पंचांग 2026 · कार्तिक अमावस्या
काली पूजा 2026
Kali Puja 2026
जिस रात आसमान में चाँद नहीं होता, उस रात आधी रात को देवी पूजी जाती हैं।
काली पूजा 2026 में 8 नवंबर, रविवार को है। कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर, सुबह 11:28 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक है। निशीथ काल की पूजा 8 नवंबर, रात 11:39 से 9 नवंबर, रात 12:31 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
आधी रात होने को है, पर गली अभी सोई नहीं।
पंडाल से ढाक की थाप आती है। धूप का धुआँ सड़क तक फैल गया है।
एक टोकरी में जबा के लाल फूल हैं। जबा यानी गुड़हल।
पुजारी जी माला उठाते हैं। सामने काली माँ हैं: साँवली, जीभ बाहर, गले में मुंडों की माला।
कल रात इसी घर के चौदह कोनों में चौदह दीये जले थे, पुरखों के लिए।
आज अमावस है। आसमान में चाँद नहीं, बस दीये।
एक पुरानी कथा में, कहते हैं, सीता ने भी कभी यही रूप लिया था, जब राम ख़ुद गिर पड़े थे।
2026 में कब
काली पूजा 2026: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़8 नवंबर, रविवार
तिथिकार्तिक अमावस्या8 नवंबर, सुबह 11:28 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक
नक्षत्रस्वातीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:38
सूर्यास्तशाम 5:31
चंद्रोदयसुबह 5:37
- निशीथ काल
- 8 नवंबर, रात 11:39 से 9 नवंबर, रात 12:31 तकआधी रात के आसपास का मुहूर्त, रात के पंद्रह हिस्सों में आठवाँ।
अगले बरस काली पूजा 28 अक्टूबर 2027, गुरुवार को है: काली पूजा 2027, तारीख़ और मुहूर्त
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पहचान
काली पूजा क्या है
काली पूजा, जिसे श्यामा पूजा और महानिशा पूजा भी कहते हैं, देवी काली की रात की पूजा है। यह कार्तिक की अमावस्या को होती है (अमांत पंचांग में इसी अमावस्या को आश्विन की अमावस्या कहते हैं), और नियम यह है कि पूजा उस दिन रखी जाए जिस दिन आधी रात को अमावस्या चल रही हो। आधी रात के इस पहर को निशीथ काल कहते हैं, और यह पन्ना उसका समय ख़ुद निकालकर दिखाता है। बंगाल, ओड़िशा और असम में यही अमावस काली की रात है, जबकि देश के ज़्यादातर हिस्सों में इसी रात लक्ष्मी पूजा होती है। त्रिपुरा, झारखंड, बिहार के भागलपुर और बांग्लादेश में भी यह पूजा होती है। इससे एक दिन पहले भूत चतुर्दशी होती है, पुरखों के दीयों की रात।
कथा
काली पूजा की कथा
बंगाल में काली को श्यामा कहते हैं, यानी साँवली। ज़्यादातर देवियाँ दिन में पूजी जाती हैं, पर काली की पूजा रात में होती है। बंगाल की मान्यता में वे मृत्यु की देवी हैं जो श्मशान में रहती हैं, और दुर्गा पूजा के बाद की पहली अमावस, साल की सबसे अँधेरी रात, उनकी रात है। कहते हैं, इस रात बुरी आत्माएँ सबसे ज़्यादा जागती हैं, और आधी रात को देवी घूमती हैं, उन्हें शांत करती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इसीलिए पूजा आधी रात को होती है।
पूजा से एक दिन पहले की रात भूत चतुर्दशी है। बंगाल के भूत डरावने कम, नटखट ज़्यादा हैं: पेड़ों पर रहते हैं, खाना चुराते हैं, और मछली के बड़े शौक़ीन हैं। उस रात घर के चौदह कोनों में मिट्टी के चौदह दीये जलते हैं, जिन्हें चोद्दो प्रदीप कहते हैं। लोक में कहते हैं, ये चौदह पीढ़ियों के पुरखों के लिए हैं। एक और मान्यता है कि उस रात देवी चामुंडा, जो काली का ही एक रूप हैं, चौदह प्रेतों के साथ धरती पर उतरती हैं, और ये दीये उन्हें घर से दूर रखते हैं। उसी दिन दोपहर को चौदह तरह का साग खाया जाता है, चोद्दो शाक, ताकि जाड़ा आते आते शरीर बीमारी से बचा रहे।
