, जिस दिन सूरज मकर में जाता है, यानी मकर संक्रांति।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Magh Bihu, Wikipediaनाम, पूह का आख़िरी दिन, उरुका शब्द, भुज, समुदायों की चावल शराब, मेजी के दो अर्थ, देओरी कथा, खामती, खाना
- Assam celebrates Magh Bihu, All India Radio Newsभेलाघर और मेजी, भोर की आग, राख खेतों पर, टेकेली भोंगा, भैंस मुर्ग़े अंडे की लड़ाई, शहरों में बना बनाया मेजी
- People gear up for Magh Bihu Uruka today, The Assam Tribuneउरुका की रात, भेलाघर की बनावट, मेजी अग्नि को, गुवाहाटी के बाज़ार
- Assam gears up to celebrate Bhogali Bihu, EastMojoमोरीगाँव के भेलाघर, पीठा की किस्में, लारू, भोगाली मेले, अहतगुड़ी और बैद्यबोरी
- One festival, different names, WIONमाघ बिहू असम की मकर संक्रांति, खेतों में आग, पुरखे देवताओं की प्रार्थना
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।