यह पूजा हमेशा इतनी बड़ी नहीं थी। अठारहवीं सदी में नदिया के राजा कृष्णचंद्र ने इसे दूर दूर तक फैलाया। उन्नीसवीं सदी में, दक्षिणेश्वर के काली भक्त श्री रामकृष्ण के समय, यह और फैली, और बड़े ज़मींदार भी बड़ी पूजाएँ करवाने लगे। आज भी बहुत से पंडालों में काली के साथ बंगाल के दो बड़े काली भक्तों की मूर्तियाँ दिखती हैं: श्री रामकृष्ण और तारापीठ के बामाखेपा।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में काली पूजा
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
अद्भुत रामायण
संस्कृत · Adbhuta Ramayana
अद्भुत रामायण शाक्त परंपरा की कथा है, सत्ताईस सर्गों की, जिसमें सीता केंद्र में हैं। यहाँ लंका जीतने के बाद कथा ख़त्म नहीं होती। पुष्कर द्वीप पर हज़ार सिर वाला एक और रावण खड़ा होता है, और उससे लड़ते हुए राम बेहोश हो जाते हैं। तब सीता महाकाली बनती हैं और उस रावण को गिराती हैं। काली की रात यह कथा याद आती है, क्योंकि इस रामकथा का आख़िरी वार उसी रूप के हाथ से होता है जिसकी आज पूजा है।
कहाँ कैसे
काली पूजा कहाँ कैसे मनाया जाता है
कालीघाट, कोलकाता
कालीघाट मंदिर में इस दिन काली की पूजा लक्ष्मी के रूप में होती है, और रात भर हज़ारों लोग दर्शन को आते हैं। मान्यता है कि यह इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ सती के शरीर का एक अंग गिरा था।
दक्षिणेश्वर, कोलकाता
हुगली के किनारे का यह मंदिर रानी रासमणि ने बनवाया था, और यहाँ की देवी भवतारिणी हैं, काली का एक रूप। श्री रामकृष्ण ने यहीं पूजा की थी।
तारापीठ, बंगाल
तारापीठ देवी तारा का स्थान है, और साधक बामाखेपा का भी। काली पूजा की रात यहाँ, कालीघाट और दक्षिणेश्वर की तरह, तांत्रिक पूजा और आधी रात का हवन होता है।
पुरी, ओड़िशा
ओड़िशा में, ख़ासकर पुरी में, आधी रात को काली की आरती होती है, और लोग जगन्नाथ धाम की बाईस पाहाच, यानी बाईस सीढ़ियों, पर पुरखों को तर्पण देते हैं। स्वर्गद्वार के पास का माँ दक्षिणकाली मंदिर और दोलमंडप साही का माँ श्यामाकाली मंदिर यहाँ के बड़े काली मंदिर हैं।
बंगाल के शहर
बारासात, नैहाटी, बशीरहाट और तमलुक की काली पूजा दूर दूर तक जानी जाती है। नदिया में यह पूजा अठारहवीं सदी में राजा कृष्णचंद्र के समय फैली।
असम और त्रिपुरा
असम के कुछ हिस्सों और त्रिपुरा में भी यह अमावस देवी के सबसे उग्र रूप की रात है, और काली की पूजा होती है।
रीत
काली पूजा के दिन क्या करते हैं
- पूजा से पहले घर धोया जाता है, ज़मीन पर आल्पना यानी बंगाल की सजावट बनती है, और मिट्टी के दीये रखे जाते हैं।
- पिछली रात, भूत चतुर्दशी को, घर के चौदह कोनों में चौदह दीये जलते हैं, और उस दोपहर चौदह तरह का साग खाया जाता है।
- पूजा उस दिन होती है जिस दिन अमावस्या आधी रात तक रहे, और मुख्य पूजा आधी रात के निशीथ काल में होती है।
- देवी को जबा, यानी लाल गुड़हल, की माला पहनाई जाती है।
- भोग में चावल, दाल, फल और मिठाइयाँ चढ़ती हैं, ख़ासकर नारियल के नारू और संदेश; कई घरों और तांत्रिक परंपराओं में मछली और मांस भी।
- तांत्रिक परंपरा में बलि की रीत है; बहुत से घर अब उसकी जगह कद्दू या पेठा चढ़ाते हैं, जिसे बंगाल में कुमड़ो बलि कहते हैं।
- पूजा करने वाला रात भर, भोर तक, ध्यान में रहता है, और काली के बांग्ला भक्ति गीत, श्यामा संगीत, गाए जाते हैं।
- बच्चे और जवान आतिशबाज़ी छोड़ते हैं, और कई जगह इस रात जादू के खेल और नाटक भी होते हैं।
रसोई
काली पूजा का खाना
- चोद्दो शाक चौदह तरह के हरे साग, भूत चतुर्दशी की दोपहर का खाना।
- खिचुड़ी चावल और दाल की, भोग की थाली का मुख्य हिस्सा।
- लाबड़ा कई सब्ज़ियों को साथ पकाकर बनी मिली जुली सब्ज़ी।
- निरामिष मांगशो बिना प्याज़ लहसुन का बकरे का मांस, जो भोग में चढ़ता है।
- पायेश दूध में पका मीठा चावल, यानी खीर।
- नारकेल नारू नारियल और चीनी के छोटे लड्डू।
सवाल जवाब
काली पूजा 2026: पूछे जाने वाले सवाल
काली पूजा 2026 कब है?
काली पूजा 2026 में 8 नवंबर, रविवार को है। कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर, सुबह 11:28 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक है। निशीथ काल की पूजा 8 नवंबर, रात 11:39 से 9 नवंबर, रात 12:31 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
काली पूजा और दीवाली एक ही रात क्यों होती हैं?
दोनों कार्तिक की अमावस्या की हैं। ज़्यादातर भारत इस रात लक्ष्मी पूजा करता है, जबकि बंगाल, ओड़िशा और असम में यही रात काली की है। लक्ष्मी पूजा के लिए वह दिन देखा जाता है जब प्रदोष में अमावस्या हो, और काली पूजा के लिए वह दिन जब आधी रात को अमावस्या हो।
काली पूजा आधी रात को क्यों होती है?
नियम यह है कि पूजा उस दिन हो जब अमावस्या आधी रात को चल रही हो। बंगाल की मान्यता है कि इस पहर देवी घूमती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं, इसलिए मुख्य पूजा निशीथ काल में होती है।
भूत चतुर्दशी पर चौदह दीये क्यों जलाते हैं?
लोक मान्यता में ये चौदह दीये चौदह पीढ़ियों के पुरखों के लिए हैं, और बुरी आत्माओं को घर से दूर रखने के लिए भी। इन्हें शाम के बाद घर के चौदह कोनों में रखा जाता है।
श्यामा पूजा का क्या मतलब है?
श्यामा यानी साँवली। बंगाल में काली को श्यामा कहते हैं, इसलिए काली पूजा को श्यामा पूजा भी कहते हैं, और उनके भक्ति गीतों को श्यामा संगीत।
कालीघाट में काली पूजा के दिन क्या ख़ास होता है?
कालीघाट मंदिर में इस दिन देवी की पूजा लक्ष्मी के रूप में होती है, और रात भर हज़ारों भक्त दर्शन को आते हैं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Kali Puja (Wikipedia)श्यामा और महानिशा नाम, अमांत पूर्णिमांत तिथि, इलाक़े, राजा कृष्णचंद्र, रामकृष्ण और बामाखेपा, कालीघाट में लक्ष्मी रूप, भोग, आतिशबाज़ी और नाटक
- Bengal Kali Puja date and time (Drik Panchang)आधी रात की अमावस्या का नियम, बंगाल ओड़िशा असम, उसी रात बाक़ी देश में लक्ष्मी पूजा
- Bhoot Chaturdashi and Kali Puja (Connecting Heritage)बंगाल के भूत, चोद्दो प्रदीप और चौदह पीढ़ियाँ, चामुंडा और चौदह प्रेत, चोद्दो शाक, श्मशान वाली देवी, श्यामा संगीत
- Kali Puja in Kolkata (Outlook Traveller)दक्षिणेश्वर, रानी रासमणि, भवतारिणी, कालीघाट शक्तिपीठ, जबा की माला
- Kali Puja (Bhakti Bharat)पुरी की आधी रात की आरती, बाईस पाहाच पर तर्पण, पुरी के काली मंदिर, आल्पना, तारापीठ में तांत्रिक पूजा और हवन
- How to Celebrate Kali Puja (Outlook India)निशीथ काल की पूजा, भोग, बलि की जगह कद्दू, असम
- Celebrating Kali Pujo and Diwali (Gulf News)चौदह कोनों के दीये, चोद्दो शाक, खिचुड़ी, लाबड़ा, निरामिष मांगशो, पायेश, कुमड़ो बलि
- Kali Puja: the Bengali way of celebrating Diwali (University of Birmingham)भूत चतुर्दशी के चौदह दीये, ढाक और धूप, आधी रात की पूजा
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।